India's #1 AI Tutorprevious year_questions · Hindi - Sparsh · Chapter 9Read in English → Class 9 Hindi Sparsh Chapter 9: दोहे — रहीम Previous Year Questions (2020–2025)
दोहे — रहीम CBSE Class 9 Hindi Sparsh के सबसे predictable chapters में से एक है। परीक्षकों ने बार-बार नीति-दोहे, जीवन-मूल्य, और रहीम की भाषा-शैली की समझ को 1-mark definition questions, 3-mark textual analysis, और 5-mark thematic essays के माध्यम से test किया है। यह guide असली papers से सबसे common question patterns को compile करता है, जिसमें NCERT expectations के अनुरूप model answers हैं। chapter को दोबारा पढ़ने की बजाय, इन solved PYQs के जरिए काम करना आपको सिखाता है कि परीक्षक क्या पूछते हैं, पूरे अंक के लिए answers कैसे frame करें, और रहीम किस भाषा-शैली का इस्तेमाल करके नैतिक ज्ञान conveय करते हैं। चाहे आप pre-board या final exam के लिए revision कर रहे हों, ये questions आपको किसी भी variation को handle करने का confidence देते हैं। cbsetutor.ai पर 3-day free trial शुरू करें personalized PYQ practice के लिए instant feedback के साथ।
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Start 3-day free trial →पिछले साल के प्रश्नपत्र हल करना अध्याय दोबारा पढ़ने से बेहतर क्यों है
ज्यादातर छात्र दोहे — रहीम पढ़ लेते हैं और आत्मविश्वास से भर जाते हैं, फिर परीक्षा में सवाल देखकर घबरा जाते हैं। क्यों? क्योंकि पाठ्यपुस्तक पढ़ना और परीक्षा का जवाब देना दोनों अलग-अलग कौशल हैं। जब आप अध्याय पढ़ते हैं, तो आप सीखों को निष्क्रिय रूप से समझते हैं। जब आप पिछले साल के प्रश्न (PYQ) का जवाब देते हैं, तो आपको सटीक दोहा याद करना होता है, नीति (सिद्धांत) को पहचानना होता है, जीवन-पाठ को समझाना होता है, और इसे रहीम की शैली से जोड़ना होता है—सब कुछ समय की दबाव में। पिछले साल के प्रश्नपत्र सक्रिय याद रखने को मजबूर करते हैं और कमियों को तुरंत सामने लाते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई सवाल पूछे 'रहीम के दोहों में कौन-से जीवन-मूल्य दिखाई देते हैं?' तो आपको विशेष दोहों का हवाला देना होता है और समझाना होता है कि रहीम की भाषा (दोहा छंद, सरल भाषा, मुहावरे) उन मूल्यों को कैसे व्यक्त करती है। केवल पढ़ने से यह पैटर्न नहीं आएगा। 5–10 पिछले साल के प्रश्नों को हल करने से पता चलता है कि परीक्षक लगभग हमेशा ये पूछते हैं: (1) अर्थ-ग्रहण (इस दोहे का मतलब क्या है?), (2) शिक्षा (नीति क्या है?), (3) भाषा-विश्लेषण (रहीम इसे कैसे व्यक्त करते हैं?), और (4) सामाजिक-संदर्भ (यह सलाह क्यों मायने रखती है?)। पिछले साल के प्रश्नपत्र हल करके, आप इस प्रश्न संरचना को आत्मसात कर लेते हैं और अपनी परीक्षा में आने वाली 80 प्रतिशत बातों का अनुमान लगा सकते हैं।
सबसे अधिक दोहराए जाने वाले 1-अंक के प्रश्न (2020–2025 पैटर्न)
दोहे — रहीम अध्यायों में 1-अंक के प्रश्न आमतौर पर छोटी परिभाषाएँ, एक-पंक्ति के अर्थ, या त्वरित पहचान के लिए पूछे जाते हैं। अगर आप पैटर्न को पहचानते हैं तो ये उच्च आत्मविश्वास वाले अंक हैं। यहाँ 5 सामान्य रूप से दोहराए जाने वाले प्रारूप हैं जिनमें आदर्श उत्तर दिए गए हैं:
(1) **दोहा क्या है?** / 'दोहा' शब्द को परिभाषित करें।
*उत्तर:* दोहा एक छंद है जिसमें दो पंक्तियाँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 24 मात्राएँ होती हैं। यह हिंदी की सबसे प्राचीन और लोकप्रिय विधा है।
(2) **रहीम कौन थे?**
*उत्तर:* रहीम अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना (1556–1627) मुगल काल के प्रसिद्ध कवि और सेनानी थे। उन्होंने नीति और प्रेम के दोहे लिखे।
(3) **नीति-दोहे का मतलब क्या है?**
*उत्तर:* नीति-दोहे वे दोहे हैं जो जीवन के सत्य, आचरण के नियम, और सामाजिक शिक्षा देते हैं।
(4) **'जीवन-मूल्य' से क्या अभिप्राय है?**
*उत्तर:* जीवन-मूल्य वे सिद्धांत हैं जो मनुष्य को सदाचारी, ईमानदार, और दयालु बनाते हैं।
(5) **रहीम की भाषा-शैली की एक विशेषता बताइए।**
*उत्तर:* रहीम की भाषा सरल, सुबोध और मुहावरेदार है। वे दैनिक जीवन के उदाहरणों से नीति समझाते हैं।
सबसे अधिक दोहराए जाने वाले 3-अंक के प्रश्न और उत्तर
3-अंक के प्रश्नों के लिए छोटे अनुच्छेद का उत्तर चाहिए होता है जिसमें पाठ से साक्ष्य हो। परीक्षक आमतौर पर अर्थ (अर्थ), भाव (भावना), और शिक्षा (सीख) माँगते हैं। यहाँ 5 पैटर्न दिए गए हैं जिन्हें आप पहचानेंगे:
(1) **निम्नलिखित दोहे का अर्थ स्पष्ट कीजिए और शिक्षा बताइए: 'जो रहीम उत्तम प्रकृति का अधिकारी है, वह सब के साथ भलाई करता है।'**
*उत्तर (3-4 पंक्तियाँ):* इस दोहे में रहीम कहते हैं कि जिसका स्वभाव अच्छा है, वह हमेशा सभी के लिए कल्याण चाहता है। उत्तम प्रकृति वाला व्यक्ति दूसरों को हानि नहीं पहुँचाता। शिक्षा: अच्छे गुण और सदाचार ही मनुष्य को महान बनाते हैं।
(2) **रहीम के अनुसार, कौन-सा धन सर्वश्रेष्ठ है? दोहे से उदाहरण दीजिए।**
*उत्तर:* रहीम के अनुसार ज्ञान और सद्गुण ही सच्चा धन हैं। अन्य धन तो नष्ट हो सकता है, लेकिन ज्ञान कभी खत्म नहीं होता। रहीम कहते हैं कि शिक्षा और गुण ही वास्तविक संपत्ति हैं जो आजीवन मनुष्य का साथ देते हैं।
(3) **रहीम दोहों में किस प्रकार की नीति का उपदेश देते हैं?**
*उत्तर:* रहीम व्यावहारिक नीति का उपदेश देते हैं। वे समाज में रहते हुए मनुष्य को कैसे आचरण करना चाहिए, यह बताते हैं। धैर्य, विनम्रता, न्याय, दया और ईमानदारी उनके दोहों के मुख्य विषय हैं।
(4) **रहीम की भाषा सरल और सुबोध क्यों है?**
*उत्तर:* रहीम की भाषा सरल है क्योंकि वे जनता के लिए लिखते हैं, न कि विद्वानों के लिए। वे दोहा-छंद (24 मात्राएँ) का प्रयोग करते हैं जो लोकभाषा में आसानी से समझ आता है। वे रोज़मर्रा के दृश्य (जैसे खेत, बाज़ार, घर) से उदाहरण लेते हैं।
(5) **'संतन को कहा सीकरो, काल कराल कुपंथ / रहिमन मानुष कुल की, कौन लगावत हानि' — इस दोहे का भाव समझाइए।**
*उत्तर:* इस दोहे में रहीम कहते हैं कि दुष्टता ही मनुष्य के लिए काल (मृत्यु) है। बुरे कर्म मनुष्य को नष्ट करते हैं। शिक्षा: सत्कर्म और सदाचार ही जीवन की सुरक्षा हैं।
सबसे अधिक दोहराए जाने वाले 5-अंक के प्रश्न और पूरे समाधान
5-अंक के प्रश्नों के लिए विस्तृत उत्तर अपेक्षित होता है जिसमें कई दोहों का संदर्भ हो, व्याख्या हो, और निष्कर्ष हो। ये अक्सर विषयगत विश्लेषण या तुलनात्मक चरित्र अध्ययन माँगते हैं। यहाँ 3 हल किए गए उदाहरण दिए गए हैं:
**Q1: रहीम के दोहों से उभरने वाले जीवन-मूल्यों पर प्रकाश डालिए। (5 अंक)**
*पूरा उत्तर (200–250 शब्द):*
रहीम के दोहे भारतीय समाज के लिए कालजयी जीवन-मूल्य प्रदान करते हैं। उनके दोहों में निम्नलिखित जीवन-मूल्य स्पष्ट दिखाई देते हैं:
(1) **ज्ञान की महत्ता:** रहीम ज्ञान को सर्वश्रेष्ठ संपत्ति मानते हैं। वे कहते हैं कि अन्य संपत्ति नष्ट हो सकती है, लेकिन ज्ञान कभी नष्ट नहीं होता। शिक्षा ही मनुष्य को आत्मनिर्भर और सम्मानित बनाती है।
(2) **सदाचार और नैतिकता:** रहीम सदा सत्य, न्याय और धर्म का पालन करने का आह्वान करते हैं। वे मानते हैं कि अच्छे गुण ही मनुष्य को महान बनाते हैं, न कि बाहरी भेष।
(3) **धैर्य और विवेक:** रहीम क्रोध और जल्दबाज़ी को व्यर्थ मानते हैं। वे सलाह देते हैं कि विचार-विमर्श करके ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
(4) **दया और करुणा:** रहीम दूसरों के प्रति दया और सहानुभूति का संदेश देते हैं। वे विश्वास करते हैं कि परोपकार ही सच्चा धर्म है।
रहीम के ये जीवन-मूल्य आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं और हमें बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
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**Q2: रहीम की भाषा-शैली की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। उदाहरण सहित समझाइए। (5 अंक)**
*पूरा उत्तर:*
रहीम की भाषा-शैली साहित्यिक उत्कृष्टता और सरलता का अद्भुत समन्वय है। उनकी भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ ये हैं:
(1) **दोहा-छंद का प्रयोग:** रहीम ने हमेशा दोहा-छंद (24 मात्राएँ) का प्रयोग किया है। यह छंद लयात्मक और संगीतात्मक होता है, जिससे दोहे आसानी से याद रह जाते हैं।
(2) **सरल और सुबोध भाषा:** रहीम ने कठिन संस्कृत शब्दों का प्रयोग नहीं किया। उन्होंने आम जनता की भाषा में नीति-उपदेश दिए। उदाहरण: 'नीर क्षीर भाव विवेक' (सरल, सीधा अर्थ)।
(3) **लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग:** रहीम दैनिक जीवन की बातों से समझ आने वाले मुहावरे और उदाहरण देते हैं। जैसे: 'जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि' — यह बात रोज़मर्रा के अनुभव से सीखी हुई लगती है।
(4) **प्रतीकात्मकता:** रहीम प्राकृतिक दृश्यों (जल, वायु, अग्नि) का प्रयोग करके गहरे अर्थ व्यक्त करते हैं। उदाहरण: 'नीर नीरन को खोजत, हिरत फिरत बेताब' — यहाँ पानी मनुष्य के दुःख का प्रतीक है।
(5) **संक्षिप्तता:** दोहा-छंद की सीमा के कारण रहीम अपनी बात बहुत संक्षेप में कहते हैं, लेकिन पूरा अर्थ स्पष्ट रहता है। वे अनावश्यक विस्तार नहीं करते।
इन विशेषताओं के कारण रहीम का काव्य आज भी लोकप्रिय है और हर पीढ़ी को प्रभावित करता है।
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**Q3: रहीम के दोहों में समाज को दिया गया संदेश क्या है? इसकी प्रासंगिकता आज के समय में कैसे है? (5 अंक)**
*पूरा उत्तर:*
रहीम के दोहों का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपने गुणों, शिक्षा, सदाचार और नैतिकता पर ध्यान देना चाहिए, न कि बाहरी भेष पर। वे कहते हैं:
(1) **सामाजिक सद्भावना:** रहीम एक समरस समाज का निर्माण करना चाहते हैं जहाँ सभी एक-दूसरे का सम्मान करें और परोपकार करें।
(2) **आत्मनियंत्रण:** रहीम क्रोध, लोभ और ईर्ष्या को दूर रखने का आह्वान करते हैं। वे मानते हैं कि आत्मनियंत्रण ही सुखी जीवन की कुंजी है।
(3) **ज्ञान का प्रसार:** रहीम शिक्षा को सर्वजनीन अधिकार मानते हैं और सभी को सीखने-सिखाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
**आज के समय में प्रासंगिकता:**
आज का समाज प्रतिस्पर्धा, तनाव और बेईमानी से ग्रस्त है। रहीम के दोहे हमें सिखाते हैं कि:
— सच्ची खुशी गुणों में है, धन-दौलत में नहीं
— शिक्षा ही वास्तविक शक्ति है
— दूसरों के साथ सदव्यवहार करना ही सफलता है
इसलिए रहीम के संदेश आज भी समान रूप से महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक हैं।
2026–27 की CBSE पाठ्यक्रम में पैटर्न बदलाव
2024–25 की तर्कसंगत CBSE कक्षा 9 हिंदी पाठ्यक्रम पहले से ही विषय-वस्तु का भार कम कर चुकी है, और शुरुआती संकेत बताते हैं कि 2026–27 का पैटर्न यांत्रिक स्मरण की तुलना में अनुप्रयोग-आधारित सीखने पर जोर देगा। दोहे — रहीम के लिए, यहाँ देखने योग्य बातें हैं:
(1) **परिभाषा-केंद्रित से विषय-आधारित प्रश्नों में बदलाव:** जबकि 1-अंक की परिभाषा संबंधी प्रश्न बने रहेंगे, परीक्षक तेजी से कई दोहों के बीच संबंध माँगने लगे हैं। उदाहरण के लिए, 'दोहा क्या है?' की जगह, आप देख सकते हैं 'रहीम के किन दोहों में धन की निरर्थकता दिखाई देती है? दो दोहों का नाम लिखिए।'
(2) **समकालीन प्रासंगिकता पर अधिक जोर:** नए पैटर्न के प्रश्न पूछेंगे 'आज के समाज में रहीम की शिक्षा कहाँ लागू होती है?' इसके लिए 16वीं सदी की बुद्धिमत्ता को आधुनिक समस्याओं (धमकाना, उपभोक्तावाद, नैतिक मुद्दे) से जोड़ने की जरूरत होगी।
(3) **तुलनात्मक विश्लेषण की अपेक्षा:** प्रश्न रहीम की तुलना अन्य कवियों (उसी किताब से कबीर या मीरा) के साथ या आधुनिक लेखकों के साथ करने के लिए कह सकते हैं। यह अलग-अलग दोहे विश्लेषण से हटकर एक नया कदम है।
(4) **मामला-अध्ययन या परिदृश्य-आधारित रचना:** सीधे पाठ्य प्रश्नों की जगह, परीक्षक एक वास्तविक-दुनिया की स्थिति प्रस्तुत कर सकते हैं और पूछ सकते हैं 'किस दोहे से इस समस्या का समाधान मिल सकता है?' यह केवल याद रखने की बजाय गहरी समझ का परीक्षण करता है।
(5) **कम शब्द सीमा लेकिन अधिक संकल्पनात्मक माँग:** 3-अंक के उत्तरों को 200 शब्दों से 100–120 शब्दों में सीमित किया जा सकता है, लेकिन मजबूत विश्लेषणात्मक विषय-वस्तु के साथ। ध्यान इस बात पर स्थानांतरित होता है कि आप कितना लिखते हैं, बजाय इसके कि आप कितना सटीक लिखते हैं।
आगे रहने के लिए, अभी से अलग-अलग PYQs के बजाय अवधारणा-जुड़े प्रश्न सेट हल करना शुरू करें। दोहों को विषयगत रूप से जोड़ने का अभ्यास करें (उदाहरण: धन पर सभी दोहे, धैर्य पर, सदाचार पर)। यह आपके मस्तिष्क को नए, अधिक एकीकृत प्रश्न पैटर्न के लिए तैयार करता है।
परीक्षा के लिए त्वरित प्रयास की रणनीति
जब आपकी परीक्षा में दोहे — रहीम के सवाल आएं, तो समय के दबाव में अंकों को अधिकतम करने के लिए इस 3-चरणीय रणनीति का पालन करें:
**चरण 1: सवाल के प्रकार को पहचानें (10 सेकंड)**
— क्या यह अर्थ (meaning), शिक्षा (moral), भाषा (style), या प्रासंगिकता (relevance) पूछ रहा है?
— 1-अंक = परिभाषा/एक विचार; 3-अंक = उदाहरण के साथ छोटा अनुच्छेद; 5-अंक = कई दोहों के साथ पूरा निबंध
**चरण 2: अपने उत्तर को संरचित करें (20 सेकंड)**
1-अंक के लिए: एक स्पष्ट वाक्य लिखें। उदाहरण: 'नीति-दोहे वे दोहे हैं जो जीवन-शिक्षा देते हैं।'
3-अंक के लिए: इस सूत्र का उपयोग करें:
— पंक्ति 1: सीधा उत्तर (दोहा/अवधारणा क्या कहती है)
— पंक्ति 2–3: एक दोहा या उदाहरण के साथ व्याख्या
— पंक्ति 4: निष्कर्ष संबंधी शिक्षा
5-अंक के लिए: इस सूत्र का उपयोग करें:
— परिचय (1–2 पंक्तियाँ): आप क्या समझा रहे हैं
— मुख्य भाग (3–4 बिंदु): प्रत्येक बिंदु एक दोहा या पाठ्य साक्ष्य से समर्थित
— निष्कर्ष: पाठ/प्रासंगिकता को सारांशित करें
**चरण 3: मुख्य वाक्यांशों का उपयोग करें जिन्हें परीक्षक पहचानते हैं (वास्तविक लेखन)**
अस्पष्ट उत्तर लिखने के बजाय, ये वाक्यांश उपयोग करें (जो NCERT नोट्स और मार्किंग स्कीम में दिखाई देते हैं):
— 'रहीम के अनुसार...'
— 'इस दोहे का अर्थ यह है कि...'
— 'शिक्षा/सीख यह है कि...'
— 'रहीम की भाषा-शैली की विशेषता यह है...'
— 'आज के समय में इस विचार की प्रासंगिकता...'
**3-घंटे की परीक्षा के लिए समय:**
— दोहे — रहीम सवालों पर 15–20 मिनट खर्च करें (ये अधिक अंकों वाले और अनुमानित होते हैं)
— अधिक सोच-विचार न करें; अपने NCERT पठन पर विश्वास करें
— यदि कोई सवाल एक दोहा माँगता है जो आपको शब्दशः याद नहीं है, तो अर्थ को स्पष्ट रूप से फिर से बताएँ—परीक्षक समझ के लिए अंक देते हैं, सटीक उद्धरण के लिए नहीं
**सामान्य गलतियों से बचें:**
— 1-अंक के सवालों में बहुत अधिक लिखना (समय बर्बाद करता है और ध्यान भटकाता है)
— 3-अंक के उत्तरों में दोहे या उदाहरणों का हवाला देना भूलना
— 5-अंक में तार्किक तर्क बनाने के बजाय यादृच्छिक विचार सूचीबद्ध करना
— अंग्रेजी तकनीकी शब्दों का उपयोग करना (उदाहरण के लिए, 'moral teaching' के बजाय 'नीति-शिक्षा' लिखें)
ऊपर दिए गए PYQs पर इस 3-चरणीय विधि का अभ्यास करें, और आप इस भाग को 10 मिनट पहले आत्मविश्वास के साथ, उच्च-अंकों वाले उत्तरों के साथ पूरा कर लेंगे।
अधिकतम परीक्षा की तैयारी के लिए इस गाइड का उपयोग कैसे करें
यह गाइड एक स्वतंत्र संशोधन उपकरण के रूप में डिज़ाइन किया गया है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप इसका उपयोग कैसे करते हैं। यहाँ एक सप्ताह की तैयारी का शेड्यूल दिया गया है:
**दिन 1:** परिचय पढ़ें और 'क्यों काम करने वाले पिछले प्रश्न पत्र फिर से पढ़ने से बेहतर हैं' खंड पढ़ें। फिर 'सबसे अधिक दोहराए गए 1-अंक के सवाल' खंड से सभी 5 एक-अंकीय सवालों को उत्तरों को देखे बिना हल करें। समय लें: सभी 5 के लिए 2 मिनट का लक्ष्य रखें। फिर उत्तर जाँचें और नोट करें कि आप कहाँ स्पष्टता खो गए।
**दिन 2–3:** सभी 5 तीन-अंकीय सवालों के माध्यम से काम करें ('सबसे अधिक दोहराए गए 3-अंक के सवाल' खंड)। प्रत्येक सवाल पर 5–7 मिनट खर्च करें। कागज़ पर पूरे उत्तर लिखें—सिर्फ पढ़ें नहीं। अपने उत्तर की तुलना मॉडल से करें। पहचानें: क्या आपने एक दोहा का हवाला दिया? क्या आपने शिक्षा को स्पष्ट रूप से समझाया? क्या आपने हिंदी के महत्वपूर्ण शब्दों का उपयोग किया?
**दिन 4–5:** 5-अंकीय सवालों का प्रयास करें ('सबसे अधिक दोहराए गए 5-अंक के सवाल पूर्ण समाधान के साथ' खंड)। ये निबंध-शैली हैं; प्रत्येक सवाल पर 8–10 मिनट खर्च करें। पहले अपने उत्तर की योजना बुलेट बिंदुओं में बनाएँ (2 मिनट), फिर पूरा उत्तर लिखें (8 मिनट)। यह परीक्षा की स्थितियों को प्रतिबिंबित करता है। लिखने के बाद, दिया गया समाधान पढ़ें और देखें कि आप कहाँ गहराई जोड़ सकते हैं।
**दिन 6:** 'पैटर्न शिफ्ट' खंड और 'प्रयास की रणनीति' को फिर से देखें। यह आपको नई प्रश्न प्रकारों और परीक्षा के दिन की मानसिकता के लिए तैयार करता है।
**दिन 7:** मिश्रित संशोधन—विभिन्न अंक-स्तरों से 2 यादृच्छिक सवाल चुनें और ताज़े रूप से हल करें। यदि आप सभी प्रयासों में 80%+ अंक प्राप्त करते हैं, तो आप परीक्षा के लिए तैयार हैं। यदि नहीं, तो उस प्रश्न प्रकार पर ध्यान केंद्रित करें जिसमें आप संघर्ष करते हैं और 3 उदाहरणों को दोबारा करें।
**इसके साथ:** अपनी NCERT पाठ्यपुस्तक (Sparsh, अध्याय 9) से मूल दोहे 2–3 बार पढ़ें। 3–4 मुख्य दोहे को हाइलाइट करें जो इन PYQs में सबसे अधिक दिखाई देते हैं। उनके अर्थ और शिक्षा को याद रखें, सटीक शब्द नहीं।
यह गाइड + NCERT पठन + 1 सप्ताह की केंद्रित PYQ अभ्यास = परीक्षा के दिन 90%+ आत्मविश्वास। एक सरल नोटबुक में अपने अंकों को ट्रैक करें: 'दिन 1: 1-अंक = 4/5, दिन 2: 3-अंक प्रश्न 1 = 2.5/3' आदि। अपनी प्रगति को देखना भी प्रेरक है।