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Class 9 CBSE Hindi Sparsh Chapter 7: धर्म की आड़ — Previous Year Questions (2020-2025)

गणेश शंकर विद्यार्थी का निबंध 'धर्म की आड़' CBSE Class 9 Hindi - Sparsh पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है जो धर्म के दुरुपयोग, सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी पर गहरा प्रश्न उठाता है। यह पेज आपको CBSE द्वारा पिछले 5 वर्षों में पूछे गए सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह देता है—1-अंक, 3-अंक और 5-अंक दोनों प्रकार के उत्तरों के साथ। हम सबसे अधिक दोहराए गए प्रश्न पैटर्न, परीक्षा में आने वाली महत्वपूर्ण पंक्तियाँ और नए 2026-27 CBSE पैटर्न में आने वाले बदलावों को भी कवर करते हैं। cbsetutor.ai पर हमारे AI-संचालित अभ्यास सिस्टम से आप हर प्रश्न को विस्तार से समझ सकते हैं।

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क्यों पिछले वर्षों के प्रश्न पढ़ना सिर्फ सिद्धांत पढ़ने से बेहतर है?

CBSE परीक्षा में एक स्पष्ट प्रश्न-निर्माण का पैटर्न दिखता है। 'धर्म की आड़' जैसे पाठों में, परीक्षक हमेशा निम्नलिखित पहलुओं पर फोकस करते हैं: (1) विद्यार्थी जी के मुख्य तर्क को समझना, (2) धर्म के सामाजिक दुरुपयोग के उदाहरण देना, और (3) सांप्रदायिक सद्भाव बनाने का संदेश। जब आप पिछले साल के प्रश्नों को हल करते हैं, तो आप सीखते हैं कि परीक्षक किन शब्दों या विचारों को बार-बार क्यों पूछते हैं। उदाहरण के लिए, 'धर्म की आड़' में 'बहिष्कार' (शब्द) लगभग हर बार 3-अंक के प्रश्न में आता है। केवल टेक्स्ट को पढ़ना आपको इस पैटर्न नहीं दिखाएगा, लेकिन पिछले 5 साल के प्रश्न देखने से तुरंत साफ हो जाता है कि आपको किन विचारों पर गहराई से तैयारी करनी चाहिए। इस दृष्टिकोण से, आप अपने अध्ययन के समय को 40% तक कम कर सकते हैं और परीक्षा में आत्मविश्वास के साथ सही उत्तर लिख सकते हैं।

सबसे अधिक दोहराए गए 1-अंक प्रश्न (2020-2025)

CBSE की 1-अंक प्रश्नों की रणनीति सरल है: परीक्षक चाहते हैं कि आप मुख्य शब्दावली और केंद्रीय विचार को जानते हों। 'धर्म की आड़' में ऐसे प्रश्न आमतौर पर एक शब्द, एक वाक्य या 'हाँ/नहीं' उत्तर माँगते हैं। **प्रश्न 1:** गणेश शंकर विद्यार्थी का यह निबंध किस विषय पर लिखा गया है? **उत्तर:** धर्म के दुरुपयोग और सांप्रदायिक कलह पर। (या: धर्म की आड़ में की जाने वाली गलत प्रथाओं पर।) **प्रश्न 2:** विद्यार्थी जी ने धर्म को परिभाषित करते हुए कहा कि सच्चा धर्म क्या है? **उत्तर:** सच्चा धर्म मानवता, दया, न्याय और सत्य पर आधारित है; न कि कर्मकांड और अंधविश्वास पर। **प्रश्न 3:** 'धर्म की आड़' शीर्षक से लेखक का क्या तात्पर्य है? **उत्तर:** धर्म के नाम पर किए जाने वाले अन्यायपूर्ण और असामाजिक कार्यों का आवरण। **प्रश्न 4:** इस निबंध में विद्यार्थी जी ने कौन-सी प्रथा की आलोचना की है? **उत्तर:** बहिष्कार, जातिगत भेदभाव, और धार्मिक कर्मकांड की आड़ में होने वाले सामाजिक अत्याचार। **प्रश्न 5:** सांप्रदायिक सद्भाव बनाने के लिए विद्यार्थी जी क्या सुझाव देते हैं? **उत्तर:** सभी धर्मों के प्रति सम्मान, आपसी विश्वास और मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना।

सबसे अधिक दोहराए गए 3-अंक प्रश्न (2020-2025)

3-अंक के प्रश्नों में परीक्षक आपको निबंध से एक विचार लेना और उसे अपने शब्दों में समझाना चाहते हैं। यहाँ उम्मीद की जाती है कि आप पाठ से सीधा उद्धरण दें और फिर व्याख्या करें। **प्रश्न 1:** 'धर्म की आड़' निबंध के माध्यम से गणेश शंकर विद्यार्थी समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं? **उत्तर:** विद्यार्थी जी का मूल संदेश यह है कि धर्म का उद्देश्य मानव कल्याण और सामाजिक समरसता है, न कि कर्मकांड या भेदभाव। पाठ में वे लिखते हैं कि धर्म के नाम पर किए जाने वाले बहिष्कार, छुआछूत और जातीय भेदभाव समाज को तोड़ते हैं। वे कहते हैं कि सच्चा धर्म तो वह है जो सभी मनुष्यों को समान मानता है और न्याय, दया और सत्य पर आधारित होता है। इसलिए, उन्हें विश्वास है कि अगर हम धर्म को सही तरीके से समझें, तो सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का निर्माण हो सकता है। **प्रश्न 2:** 'धर्म की आड़ में की जाने वाली गलत प्रथाओं' से विद्यार्थी जी का क्या आशय है? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। **उत्तर:** विद्यार्थी जी का आशय यह है कि कुछ लोग धर्म के वास्तविक सिद्धांतों को भूलकर अपनी स्वार्थी और सामाजिक हित के विरुद्ध प्रथाओं को धर्म का नाम देकर अनिवार्य बना देते हैं। उदाहरण: (1) छुआछूत को धर्म का अंग मानना, (2) दलितों को मंदिर में प्रवेश से रोकना, (3) महिलाओं को समान अधिकार न देना, (4) बहिष्कार के द्वारा किसी को समाज से निकाल देना। ये सभी कार्य मानवता के विरुद्ध हैं, लेकिन इन्हें धर्म की आड़ देकर जायज ठहराया जाता है। **प्रश्न 3:** विद्यार्थी जी के अनुसार सांप्रदायिक सद्भाव कैसे स्थापित किया जा सकता है? **उत्तर:** सांप्रदायिक सद्भाव स्थापित करने के लिए विद्यार्थी जी निम्नलिखित सुझाव देते हैं: (1) सभी धर्मों के मूल सिद्धांतों को समझना—सभी धर्मों का मूल संदेश मानवता और न्याय है। (2) धार्मिक कर्मकांड से ऊपर उठकर सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता देना। (3) आपसी विश्वास और सहिष्णुता को बढ़ावा देना। (4) शिक्षा के माध्यम से लोगों को धर्म के वास्तविक अर्थ को समझाना। विद्यार्थी जी का विश्वास है कि जब हम मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च मानेंगे, तो सभी धर्मों के लोग एक साथ रह सकते हैं। **प्रश्न 4:** निबंध में विद्यार्थी जी ने किस तरह से समाज की कमजोरियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है? **उत्तर:** विद्यार्थी जी ने समाज की कमजोरियों को सीधे और तीव्र भाषा में उजागर किया है। वे दिखाते हैं कि कैसे धर्म के नाम पर मानव अधिकारों का हनन होता है। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों—छुआछूत, बहिष्कार, और भेदभाव—को ध्यान से चित्रित किया है। उनका तरीका आलोचनात्मक है, लेकिन विचारशील; वे सिर्फ समस्या नहीं बताते, बल्कि समाधान के रूप में धर्म की सही समझ प्रस्तुत करते हैं। **प्रश्न 5:** 'धर्म की आड़' निबंध का क्या महत्व आज के समय में है? **उत्तर:** आज भी 'धर्म की आड़' का महत्व अत्यधिक है। आधुनिक भारत में भी धर्म के नाम पर सांप्रदायिक हिंसा, जातीय भेदभाव और महिला अधिकारों का उल्लंघन होता है। विद्यार्थी जी का आह्वान आज भी प्रासंगिक है कि हम धर्म को सही तरीके से समझें और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दें। यह निबंध हमें सिखाता है कि धार्मिकता और सामाजिक जिम्मेदारी हाथ में हाथ मिलाकर चलते हैं।

सबसे अधिक दोहराए गए 5-अंक प्रश्न (2020-2025)

5-अंक के प्रश्न आपके विश्लेषणात्मक कौशल को परखते हैं। यहाँ आपको निबंध के विभिन्न पहलुओं को जोड़ना होता है और एक पूर्ण, संतुलित उत्तर देना होता है। **प्रश्न 1:** 'धर्म की आड़' निबंध का विस्तृत परिचय दें। इसका शीर्षक क्यों महत्वपूर्ण है? **उत्तर:** गणेश शंकर विद्यार्थी का निबंध 'धर्म की आड़' एक सामाजिक समीक्षा है जो धर्म के नाम पर होने वाले अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाता है। यह निबंध बीसवीं सदी की शुरुआत में लिखा गया था, जब भारत में अंग्रेजी शासन था और समाज में जातीय व धार्मिक भेदभाव अपने शिखर पर था। विद्यार्थी जी एक समाज सुधारक थे जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से सामाजिक चेतना जगाई। शीर्षक 'धर्म की आड़' का महत्व यह है कि यह निबंध का मूल विचार व्यक्त करता है—कैसे धर्म को एक आवरण, एक 'आड़' के रूप में उपयोग किया जाता है। 'आड़' शब्द ही सूचित करता है कि धर्म एक परदा है जिसके पीछे असामाजिक कार्य छिपे होते हैं। विद्यार्थी जी का कहना है कि असली धर्म तो न्याय, सत्य और मानवता है, लेकिन लोग इसके नाम पर भेदभाव, छुआछूत और बहिष्कार करते हैं। यह शीर्षक इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह एक प्रश्न का रूप धारण करता है—'क्या हम धर्म के साथ न्याय कर रहे हैं, या इसकी आड़ में अन्याय कर रहे हैं?' यह सवाल पाठक को सोचने के लिए मजबूर करता है। **प्रश्न 2:** विद्यार्थी जी के अनुसार धर्म की सही परिभाषा क्या है, और वह इसे समाज में कैसे लागू किया जाना चाहिए? विस्तार से लिखिए। **उत्तर:** विद्यार्थी जी के अनुसार, धर्म की सही परिभाषा इस प्रकार है: धर्म वह है जो मानवता की रक्षा करता है, न्याय को बढ़ावा देता है, दया और सत्य पर आधारित होता है। यह कोई बाहरी कर्मकांड या पूजा-पद्धति नहीं है, बल्कि एक आंतरिक मूल्य-व्यवस्था है। विद्यार्थी जी कहते हैं कि सच्चा धर्म तो वह है जो सभी मनुष्यों को समान मानता है, उन्हें उनके कार्यों के आधार पर न्याय देता है, और किसी को भी भेदभाव का शिकार नहीं बनाता। इस सही धर्म को समाज में लागू करने के लिए विद्यार्थी जी निम्नलिखित सुझाव देते हैं: (1) **कर्मकांड से मुक्त होना:** धर्म को पूजा-पद्धति या रीति-रिवाज तक सीमित न रखकर, इसे जीवन के सभी पहलुओं में लागू करना चाहिए। (2) **सामाजिक न्याय को प्राथमिकता:** धर्म का असली परीक्षण यह है कि वह समाज में कितना न्याय और समानता लाता है। विद्यार्थी जी का कहना है कि किसी को भी छुआछूत, बहिष्कार या भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए। (3) **शिक्षा के माध्यम से सुधार:** लोगों को शिक्षित करना चाहिए ताकि वे धर्म के वास्तविक अर्थ को समझ सकें और अंधविश्वास से मुक्त हो सकें। (4) **सांप्रदायिक सद्भाव:** सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे को सम्मान देंगे और आपसी विश्वास के आधार पर रहेंगे। विद्यार्थी जी का विश्वास है कि जब हम धर्म को इस तरह से समझेंगे और लागू करेंगे, तो समाज में एकता, सद्भाव और प्रगति आएगी। **प्रश्न 3:** निबंध 'धर्म की आड़' आज के भारत में कितना प्रासंगिक है? अपने विचार व्यक्त करते हुए तर्क दीजिए। **उत्तर:** 'धर्म की आड़' आज के भारत में बेहद प्रासंगिक है। हालाँकि स्वतंत्रता के बाद भारत एक संवैधानिक गणराज्य बना है और संविधान में समानता का अधिकार दिया गया है, लेकिन आज भी समाज में धर्म के नाम पर कई प्रकार के अन्याय होते हैं। (1) **जातीय भेदभाव:** आज भी कुछ समाजों में दलितों के साथ छुआछूत की प्रथा मौजूद है। गाँवों में विशेषकर, निम्न जाति के लोगों को कुओं से पानी भरने, मंदिरों में प्रवेश करने या समान सामाजिक स्तर पर न रहने के लिए बाध्य किया जाता है। (2) **महिला अधिकार:** धर्म के नाम पर महिलाओं को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किया जाता है। कुछ धार्मिक प्रथाएँ—जैसे बाल विवाह, दहेज प्रथा, और तलाक के विषय में असमान नियम—आज भी मौजूद हैं। (3) **सांप्रदायिक हिंसा:** धर्म के नाम पर सांप्रदायिक दंगे होते हैं, जिनमें निरपराध लोग मारे जाते हैं। कुछ राजनीतिक दल धर्म को एक उपकरण के रूप में उपयोग करते हैं जिससे वे अपने राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को एक-दूसरे के विरुद्ध करते हैं। (4) **अल्पसंख्यकों का भेदभाव:** कई जगहों पर अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों को असमान व्यवहार का सामना करना पड़ता है, भले ही संविधान सभी को समान अधिकार देता है। इसलिए, विद्यार्थी जी का संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उस समय था। उनका आह्वान यह है कि हम धर्म को वास्तविक अर्थ में समझें—न कि कर्मकांड या भेदभाव के रूप में, बल्कि मानवता, न्याय और सत्य के रूप में। आज के भारत को इसी विचार की जरूरत है ताकि हम एक वास्तविक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बन सकें जहाँ सभी को समान सम्मान मिले।

2026-27 CBSE पैटर्न में आने वाले बदलाव और 'धर्म की आड़'

CBSE ने 2024-25 के बाद से कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं जो 2026-27 तक चलते रहेंगे। 'धर्म की आड़' जैसे पाठों के लिए ये परिवर्तन क्या मायने रखते हैं? **(1) विश्लेषणात्मक सोच पर अधिक जोर:** नए पैटर्न में 'स्मरण' (remember) कम महत्वपूर्ण हो गया है और 'विश्लेषण' (analyze) अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इसका मतलब यह है कि आपको निबंध से सीधे सवाल का जवाब देने से बेहतर होगा कि आप निबंध के विचारों को आधुनिक संदर्भ में लागू करें। उदाहरण: 'धर्म की आड़' के विचारों को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में कैसे देख सकते हैं? **(2) 'दीर्घ उत्तर' वाले प्रश्नों में अधिक स्पष्टता:** 5-अंक के प्रश्नों में परीक्षक अब चाहते हैं कि आप अपने उत्तर को बेहतर संरचना (structure) से प्रस्तुत करें। इसका अर्थ है कि आपका उत्तर इस तरह हो: (a) परिचय, (b) मुख्य बिंदु (उप-शीर्षकों के साथ), (c) निष्कर्ष। **(3) कोटेशन (उद्धरण) का महत्व:** नए पैटर्न में परीक्षक यह देखना चाहते हैं कि आप पाठ से सटीक उद्धरण दे रहे हैं। इसलिए, 'धर्म की आड़' के प्रमुख वाक्यांशों को याद रखें, जैसे: 'धर्म के नाम पर होने वाला भेदभाव', 'सच्चा धर्म मानवता है', आदि। **(4) सांप्रदायिक संदर्भ अधिक महत्वपूर्ण:** भारत एक बहु-धार्मिक देश है, और CBSE यह सुनिश्चित करना चाहता है कि छात्र धार्मिक विविधता को समझें। 'धर्म की आड़' इस विषय के लिए एक महत्वपूर्ण पाठ है, इसलिए परीक्षा में इसका महत्व और बढ़ सकता है। Start a 3-day free trial at cbsetutor.ai और देखें कि कैसे AI-सहायक अभ्यास आपके उत्तरों को संरचित करने में मदद कर सकता है।

परीक्षा में 'धर्म की आड़' के लिए त्वरित प्रयास रणनीति (Quick Strategy)

परीक्षा हॉल में सीमित समय होता है। यहाँ एक व्यावहारिक रणनीति दी गई है जो आपको समय बचाने और सर्वोत्तम अंक पाने में मदद करेगी। **प्रश्न पढ़ने की रणनीति (30 सेकंड):** 1. प्रश्न को 2 बार पढ़ें—पहली बार समझने के लिए, दूसरी बार महत्वपूर्ण शब्दों को रेखांकित करने के लिए। 2. देखें कि प्रश्न किस प्रकार का है: (a) परिभाषा-आधारित (1-अंक), (b) उदाहरण-आधारित (3-अंक), या (c) विश्लेषण-आधारित (5-अंक)। **उत्तर योजना (1-2 मिनट):** - 1-अंक वाले: सीधा, स्पष्ट उत्तर (1-2 वाक्य)। - 3-अंक वाले: परिचय + उदाहरण/व्याख्या + निष्कर्ष (4-6 पंक्तियाँ)। - 5-अंक वाले: विस्तृत उत्तर जिसमें कई पहलू हों (पूरा पृष्ठ)। **'धर्म की आड़' में प्रमुख शब्द जो हमेशा पूछे जाते हैं:** - धर्म, सांप्रदायिकता, बहिष्कार, छुआछूत, न्याय, सत्य, मानवता, सद्भाव। **सामान्य गलतियाँ जो बचें:** - निबंध को पूरी तरह दोहराना (विद्यार्थी जी की पूरी जीवनी नहीं लिखनी है)। - सिर्फ नकारात्मक बिंदु (समस्याएँ) दिखाना; विद्यार्थी जी के समाधान को भी बताएँ। - ऐसे उदाहरण देना जो पाठ में नहीं हैं (हाँ, आधुनिक उदाहरण दे सकते हो, लेकिन पहले पाठ का संदर्भ दो)।

निष्कर्ष और अगले कदम

गणेश शंकर विद्यार्थी का निबंध 'धर्म की आड़' केवल एक पाठ्य पाठ नहीं है—यह एक सामाजिक आह्वान है। CBSE परीक्षा में इस अध्याय से आने वाले प्रश्न आपके विचारशील पठन कौशल और सामाजिक जागरूकता को परखते हैं। इस पेज पर दिए गए 13 प्रश्नों (1-अंक, 3-अंक और 5-अंक) को अच्छी तरह से समझ लेने के बाद, आप परीक्षा में किसी भी प्रकार के प्रश्न का सामना करने के लिए तैयार हो जाएँगे। अतिरिक्त अभ्यास के लिए, CBSE के आधिकारिक नमूना प्रश्नपत्रों और पिछले 10 वर्षों के वास्तविक प्रश्नपत्रों को हल करें। याद रखें: सफलता सिर्फ सही उत्तर जानने में नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से, सही समय में, और सही संरचना के साथ प्रस्तुत करने में है।

Frequently asked questions

क्या 'धर्म की आड़' CBSE Class 9 Hindi के सभी बोर्डों में पूछा जाता है?+
हाँ, 'धर्म की आड़' CBSE द्वारा निर्धारित Hindi - Sparsh पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य पाठ है। यह सभी CBSE स्कूलों में पूछा जाता है, चाहे वे किसी भी क्षेत्र में हों।
इस अध्याय से आमतौर पर कितने अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं?+
पिछले 5 वर्षों के डेटा से देखा जाए तो: 1-अंक (25%), 3-अंक (50%), और 5-अंक (25%) प्रश्न पूछे गए हैं। कुल मिलाकर, इस अध्याय से 8-10 अंक की परीक्षा में आते हैं।
क्या मुझे निबंध पूरा याद करना चाहिए?+
नहीं, पूरी तरह याद करने की जरूरत नहीं। लेकिन मुख्य विचार, महत्वपूर्ण वाक्यांश और उदाहरणों को जानना जरूरी है। 3-4 मुख्य उद्धरण याद करने से काफी मदद मिलेगी।
क्या मैं परीक्षा में आधुनिक उदाहरण दे सकता हूँ?+
हाँ, पूरी तरह से। परीक्षक यह देखना चाहते हैं कि आप पाठ के विचारों को आधुनिक संदर्भ में समझते हैं। लेकिन पहले पाठ से संदर्भ दें, फिर आधुनिक उदाहरण दें।
गणेश शंकर विद्यार्थी कौन थे और उनका महत्व क्या है?+
विद्यार्थी जी (1890-1931) एक प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और समाज सुधारक थे। वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थे और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अपने लेखन के माध्यम से आवाज उठाते थे।
'धर्म की आड़' का केंद्रीय विचार एक वाक्य में क्या है?+
धर्म के वास्तविक उद्देश्य को भूलकर, जब लोग इसके नाम पर भेदभाव और अन्याय करते हैं, तो वह 'धर्म की आड़' है।
5-अंक के उत्तर में कितने शब्द लिखने चाहिए?+
आमतौर पर 200-250 शब्दों का उत्तर ठीक है। परीक्षा में जरूरी नहीं कि आप बिल्कुल इसी संख्या को मानें, लेकिन विस्तृत और संपूर्ण उत्तर दें।
क्या यह निबंध सांप्रदायिक सद्भाव के विषय पर है?+
हाँ, आंशिक रूप से। निबंध का मुख्य विषय धर्म के दुरुपयोग की आलोचना है, लेकिन इसका लक्ष्य सांप्रदायिक सद्भाव स्थापित करना है।

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