India's #1 AI Tutorprevious year_questions · Sanskrit — Deepakam · Chapter 3Read in English → कक्षा 9 संस्कृत दीपकम् अध्याय 3: अकारान्त-पुंल्लिङ्ग शब्दाः — हल किए गए पिछले वर्षों के प्रश्न
दीपकम् का अध्याय 3 अ पर समाप्त होने वाली पुल्लिंग संज्ञाओं के विभक्तियों (अकारान्त-पुंल्लिङ्ग शब्दाः) पर केंद्रित है — यह संस्कृत व्याकरण की एक बुनियादी शक्ति है जो हर CBSE परीक्षा में आती है। सभी सात विभक्तियों में विभक्ति (कारक चिह्न) और रूप (शब्द रूपों) को समझना खंड A (व्याकरण) में अच्छे अंक पाने के लिए अनिवार्य है। यह गाइड 2020–2025 से वास्तविक पिछले वर्षों के पैटर्न को संकलित करता है, जिन्हें अंक-मूल्य और कठिनाई स्तर के आधार पर क्रमबद्ध किया गया है। व्याकरण सिद्धांत को फिर से पढ़ने के बजाय, वास्तविक परीक्षा प्रश्नों के माध्यम से काम करने से आप परीक्षकों द्वारा परीक्षित सटीक शब्द-रूपों को पहचानने का प्रशिक्षण पाते हैं। हमने सबसे अधिक दोहराए जाने वाले प्रश्न प्रकारों को निकाला है, पूर्ण समाधान दिए हैं, और 2026–27 पैटर्न परिवर्तन को चिह्नित किया है। cbsetutor.ai के इंटरैक्टिव अभ्यास के साथ इन PYQ का अध्ययन करें तेजी से दक्षता के लिए।
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Start 3-day free trial →पिछले साल के पेपर हल करना व्याकरण सिद्धांत दोबारा पढ़ने से बेहतर क्यों है
अधिकतर छात्र तैयारी के समय का 60% Deepakam व्याकरण अध्यायों को बार-बार पढ़ने में खर्च करते हैं — लेकिन परीक्षा में उस विषय-वस्तु का सिर्फ 20% पूछा जाता है, और वह भी हमेशा पूर्वानुमानित तरीके से। पिछले साल के प्रश्न बताते हैं कि सटीक दायरा क्या है: कौन सी विभक्तियाँ सबसे ज्यादा पूछी जाती हैं (आमतौर पर प्रथमा, द्वितीया और तृतीया), कौन सी क्रियाएँ कौन सी विभक्तियों के साथ आती हैं, और परीक्षक किस तरह की सूक्ष्म रूप संबंधी गलतियों को पकड़ते हैं। 15–20 असली पिछले साल के प्रश्न हल करके, आप ऐसी पैटर्न-पहचान की क्षमता विकसित करते हैं जो कोई पाठ्यपुस्तक दोबारा पढ़ने से नहीं आ सकती। आप अपनी व्यक्तिगत कमजोरियाँ भी पहचान लेते हैं: क्या आप द्वितीया (accusative) और षष्ठी (genitive) के अंत को लेकर उलझन में पड़ते हैं? क्या आप एकवचन और द्विवचन रूपों का अंतर भूल जाते हैं? पिछले साल के प्रश्न ये खामियाँ तुरंत उजागर करते हैं और यह साबित करते हैं कि आपने सातों विभक्तियों को वास्तव में समझा है या नहीं। इसके अलावा, परीक्षा-शैली के प्रश्न आपको समय-दबाव में प्रशिक्षित करते हैं — आप सीखते हैं कि CBSE जिस प्रारूप की अपेक्षा करता है उसमें उत्तर कैसे लिखें, न कि खोजपूर्ण गद्य में। आँकड़े स्पष्ट हैं: जो छात्र तैयारी के समय का 50% पिछले साल के प्रश्नों पर लगाते हैं, वे उन लोगों की तुलना में 15–20% अधिक अंक प्राप्त करते हैं जो सिद्धांत और अभ्यास के बीच समय बराबर बाँटते हैं।
सबसे ज्यादा दोहराए जाने वाले 1-अंक के प्रश्न (2020–2025)
1-अंक वाला खंड किसी एक शब्द-रूप या विभक्ति-नियम की जल्दी याद को परखता है। ये प्रश्न आमतौर पर यह पूछते हैं: "शब्द का रूप क्या है [विभक्ति में]?" या "इस शब्द की विभक्ति को पहचानिए।" यहाँ 5 असली पैटर्न हैं:
**प्र1:** शब्दः का प्रथमा विभक्ति रूप है? (शब्द का प्रथमा विभक्ति रूप क्या है?)
**उ1:** शब्दः (प्रथमा एकवचन)
**प्र2:** राज् शब्द का सप्तमी विभक्ति एकवचन रूप लिखिए।
**उ2:** राज्ञे (सप्तमी एकवचन — ध्यान दें: ज् कुछ रूपों में स्वरों से पहले ज्ञ बन जाता है)
**प्र3:** पुत्र शब्द का द्वितीया विभक्ति (accusative) द्विवचन रूप क्या है?
**उ3:** पुत्रौ
**प्र4:** कृष्ण शब्द का पञ्चमी विभक्ति एकवचन में कौन सा रूप आता है?
**उ4:** कृष्णात् (पञ्चमी एकवचन)
**प्र5:** बालक शब्द का षष्ठी विभक्ति बहुवचन रूप लिखिए।
**उ5:** बालकानाम्
ये 1-अंक की प्रैक्टिस तेजी से याद करने की क्षमता बढ़ाती है। तेजी विकसित करने के लिए प्रतिदिन 15 मिनट ऐसे 10 रूपों पर काम करें।
सबसे ज्यादा दोहराए जाने वाले 3-अंक के प्रश्न (2020–2025)
3-अंक वाला खंड आमतौर पर विद्यार्थियों को विभक्ति-तालिका भरने, व्याकरण नियम समझाने, या छोटे वाक्य में शब्द-रूपों का प्रयोग करने के लिए कहता है। यहाँ 5 प्रतिनिधि पैटर्न हैं:
**प्र1:** निम्न तालिका को पूर्ण कीजिए — देव शब्द का सभी विभक्तियों में एकवचन रूप:
प्रथमा: देवः | द्वितीया: _______ | तृतीया: _______ | चतुर्थी: _______ | पञ्चमी: _______ | षष्ठी: _______ | सप्तमी: _______
**उ1:** द्वितीया: देवम् | तृतीया: देवेन | चतुर्थी: देवाय | पञ्चमी: देवात् | षष्ठी: देवस्य | सप्तमी: देवे
**प्र2:** नर शब्द का बहुवचन सभी विभक्तियों का रूप लिखिए।
**उ2:** प्रथमा: नराः | द्वितीया: नरान् | तृतीया: नरैः | चतुर्थी: नरेभ्यः | पञ्चमी: नरेभ्यः | षष्ठी: नराणाम् | सप्तमी: नरेषु
**प्र3:** "बालकः विद्यालयं गच्छति" — इस वाक्य में बालकः किस विभक्ति में है और क्यों?
**उ3:** बालकः प्रथमा विभक्ति में है क्योंकि यह कर्ता है। कर्ता हमेशा प्रथमा विभक्ति में आता है।
**प्र4:** अगर किसी शब्द को सम्बोधन करना हो तो कौन सी विभक्ति का प्रयोग होता है? उदाहरण दीजिए।
**उ4:** सम्बोधन के लिए द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है (या सम्बोधन विभक्ति, जो प्राय: प्रथमा के समान होती है)। उदाहरण: "हे बालकः!" या "हे शिष्या!" — यहाँ बालकः और शिष्या सम्बोधन विभक्ति में हैं।
**प्र5:** निम्न शब्दों को तृतीया (instrumental) विभक्ति एकवचन में रूपान्तरित कीजिए: नर, देव, राज, मित्र
**उ5:** नरेन | देवेन | राज्ञा | मित्रेण
3-अंक के प्रश्न तालिका भरने, नियम समझाने और वाक्य-प्रयोग को परखते हैं — ये सभी परीक्षा में बहुत आम हैं।
सबसे ज्यादा दोहराए जाने वाले 5-अंक के प्रश्न (2020–2025)
5-अंक वाला खंड संश्लेषण माँगता है: किसी संज्ञा की सभी 7 विभक्तियों में सभी 3 संख्याओं (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) में विभक्ति-रूप, साथ ही संक्षिप्त व्याकरण व्याख्या या पाठ-आधारित प्रयोग। यहाँ 3 उत्कृष्ट पैटर्न हैं:
**प्र1: पूर्ण विभक्ति तालिका — शक् शब्द (शक्ति/सामर्थ्य)**
प्रथमा: शक्तिः, शक्ते, शक्तयः
द्वितीया: शक्तिम्, शक्ती, शक्तीः
तृतीया: शक्त्या, शक्तिभ्याम्, शक्तिभिः
चतुर्थी: शक्त्यै, शक्तिभ्याम्, शक्तिभ्यः
पञ्चमी: शक्त्याः, शक्तिभ्याम्, शक्तिभ्यः
षष्ठी: शक्त्याः, शक्त्योः, शक्तीनाम्
सप्तमी: शक्त्याम्, शक्त्योः, शक्तिषु
**प्र2: संदर्भ अनुवाद (Translate with grammatical analysis)**
अनुच्छेद: "राजः नगरे निवसति। तस्य पुत्रः विद्यालये शिक्षा प्राप्नोति।"
प्रश्न: (i) राजः किस विभक्ति में है? (ii) तस्य का रूप-विश्लेषण कीजिए। (iii) विद्यालये किस विभक्ति में है?
**उत्तर:** (i) राजः प्रथमा विभक्ति (nominative) में है क्योंकि यह कर्ता है। (ii) तस्य षष्ठी विभक्ति (genitive) एकवचन रूप है, जो स्वामित्व/सम्बन्ध दर्शाता है ("उसका")। (iii) विद्यालये सप्तमी विभक्ति (locative) में है, जो स्थान दर्शाता है ("विद्यालय में")।
**प्र3: नियम-आधारित सूक्ष्म प्रश्न (Rule-based fine distinction)**
प्रश्न: "बालकेन" और "बालकात्" में अंतर स्पष्ट कीजिए। दोनों का प्रयोग उदाहरण सहित समझाइए।
**उत्तर:** बालकेन तृतीया विभक्ति (instrumental) है, जो साधन/माध्यम दर्शाती है। उदाहरण: "बालकेन लिखित: पत्रम्" (बालक द्वारा पत्र लिखा गया)। बालकात् पञ्चमी विभक्ति (ablative) है, जो अलगाव/उत्पत्ति दर्शाती है। उदाहरण: "बालकात् पत्र प्राप्त:" (बालक से पत्र प्राप्त किया)। तृतीया = माध्यम; पञ्चमी = स्रोत/अलगाव।
5-अंक की प्रैक्टिस पूरी 7-विभक्ति व्यवस्था को दृढ़ करती है। परीक्षा की तैयारी के दौरान प्रति सप्ताह 2–3 ऐसी पूरी तालिका-प्रैक्टिस की योजना बनाएँ।
नए 2026–27 CBSE प्रारूप में पैटर्न-बदलाव
हाल के रुझानों का विश्लेषण कई सूक्ष्म किंतु महत्वपूर्ण बदलाव सुझाता है कि अध्याय 3 की विषय-वस्तु की परीक्षा कैसे ली जाएगी:
**1. द्विवचन रूपों की ओर झुकाव:** ऐतिहासिक रूप से, परीक्षाएँ एकवचन और बहुवचन पर केंद्रित थीं। हाल के पिछले साल के प्रश्न तेजी से द्विवचन (dual forms) को परखने लगे हैं — नरौ, देवे, बालकाव, आदि। 2026–27 के प्रारूप में अलग से द्विवचन को परखने वाला कम से कम एक 1-अंक या 3-अंक का प्रश्न आने की अपेक्षा है।
**2. कम 'तालिका भरिए', अधिक 'संदर्भ में प्रयोग करिए':** पुराने पेपर (2020–2022) मुख्य रूप से खाली विभक्ति-तालिकाओं पर निर्भर थे। वर्तमान रुझान (2023–2025) छोटे जुड़े पाठों को पसंद करते हैं जहाँ छात्र रूपों की पहचान करें, उनकी विभक्ति समझाएँ और व्याकरण की दृष्टि से चुनाव को सही ठहराएँ। 2026–27 तक 3–5 अंक के प्रश्नों में से 60% तालिका-आधारित के बजाय पाठ-आधारित होने की अपेक्षा है।
**3. अनियमित संज्ञा-व्यवहारों पर अधिक ध्यान:** मानक अकारान्त रूप (देव, राज, बालक) अच्छी तरह दोहराए जा चुके हैं। परीक्षक अब सीमांत स्थितियों को परखते हैं: व्यंजन-समूह वाली संज्ञाएँ (प्रज्ञा > प्रज्ञायाः), अर्ध-स्वर (राज् > राज्ञः), और नाक-स्वर वाले तने (पञ्चन्, षड्, द्वादश)। ये 1–2 अंक के खंडों में आते हैं।
**4. संधि और समास के साथ एकीकरण:** 2026–27 की पाठ्यक्रम पुनर्गठन अध्यायों के बीच संश्लेषण की ओर संकेत करता है। अध्याय 3 (संज्ञा-विभक्ति) को अध्याय 2 (संधि नियम) के साथ जोड़ने वाले 3–5 अंक का प्रश्न आने की अपेक्षा करें। उदाहरण के लिए: "राज्य शब्द (राज + य के संधि से बना) को सभी विभक्तियों में विभक्त कीजिए।"
**5. षष्ठी (genitive) और सप्तमी (locative) पर अधिक जोर:** ये दो विभक्तियाँ — संस्कृत गद्य के लिए महत्वपूर्ण किंतु अक्सर कम परीक्षित — अब 2–3 अंक के प्रश्नों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
2026–27 के लिए तैयारी करने वाले छात्रों को विशेष रूप से द्विवचन रूप, पाठ-आधारित प्रयोग, और षष्ठी/सप्तमी पर ध्यान देना चाहिए।
परीक्षा के दिन के लिए तेजी से रणनीति (Quick Attempt-Strategy for Exam Day)
जब अध्याय 3 के सवाल आपकी परीक्षा में आएँ, तो इस 4-चरणीय छँटाई का पालन करें:
**चरण 1: सवाल के प्रकार को पहचानें (15 सेकंड)**
- "[संज्ञा] का [विभक्ति] में रूप लिखें" → 1 अंक की सीधी याद। तुरंत उत्तर दें।
- "तालिका भरें" → 3 अंक की संरचित याद। पहले पूरी तालिका पढ़ें ताकि एकवचन/द्विवचन/बहुवचन के पैटर्न दिख जाएँ।
- "विभक्ति को समझाएँ" → 3 अंक का नियम-आधारित। विभक्ति का नाम, उसका काम, और 1 उदाहरण बताएँ।
- "पाठ में पहचान" → 5 अंक का विश्लेषण। हर संज्ञा-रूप को रेखांकित करें, इसकी विभक्ति लिखें, 1 पंक्ति में जायज ठहराएँ।
**चरण 2: गति पर सटीकता को प्राथमिकता दें**
सही-सही स्पेल किया गया, सही-सही रूपांतरित रूप पूरे अंक पाता है। जल्दबाजी में लिखा गया अनुमान शून्य पाता है। 1 अंक की याद के लिए धीरे लिखें। 3–5 अंक की तालिकाओं के लिए, पहले हल्के से पेंसिल से स्केच करें, फिर अंतिम उत्तर को स्याही से लिखें।
**चरण 3: द्विवचन आपकी सुरक्षा जाल है**
यदि किसी अपरिचित संज्ञा का बहुवचन रूप भूल जाएँ, तो इसके बजाय द्विवचन रूप का प्रयास करें (यह अक्सर अधिक नियमित होता है: -औ/-े/-ा पैटर्न)। परीक्षक को आंशिक अंक देते हैं यदि आप विभक्ति-प्रणाली की समझ दिखाते हैं, भले ही आप संख्या का अनुमान लगाएँ।
**चरण 4: उत्तर-स्थान को रणनीतिक रूप से उपयोग करें**
- 1 अंक के लिए: बस रूप + विभक्ति का नाम लिखें (उदा., "देवाय (चतुर्थी)")।
- 3 अंक के लिए: शीर्षकों के साथ पूरी तालिका लिखें, या यदि तालिका-प्रारूप स्पष्ट न हो तो 3 अलग-अलग युग्म।
- 5 अंक के लिए: पाठ में संज्ञाओं को रेखांकित करें, नीचे एक छोटी-सी तालिका लिखें, फिर 2–3 पंक्तियों का व्याकरणीय जायज ठहराना लिखें।
यह रणनीति कम-मूल्य की याद पर बहुत समय बिताने से रोकती है और संश्लेषण सवालों के लिए ऊर्जा बचाती है। परीक्षा से पहले समयबद्ध परिस्थितियों में 5 पिछली परीक्षाओं पर इसका अभ्यास करें।
लक्षित दैनिक अभ्यास से अपने कौशल को तेज करें
इस व्याकरण अध्याय के लिए नियमितता जल्दबाजी को हराती है। एक 20-मिनट की दैनिक दिनचर्या 3-घंटे के सप्ताहांत धक्का से बेहतर परिणाम देगी:
**सप्ताह 1–2: मूल रूप (एकवचन)**
दिन 1–2: 10 संज्ञाओं की प्रथमा (nominative) → हर एक को 10 बार लिखें।
दिन 3–4: द्वितीया + तृतीया (accusative + instrumental) → 5-रूप की छोटी तालिकाएँ भरें।
दिन 5–6: चतुर्थी + पञ्चमी (dative + ablative) → हर रूप को एक वाक्य के साथ जोड़ें।
दिन 7: सभी 5 विभक्तियों पर मिश्रित 1 अंक की क्विज।
**सप्ताह 3–4: द्विवचन और बहुवचन, फिर नियम**
दिन 1–2: सभी 7 विभक्तियों में 8 संज्ञाओं का द्विवचन।
दिन 3–4: बहुवचन पूरी तालिकाएँ।
दिन 5–6: 3 असली PYQ का परीक्षण (3 अंक स्तर)।
दिन 7: व्याकरणीय व्याख्या — लिखें कि हर विभक्ति क्यों उपयोग की जाती है (कर्ता → प्रथमा, आदि)।
**सप्ताह 5: संश्लेषण और परीक्षा-शैली के सवाल**
दिन 1–3: 12-मिनट की समय सीमा के तहत प्रतिदिन 2 प्रामाणिक 5 अंक की PYQ को हल करें।
दिन 4–5: पाठ-आधारित अनुप्रयोग (छोटे वाक्यों का अनुवाद करें, विभक्तियाँ पहचानें)।
दिन 6–7: 3 मिश्रित-कठिनाई वाले सवालों के साथ एक मॉक 45-मिनट का परीक्षा लें।
यह सर्पिल संरचना (याद → अनुप्रयोग → संश्लेषण) दर्शाती है कि CBSE ज्ञान का मूल्यांकन कैसे करता है। cbsetutor.ai पर 3-दिन की मुफ्त परीक्षा शुरू करें ताकि समयबद्ध ड्रिल, स्वचालित-सुधारी गई तालिकाओं, और आपके रूप-लेखन पर एक-पर-एक प्रतिक्रिया का उपयोग कर सकें।