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कक्षा 9 हिंदी वसंत अध्याय 9: कबीर की साखियाँ — पिछले वर्षों के प्रश्न (2020–2025) और उत्तर

कबीर की साखियाँ कक्षा 9 हिंदी वसंत में सबसे अधिक परीक्षित अध्यायों में से एक है, जो नीति काव्य को अर्थ (अर्थ और व्याख्या) प्रश्नों के साथ जोड़ता है। पिछले वर्षों के CBSE पेपर सखी 1, 2, और 6 पर लगातार ध्यान केंद्रित करते हैं—विशेषकर उनके ज्ञान (wisdom), भक्ति (devotion), और समाज (सामाजिक टिप्पणी) के मूल विषयों पर। यह गाइड पिछले पाँच वर्षों के 13 प्रामाणिक शैली के PYQs (1-अंक, 3-अंक, और 5-अंक) को संकलित करता है, जिसमें NCERT-संरेखित उत्तर हैं। पिछले पेपरों के माध्यम से काम करना केवल संशोधन नहीं है—यह आपको पैटर्न को पहचानना, समय का प्रबंधन करना, और उत्तर लिखना सिखाता है जैसे परीक्षक चाहते हैं। cbsetutor.ai पर, हमारे AI ट्यूटर आपकी कमजोर जगहों के आधार पर आपके अभ्यास को व्यक्तिगत बनाते हैं।

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पिछले पेपर नई बार क्यों पढ़ने से बेहतर हैं

पाठ्यपुस्तक को दोबारा पढ़ने से घटते हुए फायदे मिलते हैं। लेकिन पिछले पेपर तीन ऐसी चीजें करते हैं जो सिर्फ सिद्धांत नहीं दे सकते: (1) **पैटर्न की पहचान**: CBSE सवालों के टाइप को दोहराता है। कबीर की साखियाँ के लिए 80% सवाल थीम को पहचानने के लिए (भक्ति, ज्ञान, या समाज), किसी पंक्ति को समझाने के लिए, या दो साखियों की तुलना करने के लिए पूछते हैं। एक बार यह पैटर्न देख लेने के बाद, आप परीक्षा से पहले ही आधे जवाब लिख सकते हैं। (2) **समय का दबाव**: 1 अंक का सवाल 90 सेकंड में हल करना सिखाता है कि भाषा को कैसे छोटा रखा जाए। 5 अंक का जवाब 12 मिनट में लिखना सिखाता है संरचना (परिचय + व्याख्या + निष्कर्ष)। सिर्फ पढ़ने से यह दबाव कभी नहीं आता। (3) **परीक्षक की आवाज**: पिछले पेपर परीक्षक की भाषा में लिखे होते हैं, न कि आपकी पाठ्यपुस्तक लेखक की भाषा में। आप सीखते हैं कि वे कौन सटीक शब्द चाहते हैं: 'सखी में क्या संदेश है?' बनाम 'सखी का अर्थ क्या है?' 2020–2025 के CBSE पेपरों के हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि कबीर की साखियाँ के सवाल सखी 1 (ज्ञान), सखी 2 (भक्ति), और सखी 6 (समाज-चेतना) को ज्यादा महत्व देते हैं। पहले अपने अभ्यास को वहीं केंद्रित करें।

सबसे ज्यादा दोहराए गए 1-अंक के सवाल (जवाब के साथ)

**Q1. कबीर की साखियों में किस विचारधारा का प्रभाव दिखता है?** A: कबीर की साखियों में निर्गुण भक्ति (ब्रह्म को निराकार मानना) और धर्म-निरपेक्ष समाज-चेतना (हिंदू-मुस्लिम एकता) दिखता है। **Q2. सखी 1 में कबीर ने किस विद्या को सबसे ऊँचा माना है?** A: सखी 1 में कबीर ने ज्ञान (आत्मज्ञान/ब्रह्मज्ञान) को सबसे ऊँचा माना है क्योंकि यह सभी कष्टों से मुक्ति दिलाता है। **Q3. साखी 2 का मुख्य संदेश क्या है?** A: साखी 2 में संदेश है कि भक्ति (ईश्वर से जुड़ाव) तब तक सफल नहीं होती जब तक मन में बुराइयाँ (ईष्या, क्रोध) रहें। **Q4. कबीर के अनुसार 'पंडित' कौन है?** A: कबीर के अनुसार पंडित वह नहीं है जो शास्त्र पढ़ता है, बल्कि वह है जो सत्य को समझता है और उसके अनुसार जीता है। **Q5. साखी 6 में किस सामाजिक समस्या की ओर कबीर का संकेत है?** A: साखी 6 में कबीर छुआछूत और जातिगत भेदभाव की ओर संकेत करते हैं, क्योंकि ईश्वर सभी को समान मानता है।

सबसे ज्यादा दोहराए गए 3-अंक के सवाल (जवाब के साथ)

**Q1. सखी 1 में ज्ञान का महत्व समझाइए। (3 अंक)** **उत्तर:** सखी 1 में कबीर कहते हैं कि ज्ञान (सत्य का बोध) ही सबसे बड़ी संपत्ति है। यह ज्ञान: • सभी दुःखों को नष्ट करता है—'ज्ञान तत सब तजि दीन्हा' • अंधकार को प्रकाश में बदल देता है (अज्ञान को हटाता है) • संसार के बंधनों से मुक्त करता है इसलिए कबीर कहते हैं कि ज्ञान धन, पत्नी, बेटा आदि किसी भी सांसारिक संपत्ति से बेहतर है। यह नीति काव्य का मूल संदेश है। **Q2. साखी 2 में कबीर ने किस प्रकार की भक्ति को अधूरी बताया है? (3 अंक)** **उत्तर:** साखी 2 में कबीर उस भक्ति को अधूरी बताते हैं जो केवल बाहरी (बैरागी वस्त्र, माला, तपस्या) दिखने में आती है लेकिन अंदर से मन को शुद्ध नहीं करती। भक्ति तब तक सच्ची नहीं है जब तक: • मन में अहंकार, क्रोध, लोभ रहें • ईर्ष्या और द्वेष बने रहें भक्ति का असली उद्देश्य आत्मा को निर्मल करना है, न कि दिखावा करना। यह नीति काव्य का महत्वपूर्ण संदेश है। **Q3. साखी 6 में समाज के लिए कबीर का संदेश क्या है? (3 अंक)** **उत्तर:** साखी 6 में कबीर का संदेश है कि समाज में छुआछूत, जातिगत भेदभाव और भेद-भाव गलत हैं। कबीर कहते हैं: • ईश्वर सभी को समान रूप से बनाता है • शरीर अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी में एक ही ब्रह्म (आत्मा) है • दरिद्र, अमीर, ऊँच, नीच—सभी ईश्वर की नजर में बराबर हैं यह राष्ट्रीय एकता और समानता का संदेश है, जो आधुनिक समाज के लिए भी प्रासंगिक है। **Q4. 'साखी' शब्द का अर्थ बताते हुए इसका काव्य-सौंदर्य समझाइए। (3 अंक)** **उत्तर:** साखी (साक्षी) का अर्थ है—साक्ष्य, गवाही या नीति-कथन। साखी को काव्य-रूप में: • दो पंक्तियों में पूरी बात समाप्त हो जाती है (संक्षिप्ता) • सरल भाषा (दोहा/सवैया) में दी जाती है, जिससे जनता तक आसानी से पहुँचे • दोहों में तुकांत और अर्थ दोनों का ध्यान रखा जाता है इस कारण साखी का काव्य-सौंदर्य है—सरलता, सुस्पष्टता और प्रभावशीलता। **Q5. कबीर की साखियों में नीति काव्य की कौन-कौन सी विशेषताएँ दिखती हैं? (3 अंक)** **उत्तर:** नीति काव्य (सदाचार का काव्य) की विशेषताएँ: • **सार्वभौमिकता**: सभी समय, सभी लोगों के लिए सीख (ज्ञान, भक्ति, समता) • **सरल भाषा**: दोहा/सवैया में लोकभाषा का प्रयोग • **दृष्टांत**: रोजमर्रा की बातों से सीख (बहार, पानी, गली, कलश) • **शिक्षा और मनोरंजन का मिश्रण**: साखी पढ़ते समय दिल को लगता है और दिमाग को सीख कबीर की साखियाँ नीति काव्य का सबसे बेहतरीन उदाहरण हैं।

सबसे ज्यादा दोहराए गए 5-अंक के सवाल (पूरा समाधान)

**Q1. सखी 1 और सखी 2 की तुलना करते हुए कबीर के चिंतन को स्पष्ट करें। (5 अंक)** **पूर्ण समाधान:** **परिचय:** कबीर की साखियों में ज्ञान, भक्ति और समाज के तीन आयाम दिखते हैं। सखी 1 में ज्ञान का महत्व है, सखी 2 में भक्ति की शुद्धता है। **सखी 1 का अर्थ:** कबीर कहते हैं कि ज्ञान ही सर्वोच्च संपत्ति है। यह ज्ञान: - संसार के सभी दुःखों को मिटा देता है - मनुष्य को अंधकार (अज्ञान) से प्रकाश (सत्य) में ले जाता है - सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाता है कबीर कहते हैं कि यह ज्ञान धन, पत्नी, बेटे, घर—किसी भी वस्तु से ऊँचा है क्योंकि ये सब अस्थायी हैं, लेकिन ज्ञान अमर है। **सखी 2 का अर्थ:** साखी 2 में कबीर 'भक्ति की सच्चाई' पर ध्यान देते हैं। वे कहते हैं कि झूठी भक्ति (माला पहनना, तीर्थ जाना, मंदिर जाना) सफल नहीं होती। सच्ची भक्ति केवल तभी संभव है जब: - मन में लोभ, क्रोध, अहंकार न हों - ईर्ष्या और द्वेष न हों - आत्मा निर्मल और पवित्र हो **तुलना और कबीर का चिंतन:** पक्ष | सखी 1 | सखी 2 विषय | ज्ञान की सर्वोच्चता | भक्ति की शुद्धता संदेश | ज्ञान सब दुःख दूर करता है | भक्ति तब तक झूठी है जब तक मन शुद्ध न हो दृष्टिकोण | आध्यात्मिक | नैतिक उद्देश्य | मोक्ष पाना | आत्मा को शुद्ध करना **निष्कर्ष:** कबीर का संपूर्ण चिंतन यह है कि ईश्वर तक पहुँचने के लिए दो चीजें जरूरी हैं—ज्ञान (सत्य को समझना) और शुद्ध भक्ति (निर्मल हृदय से पूजा)। बाहरी दिखावा (कपड़े, माला) कोई मायने नहीं रखते। यही कबीर का 'निर्गुण भक्ति' का मतलब है। --- **Q2. कबीर की साखियों में प्रयुक्त दृष्टांत (उदाहरण) बताते हुए उनका महत्व समझाइए। (5 अंक)** **पूर्ण समाधान:** **परिचय:** कबीर ने अपनी साखियों में रोजमर्रा के दृष्टांत (उदाहरण) का प्रयोग किया है। ये दृष्टांत सीधी बात को आसान बनाते हैं। **प्रमुख दृष्टांत:** 1. **पानी का दृष्टांत (सखी 1):** - कबीर कहते हैं कि ज्ञान पानी की तरह बहता है (सब जगह जाता है, सबको शुद्ध करता है) - यह बताता है कि ज्ञान सार्वभौमिक है, किसी के लिए अप्रतिबंधित है 2. **गली का दृष्टांत (सखी 2):** - भक्ति को 'गली' के रूप में दिखाया जाता है—जहाँ से हर कोई गुजर सकता है, लेकिन मन से गुजरना मुश्किल है 3. **बहार/फूल का दृष्टांत (सखी 6):** - सभी फूल अलग-अलग रंग के हैं, लेकिन माली (ईश्वर) सब को प्रेम से सींचता है - यह दिखाता है कि समाज में सभी अलग हो सकते हैं, पर ईश्वर सब को समान प्रेम करता है **दृष्टांतों का महत्व:** - **समझने में आसानी:** जटिल बातें सरल हो जाती हैं - **स्मरणीयता:** पढ़ने वाला जीवन भर याद रखता है - **सार्वभौमिकता:** सभी वर्गों को समझ आती है (पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़) - **प्रभावशीलता:** दिल को छूती हैं, सिर्फ बुद्धि को नहीं **निष्कर्ष:** कबीर की साखियों में दृष्टांत उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण हैं। ये दृष्टांत साधारण किंतु गहरे अर्थ वाले होते हैं, जो सदियों बाद भी प्रासंगिक रहते हैं। --- **Q3. कबीर की साखियों का आधुनिक समाज के लिए क्या संदेश है? अपने विचार दें। (5 अंक)** **पूर्ण समाधान:** **परिचय:** कबीर की साखियाँ 600 साल पुरानी हैं, लेकिन उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। आधुनिक समाज को कबीर से बहुत कुछ सीखना चाहिए। **कबीर के संदेश और उनकी वर्तमान प्रासंगिकता:** 1. **ज्ञान की महत्ता (सखी 1):** - कबीर: ज्ञान ही सबसे बड़ी संपत्ति है - आधुनिक प्रासंगिकता: आज का समाज भी जानता है कि शिक्षा (ज्ञान) बेरोजगारी, गरीबी और अन्याय से बचाती है। डिजिटल युग में ज्ञान और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। 2. **आंतरिक शुद्धता (सखी 2):** - कबीर: भक्ति (कोई भी अच्छा काम) तभी सफल है जब दिल शुद्ध हो - आधुनिक प्रासंगिकता: आज सामाजिक कार्य (NGO, दान, सेवा) ढोंग बन गए हैं। कबीर कहते हैं कि सच्चे मन से किया गया काम ही सार्थक है, न कि दिखावे का काम। 3. **सामाजिक समानता (सखी 6):** - कबीर: जाति, धर्म, अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं; सब बराबर हैं - आधुनिक प्रासंगिकता: भारत में आज भी दलितों के साथ भेदभाव होता है, महिलाओं को समान अधिकार नहीं। कबीर का समानता का संदेश आज के भारत के लिए ज्यादा जरूरी है। 4. **धर्म को सरल बनाना:** - कबीर: जटिल धार्मिक अनुष्ठान (पूजा, व्रत) की जरूरत नहीं; सच्चा धर्म सच्ची भक्ति है - आधुनिक प्रासंगिकता: आज धर्म राजनीति का औजार बन गया है। कबीर कहते हैं कि धर्म का मतलब आपस में प्रेम, सत्य और न्याय है, न कि हिंसा और भेद। **व्यक्तिगत विचार:** कबीर की साखियाँ आज के भारत के लिए बेहद जरूरी हैं। हमारा समाज धर्म के नाम पर लड़ रहा है, जाति के नाम पर लड़ रहा है। कबीर कहते हैं कि ये सब बातें अगर सच्चे मन (शुद्ध हृदय) से न हों, तो बेकार हैं। हमें कबीर के संदेश को समझना और अपनाना चाहिए। **निष्कर्ष:** कबीर की साखियाँ केवल साहित्य नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन हैं। आधुनिक समाज को कबीर से सीखना चाहिए कि कैसे शांति, समानता और सच्चाई के साथ रहा जाए।

नए 2026-27 CBSE पैटर्न में पैटर्न बदलाव

CBSE 2024-25 के तर्कसंगत किए गए हिंदी वसंत पाठ्यक्रम ने कबीर की साखियाँ को **संकल्पना-आधारित** के बजाय **रटने-आधारित** सवालों की ओर सरलीकृत किया है। यहाँ हम क्या बदलाव की उम्मीद करते हैं: **बदलाव 1: 'निर्गुण भक्ति' को दार्शनिक दृष्टिकोण के रूप में जोर देना** पुराने पेपर 'कबीर कौन हैं?' पूछते थे (परिभाषा)। नए पेपर 'कबीर की निर्गुण भक्ति की परिभाषा दें और उसे सखी 1 व 2 से सिद्ध करें' पूछते हैं (अनुप्रयोग)। यह कठिन है क्योंकि इसके लिए दर्शन को सबूत से जोड़ना जरूरी है। **बदलाव 2: तुलनात्मक और विपरीत सवाल** 'सखी 1 को समझाइए' के बजाय, 'सखी 1 और सखी 6 में ज्ञान और समाज के बारे में कबीर का विचार कैसे अलग है?' जैसे सवाल आएंगे। **बदलाव 3: सामाजिक प्रासंगिकता का कोण** नया पैटर्न छात्रों को यह सिद्ध करने के लिए प्रेरित करता है कि *क्यों* कबीर की साखियाँ 2024 में भी जरूरी हैं। यह गंभीर सोच परीक्षण करता है, रटने वाली सीख नहीं। 'आज के दौर में सखी 6 का संदेश कहाँ तक प्रासंगिक है? अपने विचार दें' जैसे सवालों की उम्मीद करें। **बदलाव 4: शुद्ध व्याकरण पर कम ध्यान** पुराने 'रेखांकित शब्द का अर्थ लिखिए' सवाल कम आते हैं। इसकी जगह संदर्भ में अर्थ: 'इस पंक्ति में "पानी" का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?' **आपकी तैयारी के लिए यह क्या मायने रखता है:** - सिर्फ साखियाँ न रटें; उनके गहरे अर्थ को समझें - दो साखियों की एक ही विषय पर तुलना का अभ्यास करें - कबीर के विचारों को आधुनिक सामाजिक समस्याओं (जाति, लिंग, धर्म) से जोड़ना सीखें - 5 अंक के जवाबों में ऐसी सोच दिखाएँ जो पाठ्यपुस्तक की नकल न हो, बल्कि आपकी समझ हो

इस अध्याय के लिए त्वरित प्रयास की रणनीति (परीक्षा हॉल के सुझाव)

**1-अंक के प्रश्न (90 सेकंड प्रत्येक):** - प्रश्न को दो बार पढ़ें। क्या यह परिभाषा, उदाहरण या विषय-वस्तु पूछ रहा है? - जवाब 1–2 वाक्य से ज़्यादा न दें। परीक्षकों को लंबे 1-अंक के जवाब पसंद नहीं हैं। - उदाहरण: प्रश्न: 'कबीर के अनुसार ज्ञान क्यों महत्वपूर्ण है?' उत्तर: 'क्योंकि यह सभी दुःखों को नष्ट करता है और मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जाता है.' **3-अंक के प्रश्न (12 मिनट प्रत्येक):** - **मिनट 0–1**: प्रश्न में मुख्य शब्दों को रेखांकित करें (उदाहरण: 'समझाइए', 'तुलना करें', 'संदेश क्या है?') - **मिनट 1–8**: परिचय (1 वाक्य) + व्याख्या (3–4 उदाहरण/बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य) लिखें - **मिनट 8–12**: पुनः जांचें। वर्तनी जांचें और देखें कि प्रत्येक बिंदु प्रश्न का उत्तर दे रहा है, यादृच्छिक ज्ञान नहीं। - संरचना लंबाई से अधिक महत्वपूर्ण है। एक साफ़, 8-लाइन का 3-अंक का जवाब गंदे 12-लाइन के जवाब से बेहतर है। **5-अंक के प्रश्न (15 मिनट प्रत्येक):** - **मिनट 0–2**: अपने जवाब की रूपरेखा हाशिये पर बनाएं: परिचय → बिंदु 1 (उदाहरण सहित) → बिंदु 2 (उदाहरण सहित) → बिंदु 3 → निष्कर्ष - **मिनट 2–12**: पूरा जवाब लिखें। यदि संभव हो तो मुख्य शब्दों के लिए **बोल्ड** का प्रयोग करें। - **मिनट 12–15**: जांचें: क्या मैंने प्रश्न का पूरी तरह उत्तर दिया है? क्या वर्तनी की त्रुटियां हैं? क्या मैं अपने निष्कर्ष को मज़बूत करने के लिए एक वाक्य जोड़ सकता हूं? - तुलनात्मक/विरोधाभासी प्रश्नों के लिए (उदाहरण: सखी 1 बनाम सखी 2), अपनी समझ स्पष्ट दिखाने के लिए **तालिका या साथ-साथ तुलना** का उपयोग करें। **सार्वभौमिक सुझाव:** - पाठ्यपुस्तक की भाषा का उपयोग करें, ChatGPT जैसी भाषा नहीं। 'ज्ञान अमूल्य है' न कि 'ज्ञान बहुत कीमती चीज़ है.' - प्रत्येक जवाब में साखी से कम से कम एक उद्धरण या उदाहरण होना चाहिए। अस्पष्ट उत्तरों को 30% अंक मिलते हैं। - यदि 5-अंक के प्रश्न पर फंस जाएं, तो वह लिखें जो आप जानते हैं (भले ही आंशिक रूप से) बजाय इसे खाली छोड़ने के। 5 में से 4 अंक 0 से बेहतर हैं। - परीक्षा के आखिरी 2 मिनट: अपने उत्तरों पर एक नज़र डालें। स्पष्ट त्रुटियों को ठीक करें (बेवकूफ़ी को हटाइए, मतलब को स्पष्ट करिए).

Frequently asked questions

कबीर की साखियाँ कितनी हैं और CBSE में कौन-सी पढ़ी जाती हैं?+
NCERT Vasant में 6 साखियाँ दी गई हैं। सभी को CBSE Class 9 के लिए पढ़ना जरूरी है, लेकिन सखी 1, 2 और 6 परीक्षा में सबसे ज्यादा आते हैं। ये तीनों नीति काव्य के मूल संदेश (ज्ञान, भक्ति, समता) को सबसे स्पष्ट करती हैं।
निर्गुण भक्ति क्या है? कबीर को निर्गुण भक्त क्यों कहते हैं?+
निर्गुण = गुणों से रहित, यानी आकार और गुणों से परे। कबीर को निर्गुण भक्त कहते हैं क्योंकि वे ईश्वर को निराकार (बिना शरीर) मानते हैं। वे मूर्ति-पूजा, तीर्थ, और धार्मिक अनुष्ठान को महत्व नहीं देते—केवल हृदय की शुद्धता को महत्व देते हैं।
सखी 1 में 'पानी' का क्या अर्थ है?+
सखी 1 में पानी प्रतीकात्मक है: जैसे पानी चिकना, निर्मल और सब जगह समा सकता है, वैसे ही ज्ञान है। पानी जैसे गंदगी को धोता है, वैसे ही ज्ञान अज्ञान को धोता है। पानी सभी के लिए बराबर है—निर्गुण भक्ति की तरह।
CBSE परीक्षा में कबीर की साखियों से 3-मार्क का सवाल पूछा जाए तो किस चीज़ को प्राथमिकता दें?+
3-मार्क के सवाल में संरचना और साक्ष्य को प्राथमिकता दें। परिचय (1 line) + कम से कम 2–3 points जिनमें साखी से उदाहरण हो + निष्कर्ष (1 line)। किसी भी बात को अकेला मत कहिए; हमेशा साखी से सिद्ध करिए।
क्या सखी 3, 4, 5 से भी सवाल आते हैं?+
हाँ, लेकिन कम। सखी 1, 2, 6 से 80% सवाल आते हैं। अगर आपके पास समय सीमित है, तो इन तीनों को पहले अच्छे से समझ लें। बाकी साखियों को संक्षेप में पढ़ें—कम से कम एक बार तो पूरे करिए।
कबीर की साखियों से 1-मार्क के सवाल में 'लंबा जवाब' देना क्यों गलत है?+
1-मार्क का मतलब है 1 बिंदु, 1 परिभाषा, या 1 संक्षिप्त स्पष्टीकरण। 10-12 लाइन का जवाब examiner को लगता है कि आप सवाल नहीं समझे या समय बर्बाद कर रहे हो। 1-2 sentences में पूरा दें, स्पष्ट और सीधा।
क्या कबीर की साखियों में साकार और निर्गुण भक्ति दोनों हैं?+
नहीं। कबीर की साखियाँ पूरी तरह निर्गुण भक्ति पर केंद्रित हैं। वे राम और अल्लाह को निराकार परमात्मा के रूप में देखते हैं, न कि मूर्ति या पुजारी की पूजा को मानते हैं। यही उनकी विशेषता है।
पिछले 5 सालों में कबीर की साखियों से कौन सा टॉपिक सबसे ज्यादा दोहराया गया है?+
नीति और अर्थ (meaning)। खासकर (a) ज्ञान का महत्व (सखी 1), (b) सच्ची भक्ति (सखी 2), (c) सामाजिक समानता (सखी 6)। ये तीनों कबीर के मूल विचार हैं और हर साल किसी न किसी रूप में आते हैं।

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