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Class 9 Hindi Mallar Chapter 7: झाँसी की रानी — Complete Important Questions & Solutions
Chapter 7 झाँसी की रानी from Mallar is a cornerstone text in Class 9 Hindi, celebrating the courage and sacrifice of Rani Lakshmibaí of Jhansi. This subheading-rich poem by Subhadra Kumari Chauhan appears consistently in CBSE board examinations, with questions spanning poetry appreciation, character analysis, and thematic depth. Our expertly curated question bank—aligned strictly with the 2024-25 NCERT rationalized syllabus—covers 1-mark MCQs, 2-mark short answers, 3-mark analysis, 5-mark essays, and HOTS-style case studies. Each solution is pedagogically sound and board-pattern ready. CBSETUTOR.ai's AI tutor drills these exact question types daily, ensuring your preparation mirrors real exam conditions.
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झाँसी की रानी is a prescribed poem in the Class 9 Hindi—Mallar syllabus, and board examiners prioritize this chapter for testing both rote and analytical understanding. The 2024-25 rationalized curriculum emphasizes कविता आस्वादन (poetry appreciation), requiring students to identify literary devices, thematic layers, and historical-cultural context. Board questions typically blend comprehension (MCQ/short-answer) with interpretive depth (3- and 5-mark essay questions). The poem's dual focus—वीरता (heroism) and बलिदान (sacrifice)—creates natural avenues for HOTS questions that ask students to relate Rani Lakshmibaí's actions to broader concepts of patriotism and duty. Expect 8–12 marks allocated to this chapter in the final exam. Our question set is calibrated to represent authentic board difficulty and vocabulary patterns.
1-Mark Multiple-Choice Questions (MCQs) with Answers
**Q1. झाँसी की रानी कविता किस कवि द्वारा रचित है?**
A) महादेवी वर्मा
B) सुभद्रा कुमारी चौहान
C) सुमित्रानंदन पंत
D) रामधारी सिंह 'दिनकर'
**Answer: B) सुभद्रा कुमारी चौहान**
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**Q2. रानी लक्ष्मीबाई किस रियासत की रानी थीं?**
A) इंदौर
B) झाँसी
C) ग्वालियर
D) राजस्थान
**Answer: B) झाँसी**
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**Q3. कविता में 'खूब लड़ी मर्दानी' पंक्ति किसके लिए कही गई है?**
A) एक सैनिक के लिए
B) रानी लक्ष्मीबाई के लिए
C) एक दास्य के लिए
D) एक किसान के लिए
**Answer: B) रानी लक्ष्मीबाई के लिए**
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**Q4. कविता का मुख्य विषय क्या है?**
A) प्रेम और रोमांस
B) वीरता और बलिदान
C) प्रकृति का सौंदर्य
D) सामाजिक सुधार
**Answer: B) वीरता और बलिदान**
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**Q5. 'बुन्देले हरबोलों के मुँह' पंक्ति का क्या अर्थ है?**
A) बुंदेलखंड के लोगों में
B) बुंदेलखंड के योद्धाओं के बीच
C) बुंदेलखंड की महिलाओं में
D) बुंदेलखंड के इतिहास में
**Answer: B) बुंदेलखंड के योद्धाओं के बीच**
2-Mark Short-Answer Questions with Solutions
**Q1. कविता में रानी लक्ष्मीबाई के वीरता के कौन से उदाहरण दिए गए हैं? (2 अंक)**
**उत्तर:** कविता में रानी की वीरता को दर्शाते हुए कई उदाहरण दिए गए हैं। रानी ने अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष किया और अपनी सेना का नेतृत्व किया। कविता में कहा गया है 'खूब लड़ी मर्दानी', जो उनके साहस को रेखांकित करता है। वे घोड़े पर सवार होकर युद्ध के मैदान में लड़ीं और अंत तक डटी रहीं, जो उनकी असाधारण वीरता का प्रमाण है।
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**Q2. 'बलिदान' शब्द का कविता में क्या महत्व है? (2 अंक)**
**उत्तर:** बलिदान कविता का केंद्रीय विषय है। रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी स्वतंत्रता और सम्मान के लिए अपना जीवन त्याग दिया। यह बलिदान न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका बलिदान लाखों भारतीयों को प्रेरणा देता है और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करता है।
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**Q3. कविता की भाषा-शैली पर टिप्पणी करें। (2 अंक)**
**उत्तर:** सुभद्रा कुमारी चौहान ने सरल, सुबोध और प्रभावी भाषा का प्रयोग किया है। कविता में संवेदनशील शब्दावली (वीर, मर्दानी, खूब लड़ी) का चयन वीरता के भाव को उजागर करता है। दोहा जैसे पारंपरिक छंद का उपयोग कविता को लय और संगीतात्मकता देता है। राष्ट्रीय चेतना की भावना को व्यक्त करने के लिए भाषा पूर्णतः अनुकूल है।
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**Q4. रानी लक्ष्मीबाई का राजनीतिक और व्यक्तिगत संघर्ष क्या था? (2 अंक)**
**उत्तर:** ब्रिटिश साम्राज्य के 'डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स' के अंतर्गत झाँसी को अंग्रेजों ने अपने अधीन कर लिया। रानी का दत्तक पुत्र (दामोदर राव) को उत्तराधिकार से वंचित किया गया। इसी के विरोध में रानी ने विद्रोह किया और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। व्यक्तिगत स्तर पर वह एक माँ और पत्नी थीं, लेकिन राष्ट्रीय सम्मान के लिए उन्होंने सभी कुछ त्याग दिया।
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**Q5. कविता में 'बुंदेलखंड' का विशेष उल्लेख क्यों है? (2 अंक)**
**उत्तर:** बुंदेलखंड रानी लक्ष्मीबाई की रियासत झाँसी का क्षेत्र है। यह भारत का एक गौरवशाली ऐतिहासिक क्षेत्र है, जहाँ अनेक वीर योद्धाओं का जन्म हुआ। बुंदेलखंड के 'हरबोल' (योद्धा) रानी की वीरता की गाथा गाते हैं। इसका उल्लेख कविता में इसलिए है कि रानी की वीरता को एक ऐतिहासिक और भौगोलिक संदर्भ मिले, और यह दर्शाया जाए कि उनकी वीरता बुंदेलखंड की वीर परंपरा का अंश है।
3-Mark Analysis Questions with Full Solutions
**Q1. कविता के माध्यम से सुभद्रा कुमारी चौहान ने किस सामाजिक संदेश को प्रस्तुत किया है? (3 अंक)**
**उत्तर:** सुभद्रा कुमारी चौहान ने इस कविता के माध्यम से एक सशक्त सामाजिक संदेश दिया है। वह दर्शाती हैं कि वीरता और साहस किसी विशेष लिंग के लिए आरक्षित नहीं है। रानी लक्ष्मीबाई, एक महिला होते हुए भी, घोड़े पर सवार होकर युद्ध के मैदान में लड़ीं। यह संदेश परंपरागत रूढ़ियों को तोड़ता है और महिलाओं की क्षमता को रेखांकित करता है। कविता समकालीन भारतीय समाज को यह सीख देती है कि देश की स्वतंत्रता के लिए हर नागरिक—चाहे वह स्त्री हो या पुरुष—को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। यह राष्ट्रवादी चेतना और सामाजिक समानता दोनों का प्रतीक है।
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**Q2. कविता में काव्य की कौन-कौन सी विशेषताएँ दिखाई देती हैं? उदाहरण सहित समझाइए। (3 अंक)**
**उत्तर:** इस कविता में अनेक काव्यात्मक विशेषताएँ हैं:
(१) **छंद:** दोहा छंद का प्रयोग कविता को संगीतात्मक बनाता है। दोहे की लय पाठक को आकर्षित करती है।
(२) **अलंकार:** 'खूब लड़ी मर्दानी' में अनुप्रास अलंकार है (म की पुनरावृत्ति)। 'बुन्देले हरबोलों के मुँह' में रूपक अलंकार है।
(३) **भाषागत सरलता:** कविता सरल, सुबोध हिंदी में लिखी है, जिससे आम जनता तक संदेश पहुँचता है।
(४) **राष्ट्रीय चेतना:** कविता में देशभक्ति और वीरता का भाव पूरी तरह व्यक्त है, जो पाठकों को अनुप्रাणित करता है।
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**Q3. 'खूब लड़ी मर्दानी अब' पंक्ति का सांदर्भिक विश्लेषण करें। (3 अंक)**
**उत्तर:** यह पंक्ति कविता का सबसे प्रसिद्ध अंश है। 'खूब लड़ी' शब्द रानी की असाधारण वीरता को दर्शाता है, जबकि 'मर्दानी' (पुरुषों जैसी साहसी) यह संकेत देता है कि महिलाएँ भी पुरुषों के समान साहसी हो सकती हैं। 'अब' शब्द समय की निर्णायक घड़ी को चिन्हित करता है—वह क्षण जब रानी ने आत्मसमर्पण से इंकार कर दिया और आजीवन संघर्ष का मार्ग चुना। ऐतिहासिक संदर्भ में, यह पंक्ति झाँसी पर ब्रिटिश कब्जे के बाद रानी के विद्रोह का प्रतीक है। भाषागत स्तर पर, यह पंक्ति लोकगीत की परंपरा को जीवंत करती है, जहाँ बुंदेले हरबोल रानी की वीरता की गाथा गाते हैं।
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**Q4. कविता के अंत में रानी के मृत्यु की घोषणा का कविता के समस्त भाव से संबंध स्पष्ट करें। (3 अंक)**
**उत्तर:** कविता के अंत में रानी की मृत्यु की घोषणा एक त्रासद, पर महिमामंडित क्षण है। यह अंत बलिदान की अवधारणा को पूर्ण करता है। रानी को जीवित रहने का विकल्प नहीं था—या तो अंग्रेजों के समक्ष समर्पण करो, या आजादी के लिए लड़ो। उन्होंने आजादी का रास्ता चुना, भले ही यह मृत्यु पर पहुँचे। इसलिए उनकी मृत्यु दुःखद नहीं, बल्कि गौरवान्वित है। कविता का संपूर्ण भाव—वीरता, साहस, निष्ठा, और बलिदान—इसी मृत्यु में पूर्णता पाता है। वह अपनी स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करती हुई मरीं, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक शाश्वत प्रेरणा है। उनकी मृत्यु एक प्रतीक है—हर पीढ़ी के लिए यह संदेश कि स्वतंत्रता का मूल्य जीवन से अधिक है।
5-Mark Long-Answer Questions with Complete Solutions
**Q1. रानी लक्ष्मीबाई की चरित्र विशेषताओं पर आधारित एक विस्तृत टिप्पणी लिखिए। (5 अंक)**
**उत्तर:**
रानी लक्ष्मीबाई की चरित्र विशेषताएँ अद्वितीय और प्रशंसनीय हैं:
**१. साहस और वीरता:** रानी एक अद्भुत योद्धा थीं। अंग्रेजी सेना के विरुद्ध घोड़े पर सवार होकर लड़ना उनके असाधारण साहस का प्रमाण है। कविता में 'खूब लड़ी मर्दानी' पंक्ति उनकी पुरुष-समान वीरता को दर्शाती है।
**२. मातृत्व और निष्ठा:** वह एक माँ थीं जिन्होंने अपने दत्तक पुत्र के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। परिवार के प्रति उनकी निष्ठा अटूट थी।
**३. राजनीतिक समझदारी:** रानी को ब्रिटिश साम्राज्य की नीतियों की गहरी समझ थी। 'डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स' के विरुद्ध उनका विद्रोह केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता का संघर्ष था।
**४. आत्मसम्मान और स्वाभिमान:** रानी कभी भी पराजित नहीं हुई—न शारीरिक रूप से, न मानसिक रूप से। वह अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए मृत्यु को गले लगा गईं।
**५. प्रेरणा का स्रोत:** उनका जीवन और संघर्ष लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं। वह एक प्रतीक बन गई हैं—वीरता, साहस, और बलिदान की।
अंततः, रानी लक्ष्मीबाई केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि भारतीय इतिहास के सबसे प्रेरणाप्रद पात्र हैं। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि सच्ची महानता आयु, लिंग, या परिस्थितियों से परे होती है।
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**Q2. 'झाँसी की रानी' कविता के संदर्भ में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका पर विचार करें। (5 अंक)**
**उत्तर:**
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, और रानी लक्ष्मीबाई इसका सबसे प्रमुख उदाहरण हैं।
**रानी की भूमिका:**
रानी लक्ष्मीबाई 1857 के विद्रोह के समय भारत की सबसे प्रभावशाली महिला नेता थीं। उन्होंने न केवल अपने राज्य की रक्षा की, बल्कि अन्य क्षेत्रों के योद्धाओं को भी प्रेरणा दी। उनका संघर्ष लिंग भेद से परे था—वह पुरुषों के बराबर युद्ध कौशल और रणनीतिक सोच रखती थीं।
**व्यापक योगदान:**
रानी के अलावा, झलकारी बाई, उदा देवी जैसी महिलाएँ भी स्वतंत्रता संग्राम में लड़ीं। गृहांतरे, महिलाएँ भोजन, वस्त्र, और सूचना का प्रबंध करके अप्रत्यक्ष भूमिका निभाती थीं। मातियों और बहनों ने भावनात्मक समर्थन दिया।
**सामाजिक प्रभाव:**
सुभद्रा कुमारी चौहान ने इस कविता के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया कि महिलाएँ भी राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। यह परंपरागत सामाजिक मानदंडों को चुनौती देता है।
**आधुनिक महत्व:**
आज, रानी लक्ष्मीबाई की कहानी महिला सशक्तिकरण और आजादी के संघर्ष दोनों का प्रतीक है। वह दर्शाती हैं कि साहस और निर्णय लिंग से परिभाषित नहीं होते।
निष्कर्ष में, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम महिलाओं के योगदान के बिना अधूरा है। रानी लक्ष्मीबाई और उनके जैसी अन्य महिलाएँ ने सिद्ध किया कि भारत की आजादी सभी के द्वारा, सभी के लिए एक संयुक्त प्रयास था।
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**Q3. कविता की साहित्यिक विशेषताओं (काव्य-शैली, भाषा, छंद, अलंकार) का विस्तार से विश्लेषण करते हुए बताइए कि ये विशेषताएँ कविता को कितनी प्रभावशाली बनाती हैं। (5 अंक)**
**उत्तर:**
**१. छंद और लय:**
कविता दोहा छंद में लिखी गई है। दोहा एक पारंपरिक भारतीय छंद है, जो संगीतात्मक लय और सरलता प्रदान करता है। इसकी नियमित लय पाठक को आकर्षित करती है और कविता को स्मरणीय बनाती है। 'खूब लड़ी मर्दानी / अब की बारी है' की लय पाठक के कानों में गूँजती है।
**२. भाषा:**
चौहान ने सरल, सुबोध हिंदी का प्रयोग किया है। कठिन संस्कृत शब्दों की जगह लोकभाषा (बुंदेलखंड की) का प्रयोग आम जनता तक संदेश पहुँचाता है। 'हरबोल', 'मर्दानी', 'खूब लड़ी' जैसे शब्द वीरता और साहस के भाव को तीव्रता से व्यक्त करते हैं।
**३. अलंकार:**
- **अनुप्रास:** 'खूब लड़ी मर्दानी' में 'म' की पुनरावृत्ति
- **रूपक:** 'बुन्देले हरबोलों के मुँह हमीं सुनी कहानी' (योद्धाओं का मुँह अलंकारिक अर्थ में)
- **उपमा:** रानी की तुलना महान योद्धाओं से
**४. काव्य-शैली:**
कविता गीतात्मक शैली में लिखी गई है, जो इसे एक लोकगीत का रूप देती है। यह ऐतिहासिक घटनाओं को काव्य के माध्यम से जीवंत करती है। नाटकीय प्रस्तुति (रानी के विभिन्न कृत्य) कविता को गतिशील और रोचक बनाती है।
**५. प्रभाविता:**
ये सभी तत्व मिलकर कविता को अत्यंत प्रभावशाली बनाते हैं:
- सरल भाषा जनता तक पहुँचती है
- संगीतात्मक छंद को स्मरणीय बनाता है
- वीरता के भाव को तीव्र करते हैं
- राष्ट्रीय चेतना को जागृत करते हैं
- महिला सशक्तिकरण का संदेश व्यक्त करते हैं
निष्कर्ष में, यह कविता केवल साहित्य नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है। इसकी साहित्यिक विशेषताएँ इसे शक्तिशाली माध्यम में परिणत करती हैं, जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रही है।
HOTS & Case-Study Question with Complete Solution Steps
**Question: 'झाँसी की रानी' कविता में रानी लक्ष्मीबाई के चिंतन और कार्य का विश्लेषण करते हुए बताइए कि आधुनिक समाज में उनके संघर्ष का क्या प्रासंगिकता है। (6 अंक — HOTS)**
**समस्या विश्लेषण के चरण:**
**चरण 1: ऐतिहासिक संदर्भ समझना**
रानी लक्ष्मीबाई के समय (1857) भारत अंग्रेजी साम्राज्य का अधीन था। ब्रिटिश 'डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स' नीति के तहत झाँसी को अपने नियंत्रण में ले लिया गया। रानी के पास एक बुद्धिमान निर्णय लेना था: क्या विरोध करूँ, या समर्पण करूँ?
**चरण 2: रानी के चिंतन को समझना**
रानी का चिंतन तीन स्तरों पर कार्य करता था:
- **व्यक्तिगत स्तर:** एक माँ होने के नाते, वह अपने दत्तक पुत्र के अधिकार सुरक्षित करना चाहती थीं
- **राजनीतिक स्तर:** एक रानी होने के नाते, वह अपनी रियासत की स्वतंत्रता बनाए रखना चाहती थीं
- **राष्ट्रीय स्तर:** भारत की आजादी के लिए, वह ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध खड़ी होना चाहती थीं
**चरण 3: रानी के कार्यों का विश्लेषण**
कविता में दिए गए उदाहरण:
- घोड़े पर सवार होकर युद्ध में शामिल होना (साहस)
- अपनी सेना का नेतृत्व करना (नेतृत्व क्षमता)
- अंग्रेजों के आगे समर्पण न करना (दृढ़ संकल्प)
- अंत तक लड़ना, भले ही मृत्यु सुनिश्चित थी (बलिदान की भावना)
**चरण 4: आधुनिक समाज में प्रासंगिकता**
**महिला सशक्तिकरण:**
आधुनिक भारत में रानी की कहानी महिलाओं को यह संदेश देती है कि सफलता और साहस किसी विशेष लिंग का एकाधिकार नहीं है। आज महिलाएँ सेना, विज्ञान, राजनीति, और व्यापार में रानी के समान योगदान दे रही हैं।
**नागरिक जिम्मेदारी:**
रानी का संघर्ष हमें सिखाता है कि जब अन्याय हो, तो मौन रहना गलत है। आधुनिक लोकतंत्र में नागरिकों को सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए—रानी के समान साहस के साथ।
**आत्मनिर्णय का अधिकार:**
रानी ने अपनी नियति स्वयं तय की। यह सिद्धांत आधुनिक मानवाधिकारों का आधार है—हर व्यक्ति को अपना जीवन स्वयं चुनने का अधिकार है।
**पर्यावरण और विषमता के विरुद्ध संघर्ष:**
जैसे रानी ने अंग्रेजी शोषण के विरुद्ध लड़ा, वैसे ही आजकल युवा जलवायु परिवर्तन, भ्रष्टाचार, और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष कर रहे हैं।
**चरण 5: निष्कर्ष**
रानी लक्ष्मीबाई का संघर्ष केवल 1857 का नहीं है। यह हर पीढ़ी के लिए प्रासंगिक है। उनके कार्य और विचार हमें यह सिखाते हैं कि:
1. साहस बहुत शक्तिशाली होता है
2. सच्ची आजादी कभी आसानी से नहीं मिलती
3. व्यक्तिगत सुविधा छोड़कर सामूहिक हित के लिए लड़ना महान है
4. महिलाओं की क्षमता को कम आँकना गलत है
आधुनिक समाज में, जहाँ हम अधिकारों और समानता की माँग करते हैं, रानी लक्ष्मीबाई हमारा सबसे प्रेरणाप्रद मार्गदर्शक हैं। Start a 3-day free trial at cbsetutor.ai to access AI-driven analysis of such complex HOTS questions.
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