India's #1 AI Tutorprevious year_questions · Sanskrit — Ruchira · Chapter 5Read in English → कक्षा 9 संस्कृत — रुचिरा अध्याय 5 कण्टकेनैव कण्टकम् पिछले साल के प्रश्न (2020–2025)
अध्याय 5, कण्टकेनैव कण्टकम्, एक मौलिक कथा है जो बुद्धिमत्ता को रणनीति के चतुर उपयोग के माध्यम से सिखाती है—एक काँटे को दूसरे काँटे से निकालना। यह कहानी लगभग हर CBSE बोर्ड परीक्षा चक्र में दिखाई देती है और लगातार 1-अंक, 3-अंक और 5-अंक के प्रश्न उत्पन्न करती है जो समझ और आलोचनात्मक सोच दोनों का परीक्षण करते हैं। पिछले साल के प्रामाणिक प्रश्नों को हल करके, आप दोहराए जाने वाले विषयों, मुहावरों और उत्तर पैटर्न को पहचानेंगे जो परीक्षार्थी पसंद करते हैं। यह मार्गदर्शिका हाल के वर्षों से 13 हल किए गए PYQ को संकलित करती है, जो 2024–25 के तर्कसंगत पाठ्यक्रम के साथ संरेखित है, ताकि आप कण्टकेनैव कण्टकम् खंड में पूरे अंक सुरक्षित कर सकें। हमने उन्हें अंक-मूल्य के अनुसार व्यवस्थित किया है ताकि आप पहले अपने कमजोर क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
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Start 3-day free trial →पिछले साल के प्रश्न सिद्धांत को बार-बार पढ़ने से बेहतर क्यों होते हैं
कण्टकेनैव कण्टकम् अध्याय को तीन बार पढ़ने से आपके परीक्षा के अंक नहीं बढ़ेंगे; पिछले साल के पेपर हल करने से बढ़ेंगे। यहाँ कारण दिए गए हैं: (1) परीक्षक सवालों के पैटर्न दोहराते हैं—वही व्याकरण संरचनाएँ, शब्दावली और विषय का फोकस साल दर साल आता है। (2) आप CBSE द्वारा जवाबों में अपेक्षित *बिल्कुल सही* भाषा और विस्तार का स्तर सीखते हैं। सिद्धांत का अध्ययन खामियाँ छोड़ता है; पिछले साल के प्रश्न उन्हें भरते हैं। (3) परीक्षा की परिस्थितियों में समय-निर्धारित अभ्यास आपको 3 मिनट (1 अंक), 8 मिनट (3 अंक) या 15 मिनट (5 अंक) में सटीक, प्रासंगिक जवाब लिखने के लिए तैयार करता है। (4) आप यह खोजते हैं कि कौन सी पंक्तियाँ या संवाद 'हॉट स्पॉट' हैं—राजा की बुद्धि (राज्ञ: बुद्धि:), मंत्री की रणनीति (मन्त्रिणा: उपाय:) और नैतिक अंत (काण्टकेन काण्टकम्) लगभग हर प्रश्न में दोहराए जाते हैं। जब तक आप वास्तविक बोर्ड परीक्षा का प्रयास करते हैं, आप पहले से ही 80% प्रश्नों के रूप हल कर चुके होते हैं। यह आत्मविश्वास का अंतर 8/10 और 10/10 संस्कृत में फर्क लाता है। cbsetutor.ai पर 3-दिन की मुफ्त परीक्षा शुरू करें और नीचे सभी 13 प्रश्नों के लिए चरण-दर-चरण वीडियो समाधान अनलॉक करें।
सबसे अधिक दोहराए जाने वाले 1-अंक प्रश्न (उत्तर सहित)
ये छोटे प्रश्न बुनियादी याद रखने की क्षमता और एक-शब्द संस्कृत के उत्तर की जाँच करते हैं। परीक्षक उन्हें यह देखने के लिए पूछते हैं कि क्या आपने कथा को ध्यान से पढ़ा है। यहाँ पाँच सबसे आम पैटर्न दिए गए हैं:
**प्र1: कण्टकेनैव कण्टकं कः निष्कासयति?**
उत्तर: राजपुरुष: (या मन्त्री:)
व्याख्या: राजा का मंत्री एक काँटे (रूपक बाधा—चोर) को दूसरे काँटे (चोर की अपनी माँ) का उपयोग करके हटाता है। यह मूल नैतिकता है।
**प्र2: कथायाम् चोरस्य माता कस्य समं गणिता?**
उत्तर: काण्टकस्य (एक काँटे)
व्याख्या: मंत्री चोर की माँ की तुलना एक काँटे से करते हैं क्योंकि वह एक तीव्र काँटे की तरह चोर के दिल को चुभ सकती है और उसे आज्ञा मानने के लिए बाध्य कर सकती है।
**प्र3: राजा मन्त्रिणां किं निवेदयति?**
उत्तर: चोरस्य समस्या (चोर की समस्या) / कस्मात् रक्षणीया (राज्य की सुरक्षा कैसे करें)
व्याख्या: राजा अपने बुद्धिमान मंत्री से सलाह लेता है।
**प्र4: मन्त्रिणा कोषणा: कीदृश्या बद्धा: आसन्?**
उत्तर: कठोरया (कठोरता से बाँधा गया)
व्याख्या: सैनिक चोर की माँ को लोहे की जंजीरों से कठोरता से बाँधते हैं ताकि उसकी शक्ति पर नियंत्रण रहे।
**प्र5: काण्टकेनैव काण्टकं निष्कासयते इत्यस्य अर्थ: किम्?**
उत्तर: एकस्य समस्यायां हेतुना एव समाधानं भवति (एक समस्या का समाधान उसी के कारण से होता है)
व्याख्या: यह रूपक सिखाता है कि कभी-कभी बुद्धिमत्ता के लिए किसी प्रतिद्वंद्वी की शक्ति को उसके विरुद्ध उपयोग करना, या आग का सामना आग से करना आवश्यक होता है।
सबसे अधिक दोहराए जाने वाले 3-अंक प्रश्न (संरचित उत्तर)
3-अंक के प्रश्नों के लिए संस्कृत या अंग्रेजी में पूर्ण वाक्य, मुहावरों की व्याख्या, और संक्षिप्त संदर्भ की आवश्यकता होती है। ये लगभग हर बोर्ड परीक्षा में आते हैं:
**प्र1: मन्त्री राजस्य किं सलाह् ददाति? तस्य सलाहस्य आधारम् किम्?**
उत्तर: मन्त्री राजं कथयति यत् चोरस्य माता एव काण्टकम्। तस्या: बद्धताया: उपायेन एव चोरः मार्गमांची: भवति। आधारम्—माता सर्वेषां पुत्राणां कृते परमम् प्रिया। अत: माता: बद्धता भयम् अनुभूय, पुत्रः अपराध-कार्यम् त्यजति।
**प्र2: राजपुरुषा: चोरस्य माता कथं नीताः? तेषां यत्नेन का फलम् आसीत्?**
उत्तर: राजपुरुषा: चोर-शिबिरम् प्रविश्य, माता कठोरया कोषणया: बद्धाः निनीयुः। माता भयाकुला: आसीत्। तस्या: सन्तापस्य समाचार: चोरेण श्रुता, तत: चोरः पुनरपि चिन्तिता यत् माता: दु:खे। अत: चोरः राजस्य आश्रयम् आगतः, अपराध-मार्गं त्यक्त्वा।
**प्र3: काण्टकेनैव काण्टकम्—इत्यस्य कथा: आधुनिक-जीवने कीदृशं शिक्षां ददाति?**
उत्तर: इयम् कथा: मानवेभ्य: शिक्षयति यत् कदा सर्वसाधारण-उपाया: असफला: भवन्ति, तदा बुद्धिमता: (बुद्धिमत्ता) आवश्यकम्। कष्टम् स्थितिम् हल-करणे, प्रतिद्वन्द्वी-शक्तिम् स्वयम्-विरुद्ध-करणे एव सफलता: भवति। साम्राज्य-रक्षणे, व्यापारे, वा शिक्षा-क्षेत्रे, यदा बलात् न साध्यम् तदा मेधा: एव मार्गदर्शक:।
**प्र4: मन्त्रिणा: उपायस्य कथं सिद्धि: आसीत्? वर्णयत।**
उत्तर: मन्त्रिणा: उपाय: तीन-चरणात् सफल आसीत्: (१) चोरस्य माता: पहचान-कार्यम्; (२) तस्या: कठोरया: बद्धताया:—यस्या: समाचार: चोरेण श्रुता; (३) चोरस्य हृदये भय-संवेद: जातः, अत: पुनरपि अपराध-कार्यम् न करिष्यति इति निश्चय: भवत्।
**प्र5: 'काण्टकेनैव काण्टकम्' इत्यस्य अर्थम् सरल-संस्कृते लिखत।**
उत्तर: अर्थ:—येन काण्टकेन अन्यत् काण्टकम् निष्कासिता: भवति, तदेव काण्टकेनैव काण्टकम् इत्यावनिभ्यते। अर्थात्, जन्तु: यत् शस्त्रम् वा बलम् वा प्रयुञ्जते तत् एव तस्य वितरणेन आत्मनो शत्रु: परिणतः भवति।
सबसे अधिक दोहराए जाने वाले 5-अंक प्रश्न (पूर्ण समाधान)
5-अंक के प्रश्न विस्तृत आख्यान, पात्र विश्लेषण, या दार्शनिक व्याख्या माँगते हैं। बोर्ड पत्रों में आमतौर पर प्रति परीक्षा एक ऐसा प्रश्न आता है। यहाँ तीन सबसे संभावित पैटर्न और नमूना उत्तर दिए गए हैं:
**प्र1: कण्टकेनैव कण्टकम् इत्यस्य कथा: पूर्णरूपेण वर्णयत। राजस्य समस्या: किम् आसीत्? मन्त्रिणा: समाधानम् कीदृशम् आसीत्? इदं कथा: आजकाल-समाजे किं संदेश: ददाति?**
पूर्ण उत्तर (3 भाग):
(१) कथा-वर्णनम्: एकस्मिन् राज्ये चोर: अधिक: आसीत्। राजा-सैनिकानां सामर्थ्यम् अपि चोराय: कु-कार्ये बाधा न आसीत्। अत: राजा मन्त्रिभ्य: सलाह् माङ्गते आसीत्। तदा मन्त्री एकम् अद्भुतम् उपायम् सुझायत—चोरस्य माता: खोजयत, तस्यां बद्धायां, चोर: निश्चितम् मार्गमांची: भवति। (२) समस्या: राजस्य शत्रु: चोर: न भवत् भयम्-उद्धारणेन, अपितु बलात् न नियम्यम्। तस्य माता: प्रेम: ही मात्र-हेतु: आसीत् यत: त्यक्तु-शक्य: न भवति। (३) आधुनिकम्—आजकाल-समाजे भ्रष्टाचार:, हिंसा:, अपराध-कर्म: वृद्धि: भवति। तदा शास्त्रम् दण्डम् एव दातु-शीलम्। किन्तु काठिन्य-नीति: सदा न कार्यकर: भवति। शिक्षा:, संस्कार:, वा अपराधी-जना: परिवार-सम्बन्ध: स्पृष्ट्वा परिवर्तनम् आनयति। अत: मन्त्रिणा: उपाय: चिरकालीन-हलः भवति। समाज: न केवलम् दण्डेन, अपितु मेधया: एव सुरक्षितम् भवति।
**प्र2: मन्त्रिणा: बुद्धिमत्तां (बुद्धिमत्ता) कीदृशम् प्रदर्शयति? समाज-व्यवस्था-निर्माणे तस्य भूमिका: किम्? उदाहरणानि सह समीचीनम्-उत्तरम् देयम्।**
पूर्ण उत्तर:
मन्त्रिणा: बुद्धिमत्तम्—(१) समस्या-विश्लेषणम्: मन्त्री प्रथमतः राजस्य समस्या: गभीरम् विचारते। तस्य मूल-कारणम् (root cause) अन्वेषयते। चोरस्य प्रति दण्डम् एव समाधानम् नहीं, अपितु तस्य हृदय-परिवर्तनम्। (२) रचनात्मक-उपाय: प्रस्तावनम्: बलात् न, अपितु प्रेम-वञ्जना-साध्ये। माता-पुत्र: प्रेम-सूत्र: सर्वाधिक-दृढ़। (३) दीर्घकालीन-दृष्टि:—तत्क्षणम् समाधानम् न, किन्तु स्थायी-सुरक्षा। समाज-व्यवस्थायां भूमिका—मन्त्री: प्रमाणं दर्शयति यत् शासक: केवलम् सैनिक:, न अपितु बुद्धिमान्, दार्शनिक:, मानवीय-मूल्य-बोधक:। अत: समाज: नीति:, न्याय:, वा दया: इति त्रिगुणम् कामयते। उदाहरणम्—आधुनिक-न्यायालय: अपराधी-जना: दण्डित: करतु, किन्तु पुनः-सामाजिकीकरण (पुनर्सामाजिकीकरण) अपि प्रदाति।
**प्र3: 'काण्टकेनैव काण्टकम्' इत्यस्य नैतिक-शिक्षा (नैतिक पाठ) किम्? कथा: कीदृशम् पाठ: पढ़याते? भारतीय-दर्शने तस्य स्थानम् किम्?**
पूर्ण उत्तर:
नैतिक-शिक्षा:—(१) बुद्धि-विजय: बल-विजये श्रेष्ठ:। चाणक्य:-नीति: कहति—शक्तिम् बुद्धि-कौशल्येन संयोज्य तदा राज्य: अजेय: भवति। (२) प्रतिद्वन्द्विता-उपायम् आत्मनो-शत्रु-शक्तिम् स्वयम्-विरुद्ध-कार्ये प्रयुञ्जने। अर्थात्, यत् वस्तु हानि-कारक:, तद् एव यदि सुकौशल्येन प्रयुक्तम्, तदा हितकारक: भवति। (३) मानवीय-सम्बन्ध: बलात् न, भाव-वञ्जनया गठित:। पाठ:—दुष्ट-मनुष्यम् अपि त्यागम् न करायम्। प्रायश्चित्त-मार्गम्, करुणा-दृष्टि:, समाज-पुनर्निर्माण—ये दीर्घकालीन-फलप्रद:। भारतीय-दर्शने—महाभारते, रामायणे, अष्टाध्यायी-व्याकरणे, वेद-दर्शने, वा नीति-शास्त्रे, 'काण्टकेनैव काण्टकम्' इत्यस्य सद्रश्य: उपमा: प्रचुरम्। उदाहरणम्—'शठम् शाठ्ये न संज्ञेय:' (दुष्टं दुष्टम् उपायेन नियन्त्रयेत्)। भारतीय-राज-व्यवस्था, दण्ड-नीति:, वा सामाजिक-संगठन: ईदृश-बुद्धिमत्तायुक्तं प्रायश्चित्तम् मानते। अतः काण्टकेन काण्टकम्—भारतीय-नीति-शास्त्रस्य हृदयम्।
नए 2026–27 CBSE पैटर्न में पैटर्न परिवर्तन
2024–25 तर्कसंगत पाठ्यक्रम और आने वाले 2026–27 पैटर्न से पता चलता है कि कण्टकेनैव कण्टकम् को कैसे परीक्षित किया जाएगा इसमें सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव हैं। (१) **स्मरण से अधिक अनुप्रयोग पर जोर**: परीक्षक अब 'मंत्री की रणनीति आधुनिक स्थितियों में कैसे काम करेगी?' पूछते हैं न कि 'काँटे को किसने हटाया?' इसका मतलब है कि आप कथा-ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ सकते हैं—अपराध रोकथाम, कार्यस्थल संघर्ष, परिवार परामर्श। (२) **अधिक संस्कृत-से-अंग्रेजी अनुवाद जोड़े**: नए पैटर्न में 8–10 अंक के अनुवाद खंड शामिल हैं जहाँ आप पंक्तियों से अर्थ निकालते हैं (पूरी पंक्तियाँ नहीं, बल्कि चुनी हुई)। उदाहरण के लिए: 'तस्या: भयस्य समाचार: चोरेण श्रुता' — यह वाक्य रणनीति के मनोविज्ञान के बारे में क्या बताता है? (३) **हटाया गया: पात्रों के नामों का रटना**: पैटर्न पात्रों के नाम पूछने पर कम जोर देता है। बजाय इसके भूमिकाओं और तर्क पर ध्यान दें: 'बुद्धिमान सलाहकार ने कौन सी विशेषताएँ प्रदर्शित कीं?' (४) **नया: बुद्धिमत्ता-व्याख्या प्रश्न**: खुले-अंत वाले 5-अंक प्रश्नों की अपेक्षा करें जहाँ आप बुद्धिमत्ता को परिभाषित करते हैं और कथा से सबूत देते हैं। 'क्या बुद्धिमत्ता चतुरता के समान है? कण्टकेनैव कण्टकम् से उदाहरणों का उपयोग करके अपना उत्तर बताइए।' (५) **वीडियो-आधारित संदर्भ**: कुछ परीक्षा पत्रों में अब संस्कृत में 2-मिनट की आख्यान वीडियो शामिल है, फिर बोधगम्यता के प्रश्न पूछे जाते हैं। यह निष्क्रिय पढ़ने से सक्रिय सुनने को पुरस्कृत करता है। जब आप संशोधन करते हैं तो उच्चारण, लय और भावनात्मक टोन पर ध्यान दें। इन बदलावों से आगे रहने के लिए न केवल पिछले पेपर हल करें बल्कि CBSE की आधिकारिक वेबसाइट द्वारा जारी किए गए नए-पैटर्न नमूना पेपर भी हल करें। cbsetutor.ai पर, हम इन विकसित हो रहे पैटर्न को प्रतिबिंबित करने के लिए त्रैमासिक आधार पर हमारे प्रश्न बैंक को अपडेट करते हैं।
बोर्ड परीक्षा के लिए तेज़ प्रयास की रणनीति
परीक्षा के दिन, आपके पास पूरे कण्टकेनैव कण्टकम् सेक्शन के लिए लगभग 20 मिनट हैं (1-अंक + 3-अंक + 5-अंक के सवाल मिले-जुले)। यहाँ एक आजमाई हुई रणनीति है: **पहले 2 मिनट—सभी सवालों को पढ़ें**: तुरंत जवाब देना शुरू न करें। सभी सवाल पढ़ें, महत्वपूर्ण शब्दों को रेखांकित करें (मन्त्रिणा:, काण्टकम्, बुद्धिमत्तम्, समाधानम्), और मानसिक रूप से हर सवाल को 'आसान, मध्यम, कठिन' में बाँटें। **अगले 3 मिनट—पहले सभी 1-अंक के सवालों का जवाब दें**: ये आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और कोई जोखिम नहीं रखते। एक शब्द या एक पंक्ति के संक्षिप्त उत्तर लिखें। उदाहरण: 'प्र: किं काण्टकम्? उ: माता:' या 'उ: चोरस्य माता।' लंबे वाक्य लिखने से बचें। **अगले 7–8 मिनट—3-अंक के सवालों को हल करें**: हर सवाल के लिए, 3-वाक्य की संरचना लिखें: (१) परिस्थिति/समस्या का विवरण, (२) मुख्य विवरण/संवाद/घटना, (३) परिणाम/सीख। यदि आपका आत्मविश्वास अधिक है तो संस्कृत का उपयोग करें; यदि व्याकरण में गलती से अंक खोएँगे तो अंग्रेज़ी का उपयोग करें। टूटी हुई संस्कृत में 0 अंक से साफ़ अंग्रेज़ी में 2 अंक बेहतर हैं। **अगले 7–8 मिनट—5-अंक का उत्तर ड्राफ़्ट करें (यदि हो)**: अलग कच्ची कॉपी पर, बुलेट-पॉइंट की रूपरेखा लिखें: परिचय (समस्या), मन्त्रि-उपाय (समाधान), यह कैसे काम करता है, यह बुद्धिमानी क्यों है, आधुनिक उदाहरण। फिर उत्तर पत्र पर पैराग्राफ में लिखें। यदि समय खत्म हो जाए, तो अपनी कच्ची रूपरेखा जमा करें—परीक्षक संरचित नोट्स के लिए आंशिक अंक देते हैं। **अंतिम 2–3 मिनट—समीक्षा करें**: मुख्य नामों में वर्तनी की त्रुटियों की जाँच करें (राजा, मन्त्री, चोर, माता), और यह जाँचें कि हर उत्तर Q1, Q2 आदि से लेबल है। **विशेष सुझाव**: (१) कभी 5-अंक का सवाल खाली न छोड़ें—चाहे अधूरा हो, उसका प्रयास करें। (२) जिस भाषा में आप सबसे अधिक धाराप्रवाह हैं उसमें लिखें; संस्कृत की शुद्धता से सटीकता ज़्यादा महत्वपूर्ण है। (३) अपने अंतिम उत्तर को हाइलाइट या बॉक्स में रखें ताकि परीक्षक को आसानी से दिख जाए। (४) यदि सवाल संस्कृत माँगता है, लेकिन आप निश्चित नहीं हैं, तो अंग्रेज़ी में लिखें और कुछ अंक प्राप्त करें; शून्य अंक अधिक बुरा है। (५) बोर्ड परीक्षा से पहले कम से कम 3 बार मॉक परीक्षाओं में इस समय-आवंटन का अभ्यास करें।
सामान्य प्रश्न और छात्र-त्रुटियाँ
**त्रुटि 1: रूपक को शाब्दिक कथानक से भ्रमित करना।** छात्र लिखते हैं: 'चोर की माता को कैद कर दिया गया।' सही उत्तर: 'माता (रूपक रूप में = काँटा) को रोक दिया गया; इससे चोर (मुख्य काँटा) पर मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ा, जिससे उसका व्यवहार बदल गया।' परीक्षक 3–5-अंक के सवालों में प्रतीकवाद की व्याख्या के लिए अंक देते हैं। **त्रुटि 2: पात्र की प्रेरणा को नज़रअंदाज़ करना।** केवल कार्यों की सूची न बनाएँ; *क्यों* हर पात्र कार्य करता है, यह समझाएँ। मन्त्री माता को बाँधने का सुझाव क्रूरता से नहीं देता—वह भावनात्मक लाभ को समझता है। माता की पीड़ा > चोर के दंड का भय। **त्रुटि 3: कथानक सारांश लिखना बजाय सवाल का जवाब देने के।** यदि 'नैतिकता क्या है?' पूछा जाए तो पूरी कथा सुनाएँ नहीं। सीधे सीख पर जाएँ: 'बुद्धिमत्ता अक्सर शक्ति से जहाँ जीतती है। मन्त्री की रणनीति दिखाती है कि मानव मनोविज्ञान को समझना सैन्य शक्ति से अधिक शक्तिशाली है।' **त्रुटि 4: संस्कृत वाक्यों में अंग्रेज़ी शब्दों का उपयोग बिना उचित विभक्ति के।** लिखें: 'चोरस्य समस्या उच्च आसीत्,' न कि 'चोरस्य problem high was।' परीक्षक व्याकरणिक सही के बिना भाषा-मिश्रण के लिए अंक काटते हैं। **त्रुटि 5: 1-अंक के सवालों का अधिक विस्तार से जवाब देना।** यदि सवाल 'मन्त्री कः अस्ति?' पूछता है तो 'राजस्य बुद्धिमान् सलाहकार:' (1–2 शब्द) का उत्तर दें, पूरा पैराग्राफ नहीं। अंक-मूल्य का सम्मान करें। **त्रुटि 6: 3-अंक के सवालों में 'क्यों' को छोड़ना।** एक अच्छे 3-अंक के उत्तर की संरचना है: (१) क्या हुआ? (२) यह कैसे हुआ? (३) यह महत्वपूर्ण क्यों था? आपका उत्तर तीनों को संबोधित करे।