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Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 3: कल्लू कुम्हार की उनाकोटी — Complete Previous Year Questions with Solutions

अशोक वाजपेयी का यात्रा-वृत्तांत 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' CBSE Class 9 Hindi Sanchayan में एक महत्वपूर्ण पाठ है जो त्रिपुरा के लोकसाहित्य, पुरातात्त्विक महत्व और स्थानीय संस्कृति को उजागर करता है। परीक्षा में इस अध्याय से 1-अंक, 3-अंक और 5-अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं। यह पृष्ठ पिछले 5 वर्षों के परीक्षा पत्रों में बार-बार आने वाले प्रश्नों को संकलित करता है, जिससे आप परीक्षा पैटर्न को समझ सकें और आत्मविश्वास के साथ तैयारी कर सकें। cbsetutor.ai पर हम NCERT-संरेखित, परीक्षा-केंद्रित सामग्री प्रदान करते हैं।

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1. पिछले पेपर्स पढ़ने से अधिक महत्वपूर्ण क्यों हैं?

सिर्फ पाठ को बार-बार पढ़ने से परीक्षा में सफलता नहीं मिलती। CBSE के प्रश्नपत्रों में एक निश्चित पैटर्न होता है — कुछ अवधारणाएँ बार-बार पूछी जाती हैं, जबकि अन्य कभी नहीं। 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' के संदर्भ में, परीक्षार्थियों को पता होना चाहिए कि उनाकोटी की खोज, कल्लू कुम्हार की कहानी, और त्रिपुरा के सांस्कृतिक संदर्भ सबसे अधिक दोहराए जाने वाले विषय हैं। पिछले वर्षों के प्रश्नों का अभ्यास करने से आप: (1) समय-प्रबंधन सीखते हैं, (2) प्रश्नों की भाषा और संरचना समझते हैं, (3) अपनी कमजोरियों को लक्षित करते हैं, और (4) परीक्षा हॉल में आत्मविश्वास प्राप्त करते हैं। परीक्षा के 6-8 हफ्ते पहले से नियमित रूप से पिछले पेपर हल करना आपकी स्मृति को सक्रिय रखता है और संशोधन को प्रभावी बनाता है।

2. सबसे अधिक दोहराए गए 1-अंक प्रश्न (परीक्षा पैटर्न के अनुसार)

CBSE Class 9 Hindi में 1-अंक के प्रश्न आमतौर पर शब्दों का अर्थ, पाठ के मुख्य विचार, और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित होते हैं। 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' में ये प्रश्न सबसे अधिक दोहराए गए हैं: **प्रश्न 1:** उनाकोटी नाम का क्या अर्थ है? **उत्तर:** उनाकोटी का अर्थ है 'सवा करोड़' (12.5 लाख)। स्थानीय किंवदंती के अनुसार, भगवान शिव के अनुयायियों की संख्या सवा करोड़ थी। इसलिए इस स्थान को उनाकोटी कहा जाता है। **प्रश्न 2:** कल्लू कुम्हार कौन था? **उत्तर:** कल्लू कुम्हार एक स्थानीय कलाकार था जिसने उनाकोटी की प्रसिद्ध मूर्तियों और नक्काशियों को बनाया। यह पाठ उसकी कला और समर्पण को दर्शाता है। **प्रश्न 3:** उनाकोटी कहाँ स्थित है? **उत्तर:** उनाकोटी त्रिपुरा राज्य में अवस्थित है। यह अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास माना जाता है और भारत के प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक है। **प्रश्न 4:** अशोक वाजपेयी कौन हैं? **उत्तर:** अशोक वाजपेयी एक प्रसिद्ध लेखक, कवि और साहित्यकार हैं जिन्होंने भारतीय संस्कृति और लोकसाहित्य पर कई यात्रा-वृत्तांत लिखे हैं। **प्रश्न 5:** लोकसाहित्य क्या है? **उत्तर:** लोकसाहित्य किसी क्षेत्र की जनता द्वारा रचित और संरक्षित साहित्य है जो पीढ़ी दर पीढ़ी मुखर परंपरा के माध्यम से चलता है। त्रिपुरा का लोकसाहित्य उसकी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।

3. सबसे अधिक दोहराए गए 3-अंक प्रश्न (विस्तृत उत्तर)

3-अंक के प्रश्न आमतौर पर पाठ के विषय-वस्तु, पात्रों के आचरण, और पाठ के संदेश पर आधारित होते हैं। ये प्रश्न 60-80 शब्दों के उत्तर की माँग करते हैं। **प्रश्न 1:** उनाकोटी की पुरातात्त्विक महत्ता क्या है? अशोक वाजपेयी के अनुसार इसका महत्व समझाइए। **उत्तर:** उनाकोटी भारत की प्राचीन मूर्तिकला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। अशोक वाजपेयी के यात्रा-वृत्तांत में, उनाकोटी को एक ऐसे स्थान के रूप में दर्शाया गया है जहाँ स्थानीय कलाकारों की कला और समर्पण का प्रतिफलन दिखता है। पत्थर पर उकेरी गई मूर्तियाँ और नक्काशियाँ यह बताती हैं कि कैसे आम जनता ने धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को अभिव्यक्त किया। पुरातत्वविदों के लिए यह स्थान भारतीय लोक-संस्कृति और धार्मिक विश्वासों का साक्ष्य प्रदान करता है। **प्रश्न 2:** कल्लू कुम्हार की कहानी यात्रा-वृत्तांत में क्यों महत्वपूर्ण है? पाठ के आधार पर समझाइए। **उत्तर:** कल्लू कुम्हार की कहानी इस यात्रा-वृत्तांत का हृदय है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण कलाकार असाधारण कार्य कर सकता है। अशोक वाजपेयी के लेखन में, कल्लू कुम्हार एक प्रतीक बन जाते हैं — भारतीय जनता की रचनात्मक शक्ति और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक। उनकी कला केवल व्यक्तिगत प्रतिभा नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ियों के लोकज्ञान और धार्मिक भावना का संचय है। इसलिए, कल्लू की कहानी को समझना पाठ के उद्देश्य को समझना है। **प्रश्न 3:** त्रिपुरा का लोकसाहित्य अन्य भारतीय क्षेत्रों से कैसे भिन्न है? **उत्तर:** त्रिपुरा का लोकसाहित्य अपनी स्थानीय धार्मिक मान्यताओं, सांस्कृतिक प्रथाओं और भाषिक विशेषताओं में अद्वितीय है। उनाकोटी जैसे स्थल इसी लोक-धर्मिकता का प्रमाण हैं। अशोक वाजपेयी के यात्रा-वृत्तांत में त्रिपुरा के लोगों की कला, उनकी किंवदंतियाँ और पत्थर पर उकेरी गई मूर्तियाँ उसकी विशिष्ट पहचान बताती हैं। यह भारत के सांस्कृतिक विविधता का एक जीवंत उदाहरण है। **प्रश्न 4:** यात्रा-वृत्तांत विधा क्या है? 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' इसका कैसे उदाहरण है? **उत्तर:** यात्रा-वृत्तांत एक साहित्यिक विधा है जिसमें लेखक अपनी यात्रा के दौरान देखी गई जगहों, लोगों और सांस्कृतिक अनुभवों का विवरण देता है। 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' में अशोक वाजपेयी त्रिपुरा की यात्रा करते हैं और उनाकोटी की प्राचीन मूर्तियों, स्थानीय कलाकारों की परंपरा और क्षेत्र के सांस्कृतिक महत्व का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हैं। यह केवल यात्रा का विवरण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अन्वेषण है। **प्रश्न 5:** किंवदंती (legend) और ऐतिहासिक तथ्य के बीच क्या अंतर है? पाठ के संदर्भ में समझाइए। **उत्तर:** किंवदंती स्थानीय लोगों द्वारा प्रचलित कहानियाँ हैं जो सदियों से चली आ रही हैं, जबकि ऐतिहासिक तथ्य सत्यापित और दस्तावेजित जानकारी होती है। 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' में उनाकोटी के संबंध में 'सवा करोड़ शिव-भक्तों' की कहानी एक किंवदंती है। लेकिन पत्थर पर उकेरी गई मूर्तियाँ और नक्काशियाँ ऐतिहासिक तथ्य हैं जो स्थानीय कलाकलों की प्रमाणिकता को दर्शाती हैं। लेखक दोनों को साथ लाता है ताकि हम क्षेत्र की पूर्ण सांस्कृतिक तस्वीर समझ सकें।

4. सबसे अधिक दोहराए गए 5-अंक प्रश्न (विश्लेषणात्मक उत्तर)

5-अंक के प्रश्न गहन विश्लेषण और पाठ की समग्र समझ की माँग करते हैं। ये प्रश्न 120-150 शब्दों के उत्तर की अपेक्षा करते हैं। **प्रश्न 1:** 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' पाठ के माध्यम से अशोक वाजपेयी किस संदेश को व्यक्त करना चाहते हैं? भारतीय लोक-संस्कृति के संदर्भ में विश्लेषण करें। **उत्तर:** अशोक वाजपेयी का यह यात्रा-वृत्तांत भारतीय लोक-संस्कृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश देता है। उनाकोटी एक भूली-बिसरी धरोहर है जहाँ कल्लू कुम्हार जैसे अनाम कलाकारों ने पीढ़ियों तक अपनी कला और समर्पण से मूर्तियाँ उकेरी हैं। लेखक का मूल संदेश यह है कि भारत की वास्तविक संपत्ति इसके प्राचीन मंदिरों या राजमहलों में नहीं, बल्कि इसकी जनता की रचनात्मक शक्ति में निहित है। कल्लू की कहानी आमजन को प्रेरित करती है कि वे भी महान कार्य कर सकते हैं। साथ ही, पाठ में त्रिपुरा के लोकसाहित्य, किंवदंतियों और पुरातात्त्विक महत्ता का चित्रण करके लेखक संदेश देते हैं कि भारत की विविधता इसकी शक्ति है। प्रत्येक क्षेत्र की अपनी अनूठी संस्कृति है जो राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण अंग है। यह पाठ सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय ज्ञान को मान्यता देने का आह्वान करता है। **प्रश्न 2:** 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' को एक महत्वपूर्ण पुरातात्त्विक स्थल माना जाता है। इस स्थल का महत्व, इसकी खोज की परिस्थितियाँ और सांस्कृतिक संदेश के बारे में विस्तार से लिखिए। **उत्तर:** उनाकोटी त्रिपुरा राज्य में स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुरातात्त्विक स्थल है जो भारतीय मूर्तिकला और धार्मिक परंपराओं का साक्ष्य प्रदान करता है। अशोक वाजपेयी के यात्रा-वृत्तांत में वर्णित है कि यह स्थान स्थानीय लोगों के धार्मिक विश्वासों से जुड़ा है। किंवदंती के अनुसार, भगवान शिव के सवा करोड़ भक्तों की प्रतिमाएँ यहाँ उकेरी गई थीं। इसी विश्वास के कारण इसका नाम 'उनाकोटी' (12.5 लाख) पड़ा। पुरातात्त्विक दृष्टि से, यहाँ की मूर्तियाँ और नक्काशियाँ विभिन्न कालखंडों की हैं, जो यह दर्शाती हैं कि यह स्थल सदियों से पवित्र और कलात्मक महत्व रखता आया है। इन मूर्तियों को बनाने का काम कल्लू कुम्हार जैसे स्थानीय कलाकारों ने किया, जिन्होंने पत्थर पर अपनी कला को अमर कर दिया। उनाकोटी का सांस्कृतिक संदेश यह है कि भारत की लोक-संस्कृति और जनता की रचनात्मकता ही इसकी असली धरोहर है। यह स्थल सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक सहिष्णुता और स्थानीय कलाओं के संरक्षण का प्रतीक है। **प्रश्न 3:** अशोक वाजपेयी ने 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' के माध्यम से भारतीय यात्रा-साहित्य में क्या योगदान दिया है? यात्रा-वृत्तांत की विशेषताओं के साथ समझाइए। **उत्तर:** अशोक वाजपेयी का 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' भारतीय यात्रा-साहित्य में एक महत्वपूर्ण कृति है क्योंकि यह पारंपरिक यात्रा-वृत्तांत की सीमाओं को लाँघता है। सामान्यतः यात्रा-साहित्य में लेखक केवल भौगोलिक विवरण और पर्यटन स्थलों का वर्णन करते हैं, लेकिन वाजपेयी ने इसे सांस्कृतिक और पुरातात्त्विक अन्वेषण में रूपांतरित किया। यह पाठ केवल यात्रा का विवरण नहीं, बल्कि त्रिपुरा के लोकसाहित्य, स्थानीय जनता की कलात्मक परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक विविधता का गहन अध्ययन है। लेखक का अंदाज़ सर्वेक्षणात्मक है — वे केवल तथ्यों को प्रस्तुत नहीं करते, बल्कि उन्हें सार्थक प्रश्नों के साथ जोड़ते हैं। उदाहरण के लिए, कल्लू कुम्हार की कहानी को बताते हुए, वे पूछते हैं कि क्यों आमजन की कला को इतिहास में स्थान नहीं मिलता? यह पद्धति यात्रा-वृत्तांत को दार्शनिक और सामाजिक आलोचना का माध्यम बनाती है। इसके अलावा, वाजपेयी की भाषा-शैली सरल और प्रभावशाली है, जो पाठकों को सीधे उनाकोटी की दुनिया में ले जाती है। उनका योगदान यह है कि उन्होंने हमें सिखाया कि कैसे एक साधारण स्थान का यात्रा-विवरण एक गहरे सांस्कृतिक संदेश में बदल सकता है।

5. CBSE 2026-27 नए परीक्षा पैटर्न में बदलाव और इस अध्याय पर प्रभाव

CBSE ने 2024-25 से अपने परीक्षा पैटर्न में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं जो कक्षा 9 की हिंदी परीक्षा को भी प्रभावित करते हैं। नए पैटर्न में निम्नलिखित बदलाव देखे जा रहे हैं: **(1) बहुविकल्पीय प्रश्नों का बढ़ता प्रभाव:** नए पैटर्न में MCQ (Multiple Choice Questions) और असर्ट-रीज़न आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ी है। 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' के संदर्भ में, आपको अब ऐसे प्रश्नों की तैयारी करनी होगी जो पाठ के विशिष्ट विवरणों पर आधारित हों। उदाहरण के लिए: 'उनाकोटी का नाम किसके आधार पर पड़ा? (a) कल्लू के नाम पर, (b) पत्थर की संख्या पर, (c) भक्तों की संख्या पर, (d) राजा के नाम पर'। **(2) स्रोत-आधारित प्रश्न (Source-based Questions):** नए पैटर्न में पाठ के अंशों को दिखाकर उन पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसका मतलब है कि आपको केवल पूरे पाठ को याद रखना नहीं, बल्कि किसी भी अंश को पढ़कर उस पर विश्लेषण करना होगा। **(3) कौशल-आधारित प्रश्न (Skill-based Questions):** परीक्षा में अब पाठ को समझने, विश्लेषण करने और आलोचनात्मक सोच दिखाने पर अधिक ज़ोर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, 'अशोक वाजपेयी ने कल्लू कुम्हार की कहानी को इस तरीके से क्यों प्रस्तुत किया? इससे वे किस सामाजिक संदेश को व्यक्त करना चाहते हैं?' जैसे प्रश्न आएँगे। **(4) पाठों के बीच तुलनात्मक प्रश्न:** नई व्यवस्था में Sanchayan के विभिन्न पाठों के बीच तुलना करने वाले प्रश्न भी आ सकते हैं। इसलिए, 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' को अन्य Sanchayan पाठों के साथ जोड़कर तैयारी करनी होगी। **(5) शब्दावली और भाषा का महत्व:** नए पैटर्न में शब्दों के संदर्भगत अर्थ (contextual meaning) पर अधिक प्रश्न आते हैं। 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' में ऐसे शब्द हैं जैसे 'यात्रा-वृत्तांत', 'पुरातत्व', 'किंवदंती', 'लोकसाहित्य' आदि। इन्हें केवल परिभाषित करना नहीं, बल्कि पाठ के संदर्भ में उनका महत्व समझना ज़रूरी है। तैयारी की रणनीति: पिछले 5-वर्षों के प्रश्नों को हल करने के अलावा, आपको नई परीक्षा पैटर्न के अनुसार MCQ, स्रोत-आधारित प्रश्न और तुलनात्मक प्रश्नों पर अभ्यास करना चाहिए। एक अच्छी तरीके से संरचित अध्ययन योजना यह सुनिश्चित करेगी कि आप हर प्रकार के प्रश्न के लिए तैयार हों।

6. इस अध्याय को परीक्षा हॉल में हल करने की तेज़ी से सफल रणनीति

परीक्षा हॉल में समय की कमी एक आम समस्या है। 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' अध्याय को प्रभावी तरीके से हल करने के लिए यहाँ एक चरण-दर-चरण रणनीति दी गई है: **(A) प्रश्न को समझें (Read & Understand Strategy):** प्रश्न को तीन बार पढ़ें — पहली बार पूरा समझ में आएँ, दूसरी बार महत्वपूर्ण शब्दों को रेखांकित करें, और तीसरी बार अपने उत्तर की रूपरेखा तैयार करें। उदाहरण के लिए, यदि प्रश्न है 'उनाकोटी की खोज किन परिस्थितियों में हुई?', तो आप तीन महत्वपूर्ण बिंदु खोजेंगे: (1) स्थान, (2) समय, (3) परिस्थितियाँ। **(B) समय का विभाजन:** - **1-अंक प्रश्न:** 1-2 मिनट (25-30 शब्दों में) - **3-अंक प्रश्न:** 4-5 मिनट (60-80 शब्दों में) - **5-अंक प्रश्न:** 8-10 मिनट (120-150 शब्दों में) **(C) उत्तर की संरचना:** **1-अंक प्रश्नों के लिए:** - सीधा और संक्षिप्त उत्तर - उदाहरण: 'उनाकोटी का अर्थ है सवा करोड़ (12.5 लाख)। यह त्रिपुरा राज्य में एक पुरातात्त्विक स्थल है।' **3-अंक प्रश्नों के लिए:** - परिचय + मुख्य बिंदु (2-3) + निष्कर्ष - उदाहरण संरचना: 'पाठ में कल्लू कुम्हार का उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि... [कारण 1]... इसके अलावा, [कारण 2]... इससे हमें यह संदेश मिलता है कि...'। **5-अंक प्रश्नों के लिए:** - परिचय (2-3 वाक्य) → तीन मुख्य विचार → प्रत्येक विचार पर संक्षिप्त व्याख्या → निष्कर्ष - उदाहरण: 'अशोक वाजपेयी का यह यात्रा-वृत्तांत भारतीय लोक-संस्कृति को संरक्षित करने का आह्वान करता है। [विचार 1] कल्लू कुम्हार की कहानी... [विचार 2] उनाकोटी की पुरातात्त्विक महत्ता... [विचार 3] त्रिपुरा के लोकसाहित्य की विविधता... अंत में, यह पाठ सिखाता है कि...' **(D) सामान्य गलतियों से बचें:** - **अनावश्यक विवरण:** परीक्षा में हर बात लिखने से बचें। केवल प्रश्न से संबंधित जानकारी दें। - **अस्पष्ट भाषा:** स्पष्ट और सरल भाषा का उपयोग करें। जटिल वाक्य न लिखें। - **उत्तर से भटकना:** यदि प्रश्न 'कल्लू की कहानी' के बारे में है, तो त्रिपुरा का भूगोल न लिखें। - **पाठ की भाषा को ज़बरदस्ती याद करना:** पाठ के विचारों को अपनी भाषा में लिखें। **(E) महत्वपूर्ण तथ्यों को शीघ्रता से याद रखने की तकनीक (Mnemonics):** उनाकोटी के संदर्भ में महत्वपूर्ण तथ्यों को याद रखने के लिए 'KULLA' निमोनिक का उपयोग करें: - **K** = Kalla (कल्लू कुम्हार) - **U** = Unakoti (उनाकोटी) = 12.5 लाख - **L** = Lok-sahitya (लोकसाहित्य) - **L** = Local artisans (स्थानीय कलाकार) - **A** = Archaeological significance (पुरातात्त्विक महत्व) **(F) अंतिम जाँच (Final Review):** अपने सभी उत्तरों को लिखने के बाद, अगर समय बचा हो तो 2-3 मिनट के लिए अपनी लिखावट, व्याकरण और तार्किकता की जाँच करें। किसी भी स्पष्ट त्रुटि को सुधारें। यदि आप इस रणनीति का पालन करते हैं, तो आप 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' से संबंधित किसी भी प्रश्न को आत्मविश्वास के साथ हल कर सकेंगे। Start a 3-day free trial at cbsetutor.ai to access more structured practice papers and real-time feedback from educators.

Frequently asked questions

क्या 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' एक पूर्ण सच्ची घटना है या काल्पनिक है?+
यह एक यात्रा-वृत्तांत है जिसमें अशोक वाजपेयी त्रिपुरा में उनाकोटी की वास्तविक यात्रा करते हैं। उनाकोटी एक वास्तविक पुरातात्त्विक स्थल है, लेकिन कल्लू कुम्हार की व्यक्तिगत कहानी आंशिक रूप से स्थानीय किंवदंती और ऐतिहासिक रिकॉर्ड का मिश्रण है। लेखक यात्रा के माध्यम से सांस्कृतिक सत्य को उजागर करते हैं।
परीक्षा में 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' से सबसे अधिक कौन से प्रश्न पूछे जाते हैं?+
सबसे अधिक पूछे जाने वाले विषय हैं: (1) उनाकोटी का अर्थ और महत्व, (2) कल्लू कुम्हार की कहानी, (3) त्रिपुरा के लोकसाहित्य की विशेषताएँ, (4) यात्रा-वृत्तांत विधा, और (5) पुरातात्त्विक महत्व। ये विषय पिछले 5 वर्षों में बार-बार दोहराए गए हैं।
यात्रा-वृत्तांत (Travelogue) को परिभाषित करने के लिए परीक्षा में सही उत्तर क्या है?+
यात्रा-वृत्तांत एक साहित्यिक विधा है जिसमें लेखक अपनी यात्रा के अनुभवों, देखी गई जगहों, मिले लोगों और सांस्कृतिक प्रभावों का विस्तृत विवरण देता है। 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' में अशोक वाजपेयी अपनी त्रिपुरा यात्रा के माध्यम से स्थानीय संस्कृति और पुरातत्व का अन्वेषण करते हैं।
अगर परीक्षा में 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' से कोई अपरिचित प्रश्न आए, तो क्या करूँ?+
ऐसी स्थिति में: (1) प्रश्न को धीरे-धीरे 2-3 बार पढ़ें, (2) प्रश्न में उपयोग किए गए शब्दों को पाठ में खोजें, (3) संबंधित विचार को अपनी भाषा में लिखें, (4) यदि बिल्कुल नहीं पता हो तो पाठ के मुख्य विषयों से जुड़ी सामान्य जानकारी दें। प्रश्न को खाली न छोड़ें।
क्या 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' से बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) आते हैं?+
हाँ, CBSE के नए पैटर्न में MCQ की संख्या बढ़ी है। यह अध्याय MCQ के लिए बेहद उपयुक्त है क्योंकि इसमें विशिष्ट तथ्य (उनाकोटी का अर्थ, कल्लू का नाम, त्रिपुरा की स्थिति) आसानी से विकल्प बन सकते हैं। पिछले वर्षों के MCQ को हल करके प्रश्न पैटर्न समझें।
क्या 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' के किसी विशेष अंश या संवाद को याद रखना आवश्यक है?+
पाठ के किसी विशेष अंश को शब्दशः याद रखना आवश्यक नहीं है। लेकिन, पाठ के मुख्य विचार, महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ (उनाकोटी = सवा करोड़) और लेखक के दृष्टिकोण को अच्छी तरह समझें। यह गहन समझ है जो परीक्षा में अच्छे अंक दिलाएगी।
अगर मैं 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' के किसी कठिन प्रश्न के उत्तर को विस्तार से नहीं दे सकता, तो क्या होगा?+
परीक्षा में आप जो जानते हैं उसे स्पष्ट और सुव्यवस्थित तरीके से लिखें। आंशिक उत्तर भी आंशिक अंक दिला सकता है। यदि आप किसी बिंदु को नहीं जानते, तो अगले बिंदु पर जाएँ। हमेशा कुछ न कुछ लिखें, परीक्षा पेपर को खाली न छोड़ें।
नए CBSE पैटर्न में 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' से कैसे प्रश्न आने की संभावना है?+
नए पैटर्न में: (1) स्रोत-आधारित प्रश्न (पाठ का एक अंश दिया जाएगा, फिर उस पर प्रश्न), (2) MCQ और असर्ट-रीज़न, (3) तुलनात्मक प्रश्न (Sanchayan के अन्य पाठों से), और (4) कौशल-आधारित प्रश्न (आलोचनात्मक सोच की माँग) आने की संभावना है। इसलिए नई परीक्षा पद्धति के अनुसार प्रश्नों का अभ्यास करें।

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