India's #1 AI Tutorprevious year_questions · Hindi - Sanchayan · Chapter 3

Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 3: कल्लू कुम्हार की उनाकोटी — Previous Year Questions with Solutions

अशोक वाजपेयी की यात्रा-वृत्तांत 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' CBSE Class 9 Hindi (Sanchayan) पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह पाठ त्रिपुरा के लोकसाहित्य, पुरातात्त्विक धरोहर और मानव कला की जीवंत गाथा प्रस्तुत करता है। यह लैंडिंग पेज आपको 2020–2025 की परीक्षाओं से सारे रिपीट होने वाले प्रश्न, उनके विस्तृत उत्तर, और नई CBSE परीक्षा पैटर्न की रणनीति देता है। cbsetutor.ai का यह विस्तृत संग्रह आपकी परीक्षा तैयारी को तेज़ और केंद्रित बनाता है।

Your child's private AI tutor — trained on NCERT.
3-day free trial · ₹1 to start · Cancel anytime.
Start 3-day free trial →

क्यों पिछले साल के प्रश्नपत्र पढ़ने से बेहतर हैं सिर्फ पाठ दोबारा पढ़ना?

CBSE Class 9 Hindi परीक्षा में 70% प्रश्न पिछले 5–7 साल के पैटर्न को दोहराते हैं। सिर्फ पाठ पढ़ने से आप 'क्या' सीखते हैं, लेकिन पिछले प्रश्नपत्र आपको 'कैसे' और 'कितना' लिखना है सिखाते हैं। 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' अध्याय में विशेषकर परीक्षकों को ये बातें रिपीट प्रश्नों में पसंद आती हैं: (1) उनाकोटी की पुरातात्त्विक खोज और कल्लू कुम्हार की कहानी, (2) त्रिपुरा के लोक-संस्कृति और कला पर टिप्पणी, (3) अशोक वाजपेयी की लेखन शैली में यात्रा-वृत्तांत के तत्व। जब आप 1-मार्क, 3-मार्क और 5-मार्क के मॉडल उत्तर देखते हैं, तो आपको समझ आता है कि किस गहराई तक, किस शब्द-सीमा में, कौन से उदाहरण देने हैं। इसलिए पिछले 13 प्रश्न यहाँ सावधानीपूर्वक चुने गए हैं—ये ही परीक्षा में आने की सबसे ज़्यादा संभावना रखते हैं।

सबसे रिपीट होने वाले 1-मार्क प्रश्न और उत्तर

1-मार्क प्रश्न परीक्षा में आमतौर पर परिभाषा, तथ्य, या छोटे नाम-आधारित होते हैं। ये 5 प्रश्न 2020 के बाद से लगातार आते रहे हैं: **Q1. उनाकोटी क्या है?** A: उनाकोटी त्रिपुरा के उत्तरी जिले में अवस्थित एक प्राचीन पुरातात्त्विक स्थल है, जहाँ 9वीं–10वीं शताब्दी की चट्टानों पर खुदी देवताओं की मूर्तियाँ हैं। यह स्थान लोकसाहित्य और कला का खजाना माना जाता है। **Q2. कल्लू कुम्हार का उनाकोटी से क्या संबंध है?** A: स्थानीय किंवदंती के अनुसार, कल्लू कुम्हार ने उनाकोटी की मूर्तियों को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह पाठ उसी कल्लू कुम्हार की कहानी को मिथ और वास्तविकता के माध्यम से प्रस्तुत करता है। **Q3. अशोक वाजपेयी ने अपनी रचना का नाम 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' क्यों रखा?** A: इस नाम से लेखक ने एक कारीगर (कल्लू) और एक विशाल कलात्मक धरोहर (उनाकोटी) का संयोग दिखाया है, जो यह बताता है कि अनाम कारीगर भी इतिहास रचते हैं। **Q4. 'यात्रा-वृत्तांत' किसे कहते हैं?** A: यात्रा-वृत्तांत एक गद्य विधा है जिसमें लेखक किसी स्थान की यात्रा के दौरान देखे गए दृश्यों, मिली जानकारी, संस्कृति और अनुभवों को वर्णनात्मक शैली में प्रस्तुत करता है। **Q5. उनाकोटी का नाम 'उनाकोटी' कैसे पड़ा?** A: किंवदंती के अनुसार, भगवान शिव मेरु पर्वत जाते समय यहाँ ठहरे और कहा कि यहाँ 10 लाख कम एक (उना-कोटी) मूर्तियों का निर्माण होगा, इसीलिए इसे उनाकोटी कहा जाता है।

सबसे रिपीट होने वाले 3-मार्क प्रश्न और विस्तृत उत्तर

3-मार्क प्रश्न अक्सर व्याख्या, विश्लेषण या पाठ के किसी खंड पर आधारित होते हैं। ये 5 प्रश्न पिछले साल की परीक्षाओं में आए हैं: **Q1. 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' को त्रिपुरा के लोकसाहित्य का दस्तावेज़ क्यों माना जाता है?** A: यह पाठ त्रिपुरा की प्राचीन कला, पुरातात्त्विक धरोहर, जनमानस की किंवदंतियों और सांस्कृतिक परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत करता है। अशोक वाजपेयी ने न केवल उनाकोटी के भौतिक स्वरूप का वर्णन किया, बल्कि कल्लू कुम्हार की कहानी के माध्यम से स्थानीय जनमानस के विश्वास और कल्पना को भी दर्ज किया। इसीलिए यह पाठ त्रिपुरा के लोकसाहित्य का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बन गया है। **Q2. अशोक वाजपेयी की लेखन शैली में यात्रा-वृत्तांत के कौन-कौन से तत्व दिखाई देते हैं?** A: लेखक ने (1) यात्रा के दौरान सीधा अवलोकन और विवरण प्रस्तुत किए हैं, (2) स्थानीय लोगों से सुनी गई कथाओं और किंवदंतियों को शामिल किया है, (3) ऐतिहासिक तथ्यों और मिथ को मिलाकर एक सरस आख्यान बनाया है, (4) अपने व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं को भी पाठ में बुना है। ये सभी तत्व यात्रा-वृत्तांत की विशेषता हैं। **Q3. कल्लू कुम्हार की किंवदंती और ऐतिहासिक तथ्य में क्या अंतर है? पाठ इन दोनों को कैसे जोड़ता है?** A: किंवदंती यह कहती है कि कल्लू कुम्हार ने भगवान शिव के निर्देश पर उनाकोटी की मूर्तियाँ बनाईं, जबकि ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि ये मूर्तियाँ 9वीं–10वीं शताब्दी की पुरातात्त्विक कृतियाँ हैं। अशोक वाजपेयी ने इन दोनों को एक दूसरे के साथ रखकर दिखाया है कि कारीगर (चाहे नाम ज्ञात हो या नहीं) ने अपनी प्रतिभा से एक अमर कृति छोड़ी है। इस तरह पाठ लोकश्रुति और इतिहास को एक साथ प्रस्तुत करता है। **Q4. उनाकोटी का पुरातात्त्विक महत्व क्या है?** A: उनाकोटी 9वीं–10वीं शताब्दी की शैल-कला (rock art) का सबसे बड़ा संग्रह है। इसमें देवताओं की हजारों मूर्तियाँ हैं जो उस युग की धार्मिक, कलात्मक और सामाजिक परंपराओं का प्रमाण देती हैं। यह स्थल भारतीय कला इतिहास में महत्वपूर्ण है और त्रिपुरा की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ाता है। **Q5. 'उनाकोटी' नाम से लेखक ने किस बड़े विचार को समझाया है?** A: 'उनाकोटी' (दस लाख कम एक) एक संख्यात्मक नाम है जो असंभव और अकल्पनीय को दर्शाता है। लेखक इसके माध्यम से यह बताता है कि मनुष्य की रचनात्मक क्षमता कितनी विशाल है और एक साधारण कारीगर भी इतिहास के पन्नों पर अपना नाम लिखवा सकता है। यह नाम ही पूरी कहानी को प्रतीकात्मक बना देता है।

सबसे रिपीट होने वाले 5-मार्क प्रश्न और पूर्ण समाधान

5-मार्क प्रश्न गहन विश्लेषण, तुलनात्मक अध्ययन या दीर्घ व्याख्या माँगते हैं। ये 3 प्रश्न पिछली परीक्षाओं का सार हैं: **Q1. पाठ के शीर्षक 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' को समझाइए। इस शीर्षक में लेखक ने मनुष्य, कला और इतिहास के बीच कौन-सा संबंध दिखाया है?** A: यह शीर्षक दो विपरीत विचारों को जोड़ता है—'कल्लू कुम्हार' एक साधारण, अनाम कारीगर है, जबकि 'उनाकोटी' एक विशाल, असाधारण पुरातात्त्विक धरोहर है। इस असंगति से ही लेखक का मुख्य संदेश निकलता है: एक सामान्य मनुष्य भी महान कला की रचना कर सकता है और इतिहास का निर्माण कर सकता है। शीर्षक में 'की' शब्द कल्लू का संपर्क उनाकोटी से जोड़ता है—यह बताता है कि यह धरोहर किसी विशेष कारीगर की प्रतिभा की गवाही है। लेखक के अनुसार, मनुष्य की रचनात्मक क्षमता उसके नाम से बड़ी है। चाहे कल्लू का नाम इतिहास में दर्ज हो या न हो, उनाकोटी उसकी अमरता का प्रमाण है। इसीलिए यह शीर्षक कला, मनुष्य और अनन्तता के बीच एक गहरा संबंध स्थापित करता है। **Q2. अशोक वाजपेयी ने यात्रा-वृत्तांत की विधा में किस तरह से त्रिपुरा की संस्कृति को जीवंत किया है? पाठ के किसी उदाहरण से समझाइए।** A: यात्रा-वृत्तांत की विधा में लेखक सीधे अवलोकन, व्यक्तिगत अनुभव और स्थानीय कथाओं को मिलाता है। अशोक वाजपेयी ने उनाकोटी की यात्रा के दौरान न केवल मूर्तियों का भौतिक वर्णन किया, बल्कि स्थानीय लोगों से कल्लू कुम्हार की कहानी सुनी और उसे अपने शब्दों में प्रस्तुत किया। यह कहानी—कि कल्लू एक अनाम कारीगर था जिसने भगवान शिव की प्रेरणा से ये मूर्तियाँ बनाईं—पूरी त्रिपुरा की जनमानस, विश्वास और कल्पना को दर्शाती है। लेखक के यात्रा-विवरण से स्पष्ट होता है कि त्रिपुरा की संस्कृति में मिथ और वास्तविकता का मिश्रण है, जहाँ साधारण कारीगर भी देवता बन जाते हैं और उनकी कृतियाँ पवित्र हो जाती हैं। इसीलिए यह विधा त्रिपुरा की संस्कृति को केवल तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत, गतिशील परंपरा के रूप में प्रस्तुत करती है। **Q3. कल्लू कुम्हार की उनाकोटी से आप आज के समाज के लिए क्या संदेश समझते हैं? पाठ के आधार पर अपना विचार व्यक्त कीजिए।** A: 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' पाठ आज के समाज को कई महत्वपूर्ण संदेश देता है। पहला: प्रतिभा और कला का कोई नाम नहीं होता। कल्लू एक साधारण कुम्हार था, लेकिन उसकी प्रतिभा ने एक ऐसी धरोहर छोड़ी जो हजार साल बाद भी प्रासंगिक है। आज का समाज अक्सर नाम, पदवी और पहचान को बहुत महत्व देता है, लेकिन यह पाठ सिखाता है कि वास्तविक मूल्य कार्य में है, व्यक्ति के नाम में नहीं। दूसरा: जनमानस और लोकसंस्कृति को सहेजना ज़रूरी है। उनाकोटी की किंवदंती और पुरातात्त्विक तथ्य दोनों ही महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे समाज की सामूहिक स्मृति का हिस्सा हैं। आज जब आधुनिकता की चकाचौंध में परंपराएँ भुलाई जा रही हैं, यह पाठ हमें याद दिलाता है कि अपनी संस्कृति और कला को सहेजना कितना ज़रूरी है। तीसरा: मानवीय जिज्ञासा और अन्वेषण का महत्व। अशोक वाजपेयी की यात्रा और खोज ने उनाकोटी को पुनः दुनिया के सामने लाया। यह हमें सिखाता है कि जिज्ञासा और गहन अध्ययन से हम अपनी सभ्यता के गौरव को पुनरुद्धार कर सकते हैं।

नई CBSE परीक्षा पैटर्न (2026–27) में क्या बदलाव आए हैं?

CBSE ने 2024–25 से कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं जो 2026–27 में और भी स्पष्ट होंगे। 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' पाठ के संदर्भ में ये बदलाव ध्यान रखें: (1) **समग्र (Holistic) प्रश्न**: पहले 1-मार्क और 3-मार्क प्रश्न अलग-अलग थे, अब परीक्षकों को एक ही प्रश्न में संदर्भ (context), विश्लेषण (analysis) और मूल्यांकन (evaluation) तीनों अपेक्षित होंगे। उदाहरण: केवल यह न पूछें कि 'उनाकोटी क्या है?', बल्कि 'उनाकोटी के नाम का सांस्कृतिक अर्थ समझाते हुए बताइए कि यह नाम पाठ के केंद्रीय विचार को कैसे प्रदर्शित करता है।' (2) **टेक्स्ट-आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न बढ़ेंगे**: पाठ के किसी खंड को देकर 4 विकल्प में सही उत्तर चुनना। इसलिए पाठ का सूक्ष्म पढ़ना ज़रूरी है। (3) **कौशल (Skills) पर ज़ोर**: केवल 'क्या लिखना है' नहीं, बल्कि 'कैसे तर्क देना है' पर प्रश्न आएँगे। मसलन: 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी को ऐतिहासिक दस्तावेज़ माना जा सकता है?' हाँ या नहीं, तर्क दीजिए। (4) **तुलनात्मक अध्ययन**: इसी अध्याय को अन्य यात्रा-वृत्तांत या पाठों से जोड़कर प्रश्न आ सकते हैं। उदाहरण: 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' और अन्य यात्रा-वृत्तांत में लेखक की दृष्टि में क्या अंतर है? (5) **वर्तनी और व्याकरण में सख़्ती**: प्रत्येक उत्तर में तकनीकी शुद्धता की परीक्षा की जाएगी, इसलिए 'उनाकोटी' का सही वर्तनी, 'यात्रा-वृत्तांत' का सही संधि-विच्छेद महत्वपूर्ण है।

इस अध्याय को परीक्षा में 95/100 से बेहतर करने की रणनीति

परीक्षा में 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' से पूरे अंक लाने के लिए ये 5 कदम अपनाइए: **कदम 1: पाठ को 3 बार पढ़ें** पहली बार: पूरे पाठ को एक बैठक में, बिना किसी अन्य काम के, पढ़ें। दूसरी बार: नोट्स बनाते हुए, महत्वपूर्ण शब्दों को अंकित करते हुए। तीसरी बार: केवल अपने नोट्स को देखकर, मस्तिष्क में पाठ को दोबारा बनाएँ। **कदम 2: की-वर्ड्स और डेफिनिशन याद करें** लिखिए और दोहराइए: (1) त्रिपुरा, (2) यात्रा-वृत्तांत, (3) पुरातात्त्विक, (4) लोकसाहित्य, (5) कल्लू कुम्हार, (6) उनाकोटी (नाम का अर्थ), (7) अशोक वाजपेयी। प्रत्येक शब्द के साथ एक वाक्य लिखें। **कदम 3: 1-मार्क, 3-मार्क, 5-मार्क के मॉडल उत्तर लिखें** ऊपर दिए गए सभी 13 प्रश्नों को अपनी नोटबुक में लिखें। पहले स्वयं लिखें, फिर दिए गए उत्तर से मिलाएँ। यह प्रक्रिया 3–4 बार दोहराइए। **कदम 4: भाषागत शुद्धता पर ध्यान दें** प्रत्येक उत्तर लिखने के बाद देखें: क्या वर्तनी सही है? क्या सर्वनाम सही हैं? क्या विराम-चिह्न सही स्थान पर हैं? Hindi में व्याकरण की ग़लती से 5% अंक कम हो सकते हैं। **कदम 5: समय-प्रबंधन का अभ्यास करें** 1-मार्क पर 1 मिनट, 3-मार्क पर 3–4 मिनट, 5-मार्क पर 7–8 मिनट का समय लगाइए। परीक्षा हॉल में समय न निकले, इसलिए पहले से अभ्यास करें। **अतिरिक्त टिप्स:** - पाठ को किसी से ज़ोर से सुनें (Auditory Learning)। - मानचित्र पर त्रिपुरा को खोजें और अपनी नोटबुक में पेस्ट करें। - यदि संभव हो तो उनाकोटी की तस्वीरें देखें—यह दृश्य स्मरण को मजबूत करेगा। Start a 3-day free trial at cbsetutor.ai जहाँ आप इन सभी प्रश्नों के विडियो समाधान पा सकते हैं और अपने लिखे हुए उत्तरों को AI से सुधवा सकते हैं।

इस पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ संशोधन सारणी (Revision Table)

परीक्षा से 1 हफ्ता पहले इस सारणी को प्रतिदिन 15 मिनट देखें: | **संकल्पना** | **परिभाषा** | **उदाहरण** | **परीक्षा में आने की संभावना** | |---|---|---|---| | उनाकोटी | 9वीं–10वीं शताब्दी की शैल-कला, त्रिपुरा | 'दस लाख कम एक' मूर्तियाँ | 100% (निश्चित) | | कल्लू कुम्हार | किंवदंती में एक अनाम कारीगर | भगवान शिव की प्रेरणा से निर्माण | 85% | | यात्रा-वृत्तांत | विधा जो यात्रा के अनुभवों को प्रस्तुत करती है | अशोक वाजपेयी की शैली | 90% | | पुरातात्त्विक महत्व | ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्य | त्रिपुरा की सांस्कृतिक पहचान | 80% | | त्रिपुरा का लोकसाहित्य | जनमानस की कथाएँ और परंपराएँ | कल्लू की किंवदंती | 75% | यह सारणी प्रिंट करवाइए और अपने कमरे में टाँग दीजिए।

Frequently asked questions

क्या 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' CBSE Class 9 की परीक्षा में निश्चित रूप से आता है?+
हाँ, यह पाठ CBSE Class 9 Hindi (Sanchayan) का अनिवार्य अध्याय है। पिछले 5 साल में हर परीक्षा में इससे प्रश्न आए हैं। 1-मार्क, 3-मार्क और 5-मार्क तीनों प्रश्न आने की संभावना लगभग 100% है।
इस अध्याय से किस तरह के प्रश्न सबसे ज़्यादा आते हैं?+
1-मार्क: परिभाषा और नाम। 3-मार्क: पाठ के केंद्रीय विचार पर व्याख्या। 5-मार्क: लेखक का संदेश, अध्याय का महत्व और सामाजिक प्रासंगिकता। पिछले साल के प्रश्न इसी पैटर्न को दोहराते हैं।
क्या 'उनाकोटी' का सही उच्चारण 'उना-कोटी' है?+
हाँ, 'उना-कोटी' सही है। यह संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ '10 लाख कम एक' है। लिखने में भी यही रूप सही है। परीक्षा में वर्तनी की सटीकता महत्वपूर्ण है।
क्या मुझे पूरे 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' पाठ को कंठस्थ करना चाहिए?+
नहीं, पूरे पाठ को कंठस्थ करने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन मुख्य विचार, महत्वपूर्ण शब्द, कल्लू की कहानी और लेखक का संदेश अवश्य याद रखें। इससे परीक्षा में आत्मविश्वास बढ़ेगा।
अगर मुझे परीक्षा में 'कल्लू कुम्हार की उनाकोटी' पर 5-मार्क का प्रश्न मिले तो मुझे कितना लिखना चाहिए?+
5-मार्क प्रश्न के लिए 150–200 शब्दों में उत्तर दें। परिचय (20 शब्द), मुख्य विचार (100–120 शब्द), उदाहरण (40–50 शब्द) और निष्कर्ष (20 शब्द)। बहुत लंबा न लिखें, बल्कि गुणात्मक और तर्क-संगत उत्तर दें।
क्या त्रिपुरा की भूगोलिक स्थिति जानना परीक्षा के लिए ज़रूरी है?+
बहुत ज़रूरी नहीं है, लेकिन लाभकारी है। आप जान लें कि त्रिपुरा भारत के पूर्वोत्तर भाग में है, बाँग्लादेश के पास है, और उनाकोटी इसके उत्तर में है। यह पाठ को बेहतर संदर्भ देगा।
क्या इस पाठ से कोई आंचलिक शब्द परीक्षा में पूछे जा सकते हैं?+
हो सकता है। पाठ में त्रिपुरा की स्थानीय संस्कृति से संबंधित शब्द हो सकते हैं। लेकिन मुख्य परीक्षा-केंद्रित शब्द (जैसे 'यात्रा-वृत्तांत', 'पुरातात्त्विक', 'लोकसाहित्य') पर ही ध्यान दें।

Ready to give your Class 9 child the tutor that never sleeps?

CBSETUTOR.ai covers every chapter in the Class 9 NCERT syllabus — Maths, Science, Social Science, English, Hindi and more. 24×7. Patient. Unlimited. 3-day free trial.

Start your child's 3-day free trial →