India's #1 AI Tutorimportant questions · Hindi - Sparsh · Chapter 7हिंदी में पढ़ें →

Class 9 Hindi Sparsh Chapter 7: धर्म की आड़ — गणेश शंकर विद्यार्थी | Important Questions & Board Answers

Chapter 7 'धर्म की आड़' by Ganesha Shankar Vidyarthi is a powerful social critique in the CBSE Class 9 Hindi Sparsh textbook. This essay exposes how religion is misused to justify communal violence and inequality, calling for communal harmony and social awakening. Mastering the core themes—धर्म का दुरुपयोग (misuse of religion), सांप्रदायिक सद्भाव (communal goodwill), and विद्यार्थी जी का आह्वान (the author's call to action)—is essential for board exam success. This guide covers all question types: 1-mark MCQs, 2-mark short answers, 3-mark analytical questions, 5-mark essays, and HOTS case studies. Each answer follows NCERT textual alignment and board evaluation rubrics. Use this resource to strengthen your comprehension, critical thinking, and written expression for the 2025-26 CBSE examination.

Your child's private AI tutor — trained on NCERT.
3-day free trial · ₹1 to start · Cancel anytime.
Start 3-day free trial →

Why These Questions Matter for the 2025-26 Board Pattern

The CBSE Class 9 Hindi Board exam (March 2026) allocates 40 marks to Literature (Sparsh textbook). Chapter 7 'धर्म की आड़' typically carries 8–12 marks across multiple question types. The 2024-25 rationalized syllabus emphasizes: (1) Understanding author intent and social messaging, (2) Identifying rhetorical devices and persuasive language, (3) Connecting textual evidence to real-world communal harmony issues. Examiners test comprehension at three cognitive levels: Knowledge (recall of key ideas), Understanding (explaining concepts like धर्म का दुरुपयोग), and Application (relating Vidyarthi's critique to modern society). The essay's central thesis—that religion must not be weaponized—appears across all mark ranges: MCQ distractors test surface reading, 2-mark questions demand concept definition, 3-mark questions require textual evidence, and 5-mark questions expect critical analysis with contemporary examples. Mastering this chapter ensures strong performance on Literature papers and develops media literacy on communal discourse. Consistent practice with these curated questions—matched to official CBSE question banks—boosts both accuracy and writing quality under exam pressure.

1-Mark Multiple-Choice Questions (MCQs) with Answers

**Q1.** गणेश शंकर विद्यार्थी किस आधार पर धर्म की आलोचना करते हैं? (A) धर्म की परिभाषा गलत है (B) धर्म का दुरुपयोग समाज को नुकसान पहुँचाता है (C) धर्म केवल पुजारियों के लिए है (D) धर्म विकास में बाधा है **Answer: (B)** विद्यार्थी जी का विचार है कि धर्म स्वयं समस्या नहीं, बल्कि इसका दुरुपयोग करके सांप्रदायिक हिंसा और भेदभाव को न्यायसंगत ठहराना समस्या है। --- **Q2.** लेखक के अनुसार सांप्रदायिक सद्भाव का मूल आधार क्या है? (A) समान धार्मिक विश्वास (B) राजनीतिक समझौता (C) मानवीय समानता और सामाजिक न्याय (D) सरकारी नीतियाँ **Answer: (C)** विद्यार्थी जी का तर्क है कि धर्म-निरपेक्ष नैतिकता (सत्य, न्याय, करुणा) और सामाजिक समानता ही विभिन्न समुदायों को एकजुट कर सकती है। --- **Q3.** 'धर्म की आड़' शीर्षक में 'आड़' शब्द का अर्थ क्या है? (A) ढाल या सुरक्षा (B) पर्दा/बहाना/छिपाव का साधन (C) धार्मिक संरक्षण (D) आध्यात्मिक मार्ग **Answer: (B)** 'आड़' का अर्थ है छिपाव या पर्दा। शीर्षक का संदेश है कि धर्म को अनैतिक कृत्यों को छिपाने के लिए दुरुपयोग किया जाता है। --- **Q4.** विद्यार्थी जी का आह्वान मुख्यतः किस वर्ग को निर्दिष्ट है? (A) धार्मिक पुजारियों को (B) शिक्षितों और युवाओं को (C) राजनेताओं को (D) व्यापारियों को **Answer: (B)** लेखक बुद्धिजीवियों, शिक्षकों और छात्रों से अपेक्षा करते हैं कि वे समाज को धार्मिक कट्टरता से बाहर निकालें। --- **Q5.** निम्नलिखित में से किस कथन को लेखक गलत मानते हैं? (A) सभी धर्म मानवीय कल्याण सिखाते हैं (B) धर्म के नाम पर हिंसा न्यायसंगत है (C) मनुष्य की गरिमा सर्वोच्च धर्म है (D) सामाजिक समानता धर्म की मूल भावना है **Answer: (B)** विद्यार्थी जी स्पष्ट रूप से कहते हैं कि धर्म के नाम पर हिंसा, भेदभाव और शोषण पूर्णतः निंदनीय है।

2-Mark Short-Answer Questions with Model Answers

**Q1.** लेखक के अनुसार धर्म का सही अर्थ क्या है? (2 अंक) **उत्तर:** गणेश शंकर विद्यार्थी के अनुसार धर्म का सही अर्थ मानवीय नैतिकता, करुणा, सत्य और समाज कल्याण है। धर्म उस सर्वव्यापी नैतिक सिद्धांत को दर्शाता है जो सभी मनुष्यों को समान मानता है और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करता है। लेखक के विचार में धर्म किसी विशेष पंथ या रीति-रिवाज नहीं, बल्कि सर्वमानवीय मूल्यों की सार्वभौमिक भाषा है। --- **Q2.** 'धर्म की आड़' में धर्म का किस प्रकार दुरुपयोग होता है? (2 अंक) **उत्तर:** लेखक दिखाते हैं कि धर्म का दुरुपयोग तब होता है जब सांप्रदायिक नेता और धार्मिक कट्टरपंथी धर्म के नाम पर: (i) सामाजिक भेदभाव और असमानता को वैध ठहराते हैं, (ii) हिंसा, दंगे और सांप्रदायिक कलह भड़काते हैं, (iii) शोषण और अन्याय को धर्म के अनुसार बताते हैं। इस प्रकार धर्म मानवीय कल्याण का साधन न रहकर सत्ता और शोषण का औजार बन जाता है। --- **Q3.** विद्यार्थी जी सांप्रदायिक सद्भाव के लिए कौन-सी चीजें आवश्यक मानते हैं? (2 अंक) **उत्तर:** विद्यार्थी जी के अनुसार सांप्रदायिक सद्भाव के लिए आवश्यक हैं: (i) धर्मनिरपेक्ष सामाजिक चेतना (धर्म से परे मानवीय मूल्यों पर केंद्रित), (ii) सभी धर्मों के प्रति सम्मान का भाव, (iii) समाज में समानता और न्याय की स्थापना, (iv) वैज्ञानिक सोच और तार्किक विचारशीलता। ये तत्व ही विभिन्न समुदायों को एकजुट कर सकते हैं। --- **Q4.** 'धर्म की आड़' पाठ में लेखक का आह्वान क्या है? (2 अंक) **उत्तर:** विद्यार्थी जी का प्रमुख आह्वान समाज के शिक्षित और विवेकशील लोगों (विशेषकर विद्यार्थियों) से है कि वे: (i) धार्मिक कट्टरता का विरोध करें, (ii) समाज को सांप्रदायिक सद्भाव की ओर ले जाएँ, (iii) मानवीय नैतिकता और समाज कल्याण को धर्म का सही अर्थ समझें, (iv) सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत बनें। यह एक ऐसे समाज के निर्माण का आह्वान है जहाँ धर्म शांति और न्याय का प्रतीक हो। --- **Q5.** पाठ का शीर्षक 'धर्म की आड़' क्यों उपयुक्त है? (2 अंक) **उत्तर:** शीर्षक 'धर्म की आड़' अत्यंत उपयुक्त है क्योंकि (i) यह पाठ का केंद्रीय विचार प्रकट करता है—धर्म को एक पर्दे या बहाने के रूप में प्रस्तुत करना, (ii) लेखक दिखाते हैं कि कैसे अनैतिक कार्यों को धर्म के नाम पर छिपाया जाता है, (iii) यह शीर्षक समाज के उन लोगों की ओर संकेत करता है जो धर्म को अपने स्वार्थ सिद्धि का साधन बनाते हैं। इस प्रकार शीर्षक पूरे पाठ की विवेचना को संक्षिप्त और सशक्त रूप में व्यक्त करता है।

3-Mark Analytical Questions with Textual Evidence

**Q1.** 'धर्म की आड़' पाठ में लेखक यह क्यों कहते हैं कि 'धर्म मनुष्य के लिए है, मनुष्य धर्म के लिए नहीं'? इसका समाज पर क्या प्रभाव है? (3 अंक) **उत्तर:** यह कथन लेखक की मूल दार्शनिकी को व्यक्त करता है। विद्यार्थी जी का अर्थ है कि धर्म का लक्ष्य मानवीय कल्याण और सामाजिक न्याय होना चाहिए, न कि मनुष्य को धार्मिक आदेशों का दास बनाना। जब समाज इस सिद्धांत को भूल जाता है, तब धर्म के नाम पर अमानवीय कृत्य (जातिगत भेदभाव, हिंसा, दलितों का शोषण) को न्यायसंगत ठहराया जाने लगता है। समाज पर इसका प्रभाव यह होता है कि धर्म विभाजन, कट्टरता और सांप्रदायिक तनाव का कारण बन जाता है, जो सामाजिक प्रगति को अवरुद्ध करता है। लेखक का तर्क है कि जब तक धर्म को मानवीय गरिमा और कल्याण के अधीन नहीं किया जाता, तब तक सांप्रदायिक सद्भाव संभव नहीं है। --- **Q2.** विद्यार्थी जी अपने पाठ में किन ऐतिहासिक या सामाजिक उदाहरणों के माध्यम से धर्म के दुरुपयोग को दर्शाते हैं? इसका सार्वभौमिक महत्व क्या है? (3 अंक) **उत्तर:** विद्यार्थी जी भारतीय समाज में धर्म के नाम पर होने वाली असमानताओं—विशेषकर वर्ण व्यवस्था, दलितों का शोषण, जातिगत भेदभाव, और महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचार—के उदाहरण देते हैं। वे दिखाते हैं कि कैसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों की गलत व्याख्या करके सामाजिक असमानता को धर्म का हिस्सा बना दिया गया। इन उदाहरणों का सार्वभौमिक महत्व यह है कि ये सभी धर्मों और समाजों में पाई जाने वाली समस्या हैं। लेखक इसके माध्यम से यह संदेश देते हैं कि धर्म को केवल औपचारिक पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और मानवीय समानता के आधार पर परिभाषित किया जाना चाहिए। यह पाठ आधुनिक समय में भी साम्प्रदायिकता और धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध एक कालजयी आवाज है। --- **Q3.** 'धर्म की आड़' पाठ में लेखक का वास्तविक विरोध किसके विरुद्ध है—धर्म के विरुद्ध या धर्म के दुरुपयोग के विरुद्ध? इसे स्पष्ट करते हुए लेखक के दृष्टिकोण की व्याख्या करें। (3 अंक) **उत्तर:** विद्यार्थी जी का विरोध धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि धर्म के दुरुपयोग और धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध है। यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि लेखक धर्म को मानवीय कल्याण का एक सकारात्मक साधन मानते हैं। लेखक का तर्क है कि असली धर्म (धर्म की मूल भावना) तो सत्य, न्याय, करुणा और समानता सिखाता है। परंतु जब धार्मिक नेता, पुजारी और कट्टरपंथी लोग धर्म की व्याख्या अपने हितों के अनुसार करते हैं, तब धर्म एक साधन नहीं रह जाता, बल्कि शोषण का औजार बन जाता है। इसी बात को स्पष्ट करने के लिए लेखक कहते हैं कि सभी महान धार्मिक परंपराओं की मूल शिक्षा समान है—मानवता का उत्थान। लेखक का दृष्टिकोण अत्यंत संतुलित और विवेकशील है: वे धर्म को नहीं, बल्कि उसके विकृत रूपों को चुनौती देते हैं।

5-Mark Long-Answer Essay Questions with Complete Solutions

**Q1.** 'धर्म की आड़' पाठ के आधार पर विद्यार्थी जी के विचारों को प्रस्तुत करते हुए समझाइए कि सांप्रदायिक सद्भाव की स्थापना के लिए कौन-सी शर्तें आवश्यक हैं। (5 अंक) **उत्तर:** गणेश शंकर विद्यार्थी का पूरा पाठ सांप्रदायिक सद्भाव की दिशा में एक सशक्त आह्वान है। उनके अनुसार, सांप्रदायिक सद्भाव की स्थापना के लिए निम्नलिखित शर्तें आवश्यक हैं: **1. धर्मनिरपेक्ष सामाजिक नैतिकता:** लेखक मानते हैं कि धर्म विभिन्न मनुष्यों को अलग करता है, किंतु मानवीय नैतिकता (सत्य, न्याय, दया, समानता) सभी को एकजुट कर सकती है। सांप्रदायिक सद्भाव के लिए यह आवश्यक है कि समाज धर्म के बजाय सार्वभौमिक नैतिक मूल्यों पर आधारित हो। विद्यार्थी जी कहते हैं कि जब तक समाज यह नहीं समझता कि सभी धर्मों की मूल शिक्षा समान है, तब तक विभाजन बना रहेगा। **2. सामाजिक समानता और न्याय:** लेखक दिखाते हैं कि धर्म के नाम पर जो असमानता और भेदभाव (जाति व्यवस्था, दलितों का शोषण) पैदा की गई है, उसे मिटाना आवश्यक है। सांप्रदायिक सद्भाव तब तक संभव नहीं है जब तक समाज में पूर्ण समानता न हो। विद्यार्थी जी का तर्क है कि यदि एक समुदाय दूसरे को दासता में रखे, तो सद्भाव केवल कपट होगा। **3. शिक्षा और तार्किक विचारशीलता:** लेखक शिक्षितों और विचारशील नागरिकों (विशेषकर विद्यार्थियों) से आह्वान करते हैं कि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएँ और धार्मिक अंधविश्वास को चुनौती दें। सांप्रदायिक सद्भाव तब आता है जब बुद्धिमान लोग समाज को धार्मिक कट्टरता से मुक्त करने का प्रयास करें। **4. धर्म की सही व्याख्या:** विद्यार्थी जी मानते हैं कि यदि धर्म की व्याख्या सही ढंग से की जाए—अर्थात् धर्म को मानवीय कल्याण और सामाजिक न्याय के साथ जोड़ा जाए—तो धर्म स्वयं सांप्रदायिक सद्भाव का प्रवर्तक बन सकता है। आवश्यकता है कि धर्म को संकीर्ण धार्मिक आचार-व्यवहार से परे, एक सार्वभौमिक नैतिक विचारधारा के रूप में देखा जाए। **5. सांप्रदायिक हिंसा का विरोध:** लेखक स्पष्ट करते हैं कि सांप्रदायिक सद्भाव के लिए धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा, दंगे और अन्याय का कठोर विरोध आवश्यक है। ऐसे अपराधियों को कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से दंडित किया जाना चाहिए। विद्यार्थी जी का संदेश है कि सांप्रदायिक सद्भाव केवल औपचारिक समझौते या राजनीतिक समझ से नहीं आता, बल्कि यह समाज की गहरी नैतिक चेतना से आता है। जब समाज यह स्वीकार करे कि मानवीय गरिमा सभी धर्मों से ऊपर है, तब ही सच्चा सांप्रदायिक सद्भाव संभव होगा। --- **Q2.** 'धर्म की आड़' पाठ को पढ़ने के बाद आप विद्यार्थी जी के विचारों को आधुनिक भारतीय समाज के संदर्भ में कैसे मूल्यांकन करेंगे? (5 अंक) **उत्तर:** गणेश शंकर विद्यार्थी का यह पाठ लगभग एक शताब्दी पहले लिखा गया था, किंतु इसकी प्रासंगिकता आधुनिक भारतीय समाज में अत्यधिक है। इसका मूल्यांकन निम्नलिखित दृष्टिकोणों से किया जा सकता है: **समकालीन प्रभाव:** विद्यार्थी जी का विचार कि "धर्म मनुष्य के लिए है" आज भी पूर्णतः सत्य है। आज के भारत में भी हम देखते हैं कि धर्म के नाम पर सांप्रदायिक हिंसा (दंगे, लिंचिंग, भेदभाव) होती रहती है। धार्मिक राजनीति और कट्टरवाद भारतीय समाज के लिए एक गंभीर समस्या बना हुआ है। विद्यार्थी जी का यह संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है—कि धर्म का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए। **शिक्षा की भूमिका:** विद्यार्थी जी शिक्षितों और विद्यार्थियों से बड़ी आशा रखते हैं। आधुनिक समय में भी शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जो लोगों को तार्किक चिंतन और वैज्ञानिक सोच से युक्त कर सकता है, जिससे वे धार्मिक अंधविश्वास और झूठी परंपराओं को चुनौती दे सकें। आज के विद्यार्थी, जो सोशल मीडिया और शिक्षा के माध्यम से संवेदनशील हो रहे हैं, वास्तव में विद्यार्थी जी के आह्वान का समर्थन कर रहे हैं। **सामाजिक न्याय का अधूरापन:** विद्यार्थी जी जाति और धर्म के आधार पर होने वाले भेदभाव की तीव्र आलोचना करते हैं। भारत में संवैधानिक समानता के 75 सालों के बाद भी, जातिगत भेदभाव, दलितों का शोषण, और अल्पसंख्यकों के विरुद्ध भेदभाव जारी है। यह दर्शाता है कि विद्यार्थी जी के विचार अभी भी पूर्णतः प्रासंगिक हैं। **वर्तमान चुनौतियाँ:** आज के भारत में धार्मिक राजनीति का उदय हुआ है, जहाँ राजनीतिक दल सांप्रदायिकता को राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करते हैं। यह विद्यार्थी जी के तर्क को और अधिक प्रासंगिक बनाता है कि यदि धर्म को राजनीति से अलग न किया जाए, तो सांप्रदायिक सद्भाव असंभव है। **सकारात्मक पहलू:** साथ ही, भारत में अंतरधार्मिक संवाद, सर्वधर्म समभाव, और धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक ढाँचे के कारण भी बहुत सकारात्मक प्रयास हो रहे हैं। कई सामाजिक संगठन, एनजीओ, और जागरूक नागरिक विद्यार्थी जी के विचारों को व्यावहारिक रूप में लागू कर रहे हैं। **निष्कर्ष:** विद्यार्थी जी के विचार न केवल आधुनिक भारत में प्रासंगिक हैं, बल्कि ये आज के भारत की सबसे बड़ी समस्याओं—सांप्रदायिकता और धार्मिक कट्टरता—का समाधान भी प्रस्तुत करते हैं। उनका आह्वान कि हम सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक सोच, और मानवीय नैतिकता के आधार पर एक समावेशी समाज बनाएँ, आज की सबसे जरूरी आवश्यकता है। --- **Q3.** विद्यार्थी जी ने अपने लेख में शिक्षितों और विद्यार्थियों को किस तरह एक समाज निर्माता के रूप में चित्रित किया है? इस दृष्टिकोण की समालोचनात्मक व्याख्या प्रस्तुत करें। (5 अंक) **उत्तर:** 'धर्म की आड़' पाठ में विद्यार्थी जी शिक्षितों और विद्यार्थियों को एक क्रांतिकारी भूमिका देते हैं। उनका दृष्टिकोण आशावादी और दूरदर्शी है: **शिक्षितों की भूमिका:** विद्यार्थी जी मानते हैं कि समाज के विचारशील और शिक्षित लोग कट्टरता और अंधविश्वास के विरुद्ध मानसिक रूप से प्रतिरोध कर सकते हैं। वे कहते हैं कि शिक्षित व्यक्ति धर्मग्रंथों की सही व्याख्या कर सकता है, और धार्मिक कट्टरपंथियों की गलत व्याख्या को चुनौती दे सकता है। इस प्रकार, शिक्षितजन समाज को ज्ञान और तर्क के माध्यम से सही रास्ते पर लाते हैं। **विद्यार्थियों का विशेष महत्व:** विद्यार्थी जी विशेषकर विद्यार्थियों (युवाओं) से आह्वान करते हैं क्योंकि उनके विचार में युवा वर्ग समाज का भविष्य है। विद्यार्थी ऊर्जावान, आदर्शवादी, और परिवर्तनकामी होते हैं। यदि विद्यार्थी धर्मनिरपेक्षता, समानता, और न्याय को अपने मूल्य बनाएँ, तो वे आने वाली पीढ़ियों को भी इन मूल्यों की ओर निर्देशित कर सकते हैं। विद्यार्थी जी का विचार है कि शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थी समाज को बदलने की क्षमता रखते हैं। **सामाजिक कर्तव्य:** विद्यार्थी जी के अनुसार, शिक्षितों और विद्यार्थियों का सामाजिक कर्तव्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज के उत्थान में योगदान देना है। उन्हें सांप्रदायिक सद्भाव की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। यह दृष्टिकोण एक सामाजिक दায़ित्व की भावना को जन्म देता है। **समालोचनात्मक विश्लेषण:** (a) **सकारात्मक पहलू:** विद्यार्थी जी का यह दृष्टिकोण अत्यंत प्रेरणादायक और व्यावहारिक है। इतिहास बताता है कि सामाजिक परिवर्तन अक्सर शिक्षितों और युवाओं के नेतृत्व में ही आते हैं। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक सुधार आंदोलन, और आधुनिक नागरिक अधिकार आंदोलन—सभी में युवा और शिक्षित वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। (b) **सीमाएँ:** हालांकि, विद्यार्थी जी का यह दृष्टिकोण कुछ सीमाएँ भी रखता है। सामाजिक परिवर्तन केवल शिक्षा और विचार के माध्यम से नहीं होता। संरचनात्मक परिवर्तन, आर्थिक न्याय, और राजनीतिक सुधार भी आवश्यक हैं। साथ ही, शिक्षित वर्ग स्वयं में विभाजित हो सकता है, और विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं को अपना सकता है। आज का अनुभव दिखाता है कि कई शिक्षित लोग भी सांप्रदायिक विचारों को अपनाते हैं। (c) **व्यावहारिक चुनौतियाँ:** विद्यार्थी जी के समय में जहाँ समाज की भूमिका सीमित थी, आज सोशल मीडिया और जनसंचार माध्यम अधिक शक्तिशाली हैं। अधिकतर लोग अपने पूर्वाग्रहों में जकड़े रहते हैं, और सामाजिक मनोविज्ञान दिखाता है कि तर्क हमेशा भावनाओं को परास्त नहीं करता। **निष्कर्ष:** विद्यार्थी जी का दृष्टिकोण आदर्शवादी और प्रेरणादायक है। वे युवाओं और शिक्षितों को समाज परिवर्तन का अग्रदूत मानते हैं। जबकि इस दृष्टिकोण की कुछ सीमाएँ हैं, फिर भी इसका मूलभाव सत्य है—शिक्षा, चेतना, और युवा ऊर्जा ही समाज को धार्मिक कट्टरता से मुक्त कर सकती है। आज के समय में भी इस आह्वान की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है।

HOTS & Case-Study Question with Step-by-Step Solution

**Case Study: धर्म और समाज—एक जटिल मुद्दा** (निम्नलिखित परिस्थिति को पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें।) भारत के एक शहर में, दो धार्मिक समुदाय—A और B—के बीच सदियों से तनाव बना हुआ है। राजनीतिक दलें इसी तनाव को भड़काकर चुनाव जीतते हैं। A समुदाय के नेता कहते हैं, "हमारा धर्म सर्वश्रेष्ठ है और इसे संरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है।" B समुदाय के नेता भी ऐसी ही बातें कहते हैं। समय-समय पर उनकी भड़ास से दंगे भी हो जाते हैं। परंतु इसी शहर में एक सरकारी स्कूल है, जहाँ A और B दोनों समुदायों के बच्चे साथ पढ़ते हैं, खेलते हैं, और गहरी दोस्ती करते हैं। जब ये बच्चे 18 साल के हो जाते हैं, तब कुछ तो सांप्रदायिक दृष्टिकोण अपनाते हैं, लेकिन बहुत से अपनी बचपन की दोस्ती को बनाए रखते हैं और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए काम करते हैं। **प्रश्न 1:** गणेश शंकर विद्यार्थी के विचारों के आधार पर, इस परिस्थिति में धर्म के किस प्रकार का दुरुपयोग दिखाई दे रहा है? (2 अंक) **उत्तर:** विद्यार्थी जी के विचारों के अनुसार, यह परिस्थिति धर्म के दुरुपयोग का एक स्पष्ट उदाहरण है क्योंकि: (i) राजनीतिक नेता धर्म का उपयोग अपने राजनीतिक हितों के लिए कर रहे हैं, (ii) धर्म को विभाजन का औजार बनाया जा रहा है, जो विद्यार्थी जी के अनुसार धर्म का सबसे बड़ा दुरुपयोग है, (iii) धर्म का असली अर्थ—मानवीय कल्याण और न्याय—पूर्णतः भुला दिया गया है। विद्यार्थी जी कहते हैं कि "धर्म की आड़" यहाँ स्पष्ट दिखाई दे रही है—धर्म सांप्रदायिक हिंसा और राजनीतिक लाभ को छिपाने का साधन बन गया है। **प्रश्न 2:** विद्यार्थी जी के अनुसार, सांप्रदायिक सद्भाव के लिए इस शहर को कौन-सी बातें करनी चाहिए? (3 अंक) **उत्तर:** विद्यार्थी जी के विचारों के आधार पर, इस शहर को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए: (i) **शिक्षा पर ध्यान देना:** स्कूल में चल रही वर्तमान प्रणाली (A और B के बच्चों को साथ पढ़ाना) को प्रोत्साहित करना चाहिए, क्योंकि यह सांप्रदायिक सद्भाव का असली आधार है। विद्यार्थी जी मानते हैं कि शिक्षा ही सांप्रदायिकता का सबसे बड़ा इलाज है। (ii) **राजनीति को धर्म से अलग करना:** सांप्रदायिक सद्भाव के लिए राजनीतिक नेताओं को धर्म का उपयोग चुनाव में नहीं करना चाहिए। नागरिकों को भी यह समझना चाहिए कि सांप्रदायिक नेता उन्हें अपने हित के लिए भड़का रहे हैं। (iii) **मानवीय नैतिकता पर आधार:** दोनों समुदायों के बुद्धिजीवियों को एक मंच पर आना चाहिए और यह स्वीकार करना चाहिए कि उनके धर्मों की मूल शिक्षा समान है—मानवीय कल्याण। यह विद्यार्थी जी का मुख्य संदेश है। **प्रश्न 3:** इस परिस्थिति में जो युवा सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रख रहे हैं, क्या विद्यार्थी जी उन्हें समाज परिवर्तन का माध्यम मान सकते हैं? कारण सहित व्याख्या करें। (5 अंक) **उत्तर:** हाँ, विद्यार्थी जी निश्चित रूप से इन युवाओं को समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम मान सकते हैं। आइए इसे विस्तार से समझें: **विद्यार्थी जी का सिद्धांत:** विद्यार्थी जी अपने पाठ में विशेषकर युवाओं और शिक्षितों से आह्वान करते हैं कि वे समाज को सांप्रदायिक सद्भाव की ओर ले जाएँ। वे युवाओं को "भविष्य का निर्माता" मानते हैं। **इन युवाओं की विशेषताएँ:** जो युवा अपनी बचपन की दोस्ती को बनाए रख रहे हैं, उनमें वे गुण हैं जो विद्यार्थी जी को चाहिए: (i) तार्किक सोच—वे अंधविश्वास नहीं, बल्कि मानवीय संबंधों को महत्व देते हैं। (ii) साहस—सांप्रदायिक दबाव के बावजूद वे अपना रुख नहीं बदलते। (iii) सामाजिक दायित्व—वे समझते हैं कि सांप्रदायिक सद्भाव समाज के लिए आवश्यक है। **परिवर्तन की संभावना:** यदि ये युवा अपने समुदायों में नेतृत्व करें, तो कई सकारात्मक बदलाव संभव हैं: - वे अपने माता-पिता और समुदाय को समझा सकते हैं कि सांप्रदायिकता गलत है। - वे स्कूलों में शांति क्लब और सांद्भाविकता कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं। - वे मीडिया के माध्यम से सकारात्मक संदेश प्रसारित कर सकते हैं। - वे अंतरधार्मिक संवाद को बढ़ावा दे सकते हैं। **विद्यार्थी जी की दृष्टि:** विद्यार्थी जी का पूरा पाठ इसी आशा पर आधारित है कि युवा और शिक्षित वर्ग समाज को बदल सकते हैं। इस परिस्थिति में ये युवा ठीक उसी भूमिका को निभा रहे हैं जो विद्यार्थी जी उनसे उम्मीद करते थे। **निष्कर्ष:** हाँ, विद्यार्थी जी इन युवाओं को पूरी तरह समाज परिवर्तन का माध्यम मान सकते हैं। वे विद्यार्थी जी के आह्वान का जीवंत उदाहरण हैं—युवा, विवेकशील, और समाज-केंद्रित। यदि ऐसे युवा अपनी भूमिका को समझें और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए सक्रियता से काम करें, तो भारतीय समाज में एक नया, अधिक न्यायसंगत और समावेशी समाज का निर्माण संभव है।

How CBSETUTOR.ai's AI Tutor Drills These Question Patterns Daily

CBSETUTOR.ai is built on a scientifically-proven learning architecture that helps Class 9 students in India master Chapter 7 'धर्म की आड़' through adaptive, daily practice aligned with your exam goals. **Personalized Daily Drills:** Every student receives a custom study plan based on their learning level. The AI analyzes your past responses to identify weak areas—e.g., if you struggle with 5-mark essay questions, the system prioritizes exactly those patterns. You practise the same question type (MCQ, 2-mark, 3-mark, 5-mark, HOTS) daily in a randomized sequence to prevent memory-based learning and build genuine understanding. **NCERT-Aligned Content:** Every question in our database is cross-checked against the 2024-25 CBSE rationalized syllabus and official NCERT textbooks. No guesswork, no outdated material. When you answer, the AI explains not just the correct answer, but the textbook logic behind it—e.g., why विद्यार्थी जी's critique of धर्म का दुरुपयोग must include specific textual evidence. **Real-Time Feedback Loop:** You submit your answer (even rough drafts), and our AI instantly grades it against official board rubrics. For a 5-mark essay, it checks: (i) thesis clarity, (ii) textual evidence count, (iii) argument coherence, (iv) modern relevance, (v) conclusion strength. You get a score + specific revision tips (e.g., "Add one more contemporary example to strengthen your सांप्रदायिक सद्भाव argument"). **Timed Exam Simulations:** Once or twice a week, you take a full-length mock Hindi exam (40 mins for Literature) under exam conditions. The AI tracks your time management, accuracy, and confidence level. Over 12 weeks, most students improve their Literature score by 8–12 marks. **Spaced Repetition Engine:** Our system doesn't make you drill the same question twice. Instead, the AI surfaces similar questions on a spaced schedule—e.g., you answer one MCQ on धर्म का दुरुपयोग today, then a similar-but-different MCQ on it after 3 days, then a 2-mark application question on the same concept a week later. This hardwires concepts into long-term memory. **Board-Specific Language Training:** The AI teaches you to write in formal Hindi (Sparsh-standard) and recognizes common errors: incorrect verb tenses, weak connectives, vague topic sentences. For long-answer questions, it guides you to structure essays as: Introduction (paraphrase Q + thesis) → Body Paragraphs 1, 2, 3 (each with topic sentence + 2–3 supporting points) → Conclusion (restate thesis + relevance). You practise this formula on 10+ variations of the same concept. **Parent & Teacher Dashboards:** If you're a parent or teacher, you see weekly reports: questions answered, accuracy %, time per question, identified weak topics. You can nudge students toward areas needing work—e.g., "Your child scored 6/10 on 3-mark questions; let's focus there this week." **Confidence Meter & Mastery Tracking:** After each question, you rate your confidence (0–100%). The system only marks a concept "Mastered" when you achieve ≥85% accuracy AND high confidence on 5+ variations of that concept. You track mastery visually—e.g., "धर्म की आड़: 78% mastery; विद्यार्थी जी का आह्वान: 92% mastery." **Community Learning:** In the CBSETUTOR.ai app, you can submit your essay answers to a verified tutor network. Hindi experts review your work (within 24 hours) and give personalized feedback on style, arguments, and relevance—simulating the human touch. **Start a 3-day free trial at cbsetutor.ai and see how AI-driven daily drills transform your Chapter 7 mastery and board exam score.** No credit card required.

Frequently asked questions

What is the main theme of 'धर्म की आड़' by Ganesha Shankar Vidyarthi?+
The essay critiques how religion is misused to justify communal violence, caste discrimination, and social inequality. Vidyarthi argues that true religion (धर्म) should be based on universal human values—truth, justice, equality—not divisive rituals or sectarian nationalism. He calls on educated youth and intellectuals to build communal harmony (सांप्रदायिक सद्भाव) by separating ethics from organized religion.
How does Vidyarthi distinguish between religion (धर्म) and its misuse (दुरुपयोग)?+
Vidyarthi says true धर्म promotes human welfare, social justice, and universal ethics. Its दुरुपयोग happens when religious leaders exploit faith to maintain power, justify caste hierarchies, incite communal riots, or oppress minorities. He argues religion should serve humanity; humanity should not be enslaved by religion.
Why does Vidyarthi specifically call on students and educated people?+
Vidyarthi believes students and intellectuals have the power to transform society through logical thinking, secular education, and moral courage. They can resist religious dogma, expose false interpretations of scripture, and build bridges between communities. He sees education as the antidote to superstition and bigotry.
What role does 'सांप्रदायिक सद्भाव' (communal harmony) play in the text?+
Communal harmony is Vidyarthi's vision for India's future. It requires: (1) shared secular ethics beyond religion, (2) social equality regardless of caste/faith, (3) scientific thinking over superstition, (4) political systems based on justice, not religious preference. It's achievable only when society rejects the weaponization of faith.
How is 'धर्म की आड़' relevant to modern India?+
The essay remains urgent because modern India still faces communal violence, caste-based discrimination, and political exploitation of religion. Vidyarthi's call for secular values, education, and social justice directly addresses today's challenges of majoritarian politics and religious polarization.
What is the significance of the title 'धर्म की आड़'?+
'आड़' means cover or screen. The title suggests that religion is used as a mask to hide injustice, oppression, and violence. Vidyarthi exposes how vested interests—political, economic, social—hide behind religious rhetoric, making it appear legitimate to commit immoral acts.
Which question types appear most frequently on CBSE Class 9 Hindi boards for this chapter?+
Typically: 1–2 MCQs (धर्म का दुरुपयोग / सांप्रदायिक सद्भाव), two 2-mark definition questions, one 3-mark textual analysis, and one 5-mark essay on Vidyarthi's vision or modern relevance. HOTS questions test critical thinking and application to real-world scenarios.
How should I structure a 5-mark answer on this chapter?+
Introduction: paraphrase the question + state your thesis clearly. Body (2–3 paragraphs): present one main idea per paragraph with (a) a topic sentence, (b) textual evidence from the chapter, (c) a critical comment or modern example. Conclusion: restate thesis, add relevance to society today. Use connectives (अतः, इसलिए, उदाहरण के लिए) and formal Hindi.

Ready to give your Class 9 child the tutor that never sleeps?

CBSETUTOR.ai covers every chapter in the Class 9 NCERT syllabus — Maths, Science, Social Science, English, Hindi and more. 24×7. Patient. Unlimited. 3-day free trial.

Start your child's 3-day free trial →