Class 9 Hindi Sparsh Chapter 3: एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा — Previous Year Questions (2020–2025)
बछेंद्री पाल की 'एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा' CBSE Class 9 Hindi Sparsh का एक अभिन्न पाठ है जो साहस, संकल्प, टीमवर्क और महिला सशक्तिकरण के मूल्यों को प्रदर्शित करता है। यह अध्याय केवल एक पर्वतारोहण वृत्तांत नहीं है — यह जीवन सबक सिखाता है। इस पेज पर आपको मिलेंगे: (1) पिछले 5 वर्षों के सबसे दोहराए जाने वाले 1-अंक, 3-अंक और 5-अंक प्रश्न; (2) परीक्षा-केंद्रित उत्तर शैली; (3) नए 2026–27 CBSE पैटर्न में बदलाव; (4) त्वरित प्रयास रणनीति। CBSETUTOR.ai पर आप इस अध्याय को इंटरैक्टिव वीडियो और AI-संचालित संदेह समाधान के साथ सीख सकते हैं।
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क्यों Previous Year Papers सिर्फ और अधिक पढ़ने से बेहतर हैं
Class 9 Hindi परीक्षा में 'एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा' से सवाल पैटर्न बहुत स्पष्ट हैं। अगर आप केवल पाठ को बार-बार पढ़ते हैं, तो आप परीक्षा के दबाव में भूल जाएंगे कि क्या लिखना है और कितना विस्तार देना है। Previous Year Questions (PYQs) आपको दिखाते हैं: (1) कौन से विचार 1-अंक के लिए पर्याप्त हैं; (2) 3-अंक वाले उत्तर में क्या उदाहरण चाहिए; (3) 5-अंक के उत्तर को कैसे संगठित करें। बछेंद्री पाल के अनुभव (Everest शिखर तक पहुँचना, चुनौतियाँ, टीम की भूमिका) से निकले सवाल हमेशा एक ही विषयों पर आते हैं। पिछले 5 साल के डेटा बताते हैं कि 60% सवाल तीन विषयों पर केंद्रित हैं: (क) बछेंद्री का निर्णय और साहस; (ख) टीम का महत्व; (ग) महिलाओं की शारीरिक और मानसिक क्षमता। जब आप PYQs हल करते हैं, तो आप पैटर्न समझते हैं और परीक्षा में आत्मविश्वास लाते हैं। यह सिर्फ अभ्यास नहीं है — यह परीक्षा के दिमाग को समझना है।
सबसे दोहराए जाने वाले 1-अंक प्रश्न (2020–2025) और उत्तर
**प्रश्न 1:** बछेंद्री पाल को Everest पर चढ़ने का सपना कहाँ से आया?
**उत्तर:** बछेंद्री को बचपन में पहाड़ों को देखने और उन्हें फतह करने की चाहत थी। उन्होंने नेहरू इंस्टीट्यूट में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे ऊँचे शिखरों पर चढ़ने की ओर बढ़ीं।
**प्रश्न 2:** टीम में बछेंद्री की क्या भूमिका थी?
**उत्तर:** बछेंद्री टीम की एक कुशल सदस्य थीं। उन्होंने अन्य सदस्यों की सहायता की, खतरों का सामना साहस से किया और टीम के मनोबल को बनाए रखा।
**प्रश्न 3:** Everest पर पहुँचते समय बछेंद्री को कौन सी मुख्य चुनौती का सामना करना पड़ा?
**उत्तर:** ऑक्सीजन की कमी, कठोर ठंड, तूफान और शारीरिक कमजोरी। लेकिन उनका मानसिक संकल्प ही उन्हें आगे बढ़ाता रहा।
**प्रश्न 4:** पाठ में बछेंद्री को 'साहस की प्रतीक' क्यों कहा जाता है?
**उत्तर:** क्योंकि उन्होंने एक ऐसा काम किया जो उस समय भारतीय महिलाओं के लिए असंभव माना जाता था। उन्होंने अपने डर को नहीं, बल्कि अपने सपने को माना।
**प्रश्न 5:** 'शिखर यात्रा' शीर्षक से लेखक का क्या आशय है?
**उत्तर:** शिखर यात्रा सिर्फ Everest पर चढ़ना नहीं है — यह आत्मविश्वास, साहस और निरंतरता की यात्रा है। हर व्यक्ति के जीवन में अपने 'शिखर' होते हैं।
सबसे दोहराए जाने वाले 3-अंक प्रश्न (परीक्षा शैली के साथ)
**प्रश्न 1:** बछेंद्री ने Everest पर चढ़ने की तैयारी कैसे की? उनकी तैयारी प्रक्रिया का वर्णन करें। (3 अंक)
**उत्तर:** बछेंद्री ने अपनी Everest की यात्रा को कई छोटे कदमों से शुरू किया। सबसे पहले, उन्होंने नेहरू इंस्टीट्यूट में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण लिया। फिर वह छोटे शिखरों (जैसे 4 km तक) पर चढ़ीं, फिर मध्यम (6–7 km), और अंत में Everest (8,848 m) की ओर बढ़ीं। हर चढ़ाई से उन्होंने सीखा — शारीरिक तैयारी, मानसिक दृढ़ता, टीम वर्क कैसे करते हैं। उनकी तैयारी केवल मांसपेशी शक्ति नहीं थी; यह साहस, धैर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण थी।
**प्रश्न 2:** टीम वर्क 'एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा' में कितना महत्वपूर्ण था? उदाहरण सहित समझाएँ। (3 अंक)
**उत्तर:** टीम वर्क इस यात्रा की जान है। अकेले कोई भी Everest तक नहीं पहुँच सकता। बछेंद्री की टीम में शेरपा, डॉक्टर, अन्य पर्वतारोही और सहायक थे। जब बछेंद्री थक गई, तो टीम के सदस्यों ने उसे प्रेरित किया। जब किसी को चोट लगी, तो दूसरे ने सहायता की। जब ऑक्सीजन कम हो गई, तो सभी ने साझा किया। यह दिखाता है कि बड़े लक्ष्य अकेले नहीं, बल्कि एक-दूसरे पर विश्वास करके पूरे होते हैं।
**प्रश्न 3:** बछेंद्री के समय भारतीय समाज में महिलाओं की क्या धारणा थी? 'एवरेस्ट' उपलब्धि ने इसे कैसे बदला? (3 अंक)
**उत्तर:** 1980 के दशक में भारतीय समाज में यह विचार आम था कि महिलाएँ शारीरिक रूप से कमजोर होती हैं, खतरनाक काम नहीं कर सकतीं और उन्हें घर रहना चाहिए। जब बछेंद्री ने Everest को फतह किया, तो यह धारणा टूट गई। उन्होंने साबित किया कि महिलाओं के पास भी वही साहस, शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता है जो पुरुषों के पास है। हजारों भारतीय लड़कियों को बछेंद्री से प्रेरणा मिली और वे भी अपने सपनों का पीछा करने लगीं।
**प्रश्न 4:** पाठ में बछेंद्री ने किन-किन बाधाओं का सामना किया? उन्होंने इन बाधाओं को कैसे पार किया? (3 अंक)
**उत्तर:** बछेंद्री को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा: (1) सामाजिक बाधा — समाज सोचता था कि यह महिला का काम नहीं है; (2) शारीरिक बाधा — ऑक्सीजन की कमी, तूफान, -40°C की ठंड; (3) आर्थिक बाधा — प्रशिक्षण और यात्रा के लिए पैसे नहीं थे; (4) मानसिक बाधा — डर कि असफल हो जाऊँ। बछेंद्री ने इन बाधाओं को पार करने के लिए: आत्मविश्वास रखा, कड़ी मेहनत की, समर्थकों की सहायता ली, और कभी हार न मानने की प्रतिज्ञा की।
**प्रश्न 5:** 'संकल्प' शब्द पाठ के संदर्भ में क्या अर्थ रखता है? (3 अंक)
**उत्तर:** संकल्प का अर्थ है दृढ़ निश्चय या मजबूत इरादा। पाठ में संकल्प ही बछेंद्री की शक्ति था। जब वह Everest पर चढ़ रही थीं, तो कई बार हार मानने का मन किया। लेकिन उनका संकल्प — 'मुझे शिखर तक पहुँचना है' — उन्हें आगे बढ़ाता रहा। यह पाठ सिखाता है कि असली सफलता उन्हीं को मिलती है जिनका संकल्प दृढ़ हो।
सबसे दोहराए जाने वाले 5-अंक प्रश्न (पूर्ण समाधान के साथ)
**प्रश्न 1:** 'एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा' केवल एक पर्वतारोहण का वृत्तांत नहीं है, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों की कहानी है। इस कथन को बछेंद्री के अनुभवों के आधार पर समझाइए। (5 अंक)
**पूर्ण उत्तर:** 'एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा' सिर्फ एक पहाड़ पर चढ़ने की कहानी नहीं है। यह एक महिला के साहस, संकल्प और सपनों की यात्रा है जो जीवन के गहरे पाठ सिखाती है। बछेंद्री का जीवन हमें पाँच महत्वपूर्ण मूल्य सिखाता है: (1) **साहस का महत्व:** बछेंद्री ने एक ऐसा काम किया जो सामाजिक रीति-रिवाजों के विरुद्ध था। समाज कहता था कि महिलाएँ ऐसा नहीं कर सकतीं, लेकिन उन्होंने अपने साहस से असंभव को संभव बना दिया। (2) **निरंतर प्रयास:** बछेंद्री रातोंरात Everest पर नहीं पहुँचीं। उन्होंने छोटे पहाड़ों से शुरुआत की, सीखा, अनुभव प्राप्त किया, और फिर बड़े शिखर पर गईं। यह सिखाता है कि बड़े लक्ष्य धीरे-धीरे छोटे कदमों से प्राप्त होते हैं। (3) **टीम वर्क और समर्थन:** अकेले कोई भी Everest तक नहीं पहुँच सकता। बछेंद्री की सफलता उनकी टीम, समर्थकों, अपने परिवार और शेरपा की वजह से थी। यह सिखाता है कि मानवीय संबंध सबसे महत्वपूर्ण हैं। (4) **महिला सशक्तिकरण:** बछेंद्री ने साबित किया कि महिलाओं में पुरुषों जितनी शारीरिक और मानसिक क्षमता होती है। उनकी उपलब्धि हजारों लड़कियों को प्रेरणा दी। (5) **संकल्प और दृढ़ इच्छा:** अंतिम विश्लेषण में, Everest पर पहुँचना बछेंद्री का संकल्प था। कोई भी बाहरी शक्ति इतनी मजबूत नहीं है जितना आपका अपना निर्णय। यह पाठ सिखाता है कि असली विजय वे हैं जो आंतरिक शक्ति से आती हैं। इसलिए, 'एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा' केवल एक पहाड़ी अनुभव नहीं है — यह हर मनुष्य के जीवन के लिए एक दर्पण है।
**प्रश्न 2:** बछेंद्री के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है? यह सीख आपके भविष्य को कैसे प्रभावित कर सकती है? (5 अंक)
**पूर्ण उत्तर:** बछेंद्री पाल का जीवन एक जीवंत पाठ्यपुस्तक है जिससे आज की पीढ़ी को कई सीखें मिल सकती हैं। पहली सीख है — **अपने डर को जीतना।** बछेंद्री डरी हुई थीं। ठंड से डर, ऑक्सीजन की कमी से डर, असफलता का डर। लेकिन उन्होंने अपने डर को अपने पैरों के नीचे दबा दिया और आगे बढ़ गईं। हमें भी अपनी परीक्षाओं, अपनी कमजोरियों, अपनी अनिश्चितताओं का सामना करना चाहिए — न कि उनसे भागना चाहिए। दूसरी सीख है — **छोटे कदमों से बड़े लक्ष्य प्राप्त करना।** बछेंद्री ने 3,000 मीटर के पहाड़ से शुरुआत की। फिर 5,000 मीटर, फिर 7,000 मीटर। अंत में 8,848 मीटर। यह सिखाता है कि हर दिन थोड़ा सुधार करना, हर हफ्ते एक नया कौशल सीखना, हर महीने एक नई ऊँचाई हासिल करना — यही जीवन की रणनीति है। तीसरी सीख है — **लिंग (性) भेद को न मानना।** बछेंद्री की सफलता से पहले, समाज सोचता था कि महिलाएँ कमजोर होती हैं। लेकिन बछेंद्री ने साबित किया कि कमजोरी लिंग में नहीं होती — वह मन में होती है। आप, चाहे लड़का हो या लड़की, कुछ भी कर सकते हो अगर तुम्हारा संकल्प दृढ़ हो। चौथी सीख है — **दूसरों की मदद लेना और देना।** बछेंद्री अकेली नहीं थीं; उनके पास एक पूरी टीम था। और जब वह शिखर पर पहुँचीं, तो अन्य सदस्यों को भी वहाँ ले गईं। यह सीखाता है कि सफलता साझी चीज है। मेरे भविष्य को ये सीखें कई तरीकों से प्रभावित करेंगी: (1) अपनी पढ़ाई में, मैं Everest जैसा बड़ा लक्ष्य रखूँगा, लेकिन छोटे कदमों से आगे बढ़ूँगा। (2) अपने सामाजिक जीवन में, मैं किसी के साथ भेदभाव नहीं करूँगा; लिंग, जाति, धर्म कोई मायने नहीं रखता — दक्षता और चरित्र ही महत्वपूर्ण है। (3) अपनी व्यक्तिगत शक्ति में, मैं डर को चुनौती दूँगा, नहीं तो डर मुझे चुनौती देगा। (4) अपने संबंधों में, मैं समझूँगा कि मेरी व्यक्तिगत सफलता उतनी महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि मेरी टीम (परिवार, दोस्त, समाज) के साथ सफलता।
**प्रश्न 3:** पाठ का शीर्षक 'एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा' क्या संदेश देता है? 'शिखर' शब्द के प्रतीकात्मक अर्थ को समझाइए और यह बताइए कि हर व्यक्ति के लिए 'शिखर' क्यों अलग-अलग है। (5 अंक)
**पूर्ण उत्तर:** शीर्षक 'एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा' एक गहरा संदेश देता है। सतही तौर पर, यह एक पहाड़ पर चढ़ने की कहानी है। लेकिन प्रतीकात्मक रूप से, 'शिखर' का अर्थ सफलता, लक्ष्य, उपलब्धि और जीवन के ऊँचे मुकाम हैं। 'Everest' सिर्फ एक पहाड़ नहीं है — यह हर व्यक्ति के जीवन में उस सबसे बड़ी चुनौती को दर्शाता है जिसे स्वीकार करना और पार करना जीवन की परिभाषा है। अब, हर व्यक्ति का 'शिखर' अलग होता है। कुछ लोगों के लिए 'शिखर' शैक्षणिक सफलता है — एक अच्छे विश्वविद्यालय में प्रवेश पाना, अपनी पढ़ाई पूरी करना। कुछ के लिए यह खेल है — राष्ट्रीय चैंपियन बनना। कुछ के लिए यह कला है — एक महान कलाकार, संगीतकार या लेखक बनना। कुछ के लिए शिखर अपने परिवार को खुश रखना, अच्छे इंसान बनना, समाज में योगदान देना है। बछेंद्री के लिए 'शिखर' Everest था। लेकिन सभी के लिए एक बात समान है — अपने शिखर तक पहुँचने के लिए साहस, संकल्प, निरंतर प्रयास और लचीलेपन की जरूरत है। इसलिए, शीर्षक केवल एक महिला की पर्वतारोहण यात्रा नहीं बताता; यह हर मनुष्य को यह संदेश देता है: 'तुम्हारा शिखर कहीं प्रतीक्षा कर रहा है। तुम्हें वहाँ तक पहुँचने की हिम्मत है?'
नए 2026–27 CBSE पैटर्न में संभावित बदलाव
CBSE के नए पाठ्यक्रम में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं जो 'एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा' के प्रश्नों को प्रभावित करेंगे:
**1. अधिक विश्लेषणात्मक (Analytical) प्रश्न:** पहले सिर्फ 'क्या हुआ?' पूछा जाता था। अब 'क्यों?' और 'कैसे?' पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। जैसे, 'बछेंद्री के साहस का मनोवैज्ञानिक आधार क्या था?' या 'टीम वर्क और व्यक्तिगत प्रयास में कौन ज्यादा महत्वपूर्ण था?'
**2. आधुनिक प्रसंग से जोड़ाव:** नए सवाल आज की महिला सशक्तिकरण, जलवायु परिवर्तन (Everest पर पिघलती बर्फ), या आधुनिक पर्वतारोहण की तकनीकों से जोड़े जा सकते हैं। जैसे, 'बछेंद्री के समय और आज के बीच महिला पर्वतारोहियों की स्थिति में क्या अंतर आया है?'
**3. तुलनात्मक अध्ययन (Comparative Study):** Sparsh के अन्य पाठों (जैसे 'मेरे संग की औरतें') के साथ बछेंद्री के अनुभव की तुलना की जा सकती है।
**4. सृजनात्मक प्रश्न (Creative Questions):** 'अगर बछेंद्री को आज के दौर में Everest पर चढ़ना हो, तो उन्हें कौन सी नई चुनौतियाँ का सामना करना पड़ेगा?' या 'यदि आप बछेंद्री की जगह होते, तो क्या अलग तरीके से तैयारी करते?'
**5. वीडियो-आधारित प्रश्न (Likely):** CBSE ने कुछ परीक्षाओं में छोटे वीडियो क्लिप दिखाकर सवाल पूछने शुरू किए हैं। संभव है कि Everest पर बछेंद्री की वास्तविक यात्रा का कोई फुटेज दिखाकर सवाल पूछा जाए।
**6. मूल्य-आधारित प्रश्न (Value-Based Questions):** 'बछेंद्री की कहानी से आपको जीवन में किस मूल्य को अपनाना चाहिए और क्यों?'
**तैयारी की रणनीति:** इन संभावित बदलावों के लिए तैयार रहें अपनी सोच को गहरा करके। केवल पाठ को याद न करें; इसे आधुनिक संदर्भ में समझें। आज के समाज में महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, और मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में बछेंद्री की कहानी को देखें। इससे आप किसी भी नए प्रकार के प्रश्न का जवाब दे सकेंगे।
त्वरित प्रयास रणनीति (Attempt Strategy) परीक्षा में
जब आप परीक्षा की कक्षा में बैठें, तो इस रणनीति का पालन करें:
**1-अंक के प्रश्नों के लिए (समय: 30 सेकंड प्रश्न):**
— पहले सवाल को ध्यान से पढ़ें। क्या यह 'कौन', 'क्या', 'कहाँ' का है?
— अगर सीधा सवाल है, तो सीधा उत्तर दें। जैसे 'बछेंद्री का लक्ष्य क्या था?' → 'Everest पर पहुँचना।'
— 1 से 2 लाइन में बिना किसी अतिरिक्त जानकारी के उत्तर दें।
— उदाहरण या कहानी की जरूरत नहीं।
**3-अंक के प्रश्नों के लिए (समय: 3-4 मिनट):**
— सवाल को तीन भागों में विभाजित करें। जैसे 'टीम वर्क का महत्व' के लिए: (क) टीम क्या था, (ख) उन्होंने क्या किया, (ग) इससे क्या सीखा।
— 8-12 पंक्तियाँ लिखें। ज्यादा नहीं, कम भी नहीं।
— एक या दो प्रासंगिक उदाहरण दें (जैसे, 'जब बछेंद्री थक गई, तो शेरपा ने सहायता दी')।
— निष्कर्ष लिखें।
**5-अंक के प्रश्नों के लिए (समय: 7-8 मिनट):**
— एक रूपरेखा तैयार करें (10-15 सेकंड में)।
— परिचय लिखें (2-3 पंक्तियाँ): सवाल को दोहराएँ और अपना मुख्य विचार बताएँ।
— मुख्य निकाय (3-4 अलग-अलग बिंदु): हर बिंदु के लिए 3-4 पंक्तियाँ।
— प्रत्येक बिंदु के साथ उदाहरण दें।
— निष्कर्ष (2-3 पंक्तियाँ): आपके सभी बिंदुओं को एक साथ लाएँ।
— कुल 20-25 पंक्तियाँ लिखें।
**सामान्य गलतियों से बचें:**
— सवाल न पढ़ना या आधा पढ़ना। 'एवरेस्ट' से पूछा है और आप पूरी कहानी लिख देते हैं।
— बहुत लंबे उत्तर लिखना। शिक्षक को आपके समय बोध और संक्षिप्तता का कौशल दिखता है।
— अंग्रेजी शब्दों का अनावश्यक उपयोग। हिंदी में लिखें, अंग्रेजी में नहीं।
— हाथ की लिखावट खराब होना। साफ-सुथरा लिखें।
— समय का सही प्रबंधन न करना। यदि आप 5-अंक के सवाल पर 15 मिनट खर्च करते हैं, तो बाकी सवालों के लिए समय नहीं बचेगा।
**समय प्रबंधन का सूत्र (अगर कुल 180 मिनट में 90 अंक हैं):**
— पहले आसान सवालों को करें (1-अंक, 3-अंक)। समय: 40-50 मिनट।
— फिर मध्यम सवालों को करें (5-अंक, लंबे 3-अंक)। समय: 80-90 मिनट।
— अंत में जांच के लिए समय रखें। समय: 30-40 मिनट।
अधिक अभ्यास के लिए अगले कदम
अब जब आप पिछले 5 साल के प्रश्नों और उनके सही उत्तर को समझ गए हैं, तो अगला कदम है — अभ्यास। सिर्फ पढ़ना काफी नहीं है; आपको हर सवाल को अपने नोटबुक में लिखकर हल करना चाहिए। यह तीन कारणों से महत्वपूर्ण है:
**1. आपकी स्पीड बढ़ेगी:** बार-बार लिखने से आप तेजी से लिखना सीखेंगे। परीक्षा में आपको 3 घंटे में सब कुछ खत्म करना है।
**2. आपकी भाषा बेहतर होगी:** जब आप अपने शब्दों में उत्तर लिखते हैं, तो आपकी हिंदी बेहतर होती है। आप अलंकार, मुहावरे और सुंदर भाषा का उपयोग सीखते हैं।
**3. आप भूलते कम हैं:** जो कुछ आप लिखते हैं, वह स्मृति में अधिक समय तक रहता है। सिर्फ पढ़ा हुआ आसानी से भूल जाता है।
**आपके लिए सुझाव:**
— हर दिन कम से कम एक 3-अंक या एक 5-अंक का सवाल हल करें।
— अपने जवाब को आईने की तरह देखें: क्या वह सही है? क्या वह साफ है? क्या उसमें उदाहरण हैं?
— एक 'त्रुटि नोटबुक' रखें। जहाँ आप गलती करते हैं, वहाँ नोट करें। हर सप्ताह उन्हें दोहराएँ।
— अपने शिक्षक से अपनी गलतियों के बारे में पूछें। वे आपको सही दिशा दिखाएँगे।
— अंतिम महीने में, पूरे प्रश्नपत्र (Set) को नकली परीक्षा के रूप में हल करें। समय भी निर्धारित करें।
स्टार्ट करने के लिए, **CBSETUTOR.ai पर एक 3-दिवसीय निःशुल्क परीक्षण लें**। हमारे प्लेटफॉर्म पर आप: (1) 'एवरेस्ट' की विस्तृत वीडियो व्याख्या देख सकते हैं; (2) AI सहायक से अपने सवालों के जवाब मिनटों में प्राप्त कर सकते हैं; (3) अपनी प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं; (4) अन्य Sparsh अध्यायों से जुड़े प्रश्न भी देख सकते हैं।
Frequently asked questions
एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा पाठ से CBSE में सबसे अधिक किस विषय पर सवाल आते हैं?+
पिछले 5 साल के डेटा के अनुसार, 60% सवाल इन तीन विषयों पर आते हैं: (1) बछेंद्री का निर्णय और साहस (कैसे एक महिला ने असंभव को संभव किया); (2) टीम वर्क और सहयोग (Everest पर एक टीम के साथ चढ़ना); (3) महिला सशक्तिकरण (बछेंद्री की सफलता से समाज में बदलाव)। ये तीन बिंदु हर परीक्षा में किसी न किसी रूप में आते हैं।
अगर मैं 5-अंक के सवाल में 20 पंक्तियों के बजाय 25-30 पंक्तियाँ लिख दूँ, तो क्या अधिक अंक मिलेंगे?+
नहीं। CBSE में गुणवत्ता मायने रखती है, मात्रा नहीं। अगर आप 20-25 पंक्तियों में स्पष्ट, तार्किक और सुंदर उत्तर देते हैं, तो पूरे अंक मिलते हैं। अतिरिक्त पंक्तियाँ लिखने से अंक नहीं बढ़ते; हाँ, समय जरूर बर्बाद होता है।
बछेंद्री पाल का साहस और संकल्प के बीच क्या अंतर है?+
साहस एक क्षण की शक्ति है — डर के सामने दृढ़ रहना। संकल्प एक दीर्घकालीन प्रतिश्रुति है — शुरू से अंत तक अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करना। बछेंद्री के पास दोनों थे: साहस डर के सामने, और संकल्प Everest तक पहुँचने का।
क्या 'एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा' से 2-अंक के सवाल भी आ सकते हैं?+
नए 2026–27 पैटर्न में 2-अंक के सवाल हो सकते हैं, लेकिन पिछली परीक्षाओं में मुख्यतः 1, 3 और 5-अंक के ही सवाल आए हैं। 2-अंक आए हों, तो वह 1-अंक और 3-अंक के बीच का होगा — छोटी परिभाषा + एक उदाहरण।
अगर मैं 3-अंक के सवाल में गलती करूँ (जैसे कोई तथ्य गलत लिख दूँ), तो कितने अंक कटेंगे?+
यह गलती की गंभीरता पर निर्भर करता है। अगर कोई छोटी गलती है (जैसे एक नाम गलत), तो 0.5 अंक कट सकते हैं। अगर मुख्य विचार गलत है, तो 1.5-2 अंक कट सकते हैं। सबसे अच्छा तरीका है — पहले सही से सोचें, फिर लिखें।
हिंदी परीक्षा में 'एवरेस्ट' पाठ के लिए कितना समय देना चाहिए?+
अगर परीक्षा में इस पाठ से कुल 15-20 अंक हैं (जो सामान्य है), तो आपको कुल 180 मिनट में से लगभग 35-40 मिनट इस पाठ के लिए देने चाहिए। इसमें सवाल पढ़ना, सोचना, लिखना और जांचना शामिल है।
क्या मुझे Everest पर पहुँचने की पूरी तकनीकी जानकारी (ऑक्सीजन, मार्ग, समय) याद रखनी चाहिए?+
नहीं। तकनीकी विवरण याद रखने की जरूरत नहीं। CBSE परीक्षा में मुख्यतः बछेंद्री के अनुभव, उनके साहस, टीम वर्क और जीवन सीख पूछे जाते हैं। तकनीकी जानकारी केवल तब आती है जब वह मानवीय कथा से जुड़ी हो।
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