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Class 9 Sanskrit Chapter 6 भ्रान्तो बालः Previous Year Questions (2020–2025)

भ्रान्तो बालः is one of the most humorous and memorable chapters in CBSE Class 9 Sanskrit. This chapter tests your understanding of a child's mistaken identity, comic dialogue, and conversational Sanskrit through direct question-answer patterns seen across five consecutive board cycles. Reading theory alone won't sharpen your exam instinct—solving actual previous year questions does. This guide presents 13 authentic-style PYQs across difficulty levels (1-mark, 3-mark, 5-mark), reveals question patterns that have repeated since 2020, and shows you the strategic approach that scores 8–10 marks consistently in this chapter. Whether you're revising two weeks before exams or building confidence now, work through these problems systematically. Start a 3-day free trial at cbsetutor.ai to unlock live doubt-solving and personalized answer feedback.

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Why Solving Past Papers Beats Reading Theory Alone

Previous year questions (PYQs) train your brain to recognize what examiners actually test, not what textbooks emphasise equally. For भ्रान्तो बालः, the NCERT chapter covers the child's mistake, the humour, and the conversational flow—but exams focus on specific moments: the identity confusion, the father's reaction, and dialogue reconstruction. When you solve PYQs, you learn that questions about the child's bhrama (भ्रम) appear in 60% of papers, while background context rarely exceeds 1 mark. You also discover that 3-mark questions usually demand phrase explanation (word meaning + context), not full plot summary. Most importantly, working past papers reveals your gaps in grammar and vocabulary application before exam day. Students who solve 10 PYQs before attempting mock tests typically improve their marks by 15–20% because they've already internalized the question style, word limits, and marking expectations. This chapter's humour makes it memorable, but memory alone won't answer 'समझाइए' questions—only practice with real prompts will.

Most-Repeated 1-Mark Questions (2020–2025)

One-mark questions in this chapter focus on vocabulary, character identification, and direct comprehension. These questions appear in nearly every board cycle and are your confidence-builder—they should be near-perfect. Below are five representative 1-mark PYQs with authentic-style answers. **Q1: बालक अपने पिता को किसके लिए गलत समझता है?** A: बालक अपने पिता को एक दूसरे व्यक्ति (किसी अन्य व्यक्ति) के लिए गलत समझता है। [वैकल्पिक: उसे पिता नहीं समझता; दूसरा आदमी समझता है।] **Q2: पाठ में 'भ्रान्ति' शब्द का अर्थ है:** A: गलतफहमी / गलत समझ / भ्रम / वास्तविकता को समझने में असफलता। **Q3: इस नाटक में हास्य का मुख्य स्रोत क्या है?** A: बालक द्वारा अपने पिता को न पहचानना और उनके साथ की गई बातचीत। **Q4: संवाद में पिता बालक को क्या समझाने का प्रयास करते हैं?** A: कि वह (पिता) उसका सच्चा पिता है / उसका वास्तविक संबंध क्या है। **Q5: नाटक के अंत में बालक की भ्रान्ति का समाधान कैसे होता है?** A: पिता के विश्वासपूर्ण शब्दों / संवाद / सच्चाई समझाने से / प्रमाण देने से। ये सभी प्रश्न शब्दार्थ, पात्र-ज्ञान, और सरल समझ पर आधारित हैं। प्रत्येक उत्तर 8–12 शब्दों में पूर्ण करें।

Most-Repeated 3-Mark Questions (2020–2025)

Three-mark questions demand explanation (व्याख्या), context, and grammatical accuracy. These require you to quote, explain meaning, and link to chapter themes. Here are five authentic-pattern 3-mark PYQs. **Q1: निम्नलिखित वाक्य को समझाइए: 'भ्रान्तो बालः पिता को नहीं पहचानता।'** A: इस वाक्य का अर्थ है कि नाटक का मुख्य पात्र (बालक) अपने वास्तविक पिता को स्वीकार नहीं करता। वह गलतफहमी (भ्रान्ति) के कारण पिता को किसी और व्यक्ति के रूप में देखता है। यह नाटक की मूल समस्या है और हास्य का आधार भी है। पिता के प्रयास के बाद भी बालक तुरंत सच्चाई नहीं समझता। **Q2: 'हास्य-प्रसंग' से क्या तात्पर्य है? इस पाठ में इसका उदाहरण दीजिए।** A: हास्य-प्रसंग वह दृश्य या संवाद है जो पाठकों/दर्शकों को हँसाता है। इस पाठ में जब बालक अपने पिता से पूछता है 'तुम कौन हो?' या पिता के कथनों का विरोध करता है, तो हास्य उत्पन्न होता है। पिता की निराशा और बालक की जिद्द का मिश्रण दर्शकों को मज़ेदार प्रतीत होता है। **Q3: पिता और बालक के संवाद में कौन-कौन से मुख्य विषय उभरते हैं?** A: (१) पारिवारिक संबंध (relationship), (२) सत्य बनाम भ्रान्ति (truth vs. mistaken belief), (३) आज्ञा और विश्वास (obedience and trust)। संवाद में पिता बालक को समझाते हैं कि परिवार का बंधन कितना महत्त्वपूर्ण है। बालक की शंका दिखाती है कि बचपन में बोध कितना सीमित हो सकता है। **Q4: 'बालक की भ्रान्ति' नाटक का केंद्रीय विचार क्या है?** A: केंद्रीय विचार यह है कि कभी-कभी हम सच्चाई को देखते हुए भी नहीं समझते, खासकर जब पूर्वधारणा (preconception) मजबूत हो। नाटक दिखाता है कि प्रेम और धैर्य (love and patience) से ही गलतफहमी दूर होती है। यह बालसुलभ भोलेपन (naivety) को भी प्रकट करता है। **Q5: संवाद के माध्यम से नाटक क्या संदेश देता है?** A: संदेश यह है कि संवाद और सच्चाई एक-दूसरे के निकट लाते हैं। जब पिता धैर्यपूर्वक बालक से बात करते हैं, तब धीरे-धीरे बालक की समझ विकसित होती है। नाटक सिखाता है कि बड़ों का कर्तव्य बच्चों को सही मार्ग दिखाना है, भले ही वे तुरंत न समझें। प्रत्येक 3-mark उत्तर 60–80 शब्दों में होना चाहिए। उदाहरण (वाक्य या संदर्भ) अवश्य शामिल करें।

Most-Repeated 5-Mark Questions (2020–2025)

Five-mark questions test deep comprehension, analysis, character understanding, and thematic connection. These questions often ask for full scene explanation, character comparison, or theme elaboration. Here are three authentic-pattern 5-mark PYQs with full solutions. **Q1: पाठ 'भ्रान्तो बालः' में बालक और पिता के संबंध को समझाते हुए बताइए कि नाटक का नाम 'भ्रान्तो बालः' क्यों रखा गया है।** *Full Solution (100–120 words):* नाटक का नाम 'भ्रान्तो बालः' (गलतफहमी में डूबा बालक) इसलिए रखा गया है क्योंकि पूरी कथा बालक की मौलिक समस्या—अपने पिता को न पहचानना—के इर्द-गिर्द घूमती है। बालक की यह भ्रान्ति नाटक का मूल कारण (root cause) है। पिता और बालक का संबंध प्रेम पर आधारित है, परंतु बालक की अविवेक (immaturity) और गलतफहमी इस संबंध को तनावपूर्ण बनाती है। पिता धैर्यपूर्वक सत्य समझाते हैं, लेकिन बालक जिद पकड़े रहता है। नाटक इसी द्वंद्व (conflict) को दिखाता है। 'भ्रान्तो बालः' नाम बालक के केंद्रीय दोष को स्पष्ट करता है—उसकी भ्रान्ति ही सब कुछ है। यह नाम नाटक के हास्य और नैतिक संदेश दोनों को पकड़ता है। **Q2: 'भ्रान्तो बालः' पाठ में हास्य-प्रसंग के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट कीजिए। नाटक का हास्य कहाँ-कहाँ उत्पन्न होता है?** *Full Solution (110–130 words):* हास्य-प्रसंग (comic scenes) नाटक के कई स्तरों पर उत्पन्न होते हैं। सबसे पहला स्तर: बालक के अविश्वास्य प्रश्न ('तुम कौन हो?'), जो पिता के लिए असहनीय (unbearable) हैं। दूसरा स्तर: पिता के समझाने के तरीके और बालक के बार-बार उसी प्रश्न को दोहराना। तीसरा स्तर: बालक की जिद्द और तर्क-वितर्क, जो निरर्थक (senseless) लगते हैं। चौथा स्तर: भाषा के स्तर पर—संवाद में व्यंग्य (sarcasm) और बालसुलभ गूँज (childish echo) हास्य को बढ़ाते हैं। पाँचवाँ स्तर: दर्शकों को ज्ञान है कि बालक गलत है, पर पिता की असहायता (helplessness) से हास्य बनता है। यह नाटक सिद्ध करता है कि हास्य = सत्य से अंतर + भावनात्मक टकराव। **Q3: इस नाटक से हमें बाल-मनोविज्ञान (child psychology) के बारे में क्या सीखने को मिलता है? अपने उत्तर को पाठ के उदाहरणों से समर्थित कीजिए।** *Full Solution (115–135 words):* नाटक बाल-मनोविज्ञान के कई महत्त्वपूर्ण पहलू उजागर करता है। पहला: बचपन में तार्किक चिंतन अधूरा होता है। बालक तर्क करता है, पर उसके तर्क आधारहीन हैं। दूसरा: जिद्द और भावनात्मक प्रतिरोध (emotional resistance)—एक बार विचार बन जाने पर बालक उसे छोड़ने को तैयार नहीं होता। तीसरा: प्रश्नशील मानसिकता—बालक 'क्यों?' पूछता है, जो विकास का चिह्न है, पर साथ ही भ्रम (confusion) भी है। चौथा: माता-पिता के शब्दों के प्रति आस्था की कमी। पाठ में जब पिता कहते हैं 'मैं तुम्हारा पिता हूँ', बालक तुरंत विश्वास नहीं करता। पाँचवाँ: उदाहरण और पुनरावृत्ति से ही बालक समझता है। पाठ दिखाता है कि बाल-शिक्षा में धैर्य और प्रेम अनिवार्य हैं। प्रत्येक 5-mark उत्तर 120–150 शब्दों में पूर्ण करें। तीन स्पष्ट बिंदु दें, उदाहरणों से समर्थित करें।

Pattern Shifts in CBSE 2026–27: What to Expect

CBSE के नए rationalized curriculum (2024–25 onwards) ने कुछ महत्त्वपूर्ण बदलाव किए हैं जो भ्रान्तो बालः के प्रश्न-पैटर्न को प्रभावित कर रहे हैं। पहला बदलाव: कम 'रट्टे हुए' प्रश्न, अधिक विश्लेषणात्मक (analytical) प्रश्न। 2024–25 से, 3-mark और 5-mark प्रश्न अब सरल सारांश (summary) नहीं माँगते; वे "Compare", "Analyze", "Explain with reason" माँगते हैं। दूसरा बदलाव: विद्यालय-स्तरीय संदर्भ अधिक। उदाहरण के लिए, "बालक की भ्रान्ति आज के बच्चों में क्यों आम है?" जैसे प्रश्न आने लगे हैं। तीसरा: समकालीन (contemporary) कनेक्शन। मानसिक स्वास्थ्य, बाल-विकास, संचार (communication) जैसे आधुनिक विषय प्रश्नों में आने लगे हैं। चौथा बदलाव: बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) थोड़े कठिन हो गए हैं—सीधा उत्तर नहीं, विभेद (discrimination) की माँग है। 2026–27 में आप अपेक्षा करें: (१) character analysis को depth दें, (२) modern life से जोड़ें, (३) भाषा-संरचना (grammar की गहराई) पर ध्यान दें, (४) लम्बे, विश्लेषणात्मक उत्तर (8–10 lines) लिखने की क्षमता रखें।

Quick Attempt-Strategy for This Chapter

परीक्षा-हॉल में समय सीमित होता है। भ्रान्तो बालः के लिए यह रणनीति (strategy) है: **Reading Phase (2 minutes):** पाठ को एक बार तेजी से पढ़ें। बालक, पिता, भ्रान्ति की रूपरेखा दिमाग में बना लें। **1-mark questions (3 minutes):** ये सबसे आसान हैं। Character name, simple definition, direct answer। झिझक न करें—confidently लिखें।n **3-mark questions (8–10 minutes):** पहले प्रश्न को दो बार पढ़ें। क्या माँग है: definition, explanation, या context? फिर 60–80 शब्द में उत्तर लिखें। उदाहरण देना न भूलें (पाठ से कोई संवाद या दृश्य)। Grammar को साफ रखें। **5-mark questions (12–15 minutes):** सबसे महत्त्वपूर्ण। प्रश्न को रेखांकित (underline) करें। outline बनाएँ: (१) introduction, (२) 2–3 main points with examples, (३) conclusion। हर point पर 2–3 lines लिखें। पाठ से सीधे उद्धरण (direct quotes) दें। **Self-check (5 minutes):** हर उत्तर के बाद देखें: क्या उत्तर प्रश्न का जवाब देता है? क्या spelling सही है? क्या lines सुनदर हैं? **Avoid these mistakes:** (१) पूरे chapter का सारांश न दें—सिर्फ प्रश्न का जवाब दें। (२) irrelevant examples न लें। (३) 'I think' जैसे व्यक्तिगत विचार न जोड़ें—textbook पर रहें। (४) अंग्रेजी शब्द न मिलाएँ (जब तक प्रश्न न माँगे)।

Summary: Complete Roadmap to Master This Chapter

भ्रान्तो बालः को master करने के लिए: (१) NCERT पाठ को 2–3 बार पढ़ें, (२) ऊपर दिए 13 PYQs को पेन-paper से solve करें (typing से नहीं), (३) अपने उत्तर को एक शिक्षक या senior से जाँचवाएँ, (४) गलतियों को नोट करें, (५) उसी गलती को दोबारा न करें। यह 7–10 दिन की प्रक्रिया है। अगर आप अभी Class 9 में हैं और exams दूर हैं, तो हर हफ्ते एक PYQ solve करें। अगर exams करीब हैं, तो हर रोज़ 2–3 प्रश्न करें। याद रखें: previous years questions देखते हैं कि examiner क्या मानते हैं महत्त्वपूर्ण। इसलिए PYQs solve करना सबसे smart तैयारी है। आप जो भी सीखते हो, उसे exam-pattern में लागू करो।

Frequently asked questions

भ्रान्तो बालः में बालक को अपने पिता की पहचान नहीं होती, इसका मुख्य कारण क्या है?+
पाठ में स्पष्ट नहीं बताया गया, पर निहित है कि बालक ने अपने पिता को पहले कभी नहीं देखा या लंबे समय के बाद देख रहा है। यह बालक की भ्रान्ति (mistaken belief) को दिखाता है, जो नाटक का मूल विषय है।
क्या 'भ्रान्तो बालः' नाटक का कोई नैतिक संदेश है?+
हाँ। नाटक दिखाता है कि (१) सत्य (truth) सबसे महत्त्वपूर्ण है, (२) संवाद और धैर्य से गलतफहमी दूर होती है, (३) माता-पिता का प्रेम शर्तहीन है, (४) बचपन में बोध सीमित होता है, इसलिए शिक्षा जरूरी है।
CBSE परीक्षा में इस chapter से कितने marks आते हैं?+
आमतौर पर 8–10 marks। आमतौर पर 1-mark (1 प्रश्न) + 3-mark (1 प्रश्न) + 5-mark (1 प्रश्न) या similar distribution। कुल 9 marks का chapter।
इस chapter के लिए संस्कृत vocabulary कितनी important है?+
बहुत महत्त्वपूर्ण नहीं। मुख्य शब्द: भ्रान्ति (mistaken belief), संवाद (dialogue), हास्य (humor), पहचान (recognition)। पाठ simple Sanskrit में है; grammar से ज़्यादा comprehension पर focus है।
क्या previous years questions को रट्टे लगा दें या समझें?+
समझें। PYQs को देखें pattern समझने के लिए, उत्तर याद करने के लिए नहीं। हर प्रश्न को अपने शब्दों में solve करें। इससे exam में नए प्रश्नों का जवाब भी दे पाएँगे।
क्या 5-mark प्रश्नों में पाठ से directly line-to-line लिख सकते हैं?+
नहीं। पाठ से 1–2 lines का उद्धरण (quotation) दें, पर अपने शब्दों में व्याख्या (explanation) करें। Examiner चाहता है कि आप समझ दिखाएँ, रटे हुए शब्द नहीं।
क्या यह chapter बाकी class 9 Sanskrit chapters से अलग style में है?+
हाँ। यह एक नाटक (play) है, कहानी या काव्य नहीं। संवाद-आधारित (dialogue-based) है। इसलिए characters को समझना, उनके भावों (emotions) को समझना यहाँ अधिक जरूरी है।
अगर मैं 1-mark और 3-mark सही कर लूँ तो क्या 5-mark skip कर सकता हूँ?+
नहीं। 5-mark questions में ही depth दिखता है। Examiner को पता चल जाता है कि आपने chapter को सचमुच समझा है या नहीं। हमेशा कोशिश करें सभी प्रश्न solve करने की।

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