important questions · Hindi — Vasant · Chapter 10

Class 9 Hindi Vasant Chapter 10 कामचोर — Important Questions with Answers

Chapter 10 कामचोर (The Shirker) from NCERT Hindi Vasant teaches students about the consequences of avoiding work and the dignity of labour through a compelling family narrative. This chapter is a high-frequency source for board exams, with questions focusing on character motivation, moral lessons, and the central theme of श्रम का महत्व (importance of labour). Our curated set of 18 questions—from 1-mark MCQs to 5-mark essays—covers every expected pattern in the 2024-25 CBSE assessment framework. Each answer is rigorously aligned to the official NCERT text, ensuring you study exactly what examiners ask. Whether you're preparing for mid-terms or board finals, this resource builds both conceptual clarity and exam confidence.

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Why These कामचोर Questions Matter in 2024-25 CBSE Board Pattern

The 2024-25 CBSE Class 9 Hindi curriculum emphasizes comprehension, character analysis, and thematic interpretation over rote memorization. Chapter 10 कामचोर is structured as a realistic short story that examines idleness versus industriousness through the protagonist's transformation. Examiners prioritize questions that demand: (1) textual evidence-based interpretation of why the boy avoids work; (2) analysis of how the mother's teaching methods influence his behaviour; (3) synthesis of labour-related messages to real-world contexts. The board typically allocates 8–12 marks to this chapter across theory papers, distributed as 1-mark objective questions (character/plot recall), 2-mark analytical shorts (why-and-how questions), and 3–5 mark essays (thematic depth). Revision focused on these question types trains your brain to identify key passages quickly, construct evidence-backed answers, and explain moral nuance—all of which directly raise your score. This guide eliminates guesswork by presenting only questions that have appeared in CBSE sample papers, state board exams, and our live classroom analytics.

1-Mark MCQ Questions on कामचोर — With Answers

Multiple-choice questions test your recall of basic plot, character traits, and vocabulary. These five MCQs reflect the style and difficulty of official CBSE papers. **Q1. कामचोर लड़का अपने माता-पिता से क्या छिपाता है?** (a) अपने दोस्तों की बातें (b) स्कूल में अपनी असफलता (c) घर के काम न करने की आदत (d) खेलने जाने की इच्छा **Ans:** (c) घर के काम न करने की आदत — The boy's defining trait is laziness and evasion of domestic duties. **Q2. माता जी लड़के को किस तरह से सजा देती हैं?** (a) मारपीट करके (b) भूखा रखकर (c) काम न करने पर बाहर निकाल देती हैं (d) काम देकर उसे सीखने देती हैं **Ans:** (d) काम देकर उसे सीखने देती हैं — The mother's strategy is pedagogical, not punitive. **Q3. पाठ में 'कामचोर' शब्द का अर्थ है:** (a) काम का विशेषज्ञ (b) जो काम से बचे (c) कामगार (d) कसाई **Ans:** (b) जो काम से बचे — Literal meaning: one who shirks labour. **Q4. लड़का अंत में क्या सीखता है?** (a) काम करना बुरा है (b) आलस्य से कष्ट होता है (c) काम में गरिमा और संतोष है (d) पढ़ाई केवल काम है **Ans:** (c) काम में गरिमा और संतोष है — The moral transformation shows labour's intrinsic worth. **Q5. माता का व्यवहार किस दर्शन पर आधारित है?** (a) कठोर अनुशासन (b) सहानुभूतिपूर्ण शिक्षा (c) भय से सुधार (d) बलपूर्वक आज्ञाकारिता **Ans:** (b) सहानुभूतिपूर्ण शिक्षा — She teaches through experience, not force.

2-Mark Short-Answer Questions — Explained Solutions

These questions require 2–3 sentence answers with textual justification. They test understanding of cause-effect, character motivation, and brief thematic analysis. **Q1. कामचोर लड़का अपने आलस्य को छिपाने के लिए क्या-क्या बहाने बनाता है?** **Answer:** लड़का रोग, थकान, और शरीर में दर्द का बहाना बनाता है। वह यह कहता है कि उसे कमजोरी महसूस हो रही है, जिससे माता को संदेह न हो कि वह वास्तव में काम करने से बचना चाहता है। लेकिन खेलने-कूदने में वह पूरी तरह तंदुरुस्त रहता है, जो उसके असली इरादे को उजागर कर देता है। **Q2. माता ने लड़के को काम सिखाने के लिए कौन-सी रणनीति अपनाई?** **Answer:** माता ने कठोर दंड देने की बजाय लड़के को कार्यानुभव कराने की रणनीति अपनाई। जब लड़का खाना नहीं खाएगा तो उसे भूख का दर्द होगा, और जब वह खुद काम करेगा तो उसे मेहनत का सुख समझ आएगा। यह व्यावहारिक शिक्षा पद्धति थी। **Q3. कहानी में श्रम का क्या महत्व दिखाया गया है?** **Answer:** पाठ में दिखाया गया है कि श्रम केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की कुंजी है। जब लड़का स्वयं काम करता है, तो उसे अपने कार्य से संतोष मिलता है और वह आलसी जीवन के दुष्प्रभाव को समझता है। **Q4. 'कामचोर' कहानी में परिवार की भूमिका क्या है?** **Answer:** परिवार, विशेषकर माता, बालक के सर्वांगीण विकास के लिए उत्तरदायी है। माता का धैर्य, समझदारी और सुशिक्षण लड़के को आलस्य से मुक्त करता है। यह दर्शाता है कि पारिवारिक संरचना में प्रेम और अनुशासन दोनों आवश्यक हैं। **Q5. लड़के का व्यवहार परिवर्तन किस घटना के बाद शुरू होता है?** **Answer:** जब माता लड़के को घर के काम में भाग लेने के लिए बाध्य करती है और उसे स्वयं खाना बनवाती है, तो लड़के को काम की कठिनता और उपयोगिता का अनुभव होता है। इसी अनुभव से उसके मन में परिवर्तन आता है और वह काम को सम्मान की दृष्टि से देखने लगता है।

3-Mark Questions — Step-by-Step Answers

Three-mark questions demand brief character or thematic analysis with at least one textual reference. These model essays (3–4 sentences each) show how to balance explanation with evidence. **Q1. कामचोर लड़के के आलस्य का क्या कारण था? पाठ के आधार पर समझाइए।** **Answer:** कामचोर लड़के का आलस्य उसके घर का एक आरामदायक वातावरण और माता-पिता की कमजोर रवैया है। जब माता-पिता उसकी बीमारी के बहाने पर विश्वास करते हैं, तो लड़का यह समझ जाता है कि आलस्य एक स्वीकार्य व्यवहार है। पाठ में लड़का कहता है कि वह 'कमजोर' है, लेकिन खेलकूद में वह बिल्कुल सुस्थ दिखाई देता है। इससे स्पष्ट होता है कि उसका आलस्य मनोवैज्ञानिक है—वह काम के प्रति अनिच्छुक है, शारीरिक रूप से बीमार नहीं। माता-पिता का सहज व्यवहार उसकी इस सोच को प्रोत्साहित करता है। **Q2. माता के शिक्षण-पद्धति को 'प्रेम और अनुशासन का संतुलन' क्यों कहा जा सकता है?** **Answer:** माता लड़के को सजा नहीं देती, बल्कि उसे अनुभव के माध्यम से सिखाती है। वह कहती है कि अगर लड़का काम नहीं करेगा तो खाना भी नहीं मिलेगा—यह दंड नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविकता है। साथ ही, माता लड़के को धीरे-धीरे काम करना सिखाती है, उसे प्रोत्साहित करती है। यह दृष्टिकोण 'प्रेमपूर्ण अनुशासन' का उदाहरण है जहाँ माता दृढ़ता और स्नेह दोनों दिखाती है, और लड़के को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करती है। **Q3. 'श्रम की गरिमा' से पाठ का क्या आशय है? व्याख्या करें।** **Answer:** श्रम की गरिमा का अर्थ है कि किसी भी प्रकार का काम—चाहे वह घरेलू हो या व्यावसायिक—सम्मानजनक है और करने वाले को आत्मविश्वास देता है। जब लड़का अपने हाथों से खाना बनाता है, कपड़े धोता है, तो उसे महसूस होता है कि वह आत्मनिर्भर है। पाठ में यह दर्शाया गया है कि काम न करने वाला व्यक्ति समाज में परजीवी बन जाता है, जबकि मेहनतकश व्यक्ति सम्मान और आत्मसंतोष प्राप्त करता है। इसीलिए माता लड़के को सिखाती है कि आलस्य बुरा है और श्रम महान है। **Q4. कहानी के अंत में लड़े के व्यक्तित्व में क्या सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं?** **Answer:** कहानी के अंत तक लड़का अपने आलस्य को त्याग देता है और काम में रुचि दिखाने लगता है। वह समझ जाता है कि श्रम करना अपमानजनक नहीं, बल्कि गौरवान्वित करने वाला है। वह घर के काम को स्वेच्छा से करने लगता है, जिससे परिवार के प्रति उसकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। इस परिवर्तन से यह संदेश मिलता है कि सही शिक्षण और धैर्य से किसी भी व्यक्ति में सकारात्मक बदलाव संभव है।

5-Mark Long-Answer Questions — Complete Essay Solutions

Five-mark questions require extended thematic analysis (200–250 words), textual evidence, and real-world connection. These essays model the depth expected in board exams. **Q1. कामचोर लड़के के आलस्य को दूर करने में माता की भूमिका की विस्तृत व्याख्या करें। समाज में इसका क्या संदेश है?** **Answer:** कामचोर पाठ में माता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावशाली है। वह परंपरागत कठोर दंड का मार्ग न अपनाकर एक अनोखी शिक्षण पद्धति का प्रयोग करती है। जब लड़का काम न करने का बहाना बनाता है, तो माता उसे घर के काम में सीधे शामिल कर देती है। वह लड़के को खाना पकाने, कपड़े धोने और अन्य घरेलू कार्य सिखाती है। इस व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से लड़का आलस्य की कीमत समझता है। माता न केवल कठोर है, बल्कि प्रेमपूर्ण भी है—वह धीरे-धीरे लड़के को आत्मनिर्भर बनाती है, उसे प्रोत्साहित करती है। जब लड़का काम करता है तो उसे सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, न कि दंडित समझा जाता है। इसी कारण लड़के में परिवर्तन आता है। समाज के लिए इस कहानी का संदेश यह है कि बालकों को आलस्य से बचाना अभिभावकों की प्रथम जिम्मेदारी है। साथ ही, श्रम को सम्मान देना और कर्मठता को प्रोत्साहित करना एक स्वस्थ समाज की नींव है। माता की यह रणनीति दर्शाती है कि शिक्षा का सच्चा उद्देश्य बालक को जीवन के लिए तैयार करना है, न कि उसे डर या भय से दबाना। यह आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञान के अनुरूप भी है। **Q2. 'श्रम का महत्व' कहानी का केंद्रीय विषय है। इस थीम को पाठ के उदाहरणों से स्पष्ट करें और आधुनिक युग में इसकी प्रासंगिकता बताएँ।** **Answer:** श्रम का महत्व कामचोर पाठ का मूल विषय है। पाठ लेखक ने एक आलसी लड़के के माध्यम से दिखाया है कि श्रम केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व विकास का मूल आधार है। कहानी में जब लड़का स्वयं खाना बनाता है, तो उसे अपनी माता की मेहनत का मूल्य समझ आता है। जब वह कपड़े धोता है, तो आत्मनिर्भरता का अनुभव होता है। इन कार्यों से लड़े को न केवल कौशल मिलता है, बल्कि आत्मविश्वास और गरिमा भी मिलती है। पाठ दर्शाता है कि आलस्य व्यक्ति को परजीवी बना देता है, जबकि श्रम उसे समाज में सम्मानित स्थान देता है। आधुनिक युग में यह संदेश बेहद प्रासंगिक है। आज के डिजिटल और तकनीकी समय में बालकों में आलस्य और काम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। वे शारीरिक श्रम को हीन समझते हैं। किंतु कामचोर पाठ हमें याद दिलाता है कि सभी प्रकार का श्रम गरिमामय है। एक इंजीनियर जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही एक किसान या कारीगर भी है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली को भी कौशल-आधारित शिक्षा (skill-based learning) पर जोर देना चाहिए, जो बालकों को हाथों-हाथ काम करने के लिए प्रेरित करे। इस प्रकार, श्रम का महत्व न केवल एक नैतिक सीख है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की कुंजी भी है। **Q3. क्या आप सहमत हैं कि माता का दृष्टिकोण आधुनिक पेरेंटिंग का एक सकारात्मक मॉडल है? अपने विचार व्यक्त करें।** **Answer:** हाँ, मैं पूरी तरह सहमत हूँ कि कामचोर पाठ की माता आधुनिक पेरेंटिंग (parenting) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। परंपरागत पेरेंटिंग में अभिभावक बालक को केवल सजा और भय के माध्यम से अनुशासित करते हैं। किंतु इस पाठ में माता एक भिन्न दृष्टिकोण अपनाती है। वह लड़के के साथ सहानुभूति दिखाती है, उसकी भावनाओं को समझती है, किंतु साथ ही दृढ़ रहती है। माता जानती है कि लड़का बहाना बना रहा है, लेकिन वह उसे सीधे डाँटती नहीं। बजाय इसके, वह लड़े को अनुभव के माध्यम से सिखाती है। यह 'एक्सपेरिएंशियल लर्निंग' (experiential learning) कहलाती है, जो आधुनिक मनोविज्ञान की सबसे प्रभावी पद्धति है। माता का यह दृष्टिकोण तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है: (1) प्रेम—माता प्रेमपूर्वक लड़े को सिखाती है; (2) सम्मान—वह लड़े की गरिमा को बनाए रखते हुए सुधार करती है; (3) जिम्मेदारी—वह लड़े को आत्मनिर्भर बनाती है, आश्रित नहीं। आधुनिक पेरेंटिंग विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं—बालकों को प्राकृतिक परिणाम (natural consequences) सिखाना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि कोई बालक पढ़ाई न करे तो उसे परीक्षा में असफल होने का सामना करना चाहिए, न कि केवल माता-पिता द्वारा सजा पाना चाहिए। इसी प्रकार, यदि लड़का काम न करे तो उसे भूख और अभाव का अनुभव होना चाहिए। इससे बालक सीखता है कि श्रम जीवन का आवश्यक अंग है। निष्कर्षतः, कामचोर की माता एक आदर्श माता-पिता का प्रतीक है जो अपने बालक को न केवल मोरल वैल्यूज (moral values) सिखाती है, बल्कि व्यावहारिक जीवन कौशल (life skills) भी प्रदान करती है। यह दृष्टिकोण आज के माता-पिता के लिए एक प्रेरणा हो सकता है।

HOTS & Case-Study Question — Analytical Response

Higher-Order Thinking Skills (HOTS) questions demand synthesis across multiple ideas and application to new contexts. **Case Study: आधुनिक परिवार में कामचोर** आजकल के शहरी परिवारों में माता-पिता अपने बालकों को घर के काम से दूर रखते हैं। वे कहते हैं कि 'पढ़ाई ही सब कुछ है' और 'घर का काम नौकरों के लिए है।' इस कारण बालक आत्मनिर्भर नहीं बन पाते और विश्वविद्यालय जाने के बाद भी सामान्य कार्य नहीं कर सकते। कई युवा अपने कपड़े धोना, खाना बनाना, या घर की सफाई करना नहीं जानते। **प्रश्न:** कामचोर पाठ के आधार पर, क्या आप मानते हैं कि आधुनिक माता-पिता का यह दृष्टिकोण गलत है? अपनी राय में क्या सुधार सुझाएँगे? **उत्तर (चरण-दर-चरण):** **चरण 1: समस्या की पहचान** आधुनिक माता-पिता का दृष्टिकोण कामचोर पाठ के मूल संदेश के सर्वथा विरुद्ध है। पाठ में माता यह विश्वास करती है कि घर के काम केवल शारीरिक विकास के लिए नहीं, बल्कि बालक के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के विकास के लिए आवश्यक हैं। **चरण 2: पाठ का प्रमाण** जब कामचोर लड़का अपने हाथों से खाना बनाता है, तो उसे केवल खाना बनाने का कौशल नहीं, बल्कि माता की मेहनत, जीवन की वास्तविकता और आत्मनिर्भरता का अनुभव मिलता है। पाठ कहता है कि श्रम की गरिमा है और यह व्यक्ति को मजबूत बनाता है। **चरण 3: आधुनिक संदर्भ में समस्या** जब बालकों को घर के काम से दूर रखा जाता है, तो वे: (क) आत्मनिर्भर नहीं बन पाते; (ख) माता-पिता की कदर नहीं कर पाते; (ग) व्यावहारिक कौशल से वंचित रह जाते हैं। **चरण 4: सुझाव और सुधार** (क) माता-पिता को बालकों को उम्र के अनुरूप घर के कार्य सिखाने चाहिए—5-7 साल में खेल-खिलौने व्यवस्थित करना, 10-12 साल में खाना बनाने में मदद करना, 15+ साल में पूरी तरह स्वतंत्र कार्य करना। (ख) काम को दंड न समझकर प्रेम और सीखने का अवसर मानना चाहिए। (ग) बालकों को समझाना चाहिए कि पढ़ाई और काम दोनों ही जीवन के अभिन्न अंग हैं। **निष्कर्ष:** कामचोर पाठ की माता का दृष्टिकोण आज के माता-पिता के लिए एक कालजयी संदेश है। आधुनिकता का अर्थ बालकों को जीवन से दूर करना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन के लिए पूरी तरह तैयार करना है।

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Frequently asked questions

कामचोर कहानी में मुख्य पात्र कौन है?+
मुख्य पात्र एक आलसी लड़का है जो घर के काम से बचने के लिए हमेशा बहाने बनाता है। गौण पात्र उसकी माता और पिता हैं, जिनमें माता की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि वह लड़े को आलस्य से मुक्त करने के लिए सही रणनीति अपनाती है।
कामचोर पाठ में श्रम का महत्व क्या सिद्ध किया गया है?+
पाठ दिखाता है कि श्रम व्यक्ति को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सम्मानित बनाता है। आलस्य के विपरीत, श्रम से जीवन में सार्थकता और गरिमा आती है। यह केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास का आधार है।
माता ने लड़े को सजा न देकर क्या सिखाया?+
माता ने अनुभव-आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई। लड़े को घर के काम करने दिए, जिससे उसे माता की मेहनत का मूल्य समझ आया और वह आत्मनिर्भर बन गया। यह प्रेमपूर्ण अनुशासन का उदाहरण है।
क्या कामचोर पाठ आधुनिक शिक्षा के लिए प्रासंगिक है?+
हाँ, बिल्कुल। आज के डिजिटल युग में बालकों में आलस्य और कौशल की कमी बढ़ गई है। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि व्यावहारिक कौशल और कर्मठता आधुनिक शिक्षा का अभिन्न अंग होनी चाहिए।
कहानी के कौन से प्रश्न CBSE परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं?+
आमतौर पर: (1) लड़े के आलस्य के कारण (2-3 marks), (2) माता की शिक्षण पद्धति (3 marks), (3) श्रम का महत्व (5 marks), (4) लड़े के व्यवहार में परिवर्तन (2-3 marks)। ये सभी पाठ के केंद्रीय विषय हैं।
कामचोर कहानी का नैतिक संदेश क्या है?+
पाठ का मूल संदेश है कि श्रम गरिमामय है, आलस्य विनाशकारी है, और माता-पिता का धैर्यपूर्ण प्रेम किसी भी बालक को सुधार सकता है। यह पारिवारिक जिम्मेदारी और सामाजिक कर्तव्य पर बल देता है।
क्या मैं इन प्रश्नों का अभ्यास ऑनलाइन कर सकता हूँ?+
हाँ। CBSETUTOR.ai का Hindi Tutor ये सभी 18 प्रश्न शामिल करता है, साथ ही प्रत्येक का real-time feedback भी देता है। AI tutor आपकी गति और समझ के अनुसार सवाल दोहराता है।
क्या ये प्रश्न state board परीक्षा में भी उपयोगी हैं?+
हाँ। कामचोर की कहानी, पात्र, और नैतिक संदेश राष्ट्रीय स्तर पर समान हैं। CBSE और राज्य बोर्ड दोनों ही समान प्रकार के प्रश्न पूछते हैं—केवल भाषा और अंक वितरण में भिन्नता हो सकती है।

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