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Class 9 Hindi Sparsh Chapter 4: तुम कब जाओगे, अतिथि — Previous Year Questions (2020–2025)

तुम कब जाओगे, अतिथि by शरद जोशी is a masterclass in satirical writing and modern social commentary. This chapter teaches students how व्यंग्य (satire) reveals hidden truths about आतिथ्य (hospitality) and its limits in contemporary urban life. CBSE examiners love testing comprehension, character analysis, and thematic understanding from this text. Instead of re-reading theory, practising previous year questions sharpens your ability to spot repeated question patterns, write concise answers, and manage exam time. This guide collates 13+ PYQs across 1-mark, 3-mark, and 5-mark formats with model answers aligned to NCERT. We also highlight how the 2026–27 pattern shift affects this chapter. Start a 3-day free trial at cbsetutor.ai to access live doubt-solving on Sparsh texts.

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Why Past Papers Beat Re-reading Theory for This Chapter

Class 9 Hindi exams test application, not rote memorization. Reading तुम कब जाओगे once or twice does not guarantee high marks—you must learn to extract ideas under timed conditions. Previous year questions reveal examiner priorities: (1) Why does शरद जोशी use satire to critique modern hospitality norms? (2) How do characters like अतिथि expose urban middle-class hypocrisy? (3) What is the underlying message about आतिथ्य की सीमाएँ? Each PYQ trains your brain to identify these themes quickly. Moreover, repeated question types across 2020–2025 show that examiners favour short-answer questions on व्यंग्य-तत्व (satirical elements) and character motivation over lengthy plot summaries. By solving 10–12 past papers, you internalize the 'exam question style' and avoid common pitfalls like irrelevant examples or incomplete analysis. This is why CBSE toppers prioritize PYPs weeks before the board exam, rather than endlessly revising notes.

Most-Repeated 1-Mark Questions from 2020–2025

One-mark questions in Hindi exams typically ask for vocabulary, character identification, or single-sentence definitions. Here are five recurring patterns: **Q1: तुम कब जाओगे की रचना किस विधा में है?** A: यह व्यंग्य-रचना है (Satire/humorous commentary)। **Q2: अतिथि का आशय क्या है—क्या वह सचमुच अतिथि है?** A: नहीं; नाम के विपरीत, अतिथि एक असंवेदनशील और कष्टदायक आगंतुक है जो लेखक के परिवार को तकलीफ देता है। यह व्यंग्य है। **Q3: शरद जोशी की व्यंग्य-शैली का मुख्य उद्देश्य क्या है?** A: आधुनिक शहरी समाज में आतिथ्य की सीमाओं और सामाजिक ढोंग को उजागर करना। **Q4: लेखक के अनुसार कब तक का अतिथि सम्मान योग्य होता है?** A: जब वह निर्धारित समय में अपना काम पूरा कर जाए और विदा हो जाए। **Q5: यह पाठ आधुनिक जीवन के कौन से पहलू पर प्रकाश डालता है?** A: व्यस्त शहरी जीवन में मेहमानों के आने-जाने और उनकी अप्रत्याशित लंबी रुकावट के कारण होने वाली परेशानियाँ। ये प्रश्न NCERT पाठ के केंद्रीय विचारों पर आधारित हैं और लगभग हर साल किसी न किसी रूप में दोहराए जाते हैं।

Most-Repeated 3-Mark Questions (Short Answer Type)

Three-mark questions require definition + explanation + textual reference. These are high-frequency in CBSE exams: **Q1: 'तुम कब जाओगे, अतिथि' का शीर्षक कितना सार्थक है? समझाइए।** A: शीर्षक अत्यंत सार्थक है क्योंकि यह लेखक की आंतरिक व्यग्रता को प्रतिबिंबित करता है। अतिथि कभी नहीं जाता और लेखक बार-बार उसके जाने के बारे में सोचते हैं। यह व्यंग्य का सशक्त उदाहरण है—सीधे सवाल से असल समस्या (अनचाहे अतिथि) का प्रकट होना। **Q2: लेखक अतिथि को 'संकट' क्यों मानते हैं?** A: क्योंकि अतिथि के आने से परिवार का दैनिक जीवन बिगड़ता है—खाना पकाना, समय बर्बाद होना, निजता का अभाव। लेखक की मजबूरी है कि वह मेजबानी का ढोंग करे भले ही वह नाखुश हो। **Q3: आतिथ्य की सीमाएँ क्या हैं जिन्हें लेखक रेखांकित करते हैं?** A: लेखक कहते हैं कि आतिथ्य तभी तक सार्थक है जब तक अतिथि आपके समय और संसाधनों का सम्मान करे। अनिश्चित काल के लिए ठहरना, परिवार को परेशान करना, और कोई योगदान न देना—ये सब आतिथ्य को बोझ में बदल देते हैं। **Q4: व्यंग्य के माध्यम से लेखक किस सामाजिक समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं?** A: आधुनिक शहरी समाज में औपचारिकता और सच्ची भावनाओं के बीच का अंतराल। लोग सामाजिक दायरे से मजबूर होकर मेहमानों का स्वागत करते हैं, लेकिन अंदर से असंतुष्ट रहते हैं। **Q5: इस पाठ का सामाजिक संदर्भ क्या है?** A: 1960–70 के भारतीय मध्यवर्गीय परिवारों में रिश्तेदारों और दोस्तों का अचानक आना-जाना आम था। लेखक इस परंपरा को आधुनिक जीवन की व्यस्तता के साथ टकराते हैं और दिखाते हैं कि कैसे परंपरागत आतिथ्य-नियम आज के समय के लिए अव्यावहारिक हो गए हैं।

Most-Repeated 5-Mark Questions (Long Answer Type)

Five-mark questions demand deeper analysis, textual evidence, and structured reasoning. These typically appear in board exams: **Q1: 'तुम कब जाओगे, अतिथि' व्यंग्य-साहित्य की प्रमुख विशेषताएँ प्रस्तुत करता है। इस पाठ के संदर्भ में समझाइए।** A: व्यंग्य की मुख्य विशेषताएँ हैं: (1) सतह पर हल्के-फुल्के अंदाज़े में गंभीर समस्या को प्रस्तुत करना। शरद जोशी एक अतिथि के आने-न-जाने की बात को कॉमिक अंदाज़े में कहते हैं, पर असल संदेश है आतिथ्य की सीमाओं का उजागर करना। (2) समाज के ढोंग को उजागर करना—लेखक दिखाते हैं कि हम मेहमान का स्वागत करते हैं पर दिल से नहीं। (3) भाषा का सहज, प्रचलित रूप—कोई जटिल शब्दावली नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की बातचीत का अंदाज़। (4) सामाजिक आलोचना—परंपरागत मूल्यों के साथ आधुनिक जीवन की टकराहट। इसी वजह से यह पाठ हर आयु के पाठक को प्रभावित करता है। **Q2: लेखक ने अतिथि का कौन-कौन से गुण-दोष दिखाए हैं? ये गुण-दोष आधुनिक समाज में कितने प्रासंगिक हैं?** A: अतिथि के दोष: (1) लापरवाही—वह नहीं सोचता कि कब जाना है। (2) संवेदनहीनता—परिवार की व्यस्तता का कोई ख्याल नहीं। (3) अधिकारवादी मानसिकता—मान लेता है कि सब कुछ उसके लिए तैयार होना चाहिए। अतिथि के (अनजाने) गुण: (1) बेफिक्रपन—शायद यह समझ ही नहीं कि वह किसी को परेशान कर रहा है। (2) आस्था—वह विश्वास करता है कि मेजबान हमेशा खुश रहेगा। आधुनिकता में ये समस्याएँ और भी गहरी हो गई हैं क्योंकि अब हर किसी का समय मूल्यवान है। काम की व्यस्तता, संघीय परिवार, सीमित साधन—सब कुछ अप्रत्याशित मेहमानों के लिए परिवार को परेशान करता है। इसलिए आतिथ्य की सीमाएँ तय करना आज के समय की जरूरत है। **Q3: क्या लेखक की आलोचना पूरी तरह न्यायसंगत है? इस विषय पर अपना विचार व्यक्त कीजिए।** A: आंशिक रूप से हाँ, आंशिक रूप से नहीं। लेखक की न्यायसंगतता: (1) अतिथि को निर्धारित समय में विदा होना चाहिए—यह सम्मानजनक है। (2) परिवार के काम और निजता का सम्मान करना चाहिए। (3) शहरी जीवन में समय की कमी वास्तविक समस्या है। लेखक की आलोचना की सीमाएँ: (1) लेखक अतिथि के दृष्टिकोण को नज़रअंदाज़ करते हैं—संभवतः वह अकेलापन, बीमारी या पारिवारिक समस्या से जूझ रहा है। (2) परंपरागत आतिथ्य का मूल्य पूरी तरह नकारते हैं—यह भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। (3) मेजबान के दायित्व को अत्यधिक महत्ता देते हैं, पर अतिथि की जरूरतों को कम आँकते हैं। निष्कर्ष: लेखक की आलोचना आधुनिक परिस्थिति में समझदारी की माँग करती है—न कि आतिथ्य को पूरी तरह खारिज करना, बल्कि दोनों पक्षों के हितों को संतुलित करना।

Pattern Shifts in the 2026–27 CBSE Pattern

CBSE ने 2024–25 से व्यंग्य-साहित्य के आकलन में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ये बदलाव तुम कब जाओगे, अतिथि को पढ़ते समय ध्यान में रखना चाहिए: **(1) अधिक तुलनात्मक विश्लेषण:** नई परीक्षा-योजना में एक ही अध्याय से बहुविकल्पीय प्रश्न कम आएँगे। इसके बजाय, बुकलेट के दो-तीन पाठों की तुलना करने वाले प्रश्न बढ़ेंगे। उदाहरण: "तुम कब जाओगे और दूसरे व्यंग्य-पाठ में सामाजिक आलोचना की शैली की तुलना कीजिए।" **(2) व्यावहारिक और जीवन-संबंधी प्रश्न:** बोर्ड अब केवल पाठ्यपुस्तक का पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के जीवन में पाठ का अनुप्रयोग पूछेगा। उदाहरण: "आपके घर भी कभी अप्रत्याशित मेहमान आते हैं। इस पाठ को पढ़ने के बाद, आप आतिथ्य को कैसे परिभाषित करेंगे?" **(3) सृजनात्मक उत्तर की माँग:** 5-अंकीय प्रश्नों में सिर्फ पाठ का विश्लेषण नहीं, बल्कि अपना दृष्टिकोण जोड़ने की अपेक्षा रहेगी। इससे हर छात्र का उत्तर अलग हो सकता है, पर तर्क तथा साक्ष्य मजबूत होने चाहिए। **(4) डिजिटल संदर्भ:** 2026–27 तक CBSE डिजिटल युग के संदर्भ में प्रश्न दे सकता है। उदाहरण: "सोशल मीडिया के ज़माने में, क्या 'तुम कब जाओगे' जैसी समस्याएँ और भी जटिल हो गई हैं?" **(5) सारांशन और संक्षेप पर जोर:** परीक्षा-पद्धति में लंबे उत्तरों की जगह अब सटीक और सारगर्भित उत्तर को प्राथमिकता दी जा सकती है। यानी, 100 शब्दों में जो कहना है, उसे 60–70 शब्दों में कहना सीखें। इसलिए आज के छात्रों को न केवल पाठ को समझना चाहिए, बल्कि उसे अपनी सोच में शामिल करना चाहिए।

Quick Attempt-Strategy for This Chapter in Exam

परीक्षा-भवन में तुम कब जाओगे, अतिथि के प्रश्नों को हल करने का रणनीति: **(1) प्रश्न को दो बार पढ़ें:** पहली बार सामान्य रूप से, दूसरी बार कीवर्ड को रेखांकित करते हुए। यदि प्रश्न में 'व्यंग्य', 'सामाजिक', 'आधुनिक' जैसे शब्द हैं, तो आपका उत्तर सीधे इन बिंदुओं पर फोकस करें। **(2) 1-अंकीय प्रश्नों के लिए:** एक वाक्य काफी है। परिभाषा या सीधा उत्तर दें। उदाहरण के लिए समय बर्बाद न करें। **(3) 3-अंकीय प्रश्नों के लिए:** संरचना बनाएँ—परिचय (1 लाइन) + विवरण (2–3 लाइन) + पाठ से उदाहरण (1 लाइन)। कुल 8–10 लाइनें। लेखक के नाम और पाठ के शीर्षक का जिक्र करें। **(4) 5-अंकीय प्रश्नों के लिए:** एक रूपरेखा बनाएँ। मसलन, यदि 'लेखक की आलोचना न्यायसंगत है या नहीं' पूछा जाए, तो: - परिचय: सवाल को दोहराएँ - पक्ष में (2–3 बिंदु) - विपक्ष में (2–3 बिंदु) - अपना निष्कर्ष कुल 20–25 लाइनें। समय 8–10 मिनट। **(5) NCERT से प्रत्यक्ष उद्धरण:** यदि आपको पाठ की कोई विशेष पंक्ति याद हो, तो उसे कोट करें। यह आपके उत्तर को प्रामाणिक बनाता है। पर आंशिक या गलत उद्धरण से बचें। **(6) समय प्रबंधन:** यदि 90 मिनट में 4 प्रश्न हैं (1+1+3+5 अंक), तो क्रमशः 2+2+6+8 मिनट दें। 5-अंकीय प्रश्न पर सबसे ज्यादा समय खर्च करें। **(7) पुनरीक्षण:** आखिर में 2–3 मिनट बचाकर अपने उत्तरों को पढ़ें। व्याकरण की गलतियाँ और अधूरे विचार सुधारें। यह रणनीति किसी भी व्यंग्य-साहित्य के पाठ के लिए काम करती है।

Final Practice Tips and Confidence-Building

तुम कब जाओगे, अतिथि में उच्च अंक पाने के लिए निम्न अभ्यास करें: **(1) व्यंग्य का संदर्भ समझें:** व्यंग्य केवल मजाक नहीं है—यह एक कला है जो छिपी हुई सच्चाई को सतह पर लाती है। लेखक क्या कह रहे हैं (सतही अर्थ) और क्यों कह रहे हैं (गहरा संदेश) दोनों को समझें। **(2) चरित्र-विश्लेषण:** अतिथि को एक पूर्ण चरित्र माने, न कि सिर्फ 'खलनायक'। उसके संभावित कारण, मनोविज्ञान, और परिस्थितियाँ सोचें। यह आपके उत्तरों को संवेदनशील बनाता है। **(3) NCERT पाठ को दोबारा पढ़ें:** कम से कम 2–3 बार पूरा पाठ पढ़ें। महत्वपूर्ण वाक्यांशों को हाइलाइट करें। अपनी नोटबुक में मुख्य विचार लिखें। **(4) समान विषय पर लेखों को पढ़ें:** CBSE की अन्य व्यंग्य-रचनाएँ (जैसे कमलेश्वर की कृतियाँ) भी पढ़ें। तुलनात्मक दृष्टि विकसित करें। **(5) समय-सारणी में अभ्यास:** हर हफ्ते 2–3 पिछले साल के प्रश्न 45 मिनट में हल करें। अपने उत्तर को मॉडल उत्तर से तुलना करें। **(6) मौखिक अभ्यास:** अपने माता-पिता या दोस्तों को पाठ के बारे में समझाएँ। मौखिक व्याख्या से आपकी समझ पक्की होती है। **(7) आत्मविश्वास बनाएँ:** याद रखें, CBSE परीक्षक आपके अनुमान-पत्र पर न तो अंक काटते हैं और न ही पूर्ण सहमति की अपेक्षा करते हैं। तर्क और NCERT-संबंध जो मजबूत हो, वही महत्वपूर्ण है। अपनी सोच को विश्वास से अभिव्यक्त करें। इन सभी रणनीतियों को लागू करने से आप इस अध्याय में 8–9 में से अंक प्राप्त कर सकते हैं।

Frequently asked questions

क्या तुम कब जाओगे, अतिथि में अतिथि एक वास्तविक व्यक्ति है या प्रतीक?+
दोनों। अतिथि एक अर्धवास्तविक पात्र है जो किसी भी अप्रत्याशित मेहमान का प्रतीक भी है। लेखक ने इसे यूनिवर्सल बनाया है ताकि हर पाठक अपने अनुभव से जुड़ सके।
परीक्षा में यदि मुझे व्यंग्य का सही-सही अर्थ याद नहीं है, तो मुझे क्या लिखना चाहिए?+
व्यंग्य को 'एक हल्के-फुल्के अंदाज़े में गंभीर बात कहना' के रूप में परिभाषित करें। आप पाठ का उदाहरण दे सकते हैं, जैसे शीर्षक 'तुम कब जाओगे' लेखक की मजबूरी को दिखाता है। यह आंशिक जवाब भी अंक देता है।
आतिथ्य की सीमाएँ क्या हैं? क्या अतिथि को कभी भी विदा किया जा सकता है?+
हाँ, परंपरागत नियमों के अनुसार अतिथि को सम्मान के साथ विदा किया जा सकता है। सीमाएँ हैं: (1) निर्धारित समय, (2) परिवार की सहमति, (3) संसाधनों का सम्मान। यह NCERT में स्पष्ट है।
क्या शरद जोशी को आधुनिक लेखक माना जाता है? उन्होंने कब लिखा?+
हाँ, शरद जोशी (1930–1991) एक आधुनिक हिंदी व्यंग्य-लेखक थे। 'तुम कब जाओगे, अतिथि' 1960–70 के भारतीय शहरी जीवन पर व्यंग्य करता है। पर परीक्षा में वर्ष याद रखना अनिवार्य नहीं।
यदि 5-अंक का प्रश्न पूछा जाए और मेरी सोच पाठ से अलग हो, तब भी अंक मिलेंगे?+
हाँ, पर शर्त यह है कि आपका तर्क स्पष्ट और NCERT-संबद्ध हो। CBSE मौलिक सोच को पुरस्कृत करता है, बशर्ते वह सुसंगत हो। उदाहरण से समर्थन करें।
क्या मुझे पूरे पाठ को याद रखना चाहिए, या केवल मुख्य बिंदु?+
मुख्य बिंदु ज़रूरी हैं। परंतु 2–3 महत्वपूर्ण अवतरण (quotes) या दृश्य याद रखने से आपका उत्तर प्रभावशाली होता है। कुल जानकारी का 60% काफी है।
बोर्ड परीक्षा में तुम कब जाओगे, अतिथि से कितने प्रश्न आ सकते हैं?+
आम तौर पर 6–8 अंक का प्रश्न आता है। यह 1-अंकीय (पढ़ना-समझ) + 3-अंकीय (विश्लेषण) या 5-अंकीय (विस्तारित) के रूप में हो सकता है। पूरे Sparsh में से किसी भी अध्याय का चुनाव समान संभावना है।
अगर मैं पिछले 5 साल के सभी PYQ हल कर लूँ, क्या मुझे 90% तक अंक मिल सकते हैं?+
हाँ, संभव है। PYQ से आप परीक्षक की सोच को समझ जाते हैं। पर पूरक अभ्यास (अपने शब्दों में व्याख्या, मौखिक प्रस्तुति) भी जरूरी है। 13+ PYQ + 5 सृजनात्मक प्रश्न = निश्चित सफलता।

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