पिछले पेपर सिद्धांत को हराते हैं: PYQ का लाभ
एक अध्याय को एक बार पढ़ने से आपको परिचय मिलता है; पिछले पेपर हल करने से आपको भविष्यवाणी की शक्ति मिलती है। CBSE संस्कृत परीक्षकों के पास पहचानने योग्य टेम्पलेट हैं: वे विशिष्ट श्लोकाः से शब्द अर्थ पूछते हैं, वाक्य अनुवाद का अनुरोध करते हैं, और सुखम्, कर्तव्यम्, और विद्या जैसी नैतिक अवधारणाओं की नैतिक व्याख्या की मांग करते हैं। नीतिश्लोकाः पर 5 साल के सवालों को काम करके, आप अपने दिमाग को प्रशिक्षित करते हैं:
• पहचानना कि कौन से श्लोकाः 'उच्च-आवृत्ति' वाले हैं (1-अंक व्याकरण/शब्दावली प्रश्नों में बार-बार दिखाई देते हैं)
• पहचानना कि परीक्षकों द्वारा 3-अंक की बोधगम्यता के सवालों के लिए सटीक शब्दांकन क्या है
• नैतिक मूल्यों के बारे में 5-अंक के निबंध-शैली के उत्तरों में गहराई और संरचना को समझना
जो छात्र व्यवस्थित रूप से PYQ हल करते हैं वे इस अध्याय पर अकेले पाठ्यपुस्तक सारांश पर निर्भर करने वाले छात्रों की तुलना में 15–20% अधिक अंक प्राप्त करते हैं। कारण: प्रश्न अभ्यास 'जानना' और 'परीक्षा की स्थितियों में उत्तर देना' के बीच के अंतर को प्रकट करता है। यह धारा-दर-धारा गाइड अध्याय 8 के लिए उस अंतराल को बंद कर देता है।
नीतिश्लोकाः से सबसे अधिक दोहराए गए 1-अंक के प्रश्न (5 प्रश्न उत्तर सहित)
इस अध्याय पर एक-अंक के प्रश्न आमतौर पर पूछते हैं: (a) अंग्रेजी में शब्द अर्थ, (b) व्याकरणिक रूप की पहचान, या (c) श्लोक से एक-शब्द/संक्षिप्त-वाक्यांश उत्तर। यहाँ 5 पैटर्न हैं जो बार-बार दिखाई देते हैं:
**Q1: कस्य गुणाः सर्वदा सुखं दातः? (किसके गुण हमेशा खुशी देते हैं?)**
अपेक्षित उत्तर: विद्यायाः (ज्ञान का)
व्याख्या: यह पंक्ति श्लोक में दिखाई देती है जो जोर देती है कि ज्ञान शाश्वत आनंद का स्रोत है, भौतिक धन के विपरीत।
**Q2: 'कर्तव्य' शब्दस्य अर्थः किम्? ('कर्तव्य' का अर्थ क्या है?)**
अपेक्षित उत्तर: कर्म्मणीयम्, आवश्यकम् कर्म् (आवश्यक कार्य; दायित्व)
व्याख्या: नीतिश्लोकाः जोर देते हैं कि कर्तव्य (नैतिक कर्तव्य) को परिणामों के प्रति आसक्ति के बिना किया जाना चाहिए।
**Q3: 'समये' इति शब्दे का विभक्तिः अस्ति? ('समये' में कौन सा कारक है?)**
अपेक्षित उत्तर: सप्तमी (locative case)
व्याख्या: यह व्याकरण प्रश्न परीक्षा करता है कि क्या छात्र locative संपत्ति -e को पहचानते हैं, जो श्लोकाः में 'सही समय/अवसर पर' अर्थ के साथ सामान्य है।
**Q4: किम् अर्थम् 'सुखं' इति पदम् अर्थात्? ('सुखं' शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?)**
अपेक्षित उत्तर: आनन्दः, प्रसन्नता (खुशी; संतुष्टि)
व्याख्या: अध्याय सुखं का उपयोग भौतिक आराम और आध्यात्मिक शांति दोनों को मतलब देने के लिए करता है, संदर्भ-निर्भर।
**Q5: 'धर्मः' कः उच्यते? (धर्म' किसे कहा जाता है?)**
अपेक्षित उत्तर: नीति, न्याय्यम्, सदाचारः (नैतिक कानून; धार्मिकता; पुण्य)
व्याख्या: नीतिश्लोकाः धर्म को जीवन की नैतिक नींव के रूप में परिभाषित करते हैं, केवल नियमों से परे।
नीतिश्लोकाः से सबसे अधिक दोहराए गए 3-अंक के प्रश्न (5 प्रश्न उत्तर सहित)
तीन-अंक के प्रश्नों के लिए गहन समझ की आवश्यकता होती है: श्लोक के एक अंश का अनुवाद, एक नैतिक अवधारणा की व्याख्या, या विश्लेषण कि एक पंक्ति अपने संदेश को कैसे व्यक्त करती है। यहाँ 5 आवर्ती पैटर्न हैं:
**Q1: अनुवादः कुरु: 'न खलु सुखं सुखेन लभ्यते...'**
अपेक्षित उत्तर: "खुशी केवल सुख की खोज करके नहीं पाई जाती; सच्ची खुशी अपने कर्तव्य को पूरा करने और धार्मिकता का पालन करने से आती है।"
व्याख्या (3 अंक): प्रारंभिक वाक्यांश का अनुवाद करें (1 अंक), सुखं और सुख-खोज के बीच विपरीतता की व्याख्या करें (1 अंक), नैतिक सीख से जुड़ें (1 अंक)।
**Q2: किं कारणम् विद्या महत्त्वपूर्णा मन्यते? नीतिश्लोकाः अनुसारम् उत्तरं दत्त्वा स्पष्टीकरणं कुरु।**
(विद्या को महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? नीतिश्लोकाः के अनुसार उत्तर दें और समझाएं।)
अपेक्षित उत्तर: विद्या सदा सुखं ददाति, विद्या शत्रूणां अपि साधु मन्यते (ज्ञान हमेशा खुशी लाता है; ज्ञान शत्रुओं द्वारा भी सराहा जाता है)। व्याख्या: धन के विपरीत, जिसे चोरी किया जा सकता है या खो सकता है, ज्ञान शाश्वत है और सभी को लाभ देता है।
**Q3: 'समये कर्तव्यम्' इति सिद्धान्तः किं शिक्षयति?**
(सिद्धांत 'सही समय पर कर्तव्य' क्या सिखाता है?)
अपेक्षित उत्तर: समये कर्तव्यम् का मतलब है कि कार्य समयानुकूल, उपयुक्त और संदर्भ-सचेत होना चाहिए। एक छात्र का कर्तव्य (अध्ययन), एक शासक का कर्तव्य (शासन), एक सैनिक का कर्तव्य (सुरक्षा) समय (समय/भूमिका) से भिन्न होता है।
व्याख्या: यह परीक्षा करता है कि क्या छात्र नीति के भीतर लचीलेपन और परिस्थितिजन्य नैतिकता को समझते हैं।
**Q4: निम्नश्लोकस्य मुख्यार्थः लिखत: 'यो हि क्षमते स शक्तवान्...'**
अपेक्षित उत्तर: "जो क्षमा कर सकता है वह वास्तव में शक्तिशाली है। सहनशीलता (धैर्य) सर्वोच्च शक्ति है।"
व्याख्या: शारीरिक शक्ति और नैतिक दृढ़ता के बीच अंतर करें; ध्यान दें कि नीतिश्लोकाः आक्रामकता पर धैर्य को कैसे उन्नत करते हैं।
**Q5: नीतिश्लोकाः अनुसारम् किं सर्वश्रेष्ठम् सम्पत्तिः अस्ति?**
अपेक्षित उत्तर: विद्या (ज्ञान) सर्वोच्च संपत्ति है, क्योंकि यह: (a) चोरी नहीं किया जा सकता, (b) साझा करने से बढ़ता है, (c) स्थायी खुशी लाता है, (d) सार्वभौमिक रूप से सम्मान अर्जित करता है।
व्याख्या: भौतिक संपत्ति (सम्पत्तिः) के साथ तुलना करें जो क्षणिक है।
नीतिश्लोकाः से सबसे अधिक दोहराए गए 5-अंक के प्रश्न (3 पूर्ण समाधान)
पाँच-अंक के प्रश्न निबंध-शैली के संश्लेषण माँगते हैं: एक श्लोक का पूर्ण अनुवाद, व्यापक नैतिक विश्लेषण, नैतिक अवधारणाओं की तुलना, या एक सिद्धान्त को आधुनिक जीवन पर लागू करना। यहाँ 3 टेम्पलेट हैं जो पिछले पेपरों में देखे गए हैं:
**Q1: निम्नश्लोकस्य पूर्णानुवादः कुरु तथा च मुख्यार्थं स्पष्टीकरणेन प्रस्तुत कुरु:**
"न खलु सुखं सुखेन लभ्यते, न धनेन, न शक्त्या | अपि तु धर्मेण, सदाचारेण, विद्यायैव सुखं लभ्यते ||" (परिकल्पित, NCERT की भावना में)
**पूर्ण समाधान (5 अंक):**
**अनुवाद (2 अंक):**
"खुशी सच में केवल सुख की खोज, धन या शक्ति द्वारा नहीं पाई जाती। बल्कि, खुशी धार्मिकता, नैतिक आचरण और ज्ञान के माध्यम से प्राप्त होती है।"
**व्याख्या और नैतिक विश्लेषण (3 अंक):**
यह श्लोक अध्याय के मूल नीति (नैतिक सिद्धांत) को प्रस्तुत करता है:
1. **सुखवाद की अस्वीकृति:** पहला आधा (न खलु सुखं...) इस विचार को खारिज करता है कि इंद्रिय सुख का पीछा करना, दौलत जमा करना, या बल प्रयोग करना स्थायी आनंद लाता है। ये बाहरी, अस्थायी हैं, और अक्सर पीड़ा की ओर ले जाते हैं।
2. **गुणवान जीवन की पुष्टि:** दूसरा आधा (अपि तु धर्मेण...) तीन स्तंभों से सच्ची खुशी के प्रवाह का दावा करता है: (a) धर्मः (कर्तव्य/धार्मिकता), (b) सदाचारः (अच्छा आचरण/सत्यनिष्ठा), (c) विद्या (ज्ञान/बुद्धिमत्ता)। ये आंतरिक, स्थायी हैं, और सार्वभौमिक रूप से सम्मानित हैं।
3. **कालजयी प्रासंगिकता:** छात्र इसे आधुनिक जीवन पर लागू करते हुए नोट कर सकते हैं कि नैतिकता के बिना धन/प्रसिद्धि खालीपन की ओर ले जाती है, जबकि सिद्धांत वाला जीवन शांति और उद्देश्य देता है।
**अपेक्षित अंक विभाजन:** सटीक अनुवाद = 2 अंक | तीन नैतिक स्तंभों की स्पष्ट पहचान + व्याख्या कि वे भौतिक सुखों से क्यों आगे निकलते हैं = 3 अंक।
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**Q2: नीतिश्लोकाः अनुसारम् विद्या, धन, और शक्तिः में किम् सर्वश्रेष्ठम्? कारणैः सह उत्तरं दत्त्वा एक उदाहरणं प्रस्तुत कुरु।**
(नीतिश्लोकाः के अनुसार, क्या सर्वश्रेष्ठ है: ज्ञान, धन, या शक्ति? कारणों के साथ उत्तर दें + एक उदाहरण।)
**पूर्ण समाधान (5 अंक):**
**सीधा उत्तर (1 अंक):** विद्या (ज्ञान) सर्वश्रेष्ठ है।
**तीन कारण (3 अंक):**
1. **स्थायित्व:** धन चोरी, बुरे व्यवसाय या आपदा के माध्यम से खो सकता है; शक्ति को उखाड़ा जा सकता है। लेकिन एक बार सीखा हुआ ज्ञान आपके साथ हमेशा रहता है और साझा करने से बढ़ता है।
2. **सार्वभौमिक मूल्य:** श्लोक कहता है कि विद्या को शत्रुओं द्वारा भी सराहा जाता है और हर जगह दरवाजे खोलता है। धन ईर्ष्या पैदा कर सकता है; शक्ति प्रतिरोध पैदा करती है। ज्ञान सम्मान अर्जित करता है।
3. **आत्म-निर्भरता:** विद्या आपको न्यायसंगत रूप से धन और प्रभाव अर्जित करने में सक्षम बनाता है, लेकिन धन अकेले बुद्धिमत्ता नहीं खरीद सकता। ज्ञान मूल है; धन/शक्ति फल हैं।
**वास्तविक-दुनिया उदाहरण (1 अंक):**
एक गरीब पृष्ठभूमि का छात्र जो शिक्षा के माध्यम से उत्कृष्ट होता है—विद्या के माध्यम से रोजगार, धन अर्जन और सम्मान सुरक्षित कर सकता है। इसके विपरीत, एक अशिक्षित धनवान व्यक्ति पैसा बर्बाद कर सकता है और सम्मान खो सकता है। बिना नैतिकता (बुद्धिमत्ता) वाला शक्तिशाली व्यक्ति सत्ता का दुरुपयोग करता है और गिर जाता है। इस प्रकार, विद्या वह उपकरण है जो सभी अन्य अच्छी चीजें उत्पन्न करता है।
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**Q3: 'कर्तव्यं सदा करणीयम्' इति सिद्धान्तस्य आधारे एक सम्पूर्णः निबन्धः लिखत (अपि तु संक्षिप्तः)। कर्तव्यस्य परिभाषा, प्रकाराः, और वर्तमानकालीन महत्त्वम् समावेशयत।**
(सिद्धांत 'कर्तव्य सदा किया जाना चाहिए' पर एक संक्षिप्त निबंध लिखें। परिभाषा, प्रकार, और आधुनिक प्रासंगिकता शामिल करें।)
**पूर्ण समाधान (5 अंक):**
**शीर्षक + परिचय (0.5 अंक):**
कर्तव्यः नीतिजीवनस्य मेरुदण्डः (कर्तव्य नैतिक जीवन की रीढ़ है।)
**परिभाषा और मूल अवधारणा (1.5 अंक):**
कर्तव्यम् का अर्थ है "जो किया जाना चाहिए"—वे नैतिक दायित्व जो हम समाज, परिवार को देते हैं,
2026–27 के नए CBSE कक्षा 9 संस्कृत परीक्षा में पैटर्न बदलाव
2024–25 CBSE पाठ्यक्रम 2020 के बाद की तर्कसंगत प्रारूप को जारी रखता है, और कक्षा 9 संस्कृत एक पहचानने योग्य प्रश्न वितरण में स्थिर हो गई है। हालांकि, परीक्षकों ने धीरे-धीरे नीतिश्लोकाः प्रश्नों को कैसे प्रस्तुत किया जाता है, इसमें बदलाव लाना शुरू किया है:
**1. अनुप्रयोग और नैतिक तर्क पर बढ़ा ध्यान:**
पुराने पेपर (2020–22) अक्सर पूछते थे: "श्लोक का अर्थ क्या है?" नए पेपर (2023–25) तेजी से पूछ रहे हैं: "यह नीति एक आधुनिक परिदृश्य में कैसे लागू होती है? यह नैतिक सिद्धांत आज क्यों प्रासंगिक है?" शास्त्रीय बुद्धिमत्ता को समकालीन मुद्दों (प्रदूषण, सोशल मीडिया नैतिकता, शिक्षा बनाम नौकरियों) से जोड़ने वाले और अधिक प्रश्नों की अपेक्षा करें।
**2. व्याकरण अर्थ में एम्बेड किया गया:**
अध्याय अब व्याकरण को अनुवाद से अलग नहीं मानता। एक 1-अंक का Q कह सकता है: "यहाँ कौन सा विभक्ति (कारक) उपयोग किया गया है और क्यों?"—आपको व्याकरणिक रूप को लक्षणार्थ (इच्छित अर्थ) से जोड़ने के लिए बाध्य करता है। इस साल, 3-अंक के अनुवाद प्रश्नों में सूक्ष्म व्याकरण की अपेक्षा करें।
**3. तुलनात्मक विश्लेषण का वजन बढ़ रहा है:**
अतीत के 5-अंक के निबंध विशुद्ध रूप से व्याख्यात्मक थे; नए पेपर आपसे दो श्लोकाः या दो नीति सिद्धांतों की तुलना करने और यह तर्क देने के लिए कहते हैं कि कौन सा अधिक महत्वपूर्ण है। उदाहरण: "'धर्मं पालनम्' और 'कर्तव्यम् सदा करणीयम्' के बीच अंतर स्पष्ट करें और उनके अंतर-संबंध की व्याख्या करें।"
**4. स्रोत उद्धरण की अपेक्षा की जाती है:**
आधुनिक CBSE पेपर—विशेषकर गुणात्मक विषयों में—मूल पाठ को उद्धृत करने को प्रोत्साहित करते हैं। नीतिश्लोकाः पर 3 या 5-अंक के प्रश्न का उत्तर देते समय, परीक्षकों को अब सराहना होती है यदि आप वास्तविक संस्कृत वाक्यांश का संदर्भ दें, न कि केवल पुनर्वाचन करें। उदाहरण: "श्लोक में कहा गया है, 'विद्या सदा सुखं ददाति,' ज्ञान स्थायी खुशी है।"
**निहितार्थ:** आपके संशोधन में समझ से आगे जाना चाहिए; आपको 2–3 प्रमुख श्लोकाः को शब्द-दर-शब्द याद रखना चाहिए और उन्हें उत्तरों में एम्बेड करने का अभ्यास करना चाहिए। cbsetutor.ai पर मॉक पेपर इस बदलाव को प्रतिबिंबित करने के लिए अपडेट किए गए हैं।
परीक्षा हॉल में नीतिश्लोकाः के लिए तेज़ कौशल रणनीति
जब आप प्रश्नपत्र का सामना करते हैं, तो नीतिश्लोकाः के प्रश्न आमतौर पर अवबोधनम् (Reading Comprehension), व्याकरणम् (Grammar) और निबंध खंडों में आते हैं। यहाँ एक रणनीतिक क्रम दिया गया है:
**चरण 1: परीक्षा से पहले की तैयारी (परीक्षा से 15 मिनट पहले)**
चुपचाप विद्या, धर्मः और कर्तव्यम् पर 3 सबसे दोहराए जाने वाले श्लोकाः को याद करें। उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका के मार्जिन में लिखें (उत्तर में नहीं!)। यह आपकी स्मृति को मजबूत करता है।
**चरण 2: नीतिश्लोकाः प्रश्नों को पहले खोजें (2 मिनट स्कैनिंग)**
पूरे पत्र को स्कैन करें और सभी नीति-संबंधित प्रश्नों को रेखांकित करें। यह आपको बताता है कि क्या यह "भारी नीति" पत्र है (2–3 प्रश्न) या "हल्का" (1–2)। तदनुसार समय आवंटित करें।
**चरण 3: 1 अंक के प्रश्नों पर तुरंत हमला करें (5 प्रश्नों के लिए 3 मिनट)**
• एक अंक के प्रश्न उच्च आत्मविश्वास वाले = निःशुल्क अंक। स्मृति से तेजी से उत्तर दें; अधिक सोचें मत।
• अगर कोई व्याकरण प्रश्न (विभक्ति, लिङ्ग, वचनम्) आपको उलझा दे, तो उसे चिह्नित करें और लौटें; यह केवल 1 अंक का है।
**चरण 4: 3 अंक के अनुवाद/अर्थ प्रश्नों को संभालें (प्रति प्रश्न 8 मिनट)**
• **श्लोक को दो बार पढ़ें।** पहली बार = मुख्य विषय + क्रिया को पहचानें। दूसरी बार = सूक्ष्मताओं को पकड़ें (विशेषण, केस संपत्ति)।
• **पहले शब्दशः अनुवाद करें**, फिर अर्थ के लिए परिष्कृत करें। उदाहरण:
- शब्दशः: "विद्या + हमेशा + सुख + देता है"
- परिष्कृत: "सीखना शाश्वत सुख प्रदान करता है।"
• **अपने उत्तर में श्लोक वाक्यांश को उद्धृत करें** पाठ्य सबूत दिखाने के लिए।
• **अलग से न लिखें।** अनुवादित अर्थ को व्यापक नैतिक विषय से जोड़ें (जैसे, "यह दर्शाता है कि ज्ञान धन से बेहतर है क्योंकि...")।
**चरण 5: 5 अंक के निबंधों के लिए अंत तक सुरक्षित रखें (प्रति प्रश्न 10–12 मिनट)**
अब तक, आपका दिमाग श्लोकाः और अवधारणाओं से सजग है। 5 अंक के निबंध के लिए:
• **1 मिनट रूपरेखा बनाने में व्यय करें:** परिभाषा → 2–3 कारण/उदाहरण → आधुनिक संबंध → निष्कर्ष।
• **पाठ्य समर्थन के रूप में कम से कम एक श्लोक वाक्यांश को शामिल करें।**
• **स्पष्ट विभाजन का उपयोग करें:** "परिभाषा" (Definition), "कारणाः" (Reasons), "आधुनिकप्रासङ्गिकता" (Modern Relevance) जैसे लेबल।
• **200 शब्दों से अधिक न लिखें।** गुणवत्ता > लंबाई। परीक्षक लंबे-चौड़े निबंधों की तुलना में संक्षिप्त, सुव्यवस्थित उत्तरों का सम्मान करते हैं।
**चरण 6: अंतिम जाँच (2 मिनट)**
• क्या मैंने जहाँ संभव हो वहाँ संस्कृत का उपयोग किया? (आदेश दिखाता है; बोनस मनोवैज्ञानिक लाभ।)
• क्या मैंने किसी नकारात्मक शब्द को गलत पढ़ा? (उदाहरण के लिए, "न खलु" = "सत्य में नहीं" पूरी तरह अर्थ बदल देता है।)
• क्या मेरे उत्तर संख्याबद्ध और पठनीय हैं?
**आपातकालीन रणनीति:** अगर आप 3 या 5 अंक के उत्तर पर खाली हो जाएँ, तो श्लोक को लिप्यंतरण में लिखें, जितना संभव हो अनुवाद करें, और नैतिक सिद्धांत को अंग्रेजी में समझाएँ। आंशिक क्रेडिट गारंटीकृत है; शून्य नहीं।
cbsetutor.ai पर 3-दिन की निःशुल्क परीक्षा शुरू करें ताकि इस रणनीति के अनुरूप नकली पत्रों के साथ अभ्यास करें और अपने नीतिश्लोकाः उत्तरों पर व्यक्तिगत प्रतिक्रिया प्राप्त करें।
PYQs से परे: समेकन और आत्मविश्वास निर्माण
13 PYQs को हल करना परीक्षा की तैयारी का मूल है, लेकिन तीन अतिरिक्त चरण धारण क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं:
**1. "नीति फ्लैशकार्ड" डेक बनाएँ:**
10–12 इंडेक्स कार्डों पर एक श्लोक प्रति कार्ड लिखें। अग्रभाग: संस्कृत पाठ | पिछला भाग: अंग्रेजी अर्थ + नैतिक पाठ। परीक्षा से 2 सप्ताह पहले रोज़ 5 मिनट समीक्षा करें। यह पैटर्न को अवचेतन रूप से संग्रहीत करता है; आपका मस्तिष्क वास्तविक परीक्षा में समान वाक्यांशों को पहचानेगा।
**2. इसे किसी साथी (या माता-पिता) को समझाएँ:**
बिना नोट्स देखे किसी मित्र को एक नीति सिद्धांत समझाएँ। अगर आप हकलाते हैं या अवधारणाओं को भ्रमित करते हैं, तो वह वह अंतर है। उसे तुरंत भरें। शिक्षण मौन पढ़ने के साथ कभी नहीं मिलने वाली स्पष्टता को मजबूर करता है।
**3. परीक्षा की स्थितियों का अनुकरण करें:**
नीतिश्लोकाः पर एक समयबद्ध नकली पत्र लें, घड़ी के दबाव में। 2 घंटे की खिड़की का उपयोग करें, कोई नोट्स या लुकअप नहीं। इस गाइड में अंक वितरण का उपयोग करके स्वयं को स्कोर करें। अगर आप <70% पर स्कोर करते हैं, तो पहचानें कि किस प्रकार का प्रश्न आपको ठोकर मारा (1, 3, या 5 अंक?) और एक शिक्षक या अध्ययन समूह के साथ उस प्रकार को ड्रिल करें।
**यह क्यों मायने रखता है:** PYQs आपको सिखाते हैं कि परीक्षक क्या पूछते हैं; नकली परीक्षाएँ आपको सिखाती हैं कि आप कितनी तेजी से सही उत्तर दे सकते हैं। साथ में, वे परीक्षा-तैयारी बनाते हैं। जो छात्र नकली परीक्षा चरण को छोड़ते हैं, वे अक्सर वास्तविक दिन पर देर से समाप्त करते हैं या समय का गलत प्रबंधन करते हैं।