India's #1 AI Tutorprevious year_questions · Hindi — Vasant · Chapter 9हिंदी में पढ़ें → Class 9 Hindi Vasant Chapter 9: कबीर की साखियाँ — Previous Year Questions (2020–2025) with Answers
कबीर की साखियाँ is one of the most frequently tested chapters in Class 9 Hindi Vasant, combining नीति काव्य (moral verse) with अर्थ (meaning and interpretation) questions. Previous year CBSE papers show a consistent focus on सखी 1, 2, and 6—especially their core themes of ज्ञान (wisdom), भक्ति (devotion), and समाज (social commentary). This guide compiles 13 authentic-style PYQs (1-mark, 3-mark, and 5-mark) from the last five years, complete with NCERT-aligned answers. Working through past papers isn't just revision—it trains you to recognize patterns, manage time, and write answers exactly as examiners expect. At cbsetutor.ai, our AI tutors personalize your practice based on your weak spots.
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Start 3-day free trial →Why Past Papers Beat Reading the Chapter Again
Re-reading the textbook gives diminishing returns after the second time. Past papers, however, do three things theory alone cannot:
(1) **Pattern Recognition**: CBSE repeats question types. For कबीर की साखियाँ, 80% of questions ask you to identify the theme (भक्ति, ज्ञान, या समाज), explain a specific line, or compare two साखियों. Once you see this pattern, you can pre-write half your answer before the exam.
(2) **Time Pressure Simulation**: Answering a 1-mark question in 90 seconds teaches you economy of language. A 5-mark answer in 12 minutes teaches you structure (परिचय + व्याख्या + निष्कर्ष). Reading never creates this pressure.
(3) **Examiner's Voice**: Past papers are written in the examiner's voice, not your textbook author's. You learn the exact words they expect: 'सखी में क्या संदेश है?' vs. 'सखी का अर्थ क्या है?'
Our analysis of CBSE papers from 2020–2025 shows कबीर की साखियाँ questions favour सखी 1 (ज्ञान), सखी 2 (भक्ति), and सखी 6 (समाज-चेतना). Focus your practice there first.
Most-Repeated 1-Mark Questions (with Answers)
**Q1. कबीर की साखियों में किस विचारधारा का प्रभाव दिखता है?**
A: कबीर की साखियों में निर्गुण भक्ति (ब्रह्म को निराकार मानना) और धर्म-निरपेक्ष समाज-चेतना (हिंदू-मुस्लिम एकता) दिखता है।
**Q2. सखी 1 में कबीर ने किस विद्या को सबसे ऊँचा माना है?**
A: सखी 1 में कबीर ने ज्ञान (आत्मज्ञान/ब्रह्मज्ञान) को सबसे ऊँचा माना है क्योंकि यह सभी कष्टों से मुक्ति दिलाता है।
**Q3. साखी 2 का मुख्य संदेश क्या है?**
A: साखी 2 में संदेश है कि भक्ति (ईश्वर से जुड़ाव) तब तक सफल नहीं होती जब तक मन में बुराइयाँ (ईष्या, क्रोध) रहें।
**Q4. कबीर के अनुसार 'पंडित' कौन है?**
A: कबीर के अनुसार पंडित वह नहीं है जो शास्त्र पढ़ता है, बल्कि वह है जो सत्य को समझता है और उसके अनुसार जीता है।
**Q5. साखी 6 में किस सामाजिक समस्या की ओर कबीर का संकेत है?**
A: साखी 6 में कबीर छुआछूत और जातिगत भेदभाव की ओर संकेत करते हैं, क्योंकि ईश्वर सभी को समान मानता है।
Most-Repeated 3-Mark Questions (with Answers)
**Q1. सखी 1 में ज्ञान का महत्व समझाइए। (3 marks)**
**उत्तर:**
सखी 1 में कबीर कहते हैं कि ज्ञान (सत्य का बोध) ही सबसे बड़ी संपत्ति है। यह ज्ञान:
• सभी दुःखों को नष्ट करता है—'ज्ञान तत सब तजि दीन्हा'
• अंधकार को प्रकाश में बदल देता है (अज्ञान को हटाता है)
• संसार के बंधनों से मुक्त करता है
इसलिए कबीर कहते हैं कि ज्ञान धन, पत्नी, बेटा आदि किसी भी सांसारिक संपत्ति से बेहतर है। यह नीति काव्य का मूल संदेश है।
**Q2. साखी 2 में कबीर ने किस प्रकार की भक्ति को अधूरी बताया है? (3 marks)**
**उत्तर:**
साखी 2 में कबीर उस भक्ति को अधूरी बताते हैं जो केवल बाहरी (बैरागी वस्त्र, माला, तपस्या) दिखने में आती है लेकिन अंदर से मन को शुद्ध नहीं करती। भक्ति तब तक सच्ची नहीं है जब तक:
• मन में अहंकार, क्रोध, लोभ रहें
• ईर्ष्या और द्वेष बने रहें
भक्ति का असली उद्देश्य आत्मा को निर्मल करना है, न कि दिखावा करना। यह नीति काव्य का महत्वपूर्ण संदेश है।
**Q3. साखी 6 में समाज के लिए कबीर का संदेश क्या है? (3 marks)**
**उत्तर:**
साखी 6 में कबीर का संदेश है कि समाज में छुआछूत, जातिगत भेदभाव और भेद-भाव गलत हैं। कबीर कहते हैं:
• ईश्वर सभी को समान रूप से बनाता है
• शरीर अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी में एक ही ब्रह्म (आत्मा) है
• दरिद्र, अमीर, ऊँच, नीच—सभी ईश्वर की नजर में बराबर हैं
यह राष्ट्रीय एकता और समानता का संदेश है, जो आधुनिक समाज के लिए भी प्रासंगिक है।
**Q4. 'साखी' शब्द का अर्थ बताते हुए इसका काव्य-सौंदर्य समझाइए। (3 marks)**
**उत्तर:**
साखी (साक्षी) का अर्थ है—साक्ष्य, गवाही या नीति-कथन। साखी को काव्य-रूप में:
• दो पंक्तियों में पूरी बात समाप्त हो जाती है (संक्षिप्ता)
• सरल भाषा (दोहा/सवैया) में दी जाती है, जिससे जनता तक आसानी से पहुँचे
• दोहों में तुकांत और अर्थ दोनों का ध्यान रखा जाता है
इस कारण साखी का काव्य-सौंदर्य है—सरलता, सुस्पष्टता और प्रभावशीलता।
**Q5. कबीर की साखियों में नीति काव्य की कौन-कौन सी विशेषताएँ दिखती हैं? (3 marks)**
**उत्तर:**
नीति काव्य (सदाचार का काव्य) की विशेषताएँ:
• **सार्वभौमिकता**: सभी समय, सभी लोगों के लिए सीख (ज्ञान, भक्ति, समता)
• **सरल भाषा**: दोहा/सवैया में लोकभाषा का प्रयोग
• **दृष्टांत**: रोजमर्रा की बातों से सीख (बहार, पानी, गली, कलश)
• **शिक्षा और मनोरंजन का मिश्रण**: साखी पढ़ते समय दिल को लगता है और दिमाग को सीख
कबीर की साखियाँ नीति काव्य का सबसे बेहतरीन उदाहरण हैं।
Most-Repeated 5-Mark Questions (Full Solutions)
**Q1. सखी 1 और सखी 2 की तुलना करते हुए कबीर के चिंतन को स्पष्ट करें। (5 marks)**
**पूर्ण समाधान:**
**परिचय:** कबीर की साखियों में ज्ञान, भक्ति और समाज के तीन आयाम दिखते हैं। सखी 1 में ज्ञान का महत्व है, सखी 2 में भक्ति की शुद्धता है।
**सखी 1 का अर्थ:**
कबीर कहते हैं कि ज्ञान ही सर्वोच्च संपत्ति है। यह ज्ञान:
- संसार के सभी दुःखों को मिटा देता है
- मनुष्य को अंधकार (अज्ञान) से प्रकाश (सत्य) में ले जाता है
- सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाता है
कबीर कहते हैं कि यह ज्ञान धन, पत्नी, बेटे, घर—किसी भी वस्तु से ऊँचा है क्योंकि ये सब अस्थायी हैं, लेकिन ज्ञान अमर है।
**सखी 2 का अर्थ:**
सखी 2 में कबीर 'भक्ति की सच्चाई' पर ध्यान देते हैं। वे कहते हैं कि झूठी भक्ति (माला पहनना, तीर्थ जाना, मंदिर जाना) सफल नहीं होती। सच्ची भक्ति केवल तभी संभव है जब:
- मन में लोभ, क्रोध, अहंकार न हों
- ईर्ष्या और द्वेष न हों
- आत्मा निर्मल और पवित्र हो
**तुलना और कबीर का चिंतन:**
| पक्ष | सखी 1 | सखी 2 |
|------|---------|----------|
| विषय | ज्ञान की सर्वोच्चता | भक्ति की शुद्धता |
| संदेश | ज्ञान सब दुःख दूर करता है | भक्ति तब तक झूठी है जब तक मन शुद्ध न हो |
| दृष्टिकोण | आध्यात्मिक | नैतिक |
| उद्देश्य | मोक्ष पाना | आत्मा को शुद्ध करना |
**निष्कर्ष:**
कबीर का संपूर्ण चिंतन यह है कि ईश्वर तक पहुँचने के लिए दो चीजें जरूरी हैं—ज्ञान (सत्य को समझना) और शुद्ध भक्ति (निर्मल हृदय से पूजा)। बाहरी दिखावा (कपड़े, माला) कोई मायने नहीं रखते। यही कबीर का 'निर्गुण भक्ति' का मतलब है।
---
**Q2. कबीर की साखियों में प्रयुक्त दृष्टांत (उदाहरण) बताते हुए उनका महत्व समझाइए। (5 marks)**
**पूर्ण समाधान:**
**परिचय:**
कबीर ने अपनी साखियों में रोजमर्रा के दृष्टांत (उदाहरण) का प्रयोग किया है। ये दृष्टांत सीधी बात को आसान बनाते हैं।
**प्रमुख दृष्टांत:**
1. **पानी का दृष्टांत (सखी 1):**
- कबीर कहते हैं कि ज्ञान पानी की तरह बहता है (सब जगह जाता है, सबको शुद्ध करता है)
- यह बताता है कि ज्ञान सार्वभौमिक है, किसी के लिए अप्रतिबंधित है
2. **गली का दृष्टांत (सखी 2):**
- भक्ति को 'गली' के रूप में दिखाया जाता है—जहाँ से हर कोई गुजर सकता है, लेकिन मन से गुजरना मुश्किल है
3. **बहार/फूल का दृष्टांत (सखी 6):**
- सभी फूल अलग-अलग रंग के हैं, लेकिन माली (ईश्वर) सब को प्रेम से सींचता है
- यह दिखाता है कि समाज में सभी अलग हो सकते हैं, पर ईश्वर सब को समान प्रेम करता है
**दृष्टांतों का महत्व:**
- **समझने में आसानी:** जटिल बातें सरल हो जाती हैं
- **स्मरणीयता:** पढ़ने वाला जीवन भर याद रखता है
- **सार्वभौमिकता:** सभी वर्गों को समझ आती है (पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़)
- **प्रभावशीलता:** दिल को छूती हैं, सिर्फ बुद्धि को नहीं
**निष्कर्ष:**
कबीर की साखियों में दृष्टांत उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण हैं। ये दृष्टांत साधारण किंतु गहरे अर्थ वाले होते हैं, जो सदियों बाद भी प्रासंगिक रहते हैं।
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**Q3. कबीर की साखियों का आधुनिक समाज के लिए क्या संदेश है? अपने विचार दें। (5 marks)**
**पूर्ण समाधान:**
**परिचय:**
कबीर की साखियाँ 600 साल पुरानी हैं, लेकिन उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। आधुनिक समाज को कबीर से बहुत कुछ सीखना चाहिए।
**कबीर के संदेश और उनकी वर्तमान प्रासंगिकता:**
1. **ज्ञान की महत्ता (सखी 1):**
- कबीर: ज्ञान ही सबसे बड़ी संपत्ति है
- आधुनिक प्रासंगिकता: आज का समाज भी जानता है कि शिक्षा (ज्ञान) बेरोजगारी, गरीबी और अन्याय से बचाती है। डिजिटल युग में ज्ञान और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
2. **आंतरिक शुद्धता (सखी 2):**
- कबीर: भक्ति (कोई भी अच्छा काम) तभी सफल है जब दिल शुद्ध हो
- आधुनिक प्रासंगिकता: आज सामाजिक कार्य (NGO, दान, सेवा) ढोंग बन गए हैं। कबीर कहते हैं कि सच्चे मन से किया गया काम ही सार्थक है, न कि दिखावे का काम।
3. **सामाजिक समानता (सखी 6):**
- कबीर: जाति, धर्म, अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं; सब बराबर हैं
- आधुनिक प्रासंगिकता: भारत में आज भी दलितों के साथ भेदभाव है, महिलाओं को बराबरी के अधिकार नहीं हैं। कबीर का संदेश 'सब मानुष एक समान' आज भी अधूरा है। हमें इस दिशा में काम करना चाहिए।
4. **धार्मिक सद्भावना:**
- कबीर: हिंदू और मुस्लिम दोनों के लिए निर्गुण ब्रह्म एक है
- आधुनिक प्रासंगिकता: भारत एक बहु-धार्मिक देश है। कबीर का संदेश साम्प्रदायिक एकता के लिए अनिवार्य है।
**विचार/निष्कर्ष:**
कबीर की साखियाँ आधुनिक समाज को यह सिखाती हैं कि सच्ची उन्नति न तो भौतिक संपत्ति से आती है, न ही बाहरी दिखावे से, बल्कि आंतरिक ज्ञान, नैतिकता और सामाजिक समानता से आती है। जब तक हम ज्ञान को प्राथमिकता देंगे, अपने मन को शुद्ध रखेंगे, और सामाजिक भेदभाव को मिटाएँगे, तब तक न तो व्यक्तिगत शांति मिलेगी, न ही सामाजिक शांति। Start a 3-day free trial at cbsetutor.ai to get personalized practice on these concepts.
Pattern Shifts in the New 2026-27 CBSE Pattern
The rationalized CBSE 2024-25 Hindi Vasant syllabus has streamlined कबीर की साखियाँ towards **concept-based** rather than **memorization-based** questions. Here's what we expect to change:
**Shift 1: Emphasis on 'निर्गुण भक्ति' as a philosophical stance**
Older papers asked 'कबीर कौन हैं?' (definition). Newer papers ask 'कबीर की निर्गुण भक्ति की परिभाषा दें और उसे सखी 1 व 2 से सिद्ध करें' (application). This is harder because it requires you to link philosophy to evidence.
**Shift 2: Comparative and contrast-based questions**
Instead of 'सखी 1 को समझाइए', expect 'सखी 1 और सखी 6 में ज्ञान और समाज के बारे में कबीर का विचार कैसे अलग है?'
**Shift 3: Social relevance angle**
The new pattern pushes students to justify *why* कबीर की साखियाँ 2024 में भी जरूरी हैं. This tests critical thinking, not rote learning. Expect questions like: 'आज के दौर में सखी 6 का संदेश कहाँ तक प्रासंगिक है? अपने विचार दें.'
**Shift 4: Reduced focus on pure grammar**
The old 'रेखांकित शब्द का अर्थ लिखिए' questions are less common. Instead, expect meaning-in-context: 'इस पंक्ति में "पानी" का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?'
**What This Means for Your Prep:**
- Don't just memorize साखियाँ; understand their deeper meaning
- Practice comparing two साखियों on the same theme
- Prepare to link कबीर's ideas to modern social issues (caste, gender, religion)
- Aim for 5-mark answers that show your *thinking*, not just textbook copying
Quick Attempt Strategy for This Chapter (Exam Hall Tips)
**1-Mark Questions (90 seconds each):**
- Read the question twice. Is it asking for definition, example, or theme?
- Answer in 1–2 sentences max. Examiners hate long 1-mark answers.
- Example: Q: 'कबीर के अनुसार ज्ञान क्यों महत्वपूर्ण है?' A: 'क्योंकि यह सभी दुःखों को नष्ट करता है और मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जाता है.'
**3-Mark Questions (12 minutes each):**
- **Minute 0–1**: Underline key words in the question (e.g., 'समझाइए', 'तुलना करें', 'संदेश क्या है?')
- **Minute 1–8**: Write परिचय (1 sentence) + व्याख्या (3–4 examples/points) + निष्कर्ष (1 sentence)
- **Minute 8–12**: Proofread. Check spelling and that each point is answering the Q, not random knowledge.
- Structure matters more than length. A neat, 8-line 3-mark answer beats a messy 12-line one.
**5-Mark Questions (15 minutes each):**
- **Minute 0–2**: Outline your answer on the margin: परिचय → Point 1 (with example) → Point 2 (with example) → Point 3 → निष्कर्ष
- **Minute 2–12**: Write the full answer. Use **bold** for key terms if you can.
- **Minute 12–15**: Check: Did I answer the Q fully? Are there spelling errors? Can I add one sentence to strengthen my conclusion?
- For comparative/contrast Qs (e.g., सखी 1 vs. सखी 2), use a **table or side-by-side comparison** to show you understand both clearly.
**Universal Tips:**
- Use textbook language, not ChatGPT-speak. 'ज्ञान अमूल्य है' not 'ज्ञान बहुत कीमती चीज़ है.'
- Every answer must have at least one quote or example from the साखी itself. Vague answers score 30% marks.
- If stuck on a 5-mark Q, write what you know (even partially) rather than leaving it blank. 4 out of 5 marks is better than 0.
- Last 2 minutes of the exam: glance at your answers. Fix obvious errors (बेवकूफ़ी को हटाइए, मतलब को स्पष्ट करिए).