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कक्षा 9 हिंदी वसंत अध्याय 9: कबीर की साखियाँ — संपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न क्विज़ और उत्तर कुंजी

कबीर की साखियाँ (Kabir's Couplets) कक्षा 9 हिंदी वसंत का दार्शनिक आधार हैं। यह अध्याय नीति काव्य (ethical poetry) को कबीर के भक्ति, सामाजिक असमानता और आध्यात्मिक सत्य के कालजयी ज्ञान के माध्यम से सिखाता है। CBSE हिंदी की त्रैमासिक परीक्षाओं में बहुविकल्पीय प्रश्न अब 40% हैं, इसलिए अभ्यास जरूरी है। इस गाइड में NCERT 2024-25 पाठ्यक्रम के अनुसार 30 सावधानीपूर्वक तैयार किए गए बहुविकल्पीय प्रश्न हैं — आसान, मध्यम और कठिन स्तर पर। प्रत्येक प्रश्न में सही उत्तर, एक पंक्ति का कारण और विकल्प विश्लेषण है। चाहे आप 95+ अंक लक्ष्य कर रहे हों या साखी का अर्थ और कबीर की विचारधारा पर स्पष्टता चाहते हों, यह क्विज़ आपको बोर्ड परीक्षा और स्कूल मूल्यांकन के लिए तैयार करेगा। cbsetutor.ai पर 3 दिन की निःशुल्क परीक्षा शुरू करें और हर प्रश्न के लिए वीडियो व्याख्या अनलॉक करें।

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MCQs नए CBSE पैटर्न में हिंदी साहित्य पर क्यों हावी हैं

2024-25 की CBSE कक्षा 9 हिंदी पाठ्यक्रम उच्च-स्तरीय सोच पर जोर देती है, जिसे MCQs शानदार ढंग से परखते हैं। निबंध प्रश्नों के विपरीत, MCQs आपको ये करने के लिए बाध्य करते हैं: 1. **सही अर्थ की पहचान करना** — कबीर की साखियाँ अक्सर अलंकार (metaphor) और प्रतीक (symbols) का प्रयोग करती हैं। एक MCQ आपको कबीर के शाब्दिक बनाम आध्यात्मिक अर्थ को अलग करने के लिए मजबूर करता है। 2. **काव्य विशेषताएँ पहचानना** — दोहा छंद, अनुप्रास, और अलंकार को पहचानना MCQ-अनुकूल है और बोर्ड पेपर का 30% है। 3. **नीति काव्य के सिद्धांत लागू करना** — MCQs परखते हैं कि क्या आप कबीर के सामाजिक विचार (जाति, रीति-रिवाज और पाखंड की आलोचना) को समझते हैं। 4. **भ्रामक विकल्प से बचना** — CBSE ऐतिहासिक रूप से सटीक किंतु संदर्भ में गलत उत्तर देता है, गहरी पढ़ाई को परखने के लिए। अध्याय 9 कबीर की साखियाँ विशेष रूप से NCERT पाठ्यपुस्तक में तीन साखियाँ शामिल करती है: - साखी 1: शून्य को पाना (आध्यात्मिक शून्यता) - साखी 2: माया की नकारात्मकता (आसक्ति की आलोचना) - साखी 3: सामाजिक समानता (सभी के लिए समानता) हर एक यूनिट टेस्ट पर 2–5 अंक लाती है। MCQ ड्रिल लापरवाही की त्रुटियों से बचाते हैं और अर्थों को स्थायी रूप से संग्रहित करते हैं।

10 आसान MCQs: अपनी बुनियाद परखें (स्तर 1–2)

**Q1.** कबीर किस काव्य परंपरा के कवि हैं? (A) आदिकालीन काव्य (B) भक्ति काव्य (C) रीतिकालीन काव्य (D) आधुनिक काव्य **✓ सही उत्तर: (B) भक्ति काव्य** कारण: कबीर 15वीं सदी के निर्गुण भक्ति कवि हैं, जो ईश्वर से प्रेम व भक्ति पर जोर देते हैं। --- **Q2.** साखी शब्द का अर्थ है: (A) गीत (B) साक्षी या गवाही (C) कहानी (D) नाटक **✓ सही उत्तर: (B) साक्षी या गवाही** कारण: साखी संस्कृत शब्द साक्षी से आया है, जिसका मतलब गवाही या प्रत्यक्ष अनुभव है। --- **Q3.** कबीर की साखियाँ किस छंद में लिखी गई हैं? (A) चौपाई (B) दोहा (C) सोरठा (D) कवित्त **✓ सही उत्तर: (B) दोहा** कारण: दोहा 24 मात्रा का छंद है (13–11 मात्रा की दो पंक्तियाँ), जो साखियों का मुख्य रूप है। --- **Q4.** पहली साखी में कबीर किस के माध्यम से ईश्वर की व्याख्या करते हैं? (A) शून्य (B) प्रेम (C) ज्ञान (D) भय **✓ सही उत्तर: (A) शून्य** कारण: 'निरंजन शून्य महल' में कबीर शून्य को परब्रह्म का प्रतीक मानते हैं, जहाँ कोई विकार नहीं है। --- **Q5.** 'माया' शब्द कबीर की साखियों में क्या दर्शाता है? (A) धन–सम्पत्ति (B) संसार की नश्वरता और मोह (C) नारी (D) प्रकृति **✓ सही उत्तर: (B) संसार की नश्वरता और मोह** कारण: कबीर माया को सांसारिक आसक्ति और भ्रम का प्रतीक मानते हैं, जो आत्मा को बाँधती है। --- **Q6.** कबीर किस समाज सुधार का प्रचार करते हैं? (A) जातिगत भेदभाव (B) धार्मिक रूढ़िवाद (C) दोनों (A) और (B) (D) कोई नहीं **✓ सही उत्तर: (C) दोनों (A) और (B)** कारण: तीसरी साखी में कबीर जाति–पाँति और पूजा–पाठ दोनों की निंदा करते हैं, समानता का संदेश देते हैं। --- **Q7.** 'निर्गुण भक्ति' में क्या होती है? (A) ईश्वर की मूर्ति की पूजा (B) ईश्वर को निराकार मानना (C) ईश्वर को साकार मानना (D) संत की पूजा **✓ सही उत्तर: (B) ईश्वर को निराकार मानना** कारण: कबीर निर्गुण ब्रह्म में विश्वास करते हैं—बिना गुण, रूप, नाम के परम सत्य। --- **Q8.** साखियों में कबीर का मुख्य उद्देश्य क्या है? (A) मनोरंजन (B) आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक सुधार (C) राजनीतिक विचार (D) ऐतिहासिक घटनाएँ **✓ सही उत्तर: (B) आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक सुधार** कारण: साखियाँ सत्संग के माध्यम से श्रोताओं को ईश्वर-प्राप्ति और समानता का संदेश देती हैं। --- **Q9.** कबीर साखियों में किस रूप में नहीं आते हैं? (A) आध्यात्मिक गुरु (B) समाज सुधारक (C) कवि (D) राजनेता **✓ सही उत्तर: (D) राजनेता** कारण: कबीर एक आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक थे, कवि थे, लेकिन राजनीतिक शक्ति के लिए नहीं लड़े। --- **Q10.** साखी 3 में कबीर किस बात पर जोर देते हैं? (A) अमीरी और गरीबी (B) शिक्षा का महत्व (C) जाति के भेद को मिटाना (D) मूर्ति–पूजा का महत्व **✓ सही उत्तर: (C) जाति के भेद को मिटाना** कारण: 'न को ब्राह्मण न शूद्र' जैसी पंक्तियों में कबीर सामाजिक समानता का संदेश देते हैं।

10 मध्यम स्तर के MCQs: अपनी समझ गहरी करें (स्तर 3–4)

**Q11.** 'निरंजन शून्य महल' पंक्ति में 'निरंजन' का आशय है: (A) गुणों से रहित (B) विकारों से मुक्त परमात्मा (C) खाली घर (D) निर्धन व्यक्ति **✓ सही उत्तर: (B) विकारों से मुक्त परमात्मा** कारण: निर्+अंजन = बिना मैल के। कबीर परमात्मा को निर्विकार और शुद्ध मानते हैं। --- **Q12.** साखियों में 'माया की जाल' किसके लिए बिछाई गई है? (A) केवल स्त्रियों के लिए (B) सभी जीवों को भटकाने के लिए (C) सिर्फ गरीबों के लिए (D) ब्राह्मणों के लिए **✓ सही उत्तर: (B) सभी जीवों को भटकाने के लिए** कारण: कबीर मानते हैं माया सर्वव्यापी मोह है, जो सभी मनुष्यों को आत्म-ज्ञान से दूर रखती है। --- **Q13.** कबीर की साखियों में प्रयुक्त 'दोहे' छंद की विशेषता है: (A) समान मात्रा की चारों पंक्तियाँ (B) पहली–दूसरी पंक्ति में 13–11 मात्रा (C) समानांत प्रणाली (D) केवल भावनात्मक भाषा **✓ सही उत्तर: (B) पहली–दूसरी पंक्ति में 13–11 मात्रा** कारण: दोहा छंद में विषम पद 13 मात्रा (तुक) और सम पद 11 मात्रा (तुक) में विभक्त होते हैं। --- **Q14.** 'जहाँ ब्राह्मण तहाँ देव नहीं' से कबीर का तात्पर्य है: (A) ब्राह्मणों में देवता नहीं होते (B) जाति के आधार पर देवत्व नहीं होता (C) मंदिरों में ईश्वर नहीं होता (D) पूजा अनावश्यक है **✓ सही उत्तर: (B) जाति के आधार पर देवत्व नहीं होता** कारण: कबीर जाति-प्रथा की समीक्षा करते हुए कहते हैं कि ईश्वर सभी में समान रूप से विद्यमान है। --- **Q15.** साखियों में कबीर ने 'ज्ञान की ज्योति' का प्रतीक क्यों माना? (A) तार्किक ज्ञान के लिए (B) आत्म-सचेतना और मोक्ष के लिए (C) वैज्ञानिक शिक्षा के लिए (D) राजनीतिक समझ के लिए **✓ सही उत्तर: (B) आत्म-सचेतना और मोक्ष के लिए** कारण: ज्योति=चेतना। कबीर आंतरिक प्रकाश (आत्म-ज्ञान) को ईश्वर-मिलन का मार्ग मानते हैं। --- **Q16.** तीसरी साखी में कबीर किन दो सामाजिक बुराइयों की निंदा करते हैं? (A) पढ़ाई और अनपढ़ापन (B) जाति-पाँति और बाहरी पूजा-पाठ (C) धन और दरिद्रता (D) सत्ता और विद्रोह **✓ सही उत्तर: (B) जाति-पाँति और बाहरी पूजा-पाठ** कारण: 'न को ब्राह्मण न को शूद्र / पूजहु अपने राम' में कबीर दोनों को चुनौती देते हैं। --- **Q17.** 'निरंजन' और 'निर्गुण' के बीच अर्थ का अंतर है: (A) कोई अंतर नहीं (B) निरंजन = विकार-रहित; निर्गुण = गुण-रहित (C) निरंजन = साकार; निर्गुण = निराकार (D) निरंजन = सृष्टि; निर्गुण = विनाश **✓ सही उत्तर: (B) निरंजन = विकार-रहित; निर्गुण = गुण-रहित** कारण: दोनों ब्रह्म के विभिन्न गुणों को दर्शाते हैं और कबीर की दोनों ही अवधारणाएँ पूरक हैं। --- **Q18.** साखियों में कबीर की भाषा शैली की विशेषता है: (A) संस्कृत-बहुल (B) अरबी-फारसी मिश्रित सरल भाषा (C) अत्यंत कठिन और दार्शनिक (D) केवल हिंदी व्याकरण **✓ सही उत्तर: (B) अरबी-फारसी मिश्रित सरल भाषा** कारण: कबीर आम जनता से संवाद के लिए सरल, लोकभाषा प्रयोग करते हैं, जो आज भी सुगम है। --- **Q19.** 'माया वश्या सब कोय' में 'माया वश्या' का अलंकार है: (A) उपमा (B) रूपक (C) अनुप्रास (D) विरोधाभास **✓ सही उत्तर: (C) अनुप्रास** कारण: 'माया' शब्द की आवृत्ति (M की ध्वनि) अनुप्रास अलंकार का उदाहरण है। --- **Q20.** कबीर की साखियों का मुख्य दर्शन किस पर आधारित है? (A) द्वैतवाद (दो सत्ताएँ) (B) अद्वैतवाद (एक ही सत्ता) (C) बहुदेववाद (D) नास्तिकता **✓ सही उत्तर: (B) अद्वैतवाद (एक ही सत्ता)** कारण: कबीर सभी भेद-भाव को भ्रम मानते हैं और केवल एक निर्गुण ब्रह्म को सत्य मानते हैं।

10 कठिन/कथन-कारण MCQs: बारीकियों में महारत हासिल करें (स्तर 5–6)

**Q21.** कथन (A): कबीर की साखियों में सामाजिक समानता का संदेश है। कारण (R): कबीर जन्म के आधार पर किसी को श्रेष्ठ या निम्न नहीं मानते। (A) A सत्य है, R असत्य है (B) A असत्य है, R सत्य है (C) A और R दोनों सत्य हैं, R, A की सही व्याख्या है (D) A और R दोनों सत्य हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है **✓ सही उत्तर: (C)** कारण: दोनों सत्य हैं; कबीर समानता का संदेश देते हैं क्योंकि वे जाति-प्रथा को स्वीकार नहीं करते। --- **Q22.** कथन (A): कबीर की साखियाँ दोहा छंद में नहीं हैं। कारण (R): साखी एक स्वतंत्र काव्य रूप है जो किसी भी छंद में लिखी जा सकती है। (A) A सत्य है, R असत्य है (B) A असत्य है, R सत्य है (C) A और R दोनों सत्य हैं, R, A की सही व्याख्या है (D) A और R दोनों असत्य हैं **✓ सही उत्तर: (B)** कारण: कबीर की साखियाँ दोहा छंद में हैं, इसलिए A असत्य है। R आंशिक सत्य है। --- **Q23.** कथन (A): 'निरंजन शून्य महल' में परमात्मा को महल कहा गया है। कारण (R): यह रूपक अलंकार है, जहाँ महल = ब्रह्म का निवास। (A) A सत्य है, R असत्य है (B) A असत्य है, R सत्य है (C) A और R दोनों सत्य हैं, R, A की सही व्याख्या है (D) A और R दोनों सत्य हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है **✓ सही उत्तर: (C)** कारण: दोनों सत्य हैं; महल परमात्मा (निर्गुण) की मनोवैज्ञानिक अभिव्यक्ति है, रूपक में। --- **Q24.** कथन (A): कबीर की साखियों में बाहरी पूजा-पाठ को महत्व दिया गया है। कारण (R): कबीर अंतरात्मा की शुद्धता और भक्ति को ईश्वर-प्राप्ति का मार्ग मानते हैं। (A) A सत्य है, R असत्य है (B) A असत्य है, R सत्य है (C) A और R दोनों सत्य हैं, R, A की सही व्याख्या है (D) A और R दोनों असत्य हैं **✓ सही उत्तर: (B)** कारण: A असत्य है (कबीर बाहरी पूजा की निंदा करते हैं); R सत्य है (अंतरात्मा में विश्वास)। --- **Q25.** कथन (A): माया केवल सांसारिक धन का प्रतीक है। कारण (R): कबीर माया को सभी प्रकार की आसक्ति और भ्रम के रूप में परिभाषित करते हैं। (A) A सत्य है, R असत्य है (B) A असत्य है, R सत्य है (C) A और R दोनों सत्य हैं, R, A की सही व्याख्या है (D) A और R दोनों सत्य हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है **✓ सही उत्तर: (B)** कारण: A आंशिक और संकीर्ण है; R सर्वांगीण सत्य है (माया व्यापक है)। --- **Q26.** कथन (A): कबीर की साखियाँ निर्गुण भक्ति परंपरा का विरोध करती हैं। कारण (R): कबीर ईश्वर को साकार और मूर्ति-रूप में पूजते हैं। (A) A सत्य है, R असत्य है (B) A असत्य है, R असत्य है (C) A असत्य है, R असत्य है (फिर से) (D) A और R दोनों सत्य हैं **✓ सही उत्तर: (B)** कारण: दोनों असत्य हैं; कबीर निर्गुण भक्ति को अपनाते हैं और साकार पूजा को नकारते हैं। --- **Q27.** कथन (A): 'न को ब्राह्मण न को शूद्र' पंक्ति में कबीर जाति-व्यवस्था को चुनौती देते हैं। कारण (R): कबीर समानता का संदेश देते हुए धार्मिक कर्मकाँड की निंदा करते हैं। (A) A सत्य है, R असत्य है (B) A असत्य है, R सत्य है (C) A और R दोनों सत्य हैं, किंतु R, A की पूर्ण व्याख्या नहीं है (D) A और R दोनों सत्य हैं, R, A की पूर्ण व्याख्या है **✓ सही उत्तर: (D)** कारण: दोनों सत्य हैं; R A को पूरी तरह व्याख्यायित करता है (जाति + कर्मकाँड दोनों)। --- **Q28.** कथन (A): साखियों में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग नहीं है। कारण (R): दोहा छंद में केवल उपमा और रूपक अलंकार आते हैं। (A) A सत्य है, R असत्य है (B) A असत्य है, R असत्य है (C) A असत्य है, R सत्य है (D) A और R दोनों सत्य हैं **✓ सही उत्तर: (B)** कारण: दोनों असत्य हैं; साखियों में अनुप्रास प्रयुक्त है, और दोहा सभी अलंकार स्वीकार करता है। --- **Q29.** कथन (A): कबीर की साखियों में विरोधाभास (paradox) का प्रयोग किया गया है। कारण (R): 'शून्य महल' जैसी अभिव्यक्तियाँ आध्यात्मिक सत्य को संवेदनशील भाषा में व्यक्त करती हैं। (A) A सत्य है, R असत्य है (B) A असत्य है, R सत्य है (C) A और R दोनों सत्य हैं, R, A की सही व्याख्या है

बोर्ड परीक्षा के लिए MCQ समय प्रबंधन रणनीति

**हिंदी MCQs के लिए समय बजट (40 मिनट का सत्र, 20 MCQs = 20 अंक):** **चरण 1: आसान MCQs (2 मिनट = 8 प्रश्न)** - प्रश्न + विकल्प एक बार पढ़ें - तुरंत पहचान (immediate recognition) - 30 सेकंड/प्रश्न - उदाहरण: Q1, Q2, Q3, Q10 पहली बार पढ़ने से स्पष्ट होने चाहिए **चरण 2: मध्यम MCQs (10 मिनट = 8 प्रश्न)** - दो बार पढ़ें (पहला, समझने के लिए; दूसरा, विकल्प को नकारने के लिए) - एक-एक गलत विकल्प को काटें - 75 सेकंड/प्रश्न - ध्यान दें: 'निर्गुण', 'माया', 'दोहा' जैसे महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषा **चरण 3: कठिन/कथन-कारण (12 मिनट = 4 प्रश्न)** - पहले कथन पढ़ें, फिर कारण - प्रश्न यह पूछें: क्या कारण कथन की व्याख्या करता है? - कथन-कारण के 4 प्रकार याद रखें (नीचे चार्ट) - 3 मिनट/प्रश्न = गहन तर्क के लिए पर्याप्त **कथन-कारण हल करने का फॉर्मूला:** 1. क्या कथन सत्य है? (साखी के संदर्भ में) 2. क्या कारण सत्य है? (तर्क/परिभाषा के अनुसार) 3. क्या कारण → कथन? (क्या कारण सीधे कथन को समर्थित करता है?) **उदाहरण:** Q22: कथन = 'साखियाँ दोहा छंद में नहीं' | कथन = गलत कारण = 'साखी स्वतंत्र रूप है' | कारण = आंशिक सत्य → विकल्प (B): कथन असत्य है, कारण असत्य है। **बोर्ड परीक्षा में बचने के तरीके:** ✓ पहले 2 मिनट कठिन प्रश्नों को चिह्नित करें; आखिर में करें ✓ अनुमान लगाना कम करें: गलत जवाब = 0 अंक (कोई नकारात्मक अंकन नहीं, किंतु समय की बर्बादी) ✓ पिछले 3 मिनट: गलत जवाब को एक बार फिर देखें ✓ OMR sheet ध्यान से भरें (60% गलतियाँ गलत भरने से आती हैं) **गति बढ़ाने का अभ्यास:** - हर दिन 5 MCQs करें (समय निर्धारित करके) - दूसरे दिन उन्हीं 5 को फिर करें (समय आधा होना चाहिए) - 10 दिन बाद आप 20 MCQs को 30–35 मिनट में पूरा कर सकेंगे CBSETUTOR.ai पर 'Hindi MCQ Timer' उपकरण का उपयोग करें, जो आपको वास्तविक परीक्षा जैसी स्थितियों में प्रशिक्षण देगा।

मुख्य बातें: अपनी अगली परीक्षा में कबीर की साखियों में महारत हासिल करें

**याद रखने योग्य 5 मुख्य बिंदु:** 1. **साखी = गवाही** (साक्षी से), कबीर का सीधा अनुभव और संदेश 2. **दोहा छंद** = 13–11 मात्रा (विषम–सम), कबीर की साखियों का मूल रूप 3. **निर्गुण भक्ति** = निराकार, अमूर्त परमात्मा; कोई मूर्ति–पूजा नहीं 4. **सामाजिक समानता** = जाति, धर्म, रीति-रिवाज सभी को अस्वीकार करना (तीसरी साखी) 5. **माया** = केवल धन नहीं, बल्कि **सभी आसक्ति** (धन, परिवार, सत्ता, अहंकार) **MCQ में सफल होने के 3 सूत्र:** - पहली पाठ में साखियों का अनुवाद पढ़ें (न कि कविता) - कबीर के **विचार** को समझें, शब्द याद न करें - गलत विकल्प को 'क्यों गलत है' सोचें, न कि 'क्यों सही नहीं' **अगली तैयारी:** यदि आप 24/30 MCQs सही कर रहे हैं (80%+), तो आप निम्नलिखित के लिए तैयार हैं: - **दीर्घ उत्तरीय प्रश्न** (साखियों का विश्लेषण) - **साहित्यिक तुलना** (कबीर बनाम अन्य भक्त कवि) - **बोर्ड परीक्षा** (पूर्ण आत्मविश्वास के साथ) यदि 18–23 हैं (60–75%), तो **कथन-कारण और 'महत्वपूर्ण शब्द' अनुभाग** पर ध्यान दें।

Frequently asked questions

कबीर की साखियों में कितने प्रमुख विषय (themes) हैं?+
तीन प्रमुख विषय हैं: (1) निर्गुण भक्ति—परमात्मा का निराकार स्वरूप; (2) सामाजिक समानता—जाति-प्रथा की आलोचना; (3) आध्यात्मिक सचेतना—माया से मुक्ति। NCERT साखी 1, 2, 3 इन्हीं तीनों को कवर करते हैं।
साखी vs. दोहा में क्या अंतर है?+
दोहा एक **छंद** (काव्य मीटर) है; साखी एक **विषय-वस्तु** (काव्य रूप) है जो दोहा छंद में व्यक्त होती है। कबीर की साखियाँ दोहा में लिखी गई हैं, किंतु सभी दोहे साखियाँ नहीं होते। MCQs में यह अंतर अक्सर पूछा जाता है।
तीसरी साखी ('न को ब्राह्मण न को शूद्र') में कबीर का मुख्य संदेश क्या है?+
यह साखी **जाति-व्यवस्था को पूरी तरह नकारती है** और कहती है कि सभी समान हैं, केवल भक्ति (अपने राम को पूजना) महत्वपूर्ण है। यह कबीर की सामाजिक विप्लव की घोषणा है, जो MCQs में 30-40% प्रश्नों का आधार है।
कबीर की साखियों में कौन सा अलंकार सबसे अधिक है?+
**रूपक** और **अनुप्रास** सबसे प्रचलित हैं। उदाहरण: 'निरंजन शून्य महल' (रूपक—महल = ब्रह्म), 'माया मोहन' (अनुप्रास—M ध्वनि)। Assertion-Reason MCQs में अलंकार पहचान प्रश्न 1-2 आते हैं।
क्या कबीर की साखियों का अर्थ सभी NCERT संस्करणों में एक जैसा है?+
हाँ, NCERT 2024-25 के पाठ को मानक माना जाता है। किंतु **अनुवाद और टिप्पणियाँ** संस्करणों में भिन्न हो सकती हैं। आपके स्कूल की पाठ्यपुस्तक को अधिकृत स्रोत मानें; MCQs उसी से बनते हैं।
MCQ में 'निर्गुण' और 'निराकार' शब्द अलग-अलग अर्थ देते हैं या समान?+
**समान** नहीं, **पूरक** हैं। निर्गुण = गुण-रहित (नैतिक गुणों से परे), निराकार = रूप-रहित (शारीरिक रूप नहीं)। CBSE Assertion-Reason में इनमें अंतर पूछता है; दोनों को अलग करके समझें।
बोर्ड परीक्षा में कबीर की साखियाँ कितने अंक की होती हैं?+
आमतौर पर 8–10 अंक (2–3 MCQ + 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)। किंतु यह आपकी स्कूल की मूल्यांकन नीति पर निर्भर करता है। सभी 30 MCQs का अभ्यास सर्वोत्तम तैयारी है।
क्या कबीर की साखियों का कोई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (context) जानना जरूरी है?+
हाँ। कबीर **15वीं सदी**, **भक्ति आंदोलन** के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने **हिंदू-मुस्लिम एकता** और **जाति-विरोधी** विचार प्रस्तुत किए। यह संदर्भ MCQs के 'कारण' (R) भाग में अक्सर आता है।

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