India's #1 AI Tutorprevious year_questions · Sanskrit — Ruchira · Chapter 10Read in English → कक्षा 9 संस्कृत रुचिरा अध्याय 10 व्याकरणम् पिछले साल के प्रश्न — हल किए गए PYQs (2020–2025)
व्याकरणम् (संस्कृत व्याकरण) CBSE कक्षा 9 संस्कृत परीक्षा की रीढ़ है। रुचिरा के अध्याय 10 में चार आपस में जुड़ी हुई अवधारणाओं में महारत की जरूरत है: कारक (केस संबंध), विभक्ति (डिक्लेंशन एंडिंग), लकार (क्रिया काल), और वाक्य रचना (वाक्य निर्माण)। सिद्धांत को दोबारा पढ़ने के बजाय, पिछले साल के प्रश्नों को हल करना आपके दिमाग को परीक्षा के पैटर्न को समझने, अंकों के आवंटन का अनुमान लगाने, और परीक्षकों की अपेक्षा के अनुसार उत्तर लिखने के लिए प्रशिक्षित करता है। यह गाइड 1-अंक, 3-अंक, और 5-अंक प्रारूपों में 13 वास्तविक शैली के PYQs को खोलती है—सभी को चरण-दर-चरण परीक्षक की टिप्पणियों के साथ हल किया गया है। हम 2026–27 पैटर्न शिफ्ट को भी समझाते हैं ताकि आप आगे रहें। cbsetutor.ai पर 3-दिन की मुफ्त ट्रायल शुरू करें और लाइव व्याकरण ड्रिल और तुरंत संदेह समाधान का उपयोग करें।
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Start 3-day free trial →क्यों पिछले साल के प्रश्न पत्र पढ़ना सिद्धान्त से ज्यादा अच्छा है
ज्यादातर कक्षा 9 के छात्र Ruchira पाठ्यपुस्तक को तीन या चार बार दोबारा पढ़ते हैं, उम्मीद करते हैं कि व्याकरण के नियम 'चिपक' जाएँगे। पर ऐसा नहीं होता। दिमाग संस्कृत व्याकरण को सक्रिय स्मरण के माध्यम से सीखता है—जब आप किसी प्रश्न के साथ बैठते हैं, यह पहचानते हैं कि किस संज्ञा पर कौन सी विभक्ति लागू होती है, और सही रूप लिखते हैं, तो तंत्रिका पथ मजबूत होते हैं। पिछले साल के प्रश्न ठीक यही करते हैं: ये परीक्षा का दबाव समझाते हैं, यह दिखाते हैं कि किन विषयों का वजन ज्यादा है, और सामान्य गलतियों को उजागर करते हैं।
उदाहरण के लिए, एक छात्र यह याद कर सकता है कि षष्ठी विभक्ति स्वामित्व को दर्शाती है ('का')। लेकिन जब पूछा जाए 'राज्यस्य रक्षकः कः अस्ति?' (राज्य का रक्षक कौन है?), तो अचानक उसे नियम को संदर्भ में लागू करना चाहिए। 5–6 समान पिछले साल के प्रश्नों के दोहराव से यह पैटर्न पक्का हो जाता है। CBSE परीक्षार्थी कुछ प्रश्न प्रकारों को दोहराते हैं: कारक की पहचान (1 अंक), वाक्य विश्लेषण (3 अंक), और सम्पूर्ण वाक्य रचना (5 अंक)। इन तीनों प्रारूपों का अभ्यास परीक्षा के दिन 70–80% सटीकता की गारंटी देता है। इसके अलावा, पिछले साल के प्रश्नों का काम आपके कमजोर क्षेत्र को दिखाता है—शायद आप लकार (काल) समझौता या द्वितीया में संघर्ष करते हैं—इसलिए आप पुनरावृत्ति को लक्षित कर सकते हैं।
सबसे अधिक दोहराए जाने वाले 1-अंक के प्रश्न (उत्तर के साथ 5 पिछले साल के प्रश्न)
1-अंक के प्रश्न कारक, विभक्ति नियमों, और लकार संयुग्मों की तेजी से स्मृति की परीक्षा लेते हैं। परीक्षार्थी 'मामले का नाम बताओ' और 'शब्द बनाओ' शैलियों का समर्थन करते हैं।
**प्रश्न 1: 'बालकः पुस्तकं पठति' वाक्य में 'पुस्तकम्' कौन सी कारक में है?**
उत्तर: द्वितीया (लक्ष्य कारक)। 'पठति' (पढ़ता है) एक सकर्मक क्रिया है; इसका कर्म सर्वदा द्वितीया विभक्ति लेता है। उत्तर: 1 अंक।
**प्रश्न 2: 'देवताः' (देवता, प्रथमा बहुवचन) को षष्ठी (सम्बन्ध कारक) में रूपान्तरित करो।**
उत्तर: देवानाम्। पुँल्लिङ्ग के लिए, षष्ठी बहुवचन -आनाम् होता है। उत्तर: 1 अंक।
**प्रश्न 3: लकार का नाम लिखो: 'गच्छामि' (मैं जाता हूँ)।**
उत्तर: लट् लकार (वर्तमान सूचक)। गच्छ् + आ + मि। उत्तर: 1 अंक।
**प्रश्न 4: 'शिक्षकेन किताबः दी गई' इस वाक्य में 'शिक्षकेन' कौन सी कारक है?**
उत्तर: तृतीया (करण कारक)। कर्मवाच्य में क्रिया का कर्ता तृतीया विभक्ति लेता है। उत्तर: 1 अंक।
**प्रश्न 5: 'राज्ये' किस विभक्ति का उदाहरण है?**
उत्तर: सप्तमी (अधिकरण कारक)। 'राज्य-' + ई = सप्तमी (राज्य में/पर)। उत्तर: 1 अंक।
सबसे अधिक दोहराए जाने वाले 3-अंक के प्रश्न (उत्तर के साथ 5 पिछले साल के प्रश्न)
3-अंक के प्रश्न वाक्य विश्लेषण, नियम व्याख्या, और बहु-चरणीय रूपान्तरण की माँग करते हैं। ये कारक की पहचान को विभक्ति सिद्धान्त के साथ मिश्रित करते हैं।
**प्रश्न 1: निम्नलिखित वाक्य का विश्लेषण करो और कारकों के नाम लिखो: 'शिक्षक: छात्रेभ्यः ज्ञानं ददाति।'**
उत्तर: (3 अंक: प्रत्येक कारक की पहचान के लिए 1, या नियम के अनुसार आंशिक श्रेय)
- शिक्षक: = प्रथमा (कर्ता/कर्मकर्ता)
- छात्रेभ्यः = चतुर्थी (सम्प्रदान, अप्रत्यक्ष कर्म—'किसे?')
- ज्ञानं = द्वितीया (प्रत्यक्ष कर्म—'क्या?')
- ददाति = लट् लकार, वर्तमान काल
परीक्षार्थी देखता है: सही कारक के नाम + तर्क ('दाता' को प्रथमा चाहिए, क्रिया तृतीयान्तर्गत)। प्रत्येक कारक के लिए 1 अंक दें, अगर तर्क कमजोर हो तो 0।
**प्रश्न 2: 'अश्वः ग्रामे दौड़ता है' को संस्कृत में लिखो और कारक चिह्न लगाओ।**
उत्तर: अश्वः ग्रामे धावति। (3 अंक)
- अश्वः = प्रथमा (कर्ता)
- ग्रामे = सप्तमी (अधिकरण—'गाँव में')
- धावति = लट् लकार, 3rd व्यक्ति एकवचन
अंक वितरण: सही अनुवाद के लिए 1, कारक नामों के लिए 1, विभक्ति समाप्ति के लिए 1।
**प्रश्न 3: निम्न में से सही विभक्ति चुनो और कारण दो: 'राजा _____ को सोना दिया।' (अमात्यः / अमात्याय)**
उत्तर: अमात्याय (चतुर्थी, सम्प्रदान) सही है। (3 अंक)
- कारण: 'दिया' (देना) एक द्विकर्मक क्रिया है; प्राप्तकर्ता (जिसे दिया जाए) चतुर्थी लेता है।
- अमात्य: + चतुर्थी = अमात्याय (एकवचन चतुर्थी)।
अंक वितरण: सही विकल्प के लिए 1, व्याख्या के लिए 2।
**प्रश्न 4: निम्न वाक्य को लङ् लकार में बदलो: 'देवताः पूजा करते हैं।'**
उत्तर: देवताः पूजां अकरवन्।/देवताः पूजां अचिनवन्। (3 अंक)
- मूल: पूज् + लट् (वर्तमान) = पूजयन्ति
- लङ् लकार (अपूर्ण भूत): अ + पूज् + य् + न् (3rd व्यक्ति बहुवचन)
- अंक: क्रिया रूप के लिए 1, लकार नाम के लिए 1, सही संयुग्मन के लिए 1।
**प्रश्न 5: 'पुस्तकस्य लेखकः कौन है?' वाक्य में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग करके वाक्य पूरा करो।**
उत्तर: पुस्तकस्य लेखकः प्रेमचन्दः अस्ति। (3 अंक)
- पुस्तक + षष्ठी = पुस्तकस्य ('पुस्तक का'—स्वामित्व, सम्बन्ध)
- अंक: सही विभक्ति के लिए 1, गलत न होने के लिए 1, पूर्ण अर्थ के लिए 1।
सबसे अधिक दोहराए जाने वाले 5-अंक के प्रश्न (पूर्ण समाधान के साथ 3 पिछले साल के प्रश्न)
5-अंक के प्रश्न चारों अवधारणाओं को एकीकृत करते हैं: वे वाक्य निर्माण, पूर्ण कारक विश्लेषण, और लकार औचित्य की माँग करते हैं। ये आम तौर पर 'इस गद्य को पढ़ो और उत्तर दो' या 'निर्दिष्ट रूपों का उपयोग करके एक वाक्य रचना करो' होते हैं।
**प्रश्न 1: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ो और प्रश्नों के उत्तर दो:**
'राजपुत्रः राज्यस्य रक्षणार्थं सैनिकेभ्यः आदेश ददाति। सैनिकाः राजपुत्रस्य आदेशानुसार शत्रून् युद्धे पराजितवन्तः।'
**क) 'राज्यस्य' किस कारक में है और क्यों?** (1.5 अंक)
उत्तर: षष्ठी (सम्बन्ध कारक)। कारण: यह रक्षण (सुरक्षा) की वस्तु दिखाता है—'राजा का राज्य' = स्वामित्व सम्बन्ध।
**ख) 'ददाति' का लकार नाम लिखो और इसे लङ् लकार में बदलो।** (1.5 अंक)
उत्तर: लट् लकार (वर्तमान सूचक)। लङ् लकार: अदादित् (उन्होंने/उसने दिया, अपूर्ण भूत काल)। निर्माण: अ + दा + दि + त्।
**ग) वाक्य में 'सैनिकेभ्यः' और 'शत्रून्' की कारक पहचान करो।** (2 अंक)
उत्तर:
- सैनिकेभ्यः = चतुर्थी (सम्प्रदान, अप्रत्यक्ष कर्म—'किन्हें आदेश दिया गया?')
- शत्रून् = द्वितीया (प्रत्यक्ष कर्म—'किन्हें हराया?')
**अंक विभाजन:** 1.5 + 1.5 + 2 = 5 अंक। परीक्षार्थी सही कारक नामों के लिए आंशिक अंक देता है भले ही तर्क अपूर्ण हो।
**प्रश्न 2: निम्न संस्कृत वाक्य को व्याकरण सहित विश्लेषित करो:**
'विद्यार्थीनां शिक्षकेन पुस्तकानि दानी भवन्ति।'
(छात्र शिक्षक से पुस्तकें प्राप्त करते हैं।)
**क) सभी कारकों की पहचान करो।** (2 अंक)
उत्तर:
- विद्यार्थीनां = षष्ठी (स्वामित्व, 'छात्रों का' — कुछ संदर्भों में सम्प्रदान को भी चिह्नित करता है)
- शिक्षकेन = तृतीया (कर्मवाच्य में करण/कर्ता, 'शिक्षक द्वारा/से')
- पुस्तकानि = द्वितीया (प्रत्यक्ष कर्म, 'पुस्तकें—क्या?')
- भवन्ति = कर्मवाच्य, लट् लकार (वर्तमान)
**ख) 'दानी भवन्ति' का क्या अर्थ है? इसे कर्मवाच्य से सकर्मक वाच्य में बदलो।** (2 अंक)
उत्तर: 'दानी भवन्ति' = 'दी जाती हैं' (कर्मवाच्य)। सकर्मक वाच्य: शिक्षकः विद्यार्थीभ्यः पुस्तकानि ददाति। (शिक्षक छात्रों को पुस्तकें देता है।) निर्माण बदलाव: तृतीया → कर्ता, षष्ठी → सम्प्रदान (चतुर्थी)।
**ग) 'शिक्षकेन' को षष्ठी विभक्ति में रूपान्तरित करो।** (1 अंक)
उत्तर: शिक्षकस्य (स्वामित्व, 'शिक्षक का')। ध्यान दें कि विभक्ति समाप्ति बदल जाती है: -एन (तृतीया) → -स्य (षष्ठी)।
**अंक विभाजन:** 2 + 2 + 1 = 5 अंक।
**प्रश्न 3: निम्न हिन्दी वाक्य को संस्कृत में अनुवाद करो और कारक चिह्न लगाओ:**
'बालिकाओं ने शिक्षिका के साथ बाग में फूल तोड़े।'
**उत्तर: (5 अंक — विषयवस्तु विभाजन)**
बालिकाभिः शिक्षिकया सह वाटिके पुष्पाणि आचिनवन्।
कारक चिह्न:
- बालिकाभिः = तृतीया बहुवचन (भूत काल में कर्ता, 'बालिकाओं द्वारा')
- शिक्षिकया = तृतीया एकवचन (करण, 'शिक्षिका के साथ')
- वाटिके = सप्तमी (अधिकरण, 'बाग में')
- पुष्पाणि = द्वितीया (प्रत्यक्ष कर्म, 'फूल')
- आचिनवन् = लङ् लकार, 3rd व्यक्ति बहुवचन (सरल भूत, 'उन्होंने तोड़े')
**अंकन मानदण्ड:**
- सही अनुवाद संरचना: 2 अंक
- सही कारक की पहचान: 2 अंक
- सही लकार और क्रिया रूप: 1 अंक
कुल: 5 अंक। भले ही क्रिया रूप अपूर्ण हो, सही कारक नामों के लिए आंशिक श्रेय दिया जाता है।
2026–27 के नए CBSE प्रारूप में पैटर्न बदलाव
CBSE के तर्कसंगत पाठ्यक्रम (2024–25 से आगे) रटन्त विभक्ति तालिकाओं को कम महत्व देता है और संदर्भगत प्रयोग पर जोर देता है। हाल के बोर्ड पत्रों और आधिकारिक अपडेटों के आधार पर, तीन मुख्य बदलाव दिखाई देते हैं:
**1. वाक्य निर्माण पर बढ़ता ध्यान (वाक्य रचना):**
पुराने पत्रों में 'कारक का नाम बताओ' पूछा जाता था। नए पत्रों में 'वाक्य को करण कारक का उपयोग करके दोबारा लिखो' या 'लकार का उपयोग करके कारण-प्रभाव दिखाने वाले वाक्य की रचना करो' पूछा जाता है। इसका अर्थ है कि विभक्ति तालिका को रटना अपर्याप्त है—आपको यह समझना चाहिए कि कारक *क्यों* चुना जाता है।
**2. कर्मवाच्य और काल का अंतःक्रिया:**
2026–27 के मॉडल लकार को वाच्य (सकर्मक बनाम कर्मवाच्य) के साथ एकीकृत करने की परीक्षा लेते हैं। अब एक एकल 5-अंक का प्रश्न 'लकार की पहचान करो + कर्मवाच्य में कारक बदलाव की व्याख्या करो + विभिन्न काल में दोबारा लिखो' को जोड़ता है। उदाहरण: 'बालकः खेल खेलता है' (सकर्मक, वर्तमान) → 'बालकेन खेलः क्रीयते' (कर्मवाच्य, वर्तमान) और वापस लङ् (भूत) में। इसके लिए गहरे व्याकरण ज्ञान की आवश्यकता है।
**3. संदर्भगत पठन अंश (गद्य विश्लेषण):**
अलग-थलग वाक्यों के बजाय, परीक्षार्थी अब 4–5 कारक प्रश्नों को 150-शब्द के अंश में एम्बेड करते हैं। आपको संदर्भ के लिए पढ़ना चाहिए, सम्बन्धों (कर्ता, कर्म, करण, आदि) की पहचान करनी चाहिए, फिर उत्तर देना चाहिए। रटन्त ज्ञान यहाँ काम नहीं आता; समझ महत्वपूर्ण है।
**4. नकली संयुग्मों पर कम जोर:**
सभी लकार या सभी विभक्ति रूपों की तालिकाएँ अब अपेक्षित नहीं हैं। इसके बजाय, 1–2 लकार (आम तौर पर लट्, लङ्, लोट्) वास्तविक वाक्य संदर्भों में दिखाई देते हैं। *लागू* संयुग्मों की तैयारी करें, अलग-थलग प्रतिरूपों की नहीं।
**रणनीति अनुप्रयोग:** 300 क्रिया रूपों को ड्रिल करने के बजाय, 15 सामान्य क्रियाओं (दा, गम्, पठ्, सेव्, आगम्, आदा, आद्य्, कृ, लभ्, बन्, भू, वद्, हन्, धाव्, ददा) को लट्, लङ्, और लोट् में तीनों पुरुषों में संयुग्मित करना सीखें। प्रत्येक को वास्तविक वाक्यों के साथ जोड़ें ताकि आप अनुप्रयोग को तुरंत पहचान सकें।
इस अध्याय के लिए त्वरित प्रयास की रणनीति (परीक्षा हॉल के टिप्स)
जब आप संस्कृत का पेपर देने बैठते हैं, तो व्याकरणम् के प्रश्न अक्सर एक साथ आते हैं (परीक्षा के 8–10 मिनट)। अपने अंकों को बढ़ाने के लिए इस तीन-चरणीय रणनीति का उपयोग करें:
**चरण 1: प्रश्न का प्रकार पहचानें (प्रति प्रश्न 30 सेकंड)**
प्रश्न का शीर्षक पढ़ें। क्या यह 'विभक्ति का नाम बताना,' 'वाक्य को बदलना,' 'अनुच्छेद का विश्लेषण करना,' या 'वाक्य बनाना' है? इससे आपका दृष्टिकोण तय होता है। 1 अंक का 'विभक्ति-नामकरण' प्रश्न तुरंत स्मरण की माँग करता है। 5 अंक का 'अनुच्छेद विश्लेषण' पूरे वाक्य-दर-वाक्य विभाजन की माँग करता है।
**चरण 2: पहले क्रिया और कर्म को रेखांकित करें (60 सेकंड)**
किसी भी वाक्य में पहले क्रिया खोजें। क्रिया की वाच्य (सक्रिय/निष्क्रिय) और काल (सकर्मक/अकर्मक) विभक्ति असाइनमेंट को तय करते हैं। उदाहरण के लिए:
- 'गच्छति' (अकर्मक, 'जाता है') → कोई द्वितीया कर्म संभव नहीं।
- 'पठति' (सकर्मक, 'पढ़ता है') → अगला संज्ञा आमतौर पर द्वितीया (कर्म) है।
कर्ता (आमतौर पर प्रथमा), कर्म (आमतौर पर द्वितीया), और विशेषणों (तृतीया, सप्तमी, आदि) को रेखांकित करें। यह दृश्य नक्शा त्रुटियों को रोकता है।
**चरण 3: पूर्ण उत्तर लिखें और कारण दें (90 सेकंड)**
बस 'तृतीया' लिखकर आगे न बढ़ें। लिखें: 'तृतीया—क्योंकि शस्त्रेण एकवचनम् अस्ति।' (तृतीया—क्योंकि शब्द एकवचन में सहमत है)। परीक्षक आपके विभक्ति नाम थोड़े गलत होने पर भी तर्क के लिए आंशिक अंक देते हैं। पूर्ण वाक्य आत्मविश्वास दिखाते हैं।
**1 अंक के प्रश्नों के लिए:** एक पंक्ति में उत्तर दें। 'तृतीया विभक्ति अस्ति।'
**3 अंक के प्रश्नों के लिए:** 3–4 पंक्तियों में उत्तर दें। विभक्ति पहचानें, नियम बताएँ, विभक्ति समाप्ति दें।
**5 अंक के प्रश्नों के लिए:** एक संरचित तालिका या क्रमांकित सूची का उपयोग करें। वाक्य 1: [विभक्ति], [कारण]। वाक्य 2: [विभक्ति], [कारण]। फिर 'कैसे बदलें' या 'यह रूप क्यों' उप-प्रश्न को संबोधित करें।
**परीक्षा में समय आवंटन (8–10 मिनट का ब्लॉक):**
- 1 अंक का प्रश्न: 1.5 मिनट (5 प्रश्न × 1.5 मिनट = 7.5 मिनट)
- 3 अंक का प्रश्न: 3 मिनट (2 प्रश्न × 3 मिनट = 6 मिनट) → 2 मिनट बफर छोड़ें
- 5 अंक का प्रश्न: 4–5 मिनट (1 प्रश्न = 4–5 मिनट) → अंतिम 1 मिनट में समीक्षा करें
अगर आप किसी विभक्ति के बारे में अनिश्चित हैं, तो अपना सर्वोत्तम अनुमान लगाकर तर्क दें—परीक्षक विधि अंक देते हैं। खाली उत्तर शून्य अंक देते हैं।
अंतिम चेकलिस्ट: परीक्षा से पहले इन 8 अवधारणाओं में महारत हासिल करें
परीक्षा से पहले, यह सुनिश्चित करें कि आप इन आठ प्रश्नों का बिना हिचकिचाहट के उत्तर दे सकते हैं:
1. **कारक और विभक्ति में अंतर:** कारक = अर्थगत भूमिका (कर्ता, कर्म, स्थान); विभक्ति = व्याकरणिक विभक्ति समाप्ति (कर्ताकारक, कर्मकारक, आदि)। उदाहरण: 'बालकः' कर्ता (कारक) की भूमिका निभाता है और प्रथमा विभक्ति (समाप्ति -ः) लेता है।
2. **सकर्मक बनाम अकर्मक क्रिया:** सकर्मक क्रिया (जैसे पठ्, दा, नी) को द्वितीया में सीधा कर्म चाहिए। अकर्मक क्रिया (जैसे गम्, आगम्, सेव्) ऐसा नहीं करती। विभक्ति असाइन करने से पहले क्रिया पहचानें।
3. **निष्क्रिय वाच्य में विभक्ति परिवर्तन:** निष्क्रिय में कर्ता तृतीया (करण) में चला जाता है, और कर्म विषय (प्रथमा) बन जाता है। उदाहरण: 'शिक्षकः पुस्तकं दिदाति' (सक्रिय, शिक्षक किताब देता है) → 'शिक्षकेन पुस्तकः दीयते' (निष्क्रिय, किताब शिक्षक द्वारा दी जाती है)।
4. **सम्प्रदान चतुर्थी:** जिसके लिए कोई कार्य किया जाता है उस व्यक्ति/इकाई को चिह्नित करता है ('को/किसके लिए')। उदाहरण: 'अमित्रः रोगिणे औषधं दिदाति' (दोस्त बीमार को दवा देता है—रोगिणे = चतुर्थी)।
5. **अधिकरण सप्तमी:** स्थान या समय को चिह्नित करता है ('में/पर')। उदाहरण: 'वाटिके पुष्पाणि विकसन्ति' (बगीचे में फूल खिलते हैं—वाटिके = सप्तमी)।
6. **सम्बन्ध षष्ठी:** स्वामित्व या संबंध दिखाता है ('का/की')। उदाहरण: 'राज्यस्य रक्षकः राजा अस्ति' (राजा राज्य का रक्षक है—राज्यस्य = षष्ठी)।
7. **लकार मूल बातें:** लट् = वर्तमान सूचक ('जाता है'); लङ् = अपूर्ण अतीत ('जा रहा था')। 15 सामान्य क्रिया को इन दो लकार में संयुग्मित करें और आप 80% परीक्षा प्रश्न कवर करते हैं।
8. **समझौता नियम:** विषय और विधेय संख्या और लिंग में सहमत होते हैं। कर्म, विशेषण अपने संज्ञा के साथ सहमत होते हैं। उदाहरण: 'बालिकाः' (बहुवचन, स्त्रीलिंग) 'पठन्ति' (अध्ययन करते हैं—क्रिया बहुवचन), 'पठति' (एकवचन) नहीं।
अगर आप प्रत्येक के साथ एक उदाहरण से समझा सकते हैं, तो आप परीक्षा के लिए तैयार हैं। जो भी अनिश्चित महसूस हो, उसे दोबारा देखें, और जब तक यह समझ न आए तब तक उस विषय पर 2–3 पिछले वर्ष के प्रश्न करें।