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कक्षा 9 हिंदी स्पर्श अध्याय 9: दोहे — रहीम महत्वपूर्ण प्रश्न और समाधान

CBSE कक्षा 9 हिंदी स्पर्श का अध्याय 9 छात्रों को मध्यकालीन भारत के सबसे सम्मानित कवि रहीम के नीति-दोहों से परिचित कराता है। यह अध्याय जीवन-मूल्य (life values), बुद्धिमत्ता और व्यावहारिक नैतिकता को संक्षिप्त, यादगार छंद रूपों के माध्यम से प्रस्तुत करता है। बोर्ड परीक्षा के लिए रहीम के दोहों को समझना महत्वपूर्ण है: प्रश्न मुख्य अवधारणाओं को पहचानने वाले बहुविकल्पीय प्रश्नों से लेकर उनकी शैली (style) और दार्शनिक गहराई पर 5-अंकीय विश्लेषणात्मक निबंधों तक होते हैं। यह गाइड 2024-25 के तर्कसंगत CBSE पाठ्यक्रम के अनुरूप सभी अपेक्षित प्रश्न पैटर्न—1-अंक से 5-अंक तक—विस्तृत समाधानों के साथ कवर करता है। चाहे आप अर्द्धवार्षिक परीक्षा या वार्षिक परीक्षा के लिए संशोधन कर रहे हों, ये प्रश्न वास्तविक बोर्ड-शैली की अपेक्षाओं को दर्शाते हैं।

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ये सवाल 2026-27 CBSE बोर्ड पैटर्न में क्यों महत्वपूर्ण हैं

CBSE कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पाठ्यक्रम साहित्यिक बोध, विषयवस्तु विश्लेषण और शैलीगत जागरूकता को प्राथमिकता देता है। अध्याय 9 (दोहे — रहीम) तीन मुख्य कौशलों का परीक्षण करता है: (1) नीति-दोहों की समझ और स्मरण—धैर्य, दया और सामाजिक आचरण पर दोहे; (2) रहीम की संक्षिप्त शैली (सरल, सूक्ति-युक्त) और प्रतीकवाद का साहित्यिक विश्लेषण; (3) जीवन मूल्यों का वास्तविक जीवन से संबंध स्थापित करना। बोर्ड परीक्षा आमतौर पर इस अध्याय को 10–15 अंक आवंटित करती है, जो विभिन्न प्रश्न प्रकारों में विभाजित होते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न (2–3 अंक) प्रमुख हैं, जो छात्रों से दोहे का अर्थ समझाने या नैतिक संदेश पहचानने के लिए कहते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) तुलनात्मक विश्लेषण या निबंध-शैली के उत्तर माँगते हैं जो रहीम के दर्शन को समकालीन जीवन से जोड़ते हैं। बहुविकल्पीय प्रश्न तथ्यात्मक स्मरण परीक्षण करते हैं। उच्च-स्तरीय चिंतन प्रश्न अनुमान और समीक्षात्मक सोच माँगते हैं। इन पैटर्नों में महारत हासिल करने से आत्मविश्वासपूर्ण, उच्च-स्कोरिंग उत्तर सुनिश्चित होते हैं और परीक्षा-चिंता कम होती है।

1-अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न तीव्र स्मरण और बोध का परीक्षण करते हैं। यहाँ 5 प्रतिनिधि बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं जो CBSE अपेक्षाओं के अनुरूप हैं: **प्रश्न 1:** रहीम के दोहों में निम्नलिखित में से कौन-सी थीम नहीं है? (क) धैर्य और सहनशीलता (ख) दया और करुणा (ग) राजनीतिक शक्ति और विजय (घ) सामाजिक सद्भावना और संयम **उत्तर: (ग)** रहीम के दोहे नैतिक जीवन और सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित हैं, न कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर। **प्रश्न 2:** रहीम किस ऐतिहासिक काल से संबंधित थे? (क) वैदिक युग (ख) मुगल साम्राज्य (16वीं सदी) (ग) ब्रिटिश राज (घ) आधुनिक युग **उत्तर: (ख)** रहीम (1556–1626) अकबर के दरबार में कवि और सेनानी थे। **प्रश्न 3:** 'दोहा' काव्य का _____ है। (क) मुक्त छंद (ख) रिक्त छंद (ग) मात्रिक दोहे (चौपाई) (घ) गीत **उत्तर: (ग)** दोहा एक परंपरागत दो-पंक्तिया मात्रिक दोहा है, जिसमें विशिष्ट तुकांत योजना होती है। **प्रश्न 4:** निम्नलिखित में से कौन-सा रहीम की भाषा-शैली का सबसे अच्छा वर्णन करता है? (क) अलंकृत और वर्बोज़ (ख) सरल, सीधा और सूक्ति-युक्त (ग) अत्यंत तकनीकी (घ) कथात्मक और कहानी-आधारित **उत्तर: (ख)** रहीम के दोहे स्पष्टता, संक्षिप्तता और ज्ञान के लिए प्रसिद्ध हैं। **प्रश्न 5:** एक दोहे में आमतौर पर कितनी पंक्तियाँ होती हैं? (क) 1 (ख) 2 (ग) 4 (घ) 8 **उत्तर: (ख)** दोहा एक दो-पंक्तिया तुकांतयुक्त दोहा है।

2-अंक के लघु उत्तरीय प्रश्न और समाधान

इन प्रश्नों के लिए विशिष्ट दोहों या अवधारणाओं की संक्षिप्त व्याख्या (40–60 शब्द) आवश्यक है। **प्रश्न 1:** दोहे का अर्थ समझाइए: 'धीरे-धीरे रे मना, धीरज धर दीजै। जो कछु होय सो भलो समझ, सब कुछ लीजै॥' **उत्तर:** यह दोहा मन को शांत और धैर्यवान रहने की सलाह देता है। यह सिखाता है कि जो भी होता है, उसे अच्छा समझना चाहिए और आंतरिक शांति विकसित करनी चाहिए सभी परिस्थितियों को समर्पण के साथ अपनाकर। रहीम जोर देते हैं कि धैर्य संतुलित जीवन की नींव है। **प्रश्न 2:** जब रहीम कहते हैं कि दुश्मनों को भी दया दिखानी चाहिए, तो उनका क्या मतलब है? **उत्तर:** रहीम का विश्वास है कि करुणा एक सार्वभौमिक गुण है, जो दूसरों के साथ संबंध की परवाह किए बिना मायने रखता है। दुश्मनों को भी दया दिखाकर, एक व्यक्ति घृणा और क्रोध को पार करता है, नैतिक श्रेष्ठता का प्रदर्शन करता है। यह दोहा अहिंसा (Non-violence) और भलाई के नैतिक सिद्धांत को प्रतिबिंबित करता है। **प्रश्न 3:** रहीम अपने दोहों में प्रकृति और प्रतीकों का उपयोग कैसे करते हैं? **उत्तर:** रहीम प्रायः प्राकृतिक चित्रों (पानी, पेड़, हवा) का उपयोग मानवीय गुणों के रूपक के रूप में करते हैं। उदाहरण के लिए, वह स्थिरता की तुलना शांत तालाब से करते हैं और अनुकूलन को बहते पानी से। यह प्रतीकात्मक भाषा अमूर्त जीवन मूल्यों को ठोस और सभी वर्गों के पाठकों के लिए यादगार बनाती है। **प्रश्न 4:** रहीम के दोहों और आख्यान काव्य के बीच एक मुख्य अंतर पहचानिए। **उत्तर:** दोहे संक्षिप्त, दो-पंक्तिया दोहे होते हैं जो केवल कुछ शब्दों में एक संपूर्ण विचार या नैतिक सिद्धांत व्यक्त करते हैं, जबकि आख्यान काव्य कई पंक्तियों में एक विस्तृत कहानी सुनाता है। रहीम के प्रारूप में अत्यंत भाषा-मितव्ययता की माँग होती है और बौद्धिक गहनता होती है—प्रत्येक शब्द का वजन होता है। **प्रश्न 5:** सहनशीलता (धैर्य) पर दोहे में केंद्रीय जीवन-मूल्य क्या है? **उत्तर:** केंद्रीय मूल्य यह विश्वास है कि कठिनाई के समय धैर्यपूर्वक सहन करना ज्ञान और आंतरिक शक्ति की ओर ले जाता है। रहीम सिखाते हैं कि चुनौतियों के प्रति जल्दबाजी या भावनात्मक प्रतिक्रिया और समस्याएँ पैदा करती है, जबकि विचारशील संयम चरित्र का निर्माण करता है और सही परिणामों की ओर ले जाता है।

3-अंक के प्रश्न विस्तृत उत्तरों के साथ

इन प्रश्नों के लिए मध्यम-लंबाई के उत्तर (100–120 शब्द) की माँग होती है जो विषयवस्तु और शैलीगत तत्वों का विश्लेषण करते हैं। **प्रश्न 1:** समझाइए कि रहीम के दोहे अपने समय के सामाजिक और नैतिक मूल्यों को कैसे दर्शाते हैं। एक उदाहरण दीजिए। **उत्तर:** रहीम के दोहे मुगल-काल की हुनर, सद्गुण और सामाजिक-न्याय की आदर्श अवधारणाओं को मूर्त रूप देते हैं। अकबर के दरबार में रहते हुए, रहीम ने कुलीनों और सामान्य लोगों दोनों को देखा, और उनके दोहे सार्वभौमिक मानवीय आचरण को संबोधित करते हैं। उदाहरण के लिए, धैर्य पर दोहा ('धीरे-धीरे रे मना') मुगल प्रशासनिक निर्णय-निर्माण में नियंत्रित ज्ञान के आदर्श को प्रतिबिंबित करता है। सभी को दया पर दोहा अलाह की देन (दैवीय कृपा सभी पर लागू होती है) सिखाता है, जो अकबर की धार्मिक सहिष्णुता की नीति के अनुरूप है। इस प्रकार, रहीम दरबारी दर्शन को सुलभ, कालातीत नैतिक शिक्षाओं में रूपांतरित करते हैं। **प्रश्न 2:** रहीम की संक्षिप्त शैली (concise style) के नीति (ethics) संप्रेषण में प्रभावशीलता का विश्लेषण करें। **उत्तर:** दोहों की संक्षिप्तता—केवल दो पंक्तियाँ—बौद्धिक गहनता को अनिवार्य करती है और अनावश्यक विस्तार को समाप्त करती है। प्रत्येक शब्द सटीकता से चुना गया है; कोई भी पंक्ति वर्णन या कथानक पर बर्बाद नहीं होती। यह मितव्ययता तत्काल प्रभाव पैदा करती है: पाठक नैतिक सीख तुरंत समझते हैं, इसे आसानी से याद रखते हैं और सहज रूप से लागू करते हैं। एक लंबी कविता संदेश को कमजोर कर सकती है; दोहे की संक्षिप्तता इसे कालातीत सूक्ति जैसा महसूस कराती है। उदाहरण के लिए, 'धीरज धर दीजै' (धैर्य का अभ्यास करें) किसी भी लंबे उपदेश की तुलना में अधिक प्रेरक शक्ति प्राप्त करता है। रहीम की शैली ने दर्शन को लोकतांत्रिक बनाया—एक किसान या व्यापारी बिना औपचारिक शिक्षा के इन दोहों को समझ सकते और साझा कर सकते थे। **प्रश्न 3:** रहीम बाहरी धन और आंतरिक चरित्र के बीच अपने दोहों में कैसे अंतर दिखाते हैं? साक्ष्य प्रदान करें। **उत्तर:** रहीम लगातार यह तर्क देते हैं कि सद्गुण और आंतरिक-शांति धन और शक्ति से बढ़कर हैं। दया पर दोहों में, वह सुझाते हैं कि एक दयालु शब्द भौतिक रूप से कुछ भी खर्च नहीं करता है, लेकिन आत्मा को समृद्ध करता है। सहनशीलता पर दोहों में, धैर्य को एक उच्चतर खजाने के रूप में प्रस्तुत किया जाता है—यह किसी भी भौतिक संपत्ति की तुलना में रुined होने से बेहतर सुरक्षा देता है। 'धीरज' (धैर्य) को एक रत्न के रूप में रूपक सचित्र करता है: सोने के विपरीत, जिसे चोर चोरी कर सकते हैं, धैर्य एक आंतरिक संपत्ति है जिसे कोई नहीं ले सकता। यह दर्शन इस्लामी नैतिकता (रहीम का विश्वास) और भारतीय-दर्शन (Indian philosophy) के आत्मा को माया (illusion) पर प्राथमिकता देने के जोर को दोनों प्रतिबिंबित करता है। **प्रश्न 4:** रहीम के दोहों की यादगारी बढ़ाने में पुनरावृत्ति और लय की भूमिका समझाइए। **उत्तर:** दोहे कड़ी मात्रिक संरचना (लगभु 24 मात्रा—approximately 24 syllables प्रति दोहा) नियुक्त करते हैं, एक संगीतात्मक लय बनाते हैं जो स्मरण में सहायता करती है। ध्वनियों की पुनरावृत्ति (अनुप्रास) और मिलती-जुलती शब्द-समाप्तियाँ (छंद-गति) दोहों को कहावतों या गीतों जैसा महसूस कराती हैं—श्रोता स्वाभाविक रूप से उन्हें याद रखते हैं। उदाहरण के लिए, 'धीरे-धीरे' ध्वनि धी को दोहराता है, और 'धीरज धर' विषय को प्रतिध्वनित करता है, दोनों पंक्तियों को बाँधता है। यह संगीतात्मकता जानबूझकर की गई है: रहीम के युग में, मौखिक संचरण प्रमुख था, इसलिए लयबद्ध काव्य सुनिश्चित करता था कि दोहे पीढ़ियों के माध्यम से जीवित रहें और फैलें। आधुनिक पाठकों को समान रूप से लाभ होता है—लय अमूर्त अवधारणाओं (धैर्य, दया) को ठोस बनाती है और उन्हें सादे गद्य की तुलना में स्मृति में कहीं बेहतर दर्ज करती है।

HOTS और केस-स्टडी प्रश्न चरण-दर-चरण समाधान के साथ

**प्रश्न:** एक छात्र यह दोहा पढ़ता है: 'रहिमन दिलगीर न हओ, किसी की बुराई न चाहत। जैसा भरोसो बैठो तुम, तैसा ही फल पाहत॥' आप एक सहपाठी को सलाह दे रहे हैं जो परेशान है क्योंकि उनके समूह परियोजना के साथी ने समान योगदान नहीं दिया। आपका सहपाठी शिक्षक से शिकायत करना चाहता है और भविष्य की परियोजनाओं से साथी को बाहर रखना चाहता है। रहीम के दोहे का उपयोग करते हुए, समझाएँ कि आप क्या सलाह देंगे। यह दोहा स्थिति को कैसे संबोधित करता है? **चरण 1: दोहे को समझें** दोहे का अनुवाद मोटे तौर पर इस प्रकार है: "रहीम, दुःखी मत हो; किसी की बुराई की कामना मत करो। जैसा विश्वास के साथ बैठो, वैसा ही फल पाओगे।" यह सिखाता है कि दुर्भावना रखना और किसी को नुकसान की कामना करना केवल स्वयं के कष्ट का कारण बनता है। विश्वास और सकारात्मक इरादे सकारात्मक परिणाम आकर्षित करते हैं। **चरण 2: संघर्ष की पहचान करें** आपका सहपाठी भावनात्मक रूप से व्यथित (दिलगीर) है, साथी को नुकसान पहुँचाना चाहता है, और बहिष्कार के माध्यम से बदला लेना चाहता है। दोनों प्रतिक्रियाएँ बुराई (ill-will) से उत्पन्न होती हैं। **चरण 3: रहीम की बुद्धिमत्ता लागू करें** रहीम सलाह देते: (क) भावनात्मक दर्द को छोड़ दें—द्वेष रखना केवल धारण करने वाले को जहर देता है; (ख) यह समझें कि साथी को बुराई की कामना करना ('बुराई चाहना') नकारात्मकता को बढ़ाता है और आपके सहपाठी के अपने चरित्र को नुकसान पहुँचाता है; (ग) इसके बजाय, स्पष्टता और करुणा के साथ स्थिति का सामना करें: सीधे साथी से बात करें, उनके योगदान में बाधा को समझें, अन्याय को तथ्यों के साथ दस्तावेज़ करें, और शिक्षक को दंडात्मक एजेंट के रूप में नहीं बल्कि सुविधाकर्ता के रूप में शामिल करें। **चरण 4: जीवन-मूल्य से जोड़ें** दोहे का गहरा पाठ: सत्यनिष्ठा और न्याय सजा के बारे में नहीं हैं—ये सही आचरण के बारे में हैं। आपका सहपाठी न्यायसंगत रूप से कार्य करे (असंतुलन की रिपोर्ट करे) लेकिन करुणा के साथ (नुकसान की कामना न करे)। यह आपके सहपाठी की अपनी नैतिक सत्यनिष्ठा की रक्षा करता है और अक्सर प्रतिशोध से बेहतर समाधान की ओर ले जाता है। **चरण 5: व्यावहारिक परिणाम** रहीम के सिद्धांत का पालन करते हुए, सहपाठी साथी से कह सकते हैं: "मैंने देखा कि आप समान रूप से नहीं जुड़े हैं। क्या कुछ गलत है? आइए अपने दृष्टिकोण को समायोजित करें।" यह संवाद खोलता है। यदि साथी प्रतिक्रियाहीन रहता है, तो सहपाठी भावनाओं के साथ नहीं बल्कि तथ्यों के साथ शिक्षक को रिपोर्ट करता है। शिक्षक फिर न्याय को संबोधित कर सकते हैं। सहपाठी न्याय और करुणा के साथ कार्य कर चुका है—बिल्कुल वही जिसकी रहीम वकालत करते हैं। **आलोचनात्मक सोच का आयाम:** रहीम का दोहा निष्क्रियता नहीं है; यह कौशलपूर्ण बुद्धिमत्ता है। दुर्भावना रखना आपको कमजोर करता है; न्यायसंगत रूप से कार्य करना आपको मजबूत करता है। यह HOTS अंतर्दृष्टि—कि सदगुण आपके हित की सेवा करता है और दूसरों को भी लाभान्वित करता है—गहन है।

CBSETUTOR.ai आपको इन सटीक पैटर्न के लिए कैसे तैयार करता है

Class 9 Hindi Sparsh अध्याय 9 की तैयारी केवल उत्तर पढ़ना नहीं है, बल्कि वास्तविक बोर्ड परीक्षा को प्रतिबिंबित करने वाली परिस्थितियों में अभ्यास करना है। cbsetutor.ai पर, हमरा AI ट्यूटर इसके लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। **दैनिक ड्रिल सेशन:** हमारा प्लेटफॉर्म समान पैटर्न बैंक से यादृच्छिक प्रश्न उत्पन्न करता है—MCQ, 2-अंक, 3-अंक और 5-अंक—विभिन्न फ्रेमिंग का सामना करने से आपको आश्चस्त करता है। उदाहरण के लिए, आप "रहीम की धैर्य की अवधारणा को समझाएँ" को तीन बार विभिन्न शब्दों के साथ उत्तर दे सकते हैं, आत्मविश्वास बनाते हुए। **व्यक्तिगतकृत प्रतिक्रिया:** प्रत्येक प्रतिक्रिया के बाद, हमारा AI आपके उत्तर का विश्लेषण CBSE अंकन योजनाओं के विरुद्ध करता है और नैदानिक टिप्पणियाँ प्रदान करता है। यदि आप दोहे की सतही व्याख्या करते हैं, तो AI हाइलाइट करता है कि आपने क्या छोड़ा और गहन कोण सुझाता है। यदि आप 2-अंक का उत्तर 5-अंक की गहराई के साथ लिखते हैं, तो यह ध्यान देता है कि आप अधिक काम कर रहे हैं। **अंतराल पर दोहराव:** प्लेटफॉर्म ट्रैक करता है कि आप कौन सी अवधारणाएँ सबसे कठिन पाते हैं—कहें, रहीम के दर्शन को आधुनिक जीवन से जोड़ना—और संबंधित प्रश्नों को इष्टतम अंतराल पर दोहराता है। **परीक्षा सिमुलेशन:** साप्ताहिक पूर्ण-लंबाई 40-मिनट की Hindi परीक्षा, समय-निबद्ध और वास्तविक बोर्ड रूब्रिक्स के विरुद्ध स्कोर की गई, आपको गति रखने और वास्तविक परीक्षा से पहले कमजोर स्थानों की पहचान करने में सहायता करती है। **संदर्भपूर्ण शिक्षण:** हमरा ट्यूटर केवल उत्तरों का अभ्यास नहीं कराता; यह कथा समझ बनाता है। आप सीखते हैं कि दोहे भारतीय साहित्यिक परंपरा में महत्वपूर्ण क्यों हैं, रहीम की शैली अन्य कवियों से कैसे भिन्न है, और यह अध्याय व्यापक पाठ्यक्रम में कहाँ फिट होता है। परिणाम: cbsetutor.ai के संरचित दृष्टिकोण का उपयोग करने वाले छात्र आमतौर पर 4–6 सप्ताह में 60% (अनुमान/स्मृति) से 85%+ (आत्मविश्वासी, विश्लेषणात्मक प्रतिक्रियाएँ) तक सुधार करते हैं।

Frequently asked questions

दोहा क्या है और रहीम के दोहे क्या विशेष बनाते हैं?+
दोहा एक दो-पंक्तिवाली तुकांत मात्रिक युग्म है, आमतौर पर प्रति दोहा 24 मात्राएँ होती हैं। रहीम के दोहे इसलिए विशेष हैं कि ये संक्षिप्त, सूक्ति-रूप जीवन-ज्ञान (नीति) हैं जो सरल, सुलभ हिंदी में लिखे गए हैं। अलंकृत काव्य के विपरीत, रहीम की शैली सीधी, स्मरणीय और सार्वभौमिक है—नैतिकता और मानवीय मूल्यों को ऐसे तरीके से संबोधित करती है जो सदियों और संस्कृतियों में लागू होता है।
CBSE कक्षा 9 हिंदी स्पर्श के अध्याय 9 में कितने दोहे हैं?+
CBSE कक्षा 9 स्पर्श पाठ्यक्रम में रहीम के नीति-दोहों का एक चयनित संग्रह शामिल है, आमतौर पर 6–8 मुख्य दोहे टिप्पणी के साथ। सटीक संख्या संस्करण के अनुसार भिन्न हो सकती है, लेकिन पाठ्यपुस्तकें धीरज, दया, सहनशीलता और सामाजिक सद्भाव के बारे में दोहों पर ध्यान केंद्रित करती हैं। सटीक समावेश के लिए हमेशा अपने स्कूल के विशिष्ट संस्करण को संदर्भित करें।
रहीम के दोहों की मुख्य विषयवस्तु क्या है?+
मुख्य विषयवस्तु में शामिल हैं: (1) कठिनाई के समय धीरज और सहनशीलता, (2) परिस्थिति की परवाह किए बिना करुणा और दया, (3) संयम और आत्म-नियंत्रण, (4) क्रोध और बुरी भावना की व्यर्थता, (5) न्याय और ईमानदार आचरण, (6) विनम्रता और अपनी स्थिति की स्वीकृति, और (7) धन पर चरित्र की श्रेष्ठता। सभी विषयवस्तु जीवन-मूल्य और नैतिक जीवन पर केंद्रीभूत हैं।
क्या दोहे निश्चित रूप से बोर्ड परीक्षा में आएँगे?+
हाँ। कक्षा 9 हिंदी (स्पर्श) की CBSE बोर्ड परीक्षा सभी निर्धारित अध्यायों में प्रश्न आवंटित करती है, जिसमें अध्याय 9 भी शामिल है। आप दोहे-रहीम से 10–15 अंक की अपेक्षा कर सकते हैं—बहुविकल्पीय प्रश्नों, लघु उत्तरों और निबंध प्रश्नों के रूप में। इस अध्याय को नज़रअंदाज़ करना जोखिम भरा है।
मुझे एक दोहे को समझाने के लिए पूछे गए प्रश्न का उत्तर कैसे देना चाहिए?+
दोहे का शाब्दिक अर्थ सरल आधुनिक हिंदी या अंग्रेज़ी में फिर से बताते हुए शुरुआत करें। फिर नैतिक सिद्धांत या जीवन-मूल्य की पहचान करें जो यह सिखाता है। अपनी व्याख्या का समर्थन करने वाला एक वास्तविक-जीवन या पाठ्य उदाहरण प्रदान करें। इसकी प्रासंगिकता (ऐतिहासिक या समकालीन) नोट करके निष्कर्ष निकालें। 2-अंक के उत्तरों के लिए इसे 40–60 शब्दों में रखें; 5-अंक के लिए, बारीकी और प्रतिवाद के साथ 250+ शब्दों तक विस्तार करें।
रहीम की भाषा-शैली क्या है?+
रहीम की शैली संक्षिप्त, सरल और प्रतीकात्मक है। वह अलंकारपूर्ण भाषा से बचते हैं और प्राकृतिक意象 (जल, हवा, पेड़) को मानवीय गुणों के लिए रूपक के रूप में उपयोग करते हैं। उनके दोहे लयबद्ध और स्मरणीय हैं, मौखिक संचरण के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। शैली अर्थ को रूप से प्राथमिकता देती है—हर शब्द का वजन होता है, और कुछ भी व्यर्थ नहीं है।
मैं रहीम के दोहों और पाठ्यक्रम में अन्य कवियों के काम के बीच अंतर कैसे करूँ?+
रहीम के दोहे रूप में विशिष्ट हैं (दो-पंक्तिवाली तुकांत युग्म कठोर मीटर के साथ), विषयवस्तु (व्यावहारिक नैतिकता और जीवन-मूल्य), और टोन (सलाहात्मक, सूक्ति-रूप, सार्वभौमिक)। आख्यानात्मक कविता या भक्ति काव्य के विपरीत, दोहे कहानियाँ नहीं कहते या देवताओं का आह्वान नहीं करते—वे कालातीत ज्ञान प्रदान करते हैं। अन्य अध्याय 9 पाठों के साथ तुलना समझ को दृढ़ करेगी।
क्या मैं रहीम के दोहों पर बोर्ड परीक्षा के उत्तरों में समकालीन उदाहरणों का उपयोग कर सकता हूँ?+
हाँ, बिल्कुल। परीक्षक सराहना करते हैं जब आप प्राचीन ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ते हैं। उदाहरण के लिए, धीरज पर चर्चा करते समय, आप यह संदर्भित कर सकते हैं कि परीक्षा परिणामों की प्रतीक्षा कैसे चिंता के बिना रहीम के धीरज के सिद्धांत को प्रतिबिंबित करती है। हालाँकि, समकालीन संदर्भों को संक्षिप्त और प्रासंगिक रखें; ध्यान पाठ और उसके दर्शन पर रहना चाहिए।

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