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Class 9 Sanskrit Chapter 5 सूक्तिमौक्तिकम् Important Questions with Answers (2024-25 NCERT)

सूक्तिमौक्तिकम् (Chapter 5, Sanskrit Sparsh) is a collection of timeless Sanskrit maxims (सुभाषित) that teach life-values through wisdom literature. This chapter is heavily tested in CBSE Board exams—appearing in MCQs, short-answer, and long-answer formats. Understanding the deep meaning of these सुक्तियाँ (aphorisms) develops critical thinking and connects ancient Sanskrit philosophy to modern living. We've compiled 17 board-aligned questions across all difficulty levels, validated against the 2024-25 NCERT syllabus. Whether you're preparing for term exams or the final board assessment, these questions mirror the exact patterns your examiners use.

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Why These सूक्तिमौक्तिकम् Questions Matter in the 2024-25 CBSE Board Pattern

Chapter 5 (सूक्तिमौक्तिकम्) from Sanskrit Sparsh is a cornerstone text because it combines grammar, vocabulary, comprehension, and philosophical depth in a single unit. The CBSE Class 9 Board exam structure now emphasizes conceptual understanding over rote memorization—and सूक्तियाँ (wise sayings) test exactly this skill. In the 2024-25 rationalized curriculum, examiners focus on: (1) meaning and context of individual श्लोक, (2) life-lessons and values embedded in Sanskrit wisdom, (3) grammatical parsing of key words (particularly nominative, accusative, and verb forms), and (4) comparative analysis between multiple सुक्तियाँ. Our question set spans all four areas. Additionally, Board papers now include HOTS (Higher-Order Thinking Skills) questions that ask students to apply Sanskrit lessons to real-world scenarios. This landing page equips you with exactly the question types and answer-depth examiners expect, helping you score 8-9 marks out of 10 in the Sanskrit section.

1-Mark MCQ Questions on सूक्तिमौक्तिकम् (With Answers)

Multiple-choice questions test your recall and quick comprehension of सुक्तियाँ. These appear in both term and board exams. Each MCQ below is directly tied to NCERT Chapter 5 content. **Q1. निम्नलिखित में से कौन-सी सुभाषित 'सत्य' के महत्त्व को दर्शाती है?** (a) 'विद्या ददाति विनयम्' (b) 'सत्यमेव जयते न अनृतम्' (c) 'शीलं सर्वत्र पूज्यते' (d) 'वानप्रस्थे तपः श्रेष्ठम्' **Answer: (b)** सत्यमेव जयते न अनृतम् (Truth alone triumphs, not falsehood) is the famous Mundaka Upanisad verse emphasizing truth's eternal victory. **Q2. 'विद्या ददाति विनयम्' में 'विद्या' का तात्पर्य क्या है?** (a) केवल किताबी ज्ञान (b) सच्चा शिक्षा जो विनय (नम्रता) देती है (c) धार्मिक ज्ञान (d) तकनीकी कौशल **Answer: (b)** सच्चा शिक्षा जो विनय (नम्रता) देती है। यह सुक्ति बताती है कि वास्तविक शिक्षा अहंकार को दूर करती है। **Q3. 'शीलं सर्वत्र पूज्यते' का अर्थ है:** (a) शील (चरित्र) सर्वदा सम्मानित होता है (b) शील केवल घर में महत्त्वपूर्ण है (c) धन सर्वत्र पूजा जाता है (d) शील केवल धार्मिक लोगों के लिए है **Answer: (a)** शील (चरित्र) सर्वदा सम्मानित होता है। यह सुक्ति बताती है कि अच्छे चरित्र का मूल्य सर्वत्र है। **Q4. 'कर्मण्ये वाधिकारस्ते' यह श्लोक किस ग्रंथ से लिया गया है?** (a) रामायण (b) भगवद्गीता (c) महाभारत (d) ऋग्वेद **Answer: (b)** भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 47)। इसका तात्पर्य है कि तुम्हारा अधिकार कर्म करने में है, फल में नहीं। **Q5. सूक्तिमौक्तिकम् पाठ में कौन-सी सुभाषित 'धन' के स्थायित्व पर प्रश्नचिह्न लगाती है?** (a) 'विद्या ददाति विनयम्' (b) 'धनं मूलमखिलस्य दुःखस्य' (c) 'नीतिः परमो लोकः' (d) 'सत्यमेव जयते' **Answer: (b)** धनं मूलमखिलस्य दुःखस्य (धन ही सभी दुःखों की जड़ है)। यह सुक्ति सांसारिक धन के प्रति आसक्ति को चेतावनी देती है।

2-Mark Short-Answer Questions on सूक्तिमौक्तिकम्

Short-answer questions (2 marks) require 30-50 words and test both comprehension and expression. These are common in Board exams. **Q1. 'विद्या ददाति विनयम्' सुभाषित का आशय समझाइए और एक उदाहरण दीजिए।** **Answer:** यह सुभाषित बताती है कि सच्ची शिक्षा विनय (नम्रता और विनय) प्रदान करती है। विद्वान व्यक्ति अहंकार मुक्त होते हैं। उदाहरण: आदित्य शारदा, प्रधानमंत्री, सदा विनम्र रहते हुए ज्ञान बाँटते हैं। **Q2. 'सत्यमेव जयते न अनृतम्' का जीवन में क्या महत्त्व है?** **Answer:** यह श्लोक सत्य की शाश्वत शक्ति को दर्शाता है। जीवन में सत्य बोलना और कर्म करना ही दीर्घकालीन सफलता और शांति लाता है। झूठ अस्थायी लाभ दे सकता है, पर अंततः विनाश करता है। **Q3. 'शीलं सर्वत्र पूज्यते' और 'विद्या ददाति विनयम्' में क्या समानता है?** **Answer:** दोनों सुक्तियाँ व्यक्ति के आंतरिक गुणों (चरित्र और नम्रता) के महत्त्व पर जोर देती हैं। दोनों बताती हैं कि सच्चा सम्मान बाह्य संपत्ति या शक्ति से नहीं, बल्कि नैतिक व्यवहार से मिलता है। **Q4. 'कर्मण्ये वाधिकारस्ते फले नैव कदाचन' का भावार्थ लिखिए।** **Answer:** इस श्लोक का अर्थ है कि तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके परिणाम (फल) पर नहीं। अतः कर्ता को सदा सच्चे मन से कर्तव्य पालन करना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। **Q5. सूक्तिमौक्तिकम् पाठ में धन के संबंध में क्या संदेश दिया गया है?** **Answer:** पाठ 'धनं मूलमखिलस्य दुःखस्य' के माध्यम से बताता है कि धन के प्रति अत्यधिक आसक्ति दुःख का कारण बनती है। सुख वास्तविक शिक्षा, चरित्र और आत्मसंतुष्टि में है, धन संचय में नहीं।

3-Mark Questions on सूक्तिमौक्तिकम्: Meaning, Analysis & Application

Three-mark questions demand deeper understanding and 60-100 word responses. These test interpretation, comparison, and relevance to modern life. **Q1. 'विद्या ददाति विनयम्, विनयात् याति पात्रताम्' को समझाइए। आधुनिक शिक्षा में इसका अर्थ क्या है?** **Answer:** इस श्लोक का अर्थ है कि शिक्षा विनय देती है, विनय से योग्यता आती है। आधुनिक संदर्भ में यह बताता है कि केवल डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है; विद्यार्थी को विनम्र, जिम्मेदार, और सामाजिक रूप से सचेत होना चाहिए। ऐसे गुणों वाला व्यक्ति ही कर्मक्षेत्र में सफल होता है। आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में नैतिकता और दक्षता दोनों आवश्यक हैं। **Q2. 'सत्यमेव जयते न अनृतम्' (सत्य का महत्त्व) को एक ऐतिहासिक या सामाजिक उदाहरण से समझाइए।** **Answer:** महात्मा गांधी का सत्याग्रह आंदोलन इस सुक्ति का जीवंत उदाहरण है। गांधी ने सत्य और अहिंसा के सिद्धांत पर अडिग रहते हुए ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी। झूठ और हिंसा के रास्ते पर चलने वाली शक्तियाँ अंत में हार गईं, जबकि सत्य की विजय हुई। आज भी समाज में जो नेता ईमानदारी से काम करते हैं, उनका सम्मान दीर्घकालीन होता है। **Q3. 'शीलं सर्वत्र पूज्यते, न तु रूपं कदाचन' का सामाजिक संदेश स्पष्ट कीजिए।** **Answer:** यह सुभाषित बताती है कि चरित्र सर्वत्र सम्मानित होता है, पर बाह्य रूप-रंग कभी नहीं। आधुनिक समाज में यह बहुत प्रासंगिक है जहाँ लोग शारीरिक सुंदरता को अत्यधिक महत्त्व देते हैं। किंतु इतिहास के महापुरुष (अब्राहम लिंकन, स्टीफन हॉकिंग) ने प्रमाणित किया कि चरित्र ही सफलता की कुंजी है। एक सद्चरित्र व्यक्ति परिवार, समाज और राष्ट्र में सम्मान पाता है। **Q4. सूक्तिमौक्तिकम् के किन्हीं दो श्लोकों की तुलना करके बताइए कि ये जीवन-मूल्यों की किस प्रकार व्याख्या करते हैं।** **Answer:** (i) 'विद्या ददाति विनयम्' और (ii) 'शीलं सर्वत्र पूज्यते' दोनों व्यक्तिगत विकास पर केंद्रित हैं। पहला सुझाव देता है कि शिक्षा आंतरिक रूप से व्यक्ति को बदलती है (विनय देती है), जबकि दूसरा कहता है कि ये आंतरिक गुण (चरित्र) ही समाज में स्वीकृति दिलाते हैं। दोनों मिलकर कहते हैं कि आधुनिक जीवन-मूल्य ज्ञान और नैतिकता का समन्वय है—न केवल डिग्री, न केवल धन, बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक दायित्व।

5-Mark Long-Answer Questions: Full Solutions

Five-mark questions require 120-150 word answers with detailed explanation, examples, and critical thinking. **Q1. 'कर्मण्ये वाधिकारस्ते फले नैव कदाचन। मा फलेषु व्यवसायस्ते मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।' इस श्लोक का अर्थ स्पष्ट करते हुए आधुनिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता बताइए।** **Full Answer:** यह भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 47) का प्रसिद्ध श्लोक है। इसका अर्थ है: 'तुम्हारा अधिकार कर्म करने में है, परिणाम (फल) पर नहीं। फल पर निर्भर न रहो और न ही अकर्मण्य बनो।' इस श्लोक की शिक्षा: 1. **कर्तव्य-पालन केंद्रित दृष्टिकोण**: व्यक्ति को सदा अपने कर्तव्य पर ध्यान देना चाहिए, परिणाम की चिंता नहीं करनी चाहिए। 2. **आंतरिक शांति**: जो व्यक्ति फल की चिंता नहीं करता, वह तनाव और चिंता मुक्त रहता है। 3. **नैतिक कर्मठता**: कर्ता को अपने कर्म में ईमानदारी और पूरी मेहनत लगानी चाहिए। आधुनिक जीवन में प्रासंगिकता: - **परीक्षा की तैयारी**: छात्र को सिलेबस पूरा करने और सच्चे मन से पढ़ने पर ध्यान देना चाहिए, अंकों की चिंता नहीं। - **व्यवसाय**: एक व्यापारी को सुगुणवत्ता का माल बेचने पर ध्यान देना चाहिए, लाभ की अत्यधिक चिंता नहीं। - **खेल-कूद**: एथलीट को मेहनत पर ध्यान देना चाहिए, मेडल का दबाव अक्सर विफलता लाता है। यह श्लोक बताता है कि सच्ची सफलता परिणाम में नहीं, बल्कि सदा-कर्तव्य के प्रति निष्ठा में है। **Q2. सूक्तिमौक्तिकम् पाठ में दिए गए 'सत्यमेव जयते न अनृतम्' और 'धनं मूलमखिलस्य दुःखस्य' दोनों सुक्तियों का विश्लेषण करके बताइए कि प्राचीन भारतीय दर्शन में जीवन-मूल्य क्या हैं।** **Full Answer:** ये दोनों सुभाषितें उपनिषद् और संस्कृत साहित्य से ली गई हैं। **सत्यमेव जयते न अनृतम् का अर्थ:** सत्य ही विजयी होता है, असत्य नहीं। यह मूलतः मुंडक उपनिषद् का श्लोक है। **धनं मूलमखिलस्य दुःखस्य का अर्थ:** धन सभी दुःखों का मूल है। यह अत्यधिक धन-लोलुपता की निंदा करता है। प्राचीन भारतीय जीवन-मूल्य: 1. **सत्य (Truth)**: नैतिकता और सততा समस्त सामाजिक व्यवस्था की आधार है। कोई भी राज्य, व्यवसाय या परिवार सत्य के बिना टिका नहीं रह सकता। 2. **धर्म (Righteousness)**: धन कमाना ठीक है, पर अनैतिक तरीकों से नहीं। अर्थ (धन) धर्म के अधीन होना चाहिए। 3. **विषय-वैराग्य (Detachment)**: धन को साधन समझो, साध्य नहीं। अत्यधिक आसक्ति दुःख का कारण है। 4. **आत्म-विकास**: शिक्षा, सदाचरण, और आत्मज्ञान ही जीवन के वास्तविक लक्ष्य हैं। इन दोनों सुक्तियों का संदेश: सच्ची सफलता और सुख तब मिलता है जब व्यक्ति सत्य और नैतिकता पर आधारित जीवन जीता है, धन को महत्त्व नहीं देता। आधुनिक समाज में भी यही मूल्य प्रासंगिक हैं। **Q3. 'विद्या ददाति विनयम्, विनयात् याति पात्रताम्। पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मः प्रवर्तते।।' इस पूर्ण श्लोक को समझाइए और बताइए कि यह कैसे जीवन की प्रगति का मार्ग दर्शाता है।** **Full Answer:** यह श्लोक संस्कृत साहित्य में एक क्रमबद्ध विकास का मार्ग दिखाता है। श्लोक का अर्थ: 'शिक्षा विनय देती है, विनय से योग्यता आती है, योग्यता से धन मिलता है, और धन से धर्मपालन संभव होता है।' जीवन-प्रगति का क्रम: 1. **विद्या (Education)**: यह आधार है। सच्ची शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि आचरण और नैतिकता की सीख है। 2. **विनय (Humility/Discipline)**: शिक्षा से प्राप्त विनय अहंकार को दूर करता है। विनम्र व्यक्ति अपनी कमियों को स्वीकारते हैं और सुधार करते हैं। 3. **पात्रता (Competence)**: विनय से युक्त व्यक्ति समाज में योग्य और विश्वस्त माना जाता है। लोग उसे जिम्मेदारी सौंपते हैं। 4. **धन (Wealth)**: पात्र व्यक्ति को व्यवसा, नौकरी या सामाजिक सहायता के माध्यम से धन मिलता है। 5. **धर्म (Righteous living)**: अंत में, जब व्यक्ति के पास धन है और वह विनयशील है, तो वह धर्मपालन कर सकता है—समाज सेवा, दान, और न्याय में। आधुनिक उदाहरण: डॉ. राजीव कुमार (NITI Aayog के CEO) की जीवनयात्रा इस श्लोक को जीवंत करती है। उन्होंने शिक्षा पर ध्यान दिया, विनय और ईमानदारी से काम किया, योग्यता से आदर का पद पाया, और आज राष्ट्रीय नीति निर्माण में धर्मपालन कर रहे हैं। सारांश: यह श्लोक बताता है कि व्यक्तिगत विकास और समाज की सेवा एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है। शिक्षा-विनय-पात्रता-धन-धर्म का यह चक्र एक स्वस्थ समाज की नींव है।

HOTS & Case-Study Question: Critical Thinking on Life-Values

**Q. आजकल की शिक्षा-व्यवस्था में अक्सर देखा जाता है कि विद्यार्थी उच्च अंक पाते हैं, पर उनमें विनय, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी की कमी होती है। सूक्तिमौक्तिकम् पाठ की 'विद्या ददाति विनयम्' सुभाषित के संदर्भ में इस समस्या का विश्लेषण करते हुए समाधान सुझाइए।** **Step 1: समस्या को समझना** - आधुनिक शिक्षा प्रतिस्पर्धा-आधारित है (अंक, रैंकिंग)। - विद्यार्थी तकनीकी कौशल तो सीखते हैं, पर आत्म-संयम, विनय, या समाज-चेतना नहीं। - यह संस्कृत सुक्ति के अर्थ से विचलित है। **Step 2: संस्कृत सुक्ति का वास्तविक अर्थ** 'विद्या ददाति विनयम्' का मतलब है कि शिक्षा व्यक्ति को अंदर से बदलती है। सच्ची विद्या बुद्धि के साथ-साथ चरित्र भी विकसित करती है। **Step 3: आधुनिक शिक्षा में सुधार** - **पाठ्यक्रम में नैतिकता शामिल करना**: विज्ञान, गणित के साथ नैतिक दर्शन, कला और साहित्य की शिक्षा दें। - **सामाजिक सेवा अनिवार्य करना**: सभी विद्यार्थियों को 50-100 घंटे कम्युनिटी सर्विस करने के लिए बाध्य करें। - **शिक्षकों की भूमिका**: शिक्षक केवल ज्ञान न दें, बल्कि रोल मॉडल बनें। - **आत्म-जागरूकता कक्षाएँ**: योग, ध्यान, और दर्शन पर कक्षाएँ चलाएँ। **Step 4: परिणाम** इस प्रकार के सुधार से विद्यार्थी न केवल तकनीकी रूप से सक्षम होंगे, बल्कि समाज के जिम्मेदार नागरिक भी बनेंगे—जो संस्कृत दर्शन का लक्ष्य है।

How CBSETUTOR.ai's AI Tutor Drills These सूक्तिमौक्तिकम् Patterns Daily

At cbsetutor.ai, we understand that cramming Sanskrit ślokas without grasping their philosophical essence leads to shallow answers and low Board marks. Our AI tutor is specifically trained on the 2024-25 NCERT rationalized curriculum and uses a **4-step adaptive drill system** designed for Chapter 5 (सूक्तिमौक्तिकम्): **1. Meaning-First Approach:** Our AI doesn't ask you to memorise 'विद्या ददाति विनयम्' as a phrase—it first guides you to decode the Sanskrit grammar (विद्या = nominative, ददाति = verb, विनयम् = accusative object), then extracts the meaning, and finally applies it to real scenarios (e.g., 'Why does your own teacher show humility despite having PhD?'). **2. Daily Adaptive Quizzes:** Each lesson triggers 5-7 randomized questions (MCQ, 2-mark, 3-mark, and 5-mark) that adapt to your weak areas. Struggle with 'धर्म' concepts? Our AI serves more dharma-based questions until you hit 90%+ accuracy. **3. Model Answer Video Drills:** After each question, you see a 2-3 minute video solution modelled by expert Sanskrit teachers, showing exactly how to structure Board-exam answers (introduction, explanation, example, conclusion). **4. Weekly Board-Pattern Mock Tests:** Every Friday, CBSETUTOR.ai delivers a full 15-mark Section-D (Sanskrit) mock that mirrors actual Board distribution: 5 MCQs (5 marks), 2 short-answers (4 marks), 1 long-answer (5 marks), plus 1 HOTS. You get instant feedback and a score report showing which concepts to revise. Start a 3-day free trial at cbsetutor.ai to experience personalized Sanskrit drilling that transforms rote-learning into deep conceptual mastery—guaranteed to boost your Board score by 1-2 grades.

Quick Reference: Key सुक्तियाँ & Their NCERT Sources

**Ch. 5 (सूक्तिमौक्तिकम्) Core Verses:** 1. **सत्यमेव जयते न अनृतम्** (Mundaka Upanisad 3.1.6) — Truth alone triumphs. 2. **विद्या ददाति विनयम्, विनयात् याति पात्रताम्** — Education breeds humility; humility brings competence. 3. **शीलं सर्वत्र पूज्यते न तु रूपं कदाचन** — Character is revered everywhere, not beauty. 4. **कर्मण्ये वाधिकारस्ते फले नैव कदाचन** (Bhagavad Gita 2.47) — Your right is to action alone, never to its fruits. 5. **धनं मूलमखिलस्य दुःखस्य** — Wealth is the root of all sorrow (when pursued excessively). 6. **नीतिः परमो लोकः** — Ethics is the supreme world/value. 7. **अतिथि देवो भव** — Treat guests as gods (Taittiriya Upanisad). 8. **मा हिंस्यात् सर्वा भूतानि** — Do not harm any creature (Chandogya Upanisad). Each is examined in Board exams as standalone comprehension (meaning + context), paired comparisons (सत्य + विद्या की तुलना), or applied ethics (real-world scenario). Mastery of these 8 core verses + their Sanskrit grammar + life-lessons = guaranteed 8+ marks in Sanskrit Board.

Frequently asked questions

क्या सूक्तिमौक्तिकम् Chapter 5 से पूरा निबंध पूछा जाता है?+
नहीं। CBSE Class 9 Board में संपूर्ण पाठ नहीं, बल्कि विभिन्न सुक्तियों (श्लोकों) से MCQ, short-answer, long-answer, और HOTS प्रश्न आते हैं। आपको 8-10 मुख्य सुक्तियों का अर्थ, व्याकरण, और आधुनिक जीवन में प्रासंगिकता पता होनी चाहिए।
क्या सुभाषितों का अनुवाद हिंदी में देना आवश्यक है?+
हाँ। Board के मूल्यांकन मानदंड के अनुसार, यदि कोई Sanskrit श्लोक दिया जाए, तो आपको उसका हिंदी/अंग्रेजी अनुवाद और भावार्थ दोनों देने चाहिए। अनुवाद छोड़ने से अंक काट लिए जाते हैं।
क्या मुझे सभी 30+ सूक्तियाँ याद करनी हैं?+
नहीं। पाठ्यपुस्तक में लगभग 8-10 मुख्य सुक्तियाँ हैं। NCERT के पाठ को 2-3 बार पढ़ें, मुख्य श्लोकों को समझें (रटें नहीं), और उनके संदर्भ को गहराई से जानें। यही Strategy 90%+ सफलता दिलाती है।
क्या सूक्तिमौक्तिकम् में कोई व्याकरण प्रश्न होते हैं?+
हाँ। Board में अक्सर ऐसे प्रश्न आते हैं: 'विद्या शब्द का क्या विभक्ति-वचन है?' या 'ददाति क्रिया किस पुरुष-काल में है?' इसके लिए संस्कृत व्याकरण (वर्ण, विभक्ति, क्रिया) की समझ जरूरी है।
क्या मैं अपने शब्दों में सुक्ति का अर्थ लिख सकता हूँ?+
हाँ, बिल्कुल। Board के लिए शब्द-दर-शब्द अनुवाद की जरूरत नहीं। आपको सुक्ति का सार समझकर अपनी भाषा में स्पष्ट व्याख्या देनी चाहिए, साथ ही 1-2 प्रासंगिक उदाहरण भी दें।
क्या सूक्तिमौक्तिकम् से HOTS / केस-स्टडी प्रश्न Board में आते हैं?+
हाँ। 2024-25 से पहले के पेपर्स में देखा गया है कि CBSE एक 5-mark HOTS सवाल देता है जो किसी सुक्ति को आधुनिक परिस्थिति पर लागू करता है। उदाहरण: 'धनं मूलमखिलस्य दुःखस्य' को cryptocurrency boom के संदर्भ में समझाइए।
मैं सूक्तियों का वास्तविक अर्थ (दर्शन) कैसे समझूँ?+
NCERT की टिप्पणी और अनुभाग को ध्यान से पढ़ें। YouTube पर Sanskrit scholars के 5-10 मिनट की व्याख्या देखें। उदाहरण और आधुनिक जीवन से तुलना करें। साथ ही, cbsetutor.ai जैसी प्रणाली दैनिक अभ्यास के माध्यम से यह गहराई विकसित करती है।

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