India's #1 AI Tutorimportant questions · Hindi — Vasant · Chapter 7हिंदी में पढ़ें → Class 9 Hindi Vasant Chapter 7: क्या निराश हुआ जाए — Complete Important Questions & Answers
Chapter 7 'क्या निराश हुआ जाए' (Should We Lose Hope?) is a thought-provoking essay by Jainendra Kumar that explores optimism, human resilience, and the dangers of pessimism. This chapter appears frequently in CBSE board exams with questions on the essay's central theme of positivity and overcoming despair. Understanding this chapter thoroughly—from the author's arguments to the nuances of सकारात्मकता (positivity)—is essential for scoring well in Hindi Literature. This guide covers all question types: MCQs, short answers (2-mark), medium answers (3-mark), and long-form responses (5-mark), plus HOTS and case-study questions aligned with the 2024-25 CBSE syllabus. Practise these daily with cbsetutor.ai's AI tutor for guaranteed fluency.
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Start 3-day free trial →Why Chapter 7 Matters in the 2024-25 CBSE Board Pattern
The essay 'क्या निराश हुआ जाए' is a cornerstone of Class 9 Hindi Vasant because it tests both comprehension and analytical thinking. CBSE exams emphasize understanding the author's intent—in this case, Jainendra Kumar's powerful argument against pessimism and despair. Board questions often focus on: (1) the central theme of सकारात्मकता (optimism/positivity), (2) evidence of human progress cited by the author, (3) contrasting pessimism vs. optimism, and (4) application of the essay's philosophy to real life. The 2024-25 rationalized syllabus places heavy emphasis on निबंध (essay) comprehension and critical appreciation, making this chapter crucial. Expect 8–12 marks dedicated to this chapter in the final exam across MCQ, short-answer, and long-answer sections. Students who master the author's tone, key arguments, and vocabulary gain significant board advantage. Regular practice with varied question formats ensures you're prepared for any question pattern the examiner might use.
1-Mark Multiple-Choice Questions (MCQs) with Answers
MCQ questions in Class 9 CBSE Hindi typically test factual recall and quick understanding. Here are 5 important MCQs based on Chapter 7:
**Q1.** निराश न होने का संदेश किसने दिया है?
(a) गांधी जी
(b) जयशंकर प्रसाद
(c) जैनेंद्र कुमार
(d) प्रेमचंद
**Answer: (c) जैनेंद्र कुमार**
**Q2.** 'क्या निराश हुआ जाए' निबंध का मुख्य विषय क्या है?
(a) धर्म और अधर्म
(b) आशावाद और मानव प्रगति
(c) राजनीति और शासन
(d) प्रेम और परिवार
**Answer: (b) आशावाद और मानव प्रगति**
**Q3.** लेखक मनुष्य को किस बात के लिए प्रोत्साहित करता है?
(a) धन कमाने के लिए
(b) सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने के लिए
(c) शक्तिशाली बनने के लिए
(d) प्रसिद्ध होने के लिए
**Answer: (b) सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने के लिए**
**Q4.** निराशा किसे कहते हैं?
(a) उदास होना
(b) आशा खो देना और नकारात्मक सोच
(c) अकेला होना
(d) गरीब होना
**Answer: (b) आशा खो देना और नकारात्मक सोच**
**Q5.** लेखक मानव समाज की किस क्षमता की ओर संकेत करता है?
(a) युद्ध करने की
(b) निर्माण और सुधार की
(c) बहस करने की
(d) भूलने की
**Answer: (b) निर्माण और सुधार की**
2-Mark Short-Answer Questions with Answers
Short-answer questions (2-mark) require focused, concise responses (30–50 words). Here are 5 important 2-mark questions:
**Q1.** लेखक के अनुसार निराश न होने का कारण क्या है?
**Answer:** लेखक मानता है कि मनुष्य ने इतिहास में असंभव चीजें संभव की हैं और निरंतर प्रगति की है। विज्ञान, तकनीक और समाज में हुई विकास से पता चलता है कि आशा रखना और सकारात्मक सोच से मनुष्य किसी भी समस्या का समाधान कर सकता है।
**Q2.** निराशावाद (pessimism) क्या है और यह हानिकारक क्यों है?
**Answer:** निराशावाद वह नकारात्मक दृष्टिकोण है जिसमें व्यक्ति सदा बुरे परिणामों की आशंका करता है। यह मनुष्य की प्रगति को रोकता है क्योंकि निराश व्यक्ति प्रयास नहीं करता, जिससे विकास संभव नहीं हो पाता।
**Q3.** निबंध में लेखक ने मानव प्रगति के कौन-कौन से उदाहरण दिए हैं?
**Answer:** लेखक ने विज्ञान की खोजें (बिजली, रेडियो आदि), चिकित्सा में उन्नति, शिक्षा का प्रसार, परिवहन तथा संचार के साधनों में विकास आदि उदाहरण दिए हैं जो यह साबित करते हैं कि आशा और परिश्रम से अधिकांश समस्याओं का हल संभव है।
**Q4.** 'सकारात्मकता' (positivity) से लेखक का क्या अभिप्राय है?
**Answer:** सकारात्मकता का मतलब है आशावाद, आशा और विश्वास की भावना बनाए रखना। यह एक मानसिकता है जिसमें व्यक्ति समस्याओं को चुनौती मानता है, उन्हें हल करने के लिए प्रयास करता है, और विश्वास करता है कि सफलता संभव है।
**Q5.** निराशा से बचने के लिए लेखक क्या सुझाव देता है?
**Answer:** लेखक सुझाता है कि अतीत में मानव द्वारा की गई उपलब्धियों को याद रखें, इतिहास से सीखें, और भविष्य के प्रति आशान्वित रहें। सकारात्मक सोच, परिश्रम और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
3-Mark Medium-Answer Questions with Answers
3-mark questions require slightly detailed answers (60–100 words) that demonstrate understanding of ideas and context.
**Q1.** 'क्या निराश हुआ जाए' निबंध का मुख्य संदेश क्या है? अपने शब्दों में समझाइए।
**Answer:** इस निबंध का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को कभी निराश नहीं होना चाहिए। लेखक जैनेंद्र कुमार कहते हैं कि मानव समाज की सबसे बड़ी शक्ति आशा और सकारात्मक सोच है। वे दर्शाते हैं कि ऐतिहासिक रूप से जब भी मनुष्य ने संकटों का सामना किया, उसने आशा और परिश्रम से उन्हें पार किया। वर्तमान में चाहे कितनी भी समस्याएं हों, सकारात्मक दृष्टिकोण और निरंतर प्रयास से हल संभव है। निराशा केवल मनुष्य को निष्क्रिय बनाती है, जबकि आशा उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
**Q2.** लेखक ने मानव जाति की किन उपलब्धियों का जिक्र किया है? इनसे क्या संदेश मिलता है?
**Answer:** लेखक ने विज्ञान की अद्भुत खोजों (बिजली, मशीन, रेडियो), चिकित्सा विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव (गंभीर रोगों का इलाज), परिवहन के साधनों में विकास (रेलगाड़ी, हवाई जहाज), और शिक्षा के प्रसार का उल्लेख किया है। इन सभी उदाहरणों से संदेश यह मिलता है कि जब मनुष्य ने दृढ़ संकल्प और आशा से काम लिया, तो वह असंभव को संभव कर सका। प्रत्येक आविष्कार के पीछे वर्षों की मेहनत और आस्था थी। इसलिए वर्तमान समस्याओं से भी निराश होने की जरूरत नहीं है।
**Q3.** निराशा (despair) के क्या परिणाम होते हैं? निबंध के आधार पर समझाइए।
**Answer:** निराशा का सबसे प्रमुख परिणाम यह है कि व्यक्ति निष्क्रिय हो जाता है। निराश मनुष्य किसी भी समस्या का हल खोजने का प्रयास नहीं करता क्योंकि वह सफलता में विश्वास नहीं करता। यह मानसिक दुर्बलता व्यक्तिगत विकास को रोकती है और समाज की प्रगति में बाधा डालती है। लेखक मानता है कि निराशा केवल विनाश की ओर ले जाती है। यदि पूरा समाज निराश हो जाए, तो सभ्यता का विकास रुक जाएगा। इसलिए सकारात्मकता और आशा को अपने हृदय में रखना आवश्यक है।
**Q4.** लेखक किस प्रकार के समाज की कल्पना करते हैं? 'क्या निराश हुआ जाए' से संबंध बताइए।
**Answer:** लेखक एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ प्रत्येक व्यक्ति सकारात्मक सोच रखता है और समस्याओं का समाधान खोजने में विश्वास करता है। इस समाज में निराशा और हताशा का कोई स्थान नहीं है। प्रत्येक चुनौती को एक अवसर माना जाता है। लेखक का मानना है कि यदि हम निराश न हों, तो सामाजिक समस्याओं, गरीबी, अशिक्षा और बीमारी का समाधान संभव है। इस कारण 'क्या निराश हुआ जाए' केवल एक प्रश्न नहीं, बल्कि एक दृढ़ प्रतिवाद है। लेखक कहते हैं—नहीं, हमें निराश नहीं होना चाहिए। आशा ही हमारी असली शक्ति है।
5-Mark Long-Answer Questions with Complete Solutions
5-mark questions require comprehensive, well-structured answers (150–200 words) with examples and analysis.
**Q1.** 'क्या निराश हुआ जाए' निबंध में जैनेंद्र कुमार ने किस प्रकार यह सिद्ध किया है कि निराशा गलत है? विस्तार से समझाइए।
**Answer:** जैनेंद्र कुमार ने अपने निबंध में ऐतिहासिक तथ्यों और तार्किक दलीलों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि निराशा मनुष्य को कमजोर बनाती है। सबसे पहले, लेखक मानव सभ्यता के विकास के उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। प्राचीन काल में मनुष्य गुफाओं में रहता था, लेकिन आशा और प्रयास से उसने महान सभ्यताएं विकसित कीं। आधुनिक काल में विज्ञान और तकनीक की खोजें—जैसे बिजली, रेडियो, टेलीविजन—ये सब निराश लोगों ने नहीं, बल्कि आशान्वित और सकारात्मक विचारकों ने की हैं। दूसरा, लेखक कहते हैं कि यदि हमारे पूर्वजों ने निराश हो जाते, तो आज की प्रगति संभव न होती। तीसरा, लेखक तर्क देते हैं कि निराशा आत्मघाती है—यह व्यक्ति और समाज दोनों को नष्ट करती है। अंतत:, लेखक का निष्कर्ष है कि मानव इतिहास निराशा का नहीं, आशा का इतिहास है। इसलिए 'क्या निराश हुआ जाए?'—का उत्तर कभी हाँ नहीं हो सकता।
**Q2.** सकारात्मकता (Positivity) क्या है? निबंध के अनुसार, इसका जीवन में क्या महत्व है?
**Answer:** सकारात्मकता का अर्थ है ऐसी मानसिकता जिसमें व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में आशा, साहस और विश्वास बनाए रखता है। यह केवल सुखवादी दृष्टिकोण नहीं है, बल्कि यथार्थवादी आशावाद है जो समस्याओं को स्वीकार करते हुए भी उनके समाधान के लिए प्रयास करता है। जैनेंद्र कुमार के निबंध में सकारात्मकता का महत्व बहुत स्पष्ट है। पहला महत्व यह है कि सकारात्मक सोच मनुष्य को निष्क्रियता से बचाती है। जब व्यक्ति में आशा होती है, वह समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए सक्रिय हो जाता है। दूसरा, यह मानसिक शक्ति प्रदान करती है—कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति हार नहीं मानता। तीसरा, सकारात्मकता समाज के विकास को गति देती है। यदि नागरिक सकारात्मक विचार रखें, तो सामूहिक रूप से बड़े परिवर्तन संभव हैं। लेखक के अनुसार, विज्ञान, शिक्षा और सामाजिक सुधार—सभी सकारात्मकता के फल हैं। अत:, जीवन में सकारात्मकता सफलता की कुंजी है।
**Q3.** 'क्या निराश हुआ जाए' निबंध का आधुनिक समाज में क्या प्रासंगिकता है? अपने विचार व्यक्त करें।
**Answer:** यद्यपि यह निबंध दशकों पहले लिखा गया था, किंतु आज के समय में इसका प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। आज का युवा वर्ग कई चुनौतियों का सामना कर रहा है—जलवायु परिवर्तन, बेरोजगारी, सामाजिक मीडिया पर नकारात्मकता, महामारी आदि। इन परिस्थितियों में निराशा और चिंता बहुत सामान्य हो गई है। जैनेंद्र कुमार का संदेश आज बेहद जरूरी है कि हमें निराश नहीं होना चाहिए। आधुनिक उदाहरणों से भी यह साबित हो रहा है—पिछले कुछ दशकों में कोविड-19 जैसी महामारी का टीका बना, नवीकरणीय ऊर्जा में विकास हुआ, तकनीक से गरीबों को शिक्षा मिल रही है। ये सब आशा और सकारात्मक सोच के फल हैं। आज का अगर किसी को निराश हो रहा है, तो उसे इस निबंध को पढ़ना चाहिए और यह समझना चाहिए कि इतिहास हमेशा उन्हीं को याद रखता है जिन्होंने आशा नहीं खोई। इसलिए 'क्या निराश हुआ जाए?'—यह प्रश्न आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जवाब स्पष्ट है—नहीं। हमें सकारात्मक रहना चाहिए और परिवर्तन का हिस्सा बनना चाहिए।
HOTS & Case-Study Question with Step-by-Step Solution
HOTS (Higher Order Thinking Skills) questions test critical thinking and application of concepts.
**Case-Study Question:**
श्रीमती शर्मा एक शिक्षिका हैं। उनकी कक्षा में रवि नाम का एक विद्यार्थी है जो हमेशा सोचता है कि वह गणित में कभी अच्छा नहीं हो सकता। वह कहता है, 'मेरे माता-पिता को यह विषय नहीं आता, मेरी बहन भी फेल हुई, तो मैं कैसे पास हो सकता हूँ?' दूसरी ओर, अंजलि एक साधारण बुद्धिमान विद्यार्थी है, किंतु वह सदा सकारात्मक रहती है और कहती है, 'मुझे समझ नहीं आया, पर मैं बार-बार कोशिश करूंगी। कोई न कोई तरीका निकल जाएगा।'
**प्रश्न:**
(a) रवि और अंजलि में से किसका दृष्टिकोण 'क्या निराश हुआ जाए' निबंध के अनुरूप है? क्यों?
(b) जैनेंद्र कुमार इस परिस्थिति में रवि को क्या सलाह देते?
(c) इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
**Step-by-Step Solution:**
**Step 1: सवाल को समझें**
यह प्रश्न दो विद्यार्थियों की मानसिकता की तुलना करता है और निबंध के विचारों को व्यावहारिक परिस्थिति में लागू करने के लिए कहता है।
**Step 2: उत्तर (a)—दृष्टिकोण की तुलना**
अंजलि का दृष्टिकोण 'क्या निराश हुआ जाए' निबंध के पूर्ण अनुरूप है। रवि पारिवारिक पृष्ठभूमि और विफलता के इतिहास से प्रभावित होकर निराशा में पड़ गया है (निराशावाद), जबकि अंजलि समस्या को चुनौती मानती है और सकारात्मक सोच रखती है (सकारात्मकता)। लेखक के अनुसार, यह अंजलि जैसी सोच ही सफलता की ओर ले जाती है।
**Step 3: उत्तर (b)—जैनेंद्र कुमार की सलाह**
जैनेंद्र कुमार रवि को कहते: 'यह सच है कि तुम्हारे परिवार को गणित कठिन लगा, पर इसका अर्थ यह नहीं कि तुम भी असफल होगे। मनुष्य ने इतिहास में ऐसी-ऐसी समस्याएं हल की हैं जो असंभव लगती थीं। तुम्हारी शक्ति है आशा और परिश्रम। बार-बार कोशिश से और सकारात्मक सोच से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। निराशा मत पालो।'
**Step 4: उत्तर (c)—शिक्षा**
इस कहानी से हमें तीन मुख्य सीखें मिलती हैं:
1. **मानसिकता ही सफलता निर्धारित करती है**—रवि का ज्ञान अंजलि जितना बुरा न हो, पर उसकी निराशा उसे पीछे रखती है।
2. **अतीत भविष्य नहीं है**—परिवार के असफल होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति भी असफल होगा। नई आशा और प्रयास से नया परिणाम संभव है।
3. **सकारात्मकता क्रिया को जन्म देती है**—अंजलि की सकारात्मक सोच उसे 'बार-बार कोशिश' करने के लिए प्रेरित करती है, जो सफलता की वास्तविक कुंजी है।
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