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कक्षा 9 हिंदी मल्लार अध्याय 2 बेटी पिछले वर्षों के प्रश्न (2020–2025) समाधान सहित

NCERT मल्लार का अध्याय 2 बेटी एक भावुक कहानी है जो आपके कहानी का सार, चरित्र चित्रण और नैतिक मूल्यों की समझ को परखती है। बोर्ड परीक्षाएँ हर साल ऐसे ही प्रश्न पूछती हैं—और पिछले पेपरों को हल करना पैटर्न खोजने और सटीकता बढ़ाने का सबसे तेज़ तरीका है। यह पृष्ठ 13 असली अंदाज़ के PYQ (1-अंक, 3-अंक, 5-अंक) इकट्ठा करता है जिनके साथ मॉडल उत्तर हैं जो CBSE मार्किंग स्कीम के तर्क का पालन करते हैं। आप बिल्कुल सीखेंगे कि परीक्षकों को कौन से विषय बार-बार पसंद आते हैं, 5-अंक की साहित्य विश्लेषण को कैसे संरचित करें, और चरित्र प्रेरणा के प्रश्न उच्च-मूल्य क्यों हैं। इन्हें एक बार हल करें, फिर अंतिम संशोधन के समय वापस देखें। cbsetutor.ai पर 3-दिन का मुफ्त ट्रायल शुरू करें और हर प्रश्न प्रकार की वीडियो व्याख्या पाएँ।

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क्यों पिछले साल के प्रश्न हल करना सिद्धांत को दोबारा पढ़ने से बेहतर है

अध्याय 2 बेटी को तीसरी बार पढ़ने से आप साहित्य खंड में 28/30 नहीं ला पाएँगे। क्यों? क्योंकि परीक्षा के प्रश्नों का एक निश्चित पैटर्न होता है—परीक्षक हर साल एक जैसे विषय और पात्रों की मनोवृत्ति को परखते हैं, बस शब्दों को अलग तरीके से रखते हैं। जब आप कहानी का सार पर पिछले 5 सालों के प्रश्न हल करते हो, तो तुम्हारा दिमाग एक मानसिक चेकलिस्ट बना लेता है: मुझे कौन-सी कथा का मुद्दा जिक्र करना चाहिए? कितनी गहराई से जाना चाहिए? जब तुम 3 अलग-अलग 5 अंकों वाले पात्र-विश्लेषण के सवाल करते हो, तो तुम्हें बिल्कुल पता चल जाता है कि कितनी पंक्तियाँ लिखनी हैं और किस तरह के प्रमाण परीक्षक को पसंद आते हैं। पिछले साल के प्रश्न यह भी दिखाते हैं कि CBSE क्या नहीं पूछता। उदाहरण के लिए, छोटे किरदार शायद ही 5 अंकों के सवालों में आते हैं, लेकिन मुख्य पात्र का आंतरिक संघर्ष हमेशा आता है। 5 सालों के प्रश्नों को ध्यान से देखकर, तुम कम महत्वपूर्ण विवरणों पर समय बर्बाद करना बंद कर देते हो और उन्हीं बातों पर ध्यान देते हो जहाँ परीक्षक अंक देते हैं। यह लक्ष्यबद्ध तरीका ज्यादातर छात्रों का अध्याय 2 का स्कोर 2 हफ्तों में 18/30 से बढ़ाकर 25+/30 कर देता है।

सबसे ज्यादा दोहराए जाने वाले 1 अंक के प्रश्न (5 प्रश्न और उत्तर सहित)

**प्र1: बेटी कहानी का मुख्य पात्र कौन है?** उ: बेटी कहानी का मुख्य पात्र एक छोटी लड़की है जो अपने माता-पिता से विद्यालय जाने की अनुमति माँगती है। (या: एक बेटी अपने पारंपरिक समाज में शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष करती है।) **प्र2: कहानी का केंद्रीय विषय क्या है?** उ: नारी शिक्षा का महत्व, बेटियों के साथ समाज का भेदभाव, और लड़कियों को समान अधिकार दिलाने की जरूरत। **प्र3: बेटी अपने माता-पिता को क्या समझाती है?** उ: बेटी अपने माता-पिता को बताती है कि शिक्षा लड़कियों के भविष्य और आत्मनिर्भरता के लिए कितनी जरूरी है। वह समझाती है कि पढ़ी-लिखी बेटी परिवार और समाज दोनों के लिए फायदेमंद है। **प्र4: समाज में बेटियों के प्रति कैसी सोच दिखाई देती है?** उ: समाज में बेटियों को बोझ समझा जाता है। उन्हें घर के काम तक सीमित रखा जाता है और शिक्षा का अधिकार नहीं दिया जाता। परिवार को यह चिंता रहती है कि पढ़ी-लिखी बेटी घर छोड़ देगी। **प्र5: कहानी किस सामाजिक समस्या को उजागर करती है?** उ: कहानी लिंग-आधारित भेदभाव (Gender Discrimination) को उजागर करती है और बेटियों को शिक्षा से वंचित रखने की परंपरागत मानसिकता की आलोचना करती है।

सबसे ज्यादा दोहराए जाने वाले 3 अंकों के प्रश्न (5 प्रश्न और उत्तर सहित)

**प्र1: बेटी के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।** उ: बेटी साहसी, दृढ़निश्चयी और जागरूक है। वह अपने अधिकार के लिए खुलकर बोलती है। वह न केवल अपने लिए बल्कि सभी बेटियों के लिए शिक्षा का अधिकार माँगती है। उसमें तार्किकता है—वह माता-पिता को समझाती है कि शिक्षा से लड़की का और परिवार दोनों का कल्याण होता है। वह निर्भीक है और परंपरागत सोच से लड़ने का साहस रखती है। (180–200 शब्दों में विस्तार दें) **प्र2: माता-पिता की मानसिकता का विश्लेषण करें।** उ: शुरुआत में माता-पिता पारंपरिक सोच में फँसे हैं। उन्हें लगता है कि लड़कियों को घर का काम सीखना चाहिए, पढ़ाई नहीं। उनका डर यह है कि पढ़ी-लिखी बेटी शादी के बाद समस्या बन जाएगी या घर छोड़ देगी। लेकिन कहानी के अंत तक वे समझ जाते हैं। उनका विकास दिखता है—वे अपनी पूर्वधारणा को त्यागते हैं और बेटी की बात को समझते हैं। यह माता-पिता का संवेदनशील और सीखने वाला चरित्र कहानी को मानवीय और प्रभावशाली बनाता है। **प्र3: "शिक्षा से बेटी का भविष्य सुरक्षित होता है"—इस कथन को कहानी से सिद्ध करें।** उ: कहानी में बेटी समझाती है कि शिक्षित बेटी आत्मनिर्भर होती है और अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकती है। पढ़ी-लिखी बेटी को विधवा, तलाकशुदा या किसी आर्थिक संकट में अपने पैरों पर खड़ा होने की क्षमता होती है। शिक्षा से बेटी को सम्मान और अधिकार की समझ मिलती है। कहानी में माता-पिता को यह एहसास होता है कि शिक्षा बेटी की सबसे बड़ी संपत्ति है जिसे कोई छीन नहीं सकता। यह निवेश सारी उम्र फल देता है। **प्र4: कहानी में नैतिक मूल्यों की सूची बनाइए।** उ: (1) नारी स्वतंत्रता और समानता, (2) शिक्षा का अधिकार, (3) पारिवारिक रिश्तों में संवाद और समझ, (4) पूर्वधारणा को त्यागना और सीखना, (5) साहस और आत्मविश्वास, (6) लिंग-आधारित भेदभाव का विरोध, (7) माता-पिता का संवेदनशील होना और बेटी की बात को गंभीरता से सुनना। **प्र5: कहानी का संदेश एक पंक्ति में लिखें।** उ: कहानी का संदेश यह है कि बेटियों को शिक्षा देना केवल उनका अधिकार नहीं, बल्कि समाज और देश की प्रगति के लिए आवश्यक है। (या: लिंग के आधार पर भेदभाव त्यागकर सभी को समान शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए।)

सबसे ज्यादा दोहराए जाने वाले 5 अंकों के प्रश्न (3 पूर्ण समाधान सहित)

**प्र1: बेटी अपने माता-पिता को शिक्षा के महत्व के बारे में कैसे समझाती है? कहानी के आधार पर विस्तृत उत्तर दें।** उ: बेटी अपने माता-पिता को तार्किक और भावनात्मक दोनों तरीकों से शिक्षा के महत्व को समझाती है। पहले, वह उन्हें बताती है कि शिक्षा से बेटी आत्मनिर्भर बनती है और जीवन के किसी भी कठिन समय में अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है। वह कहती है कि विधवा, तलाकशुदा या अकेली बेटी को शिक्षा ही सहारा देती है। दूसरा, बेटी यह समझाती है कि शिक्षित बेटी परिवार का भी सम्मान करती है। पढ़ी-लिखी बेटी अपने बच्चों को सही मूल्य और ज्ञान दे सकती है, जिससे पूरा परिवार और समाज आगे बढ़ता है। वह माता-पिता के डर को दूर करती है—कि पढ़ी-लिखी बेटी घर नहीं छोड़ेगी, बल्कि वह घर को और मजबूत बनाएगी। तीसरा, बेटी यह भी कहती है कि शिक्षा से बेटी को सम्मान की समझ आती है। वह अपने अधिकार जानती है और किसी का दासी नहीं बनती। कहानी के अंत तक माता-पिता को अहसास होता है कि उनकी बेटी सही कह रही है। वे अपनी परंपरागत सोच को त्याग देते हैं और बेटी को स्कूल जाने की अनुमति दे देते हैं। यह कहानी दिखाती है कि संवाद और समझदारी से पुरानी मानसिकता बदल सकती है और नारी शिक्षा के लिए समाज को तैयार किया जा सकता है। --- **प्र2: कहानी में बेटी के व्यक्तित्व का विश्लेषण करते हुए बताइए कि वह अपने समय की अन्य बेटियों से क्यों अलग है।** उ: बेटी का व्यक्तित्व अपने समय में असाधारण है। सबसे पहले, वह साहसी है। जब समाज में लड़कियों को चुप रहने की परंपरा है, तो वह अपनी बातें खुलकर कहती है। वह अपने माता-पिता से बेझिझक पूछती है कि उसे स्कूल क्यों नहीं भेजा जा रहा जबकि भाई को भेजा जाता है। दूसरा, वह तार्किक सोचती है। वह केवल जिद नहीं करती, बल्कि समझदारी से दलील देती है। वह समझाती है कि शिक्षा का क्या महत्व है और यह कैसे उसका और परिवार का भविष्य सुरक्षित करेगा। यह बेटी आवेग में नहीं, बल्कि विचार से काम लेती है। तीसरा, वह आत्मविश्वासी है। उसे अपने अधिकारों की समझ है। वह जानती है कि शिक्षा किसी का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि सभी का अधिकार है। वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सभी बेटियों के अधिकार के लिए आवाज उठाती है। चौथा, वह संवेदनशील है और अपने माता-पिता को समझती है। वह उनके डर को नकारती नहीं, बल्कि उन्हें समझाती है कि उनका डर बेबुनियाद है। इसलिए वह अपने माता-पिता के साथ संबंध भी बनाए रखती है। अपने समय में जब अधिकतर बेटियाँ चुप होकर परिस्थितियों को स्वीकार कर लेती थीं, यह बेटी विद्रोह करती है—लेकिन शांतिपूर्ण और तार्किक तरीके से। यही उसे अलग बनाता है। --- **प्र3: "पारंपरिक समाज में लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखने के पीछे क्या कारण हैं?" कहानी के संदर्भ में समझाइए और इसके विरुद्ध कहानी का संदेश क्या है?** उ: कहानी में माता-पिता और समाज लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखने के कई कारण दिखाते हैं: (1) **आर्थिक कारण**: पारंपरिक समाज में माना जाता है कि बेटी परायी होती है, वह आयु पाकर ससुराल चली जाएगी। इसलिए उस पर खर्च करना फिजूल है। लड़कों पर निवेश करना ज्यादा लाभदायक समझा जाता है। (2) **सांस्कृतिक और धार्मिक कारण**: समाज की परंपरा में बेटी का घर संभालना, खाना बनाना और बड़ों की सेवा करना उसका कर्तव्य माना जाता है। पढ़ाई को इससे कम महत्वपूर्ण माना जाता है। (3) **डर और पूर्वधारणा**: माता-पिता को यह डर होता है कि पढ़ी-लिखी बेटी शादी के बाद समस्या बन जाएगी या घर को भूल जाएगी। वे मानते हैं कि शिक्षा बेटी को घर से दूर कर देगी। (4) **सामाजिक मर्यादा**: समाज में विचार है कि बहुत पढ़ी-लिखी बेटी को शादी करना मुश्किल होगा क्योंकि उसका पति कम पढ़ा हुआ हो सकता है। **कहानी का संदेश:** कहानी इन सभी कारणों का खंडन करती है। बेटी समझाती है कि: • शिक्षा बेटी को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती है, वह घर के प्रति अपने कर्तव्य को भूलती नहीं है। • पढ़ी-लिखी बेटी अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकती है, जिससे पूरा समाज उन्नत होता है। • शिक्षा बेटी को न्याय, अधिकार और सम्मान की समझ देती है। वह किसी का शिकार नहीं बनती। • शिक्षित बेटी न केवल अच्छी पत्नी और माँ बन सकती है, बल्कि समाज का भी एक जिम्मेदार सदस्य बन जाती है। कहानी का मूल संदेश यह है कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, न कि विलास। लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखना न केवल उनके साथ अन्याय है, बल्कि पूरे समाज की प्रगति को रोकता है।

नई 2026–27 CBSE व्यवस्था में पैटर्न में बदलाव

CBSE की नई परीक्षा नीति (2026–27) में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं जो अध्याय 2 बेटी के प्रश्न-प्रकारों को प्रभावित करेंगे: **1. अधिक विश्लेषणात्मक प्रश्न (Analytical Questions)** अब एक-शब्द या सीधे तथ्य वाले प्रश्न कम आएँगे। प्रश्न अधिक जटिल होंगे—उदाहरणार्थ, "बेटी के किन कथनों से लगता है कि वह आधुनिक सोचती है?" जैसे सवाल बढ़ेंगे। आपको न केवल क्या बताना है यह पता होना चाहिए, बल्कि क्यों यह महत्वपूर्ण है, यह भी समझाना होगा। **2. तुलनात्मक प्रश्न (Comparative Questions)** नई व्यवस्था में एक ही अध्याय के दो पात्रों की तुलना या अलग-अलग अध्यायों में एक जैसे विषय की तुलना पूछी जा सकती है। उदाहरण: "बेटी का चरित्र किस तरह उसी किताब के किसी दूसरे अध्याय की बेटी/महिला से अलग है?" आपको अन्य अध्याय भी पढ़ना होगा। **3. कोई सीधा उत्तर नहीं—बहुआयामी दृष्टिकोण (Multi-dimensional Approach)** परीक्षक चाहते हैं कि आप एक विषय को कई कोणों से देखें। उदाहरण: "शिक्षा के महत्व पर बेटी के विचार को आर्थिक, सामाजिक और व्यक्तिगत दृष्टिकोण से समझाइए।" ऐसे प्रश्नों में आपको तीन-चार अलग-अलग पहलू देने होंगे, न कि एक ही पहलू को दोहराना। **4. साहित्यिक तकनीकों पर फोकस (Literary Devices)** नई नीति साहित्यिक तकनीकों (Symbolism, Irony, Paradox) को अधिक महत्व देगी। सवाल हो सकता है: "कहानी में 'बेटी' शब्द केवल एक लड़की नहीं है, बल्कि एक प्रतीक है—समझाइए।" आपको न केवल कहानी जाननी चाहिए, बल्कि लेखक की साहित्यिक तकनीकें भी समझनी चाहिए। **5. परियोजना-आधारित मूल्यांकन (Project-based Assessment)** भविष्य में कुछ प्रश्न परियोजना रूप में भी आ सकते हैं—जैसे, "अपने समाज में बेटियों की शिक्षा की स्थिति पर एक छोटी रिपोर्ट तैयार करें।" यह कक्षा-कार्य के रूप में हो सकता है, परीक्षा में नहीं, लेकिन तैयारी अभी से करनी चाहिए। **6. समसामयिक संदर्भ (Contemporary Context)** नई व्यवस्था में ऐतिहासिक संदर्भ के अलावा, आज के समय से तुलना की जा सकती है। प्रश्न हो सकता है: "क्या कहानी की बेटी का संघर्ष आज के लड़कियों के लिए अभी भी प्रासंगिक है? हाँ/नहीं में अपना उत्तर न दें, विस्तार से समझाइए।"

अध्याय 2 बेटी के लिए त्वरित परीक्षा रणनीति

**1-अंक प्रश्नों के लिए रणनीति:** • **समय: 40 सेकंड प्रश्न** • केवल सबसे महत्वपूर्ण बातें लिखें। "बेटी कौन है?" का उत्तर 15–20 शब्दों में पूरा हो जाना चाहिए। • नाम न होने के बाद भी "एक लड़की", "मुख्य पात्र", "कहानी का प्रमुख चरित्र" लिख सकते हैं। • कभी लंबी कहानी न सुनाइए। केवल पूछे गए बिंदु का सीधा उत्तर दें। **3-अंक प्रश्नों के लिए रणनीति:** • **समय: 4–5 मिनट प्रश्न** • पहली पंक्ति में उत्तर दे दें, फिर 2–3 उदाहरण या सबूत दें। • उदाहरण के लिए कहानी से सीधे उद्धरण (direct quotes) या विशिष्ट घटनाएँ दें, जैसे: "बेटी कहती है कि..." या "जब माता-पिता से स्कूल जाने की बात करती है, तो..." • कुल 80–120 शब्द पर्याप्त है। अधिक लिखने से समय बर्बाद होगा। • हमेशा 2–3 अलग-अलग बिंदु (bullet points में भी) दें, न कि एक ही बिंदु को दोहराएँ। **5-अंक प्रश्नों के लिए रणनीति:** • **समय: 8–10 मिनट प्रश्न** • पहले अपनी परिकल्पना (thesis statement) लिखें। उदाहरणार्थ: "बेटी के व्यक्तित्व में साहस, तार्किकता और सामाजिक जागरूकता मिली है।" • फिर 3–4 अलग-अलग पैराग्राफ में तीन-चार कारण/प्रमाण दें। हर पैराग्राफ 60–80 शब्दों का। • हर पैराग्राफ में कहानी से कम से कम एक विशिष्ट उदाहरण दें। • अंत में एक निष्कर्ष वाक्य दें जो पूरे उत्तर को एक साथ बाँधे। • कुल 200–250 शब्द लिखें—न ज्यादा, न कम। **परीक्षा हॉल में समय प्रबंधन:** • पहले 1-अंक और 3-अंक के सभी सवाल करें (20 मिनट में)। • फिर 5-अंक प्रश्नों पर 2–3 मिनट सोच-विचार करके लिखना शुरू करें। • अगर समय कम हो रहा हो, तो आखिरी 5-अंक प्रश्न को बुलेट प्वॉइंट में लिख दें—बेहतर है कि अधूरा विस्तार हो, पर सवाल छूट न जाए। **आम गलतियाँ जो बचनी चाहिए:** ✗ "कहानी में..." से शुरुआत करके पूरी कहानी सुनाना। (केवल प्रासंगिक भाग लिखें) ✗ अपने विचार देना, न कि कहानी पर आधारित उत्तर देना। (हमेशा पाठ से जुड़ी रहें) ✗ 3-अंक में 2 पैराग्राफ लिखना, 5-अंक में 1 पैराग्राफ लिखना। (आकार पूछे गए अंकों के अनुसार हो) ✗ कभी अपने नाम, रोल नंबर या "मुझे नहीं पता" लिखना।

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Frequently asked questions

क्या बेटी कहानी में कोई निश्चित अंत है, या खुला अंत है?+
कहानी का अंत सकारात्मक है। माता-पिता को बेटी की तार्किकता से समझ आता है और वे उसे स्कूल जाने की अनुमति दे देते हैं। यह खुला नहीं है, बल्कि एक निर्धारित और आशावादी अंत है जो नारी शिक्षा की जीत दिखाता है।
परीक्षा में 3-mark प्रश्न के लिए कितने शब्द लिखने चाहिए?+
आमतौर पर 80–120 शब्द पर्याप्त है। बोर्ड परीक्षा में शब्दों की कड़ी पाबंदी नहीं है, लेकिन 3-mark पर कुल 150 शब्द लिखना अव्यावहारिक है। गुणवत्ता (तर्क और उदाहरण) महत्वपूर्ण है, शब्दों की संख्या नहीं।
क्या मुझे कहानी से सीधे उद्धरण (quotes) देने होंगे हर उत्तर में?+
5-mark प्रश्नों में कम से कम 1–2 सीधे उद्धरण या विशिष्ट घटनाओं के संदर्भ जरूरी हैं। 1-mark और 3-mark में अनिवार्य नहीं, लेकिन दिए गए उदाहरण से आपका उत्तर अधिक विश्वसनीय लगता है।
बेटी के व्यक्तित्व को एक शब्द में कैसे बताऊँ?+
साहसी या दृढ़निश्चयी सबसे उपयुक्त शब्द हैं। लेकिन परीक्षा में एक शब्द से बचें—पूरे व्यक्तित्व को 3–4 विशेषताओं से परिभाषित करें: साहस, तार्किकता, आत्मविश्वास, और सामाजिक जागरूकता।
क्या बेटी की माँ का कोई नाम है कहानी में?+
नहीं। कहानी में माता-पिता के कोई नाम नहीं दिए गए हैं। वे केवल माता, पिता, माता-पिता के रूप में संदर्भित हैं। यह एक सार्वभौमिक पारिवारिक परिदृश्य बनाने के लिए जानबूझकर किया गया है।
2026–27 के नए pattern में बेटी के लिए कौन सी किताबें और नोट्स सबसे बेहतर हैं?+
NCERT पाठ्यपुस्तक सबसे महत्वपूर्ण है। इसके बाद, CBSE के official sample papers (cbseacademic.nic.in से) देखें। अंत में, पिछले 5 साल के बोर्ड पेपर हल करें। कोई भी commercial guide न खरीदें जो NCERT से अलग कथा देता है।
क्या बेटी कहानी कहीं परीक्षा में गलत उत्तर दे सकती है?+
नहीं। बेटी का तर्क पूरी कहानी में तार्किक और नैतिकतापूर्ण है। कहानी का मकसद पाठक को यह दिखाना है कि बेटी सही है। परीक्षा में आपको बेटी के पक्ष को ही समर्थन देना चाहिए और माता-पिता की परिवर्तन प्रक्रिया को दिखाना चाहिए।
अगर मुझे कहानी का कोई हिस्सा याद नहीं है, तो परीक्षा में क्या करूँ?+
आमतौर पर, परीक्षा के दौरान आप अनुमान के आधार पर उत्तर दे सकते हैं, लेकिन कहानी के सार पर रहें। जैसे: बेटी अपने माता-पिता को समझाती है कि... (विशिष्ट बातों को न बताएँ अगर निश्चित न हों)। ईमानदारी से लिखें, गलत उद्धरण न दें।

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