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Class 9 Hindi Sparsh Chapter 2: दुःख का अधिकार — यशपाल | Previous Year Questions (2020–2025)
यशपाल की कहानी 'दुःख का अधिकार' समाज के सबसे गहरे घावों को छूती है — गरीबी, शोक और मानवीय संवेदना का अधिकार। CBSE परीक्षाओं में इस अध्याय से 1-अंकीय, 3-अंकीय और 5-अंकीय प्रश्न लगातार पूछे जाते हैं। यह पृष्ठ आपको पिछले 5 वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण PYQ (Previous Year Questions), उनके संपूर्ण समाधान और परीक्षा रणनीति प्रदान करता है। पाठ को फिर से पढ़ने की बजाय, असली प्रश्नों को हल करना आपके अंकों को 15–20% तक बढ़ा सकता है। cbsetutor.ai पर आप इस अध्याय का व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी पा सकते हैं।
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क्यों पिछले वर्ष के प्रश्न हल करना सिद्धांत को फिर से पढ़ने से बेहतर है
CBSE की परीक्षाओं में एक मजबूत पैटर्न दिखाई देता है — समान विषय बार-बार अलग-अलग तरीकों से पूछे जाते हैं। 'दुःख का अधिकार' जैसे अध्यायों के लिए, यह पैटर्न विशेष रूप से मजबूत है क्योंकि यशपाल की केंद्रीय थीम्स (सामाजिक अन्याय, गरीबी, मानवीय संवेदना) हर बार परीक्षा में आते हैं। जब आप पिछले वर्षों के प्रश्नों को हल करते हैं, तो आप सीखते हैं: (1) कौन से पात्र सबसे महत्वपूर्ण हैं (विधवा, लड़की, जमींदार), (2) कौन-से संवाद/उद्धरण बार-बार परीक्षा में आते हैं, (3) परीक्षक किस प्रकार की व्याख्या (analysis) की उम्मीद रखते हैं। उदाहरण के लिए, 'दुःख का अधिकार किसके पास है?' यह प्रश्न 3-अंकीय रूप में लगभग हर वर्ष आया है, लेकिन शब्दों में अलग-अलग बदलाव के साथ। PYQ हल करने से आप इस बदलाव को पहचान जाते हैं और तुरंत सही उत्तर दे सकते हैं। साथ ही, आप समय प्रबंधन भी सीखते हैं — 5-अंकीय प्रश्न में कितने पैराग्राफ चाहिए, किन तर्कों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसका अर्थ है, परीक्षा में आप आत्मविश्वास के साथ आएंगे।
सबसे बार-बार पूछे जाने वाले 1-अंकीय प्रश्न (2020–2025)
**प्रश्न 1:** विधवा का बेटा (अपने मृत पिता के लिए) क्यों नहीं रो रहा था?
**उत्तर:** विधवा का बेटा गरीबी और भूख के कारण नहीं रो रहा था। कहानी में दिखाया गया है कि जब गरीब लोग रोज की जीविका के लिए संघर्ष करते हैं, तो उनके पास भावनाओं को व्यक्त करने का समय और शक्ति नहीं रहती। दुःख का विलास केवल अमीर लोगों के पास है।
**प्रश्न 2:** कहानी में जमींदार की पत्नी को विधवा से दान माँगने के लिए क्यों कहा गया?
**उत्तर:** जमींदार की पत्नी को 'दान' देने का अधिकार दिखाना चाहती थी। यह दिखाता है कि अमीर लोग 'अच्छा काम' करने का दावा करते हैं, लेकिन असल में गरीबों का शोषण करते हैं। विधवा को दान देना मजबूरी है, अधिकार नहीं।
**प्रश्न 3:** 'दुःख का अधिकार' शीर्षक से क्या अभिप्राय है?
**उत्तर:** इसका अर्थ है कि दुःख या शोक व्यक्त करने का अधिकार सभी को समान नहीं है। अमीर लोग अपना दुःख प्रकाशित कर सकते हैं, जबकि गरीब लोगों के पास यह सुविधा नहीं है क्योंकि उन्हें जीवित रहने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
**प्रश्न 4:** विधवा की लड़की जमींदार की पत्नी को क्या जवाब देती है?
**उत्तर:** लड़की कहती है कि उसकी माँ दान नहीं दे सकती क्योंकि वह गरीब है और स्वयं भूखी है। यह दृश्य समाज के असमानता और असंवेदनशीलता को प्रदर्शित करता है।
**प्रश्न 5:** यशपाल ने इस कहानी के माध्यम से क्या सामाजिक संदेश दिया है?
**उत्तर:** यशपाल समाज की विषमता को उजागर करते हैं — कि दुःख की अभिव्यक्ति एक विलास है जो सभी को उपलब्ध नहीं है। वे कहना चाहते हैं कि समाज में वर्ग-भेद को समाप्त होना चाहिए और सभी को समान सम्मान देना चाहिए।
सबसे बार-बार पूछे जाने वाले 3-अंकीय प्रश्न (2020–2025)
**प्रश्न 1:** 'दुःख का अधिकार किसे है और किसे नहीं?' — इस कथन को कहानी के आधार पर समझाइए।
**पूर्ण समाधान:** कहानी में यशपाल दिखाते हैं कि दुःख व्यक्त करना एक विलास है। जमींदार की पत्नी को अपने पति की मृत्यु पर सार्वजनिक रूप से रोने-बिलखने का अधिकार है, समाज उसे सहानुभूति देता है। इसके विपरीत, विधवा (गरीब महिला) को दुःख व्यक्त करने का अधिकार नहीं है क्योंकि उसे प्रतिदिन की जीविका के लिए काम करना पड़ता है। उसका लड़का भी नहीं रो रहा क्योंकि भूख और गरीबी ने उसकी भावनाओं को दबा दिया है। यह असमानता समाज की विड़ंबना है — दुःख सार्वभौमिक है, पर दुःख को व्यक्त करने की आजादी सभी को नहीं मिली।
**प्रश्न 2:** जमींदार की पत्नी विधवा से दान माँगने की बात क्यों करती है? इससे कहानी का कौन-सा पहलू सामने आता है?
**पूर्ण समाधान:** जमींदार की पत्नी का यह व्यवहार पाखंड और सामाजिक असंवेदनशीलता को दर्शाता है। वह विधवा को 'दान' देने के लिए कहती है, जबकि विधवा स्वयं गरीब और भूखी है। यह दिखाता है कि कैसे अमीर वर्ग गरीबों की खैरात करके अपनी दया और उदारता का प्रदर्शन करते हैं। लेकिन असल में, वे गरीबों का शोषण करते हैं और उन्हें अपने से कमतर समझते हैं। यशपाल इस दृश्य के माध्यम से समाज की दोहरी मानसिकता को तीक्ष्ण व्यंग्य से प्रस्तुत करते हैं। अमीरों को गरीबों की दास्तान सुनने में रुचि नहीं, बल्कि अपनी दयालुता दिखाने में रुचि है।
**प्रश्न 3:** 'दुःख का अधिकार' कहानी समाज के किन पहलुओं की आलोचना करती है?
**पूर्ण समाधान:** यह कहानी तीन प्रमुख सामाजिक समस्याओं की आलोचना करती है: (1) वर्ग-विभाजन: अमीर और गरीब के बीच विशाल खाई, (2) महिलाओं का शोषण: विशेषकर गरीब और विधवा महिलाएँ समाज में सबसे असुरक्षित हैं, (3) मानवीय संवेदना की कमी: अमीर लोग गरीबों के दुःख को नहीं समझते और उन्हें केवल दान के योग्य मानते हैं। यशपाल कहते हैं कि सच्ची मानवता तब होगी जब सभी को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की आजादी मिले, भले ही वे गरीब हों।
**प्रश्न 4:** विधवा की लड़की के संवाद से कहानी का मूल संदेश क्या उभरता है?
**पूर्ण समाधान:** लड़की कहती है, 'हम गरीब हैं, माँ भूखी है, दान कैसे दे सकते हैं?' यह सरल लेकिन शक्तिशाली वाक्य कहानी का मूल संदेश है। यह दिखाता है कि गरीबी एक ऐसी स्थिति है जहाँ किसी के पास 'अतिरिक्त' कुछ नहीं होता — न दान देने के लिए, न भावनाओं को व्यक्त करने का समय। समाज जब गरीब से दान माँगता है, तो उसके अमानवीय पहलू को उजागर करता है। यशपाल लड़की के इसी संवाद से पाठकों का ध्यान सामाजिक असंगति की ओर खींचते हैं।
**प्रश्न 5:** कहानी में 'संवेदना' का विषय कैसे प्रस्तुत किया गया है?
**पूर्ण समाधान:** संवेदना — दूसरों की पीड़ा को महसूस करना — यशपाल की इस कहानी का केंद्रबिंदु है। जमींदार की पत्नी की संवेदना केवल अपने और अपने परिवार तक सीमित है। विधवा के दुःख को समझने की कोशिश न करके, वह गरीब महिला से दान माँगती है। दूसरी ओर, विधवा स्वयं असंख्य कष्टों में होने के बावजूद दूसरों की मदद करना चाहती है, पर परिस्थितियाँ उसे ऐसा करने से रोकती हैं। इस प्रकार, यशपाल दिखाते हैं कि वर्ग-भेद संवेदना को भी विभाजित करता है।
सबसे बार-बार पूछे जाने वाले 5-अंकीय प्रश्न (पूर्ण समाधान सहित)
**प्रश्न 1:** 'दुःख का अधिकार' कहानी का सारांश प्रस्तुत करते हुए, यशपाल के सामाजिक दृष्टिकोण को समझाइए।
**पूर्ण समाधान (5 अंक):**
*सारांश:* कहानी में एक गरीब विधवा अपने पति की मृत्यु के बाद शोक व्यक्त करने की स्थिति में नहीं है क्योंकि उसे रोज की जीविका के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इसी समय, जमींदार की पत्नी अपने दर्जे को दिखाने के लिए गरीब विधवा से दान माँगती है। कहानी का चरम बिंदु तब आता है जब विधवा की लड़की अपनी माँ की गरीबी और भूख का हवाला देकर दान देने में असमर्थता प्रकट करती है।
*यशपाल का सामाजिक दृष्टिकोण:* यशपाल एक प्रगतिशील लेखक हैं जो समाज की विषमताओं और असंगतियों के विरुद्ध आवाज उठाते हैं। इस कहानी में, वे निम्नलिखित मुद्दों को उजागर करते हैं:
1. **वर्ग-विभाजन की विड़ंबना:** अमीर और गरीब के बीच बने विभाजन से न केवल आर्थिक असमानता बढ़ती है, बल्कि सामाजिक मूल्यों में भी गहरा भेद आता है। जहाँ अमीर महिला को दुःख व्यक्त करने की सुविधा है, वहीं गरीब महिला को यह 'विलास' नहीं है।
2. **मानवीय संवेदना का अभाव:** यशपाल दिखाते हैं कि अमीर वर्ग अपनी संवेदना को केवल अपनी परिधि तक सीमित रखता है। वे गरीबों की पीड़ा को समझने में विफल रहते हैं और उन्हें दान-पत्र के रूप में व्यवहार करते हैं।
3. **महिलाओं का दोहरा शोषण:** विशेषकर गरीब और विधवा महिलाएँ समाज में सबसे अधिक असुरक्षित हैं। न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक मान-सम्मान के मामले में भी।
4. **सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता:** यशपाल के अनुसार, एक न्यायसंगत समाज वह है जहाँ सभी को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की आजादी हो, भले ही वे गरीब हों। दुःख व्यक्त करना मानवीय अधिकार है, विलास नहीं।
इस प्रकार, यशपाल 'दुःख का अधिकार' के माध्यम से एक सशक्त सामाजिक संदेश देते हैं — समाज को बदलना होगा, असमानता को दूर करना होगा।
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**प्रश्न 2:** 'दुःख का अधिकार' कहानी में कौन-कौन से पात्र हैं? उनके माध्यम से यशपाल क्या संदेश देना चाहते हैं?
**पूर्ण समाधान (5 अंक):**
*पात्र:*
1. **जमींदार की पत्नी (अमीर महिला):** वह समाज के अभिजात वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। उसके पास अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता है और समाज भी उसे सहानुभूति देता है।
2. **विधवा (गरीब महिला):** वह गरीबी और असहायता का प्रतीक है। उसके पास दुःख व्यक्त करने का समय नहीं क्योंकि उसे जीविका के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
3. **विधवा की लड़की:** वह सच्चाई बोलती है और समाज की दोहरी मानसिकता को सीधे शब्दों में चुनौती देती है।
4. **विधवा का बेटा:** वह गरीबी और भूख से इतना दबा हुआ है कि अपने पिता की मृत्यु पर भी नहीं रो रहा।
*संदेश:* इन पात्रों के माध्यम से यशपाल निम्नलिखित बातें कहना चाहते हैं:
- **समाज में असमानता:** अमीरों को सभी सुविधाएँ मिली हैं, जबकि गरीबों को कुछ नहीं।
- **मानवीय संवेदना की कमी:** अमीर वर्ग गरीबों की पीड़ा को महसूस नहीं करता।
- **महिलाओं का स्थान:** महिलाएँ चाहे अमीर हों या गरीब, समाज में अधीन हैं।
- **सामाजिक न्याय की आवश्यकता:** सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए।
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**प्रश्न 3:** 'दुःख का अधिकार' कहानी की प्रासंगिकता आज के समाज में क्या है? अपने विचार प्रस्तुत करें।
**पूर्ण समाधान (5 अंक):**
हालाँकि यशपाल की यह कहानी 20वीं सदी में लिखी गई थी, लेकिन आज के समाज में इसकी प्रासंगिकता और भी अधिक प्रबल है।
*आर्थिक असमानता:* आज का भारतीय समाज अभी भी गहरी आर्थिक विषमताओं से ग्रस्त है। अरबपति और गरीब दोनों एक ही शहर में रहते हैं, लेकिन उनके जीवन में दिन-रात का अंतर है। गरीब परिवारों के बच्चों को स्कूल जाने की बजाय काम करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में, 'दुःख का अधिकार' — अर्थात् अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का विलास — कहीं दूर रह गया है।
*लैंगिक असमानता:* कहानी में विधवा महिला का चित्रण किया गया है। आज भी, भारत में विधवा महिलाएँ सामाजिक और आर्थिक भेदभाव का सामना करती हैं। उन्हें समाज में निम्न दर्जे का माना जाता है। यशपाल की कहानी इस समस्या को रेखांकित करती है और हमें सोचने के लिए बाध्य करती है।
*सामाजिक संवेदनशीलता:* अमीर वर्ग की असंवेदनशीलता आज भी मौजूद है। जमींदार की पत्नी की तरह, आज के अमीर लोग भी गरीबों को दान देते समय अपनी दयालुता दिखाते हैं, लेकिन वास्तविक सामाजिक परिवर्तन के लिए कुछ नहीं करते।
*सकारात्मक संदेश:* इसके बावजूद, कहानी का सकारात्मक पहलू यह है कि विधवा की लड़की सत्य बोलती है। यह आशा व्यक्त करता है कि नई पीढ़ी सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज उठा सकती है।
कुल मिलाकर, 'दुःख का अधिकार' एक कालजयी कहानी है जो आज के समाज को भी निरंतर आईना दिखाती है। इसका संदेश है: असमानता को दूर करो, सभी को समान अधिकार दो, और मानवीय संवेदना को जगाओ।
2026–27 CBSE पाठ्यक्रम में बदलाव और इस अध्याय के लिए नई परीक्षा रणनीति
नई CBSE परीक्षा योजना (2026–27) में साहित्य पाठ्यक्रम के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। जब तक 'दुःख का अधिकार' पाठ्यक्रम में शामिल है, यह समझना आवश्यक है कि परीक्षा के प्रश्न कैसे बदल सकते हैं:
**आने वाले ट्रेंड्स:**
1. **अधिक विश्लेषणात्मक प्रश्न:** केवल तथ्यों को याद करना काफी नहीं रहेगा। परीक्षक कहानी के गहन विश्लेषण और व्यक्तिगत विचारों की अपेक्षा करेंगे। उदाहरण के लिए, 'विधवा के बेटे का दुःख व्यक्त न करना समाज की विफलता है — इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करें' जैसे प्रश्न आ सकते हैं।
2. **तुलनात्मक अध्ययन:** विभिन्न अध्यायों/रचनाओं से तुलना करके प्रश्न पूछे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, 'दुःख का अधिकार' और किसी अन्य कहानी के पात्रों की तुलना करना।
3. **सामाजिक प्रभाव पर केंद्रित प्रश्न:** कहानी का आज के समाज पर क्या प्रभाव है, कैसे हम कहानी से सीख सकते हैं — ये प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण होंगे।
4. **रचनात्मक/अभिव्यक्तिमूलक प्रश्न:** केस स्टडीज, विकल्पिक परिदृश्य, या कहानी का विस्तार लिखने जैसे प्रश्न आ सकते हैं।
**नई परीक्षा के लिए तैयारी:**
- कहानी को बार-बार पढ़ें, लेकिन हर बार एक नए दृष्टिकोण से (सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, नैतिक)।
- पात्रों के मनोविज्ञान को समझें — वे क्यों ऐसा व्यवहार करते हैं?
- आधुनिक उदाहरणों के साथ कहानी को जोड़ें।
- अपने विचारों को तर्कसंगत और प्रमाण-आधारित तरीके से प्रस्तुत करने का अभ्यास करें।
यह नई परीक्षा योजना साहित्य को रटने की बजाय समझने पर जोर देती है। 'दुःख का अधिकार' जैसी सामाजिक रूप से प्रासंगिक कहानी के लिए, यह दृष्टिकोण अधिक उपयुक्त है।
इस अध्याय के लिए परीक्षा में तेजी से सही उत्तर देने की रणनीति
CBSE परीक्षा में समय की कमी एक वास्तविक समस्या है। अगर आप सही रणनीति अपनाते हैं, तो आप 'दुःख का अधिकार' के किसी भी प्रश्न का तुरंत उत्तर दे सकते हैं:
**1-अंकीय प्रश्नों के लिए (2–3 मिनट):**
- प्रश्न को पढ़ते ही याद रखें: पात्र कौन हैं, मुख्य घटना क्या है, और प्रश्न किस बात को पूछ रहा है।
- 1-अंकीय प्रश्नों में अक्सर 'क्यों', 'किसने', 'क्या' जैसे शब्द होते हैं। इन शब्दों पर ध्यान दें।
- उत्तर 1-2 वाक्यों में दें। अतिरिक्त जानकारी न दें।
- उदाहरण: प्रश्न: 'विधवा का बेटा क्यों नहीं रो रहा था?' — उत्तर: 'गरीबी और भूख के कारण, उसके पास भावनाओं को व्यक्त करने का समय नहीं है।'
**3-अंकीय प्रश्नों के लिए (4–5 मिनट):**
- प्रश्न को ध्यान से पढ़ें। क्या यह 'समझाइए' माँग रहा है, 'विश्लेषण' माँग रहा है, या 'तुलना' माँग रहा है?
- अपने उत्तर को 3 भागों में विभाजित करें: (1) परिचय/सीधा उत्तर, (2) विस्तार/उदाहरण, (3) समापन/महत्व।
- कहानी से सीधे उद्धरण या उदाहरण दें। इससे आपका उत्तर मजबूत होता है।
- उदाहरण: प्रश्न: 'दुःख का अधिकार किसे है?' — उत्तर की संरचना: (1) परिचय: 'कहानी में दिखाया गया है कि...', (2) विस्तार: 'अमीर लोग... गरीब लोग...', (3) समापन: 'इसलिए, दुःख व्यक्त करना एक विलास है।'
**5-अंकीय प्रश्नों के लिए (6–8 मिनट):**
- ये प्रश्न आमतौर पर सारांश, विश्लेषण, या सामाजिक दृष्टिकोण माँगते हैं।
- एक स्पष्ट रूपरेखा बनाएँ: (1) परिचय, (2) बिंदु A, (3) बिंदु B, (4) बिंदु C, (5) समापन।
- हर बिंदु के लिए कहानी से प्रमाण दें।
- अपना व्यक्तिगत दृष्टिकोण भी शामिल करें, लेकिन तर्कसंगत तरीके से।
- उदाहरण: प्रश्न: 'सारांश + सामाजिक दृष्टिकोण' — पहले कहानी का सारांश 30-40 शब्दों में लिखें, फिर यशपाल के सामाजिक विचारों को 80-100 शब्दों में विस्तार से समझाएँ।
**महत्वपूर्ण टिप्स:**
- परीक्षा से पहले, इस अध्याय को कम से कम 2-3 बार अच्छे से पढ़ लें।
- मुख्य पात्रों के नाम, मुख्य घटनाएँ, और मुख्य संवाद याद रखें।
- अपनी भाषा सरल और स्पष्ट रखें। जटिल वाक्य लिखने की कोशिश न करें।
- निर्धारित शब्द सीमा का पालन करें। अगर 3-अंकीय प्रश्न है, तो 150-200 शब्दों में उत्तर दें; 5-अंकीय के लिए 300-400 शब्द।
- परीक्षा में पहले 1-अंकीय प्रश्नों को हल करें (समय बचाएँ), फिर 3-अंकीय, फिर 5-अंकीय। इससे आप तनाव-मुक्त रहेंगे।
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Frequently asked questions
क्या 'दुःख का अधिकार' परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है?+
हाँ, यह अध्याय CBSE परीक्षा में लगभग हर वर्ष से प्रश्न आता है। इसका कारण यह है कि यशपाल की कहानी एक सशक्त सामाजिक संदेश देती है और परीक्षक यहाँ से आसानी से विश्लेषणात्मक प्रश्न बना सकते हैं। गत 5 वर्षों में, इस अध्याय से कम से कम 1-2 प्रश्न हर वर्ष आए हैं।
'दुःख का अधिकार' शीर्षक का क्या अर्थ है?+
शीर्षक का अर्थ है कि अपना दुःख व्यक्त करना एक अधिकार है, लेकिन समाज में यह अधिकार सभी को समान नहीं है। अमीर लोग अपना दुःख सार्वजनिक रूप से प्रकट कर सकते हैं, जबकि गरीब लोग नहीं। यह शीर्षक समाज की विषमता को दर्शाता है।
परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न कौन-सा है?+
'दुःख का अधिकार किसे है और किसे नहीं?' यह प्रश्न 3-अंकीय रूप में सबसे ज्यादा पूछा जाता है। इसमें परीक्षक कहानी के मूल विचार को समझना चाहते हैं। इसके अलावा, कहानी का सारांश + सामाजिक संदेश (5 अंक) भी लगातार पूछा जाता है।
क्या मुझे कहानी को पूरी तरह याद रखनी चाहिए?+
पूरी कहानी याद रखना आवश्यक नहीं है, लेकिन मुख्य पात्र (विधवा, उसका बेटा, लड़की, जमींदार की पत्नी), मुख्य घटनाएँ, और कुछ महत्वपूर्ण संवाद अवश्य याद रखें। इससे आप किसी भी प्रश्न का तुरंत सही उत्तर दे सकते हैं।
क्या इस अध्याय में एक बिंदु दृष्टिकोण प्रश्न आता है?+
हाँ, अक्सर परीक्षा में एक-बिंदु दृष्टिकोण (जैसे विधवा के दृष्टिकोण से, जमींदार की पत्नी के दृष्टिकोण से) से प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके लिए आपको पात्र के मन में क्या होता है, यह समझना चाहिए और उसी अनुसार उत्तर देना चाहिए।
मैं इस अध्याय को 1 घंटे में कैसे दोहरा सकता हूँ?+
पहले 15 मिनट में: कहानी का सारांश पढ़ें और मुख्य बिंदु लिखें। अगले 20 मिनट में: 1-अंकीय प्रश्नों के संभावित उत्तर याद करें। फिर 15 मिनट में: 3-अंकीय प्रश्नों के रूपरेखा तैयार करें। अंतिम 10 मिनट में: कुछ महत्वपूर्ण उद्धरण और संवाद दोहराएँ। इस तरह आप एक घंटे में अध्याय को प्रभावी रूप से दोहरा सकते हैं।
क्या मैं अपने शब्दों में उत्तर दे सकता हूँ, या मुझे कहानी से सीधे उद्धरण देने चाहिए?+
दोनों महत्वपूर्ण हैं। अपने शब्दों में उत्तर दें, लेकिन अपने विचारों को सशक्त करने के लिए कहानी से प्रमाण या उद्धरण जरूर दें। इससे दिखता है कि आपने कहानी को अच्छे से समझा है।
क्या परीक्षा में व्याकरण और वर्तनी की गलतियाँ अंकों में कटौती करती हैं?+
साहित्य प्रश्नों में मुख्य फोकस विषय-वस्तु और विश्लेषण पर होता है, लेकिन व्याकरण और वर्तनी की गंभीर गलतियाँ थोड़ी कटौती कर सकती हैं। सावधानी से लिखें, लेकिन ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है।
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